नवरात्रि सनातन धर्म के प्रमुख धार्मिक पर्वों में से एक है, जिसमें नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। चैत्र नवरात्रि के दौरान नवमी तिथि को राम नवमी मनाई जाती है, जबकि शारदीय नवरात्रि के बाद विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है।
नवरात्रि 2026 कब है, चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि की शुरुआत कब होगी, घटस्थापना का शुभ मुहूर्त क्या है और नौ दिनों में किन देवी स्वरूपों की पूजा की जाती है? इस लेख में आपको चैत्र और शारदीय नवरात्रि 2026 की तिथि, घटस्थापना मुहूर्त, पूजा विधि, नौ देवियों के स्वरूप, व्रत-उपवास, धार्मिक महत्व और नवरात्रि से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी विस्तार से मिलेगी।
नवरात्रि 2026 कब है?
वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च 2026 से शुरू होकर 27 मार्च 2026 तक रहेगी। वहीं शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होकर 20 अक्टूबर 2026 तक मनाई जाएगी।
दोनों नवरात्रियों की तिथि, घटस्थापना और पूजा से संबंधित विवरण नीचे अलग-अलग दिया गया है।
चैत्र नवरात्रि 2026 की तिथि और समय
चैत्र नवरात्रि प्रारंभ: 19 मार्च 2026, गुरुवार
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 19 मार्च 2026 को सुबह 06:54 बजे से
प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च 2026 को सुबह 04:53 बजे तक
चैत्र नवरात्रि 2026 घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
• 19 मार्च 2026 को सुबह 06:51 बजे से 08:07 बजे तक
• 19 मार्च 2026 को सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
चैत्र नवरात्रि 2026 का दिनवार क्रम
• 19 मार्च, गुरुवार - प्रतिपदा, मां शैलपुत्री पूजा और घटस्थापना
• 20 मार्च, शुक्रवार - द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी पूजा
• 21 मार्च, शनिवार - तृतीया, मां चंद्रघंटा पूजा
• 22 मार्च, रविवार - चतुर्थी, मां कूष्मांडा पूजा
• 23 मार्च, सोमवार - पंचमी, मां स्कंदमाता पूजा
• 24 मार्च, मंगलवार - षष्ठी, मां कात्यायनी पूजा
• 25 मार्च, बुधवार - सप्तमी, मां कालरात्रि पूजा
• 26 मार्च, गुरुवार - अष्टमी, मां महागौरी पूजा
• 27 मार्च, शुक्रवार - नवमी, मां सिद्धिदात्री पूजा और नवरात्रि पारण
चैत्र नवरात्रि की तिथि, घटस्थापना मुहूर्त, नौ देवियों की पूजा विधि, व्रत के नियम और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ें: [चैत्र नवरात्रि]।
शारदीय नवरात्रि 2026 की तिथि और समय
शारदीय नवरात्रि: 11 अक्टूबर 2026, रविवार से 20 अक्टूबर 2026, मंगलवार तक
शारदीय नवरात्रि 2026 घटस्थापना
घटस्थापना तिथि: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
• 11 अक्टूबर 2026 को सुबह 06:32 बजे से 10:28 बजे तक
• 11 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:02 बजे से 12:48 बजे तक
शारदीय नवरात्रि 2026 का दिनवार क्रम
• 11 अक्टूबर - प्रतिपदा, मां शैलपुत्री पूजा
• 12 अक्टूबर - द्वितीया, मां ब्रह्मचारिणी पूजा
• 13 अक्टूबर - तृतीया, मां चंद्रघंटा पूजा
• 14 अक्टूबर - चतुर्थी, मां कूष्मांडा पूजा
• 15 अक्टूबर - पंचमी, मां स्कंदमाता पूजा
• 16 अक्टूबर - षष्ठी, मां कात्यायनी पूजा
• 17 अक्टूबर - सप्तमी, मां कालरात्रि पूजा
• 18 अक्टूबर - अष्टमी, मां महागौरी पूजा
• 19 अक्टूबर - नवमी, मां सिद्धिदात्री पूजा
• 20 अक्टूबर - विजयदशमी और दुर्गा विसर्जन
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूप
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन्हें नवदुर्गा के नाम से जाना जाता है। ये नौ स्वरूप हैं -
8. मां महागौरी
नवरात्रि में इन सभी देवी स्वरूपों की पूजा श्रद्धा और भक्ति के साथ की जाती है। मान्यता के अनुसार सभी देवी स्वरूपों की आराधना व्रती स्त्री और पुरुष को पुण्यकारी फल प्रदान करती है।
जब सृष्टि का निर्माण हुआ था, तब मां दुर्गा आदिशक्ति के रूप में प्रकट हुई थीं। उस समय सभी देवताओं ने मां दुर्गा की पूजा और आराधना की थी। माता ने प्रसन्न होकर देवताओं के कल्याण के लिए उन्हें आशीर्वाद दिया। इसी से चैत्र और शारदीय नवरात्रि मनाने की परंपरा जुड़ी हुई मानी जाती है।
नवरात्रि क्या है?
