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Muhurat Consultation

The full benefits of an auspicious task are achieved only when it is performed at the right time. But do you know that the auspicious timing (Muhurta) for each person varies according to their birth sign?

Sagai Muhurat

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Sagai Muhurat

Sagai Muhurat: Auspicious Dates and Time for Your Engagement Ceremony

सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat)

भारतीय हिन्दू परंपराओं में, विवाह (शादी) सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और उनके भाग्य का मिलन होता है। इस पवित्र बंधन की शुरुआत 'सगाई' (Engagement) से होती है, जिसे निश्चय का प्रतीक माना जाता है।
यह शुभ सगाई मुहूर्त (Shubh Sagai Muhurat) एक ज्योतिष द्वारा गणना करने के बाद दिया गया शुभ मुहूर्त होता है, जो ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थितियों के आधार पर निकाला जाता है। सही मुहूर्त (Muhurat) में की गई सगाई, आने वाले वैवाहिक जीवन को सौभाग्य, समृद्धि और प्रेम से भर देती है।


क्या है सगाई मुहूर्त? (What is Sagai Muhurat?)

सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) दो शब्दों से मिलकर बना है: 'सगाई' (जिसका अर्थ है निश्चय या engagement) और 'मुहूर्त' (जिसका अर्थ है शुभ समय)। सीधे शब्दों में, सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) वह ज्योतिष द्वार निर्धारित समय होता है जो सगाई की रस्म को पूरा करने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है।

हिन्दू ज्योतिष (Jyotish) में, किसी कार्य को शुरू करने का एक निश्चित समय होता है जिसे 'शुभ समय' (Auspicious Time) कहते हैं। हिन्दू सगाई मुहूर्त (Hindu Sagai Muhurat) का चयन करने के पीछे यही मान्यता है कि यदि कोई कार्य ग्रह-नक्षत्रों के सकारात्मक प्रभाव में शुरू किया जाता है, तो उसकी सफलता की संभावना बढ़ जाती है और उसमें आने वाली बाधाएं कम हो जाती हैं। यह एंगेजमेंट मुहूर्त (Engagement Muhurat) पंच अंगों (पंचांग) - तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण - की गणना के आधार पर निकाला जाता है।


सगाई मुहूर्त का महत्व क्या है? (What is the importance of Sagai Muhurat?)

सगाई, विवाह से पहले की सबसे महत्वपूर्ण रस्म होती है जिसमें दो व्यक्ति (और उनके परिवार) एक दूसरे को स्वीकार करते हैं और विवाह की तैयारी शुरू करते हैं। सगाई मुहूर्त इंपॉर्टेंस (Sagai Muhurat Importance) को कई कारणों से समझा जाता है:

  • ज्योतिषीय शुद्धता (Astrological Purity): सही सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) ज्योतिष द्वारा, नवग्रह (नौ ग्रह) और 27 नक्षत्रों के शुभ प्रभाव को देखकर दिया जाता है। यह निश्चित करता है कि दम्पति के जीवन में कोई बाधा, अस्वस्थता, या अचानक संकट न आए।
  • संबंधों की मजबूती (Strengthening Relationships): माना जाता है कि शुभ सगाई मुहूर्त (Shubh Sagai Muhurat) में की गई सगाई, होने वाले रिश्ते को और अधिक मज़बूत (Mazboot) और समर्पित बना देती है। इससे रिश्तों में विश्वास, समझौता, और स्नेह बना रहता है।
  • दांपत्य सुख (Marital Bliss): एंगेजमेंट मुहूर्त बेनिफिट्स (Engagement Muhurat Benefits) में सबसे बड़ा लाभ है दांपत्य जीवन में सुख और शांति की कमाना। ऐसा माना जाता है कि ग्रहों का आशीर्वाद (Aashirwad) होने से विवाहित जीवन समस्या-मुक्त और आदर्श बनता है।
  • बाधाओं से मुक्ति (Freedom from Obstacles