साल में चार नवरात्रि आती हैं, जिन्हें माघ नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, आषाढ़ नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इनमें चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व होता है, जबकि माघ और आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि के रूप में जाना जाता है।
गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि, दस महाविद्याओं की साधना, नियम और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानने के लिए पढ़ें: [गुप्त नवरात्रि]।
चैत्र नवरात्रि में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है और नवमी तिथि को राम नवमी के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म इसी दिन हुआ था। वहीं शारदीय नवरात्रि की नवमी को महानवमी के रूप में मनाया जाता है और इसके अगले दिन विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजयदशमी के दिन माता दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। इसी दिन भगवान श्रीराम द्वारा रावण के वध की कथा भी जुड़ी हुई है। इस प्रकार नवरात्रि शक्ति, भक्ति और बुराई पर अच्छाई की विजय से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है।
विजय दशमी 2026 कब है, विजय मुहूर्त क्या है और रावण दहन कब किया जाएगा? इसकी संपूर्ण जानकारी के लिए: - हमारा विजय दशमी 2026 का विस्तृत लेख पढ़ें।
नवरात्रि की पूजा विधि
चैत्र या शारदीय नवरात्रि में भक्त मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से करते हैं। अलग-अलग स्थानों और परिवारों में रीति-रिवाज भिन्न होने के कारण पूजा विधि में भी अंतर हो सकता है। इसलिए नवरात्रि की पूजा अपनी पारिवारिक और स्थानीय परंपरा के अनुसार करना उचित माना जाता है।
सामान्य रूप से नवरात्रि के पहले दिन पूजा स्थल की साफ-सफाई करके कलश या घट की स्थापना की जाती है। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करके उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार माता को पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, धूप, दीप, नैवेद्य और फल आदि अर्पित करते हैं।
नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, देवी स्तुति, मंत्र-जप और भजन-कीर्तन करते हैं।
नवरात्रि में व्रत और उपवास रखने का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की अन्य दिनों में पूजा करने से जो फल प्राप्त होता है, उससे कई गुना फल नवरात्रि में माता की पूजा करने से प्राप्त होता है। इसलिए भक्त नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत-उपवास भी रखते हैं।
व्रत और उपवास को आध्यात्मिक साधना का माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि मां दुर्गा की पूजा करने से मन की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे मन को शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है।
उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक क्षमता और पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत रखना चाहिए।
नवरात्रि में क्या करें?
• प्रतिदिन स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
• मां दुर्गा के स्वरूप का श्रद्धापूर्वक पूजन करें।
• नवरात्रि में व्रत रखने का संकल्प अपनी क्षमता के अनुसार लें।
• माता के मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ करें।
• दुर्गा सप्तशती या देवी से संबंधित धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें।
• घर और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें।
• जरूरतमंद लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान दें।
• अष्टमी या नवमी पर अपनी परंपरा के अनुसार कन्या पूजन करें।
• नवरात्रि के दौरान सात्त्विक आचरण रखने का प्रयास करें।
नवरात्रि में क्या न करें?
• किसी का अपमान या निंदा न करें।
• क्रोध, छल-कपट और विवाद से बचें।
• पूजा और व्रत को केवल दिखावे के लिए न करें।
• अपनी शारीरिक क्षमता से अधिक कठिन उपवास न रखें।
• पूजा स्थल और घर में अशुद्धता न रखें।
• तामसिक आहार और अनुचित आचरण से बचें।
व्रत और पूजा के नियम अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं, इसलिए अपनी परंपरा के अनुसार नियमों का पालन करना उचित है।
नवरात्रि में क्या खाएं?
जो श्रद्धालु नवरात्रि में व्रत रखते हैं, वे अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार या सात्त्विक आहार ग्रहण कर सकते हैं। व्रत के दौरान फल, दूध और अन्य व्रत-अनुकूल खाद्य पदार्थों का सेवन किया जाता है।
एकादशी की तरह नवरात्रि के व्रत में भी आहार संबंधी नियम अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में अलग हो सकते हैं। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार आहार का चुनाव करना उचित है।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व
चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि दोनों ही मां दुर्गा की आराधना के प्रमुख पर्व हैं। चैत्र नवरात्रि के साथ राम नवमी का पर्व जुड़ा हुआ है, जबकि शारदीय नवरात्रि के बाद विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है।
चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करने से भक्तों की मानसिक शक्ति मजबूत होने और आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति होने की मान्यता है। वहीं शारदीय नवरात्रि में माता के विभिन्न स्वरूपों की पूजा से भक्तों की सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति होने की धार्मिक मान्यता है।
दोनों ही नवरात्रियां भक्तों को शक्ति, भक्ति और सकारात्मकता से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण पर्व माने जाते हैं।
नवरात्रि के प्रमुख पर्व
राम नवमी
चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था।
महानवमी
शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि को महानवमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा की जाती है।
विजयदशमी
शारदीय नवरात्रि के बाद दशमी तिथि को विजयदशमी का पर्व मनाया जाता है। इसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।
दुर्गा विसर्जन
शारदीय नवरात्रि के समापन पर श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार मां दुर्गा की पूजा करने के बाद विसर्जन करते हैं।
चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तिथि, घटस्थापना मुहूर्त और अपने शहर के अनुसार शुभ समय जानने के लिए: -हमारा विस्तृत पंचांग देखें।
नवरात्रि 2026 से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1.नवरात्रि 2026 कब है?
वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से 27 मार्च 2026 तक और शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर 2026 तक रहेगी।
2.चैत्र नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?
चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होगी।
3.शारदीय नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?
शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026, रविवार से होगी।
4.नवरात्रि में घटस्थापना कब की जाती है?
नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि में घटस्थापना की जाती है। 2026 में चैत्र नवरात्रि की घटस्थापना 19 मार्च और शारदीय नवरात्रि की घटस्थापना 11 अक्टूबर को होगी।
5.नवरात्रि के नौ दिनों में किन देवी की पूजा होती है?
नवरात्रि में क्रमशः मां शैलपुत्री, मां ब्रह्मचारिणी, मां चंद्रघंटा, मां कूष्मांडा, मां स्कंदमाता, मां कात्यायनी, मां कालरात्रि, मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
6.चैत्र और शारदीय नवरात्रि में क्या अंतर है?
चैत्र नवरात्रि हिंदू नववर्ष की शुरुआत से जुड़ी है और इसकी नवमी को राम नवमी मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि की नवमी को महानवमी और इसके बाद दशमी को विजयदशमी मनाई जाती है।
7.नवरात्रि में व्रत क्यों रखा जाता है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि में व्रत और मां दुर्गा की आराधना करने से मन की नकारात्मकता दूर होती है तथा आध्यात्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
8.नवरात्रि में क्या खाना चाहिए?
व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार फलाहार और सात्त्विक व्रत-अनुकूल भोजन कर सकते हैं। आहार के नियम परिवार और संप्रदाय के अनुसार अलग हो सकते हैं।
9.नवरात्रि में क्या नहीं करना चाहिए?
नवरात्रि में क्रोध, निंदा, छल-कपट और विवाद से बचना चाहिए। व्रत और पूजा अपनी क्षमता के अनुसार श्रद्धा से करनी चाहिए।
नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना और शक्ति की उपासना का प्रमुख पर्व है। वर्ष में आने वाली नवरात्रियों में चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। चैत्र नवरात्रि राम नवमी से और शारदीय नवरात्रि विजयदशमी से जुड़ी हुई है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा, व्रत, जप और ध्यान करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार नवरात्रि का पालन करते हैं।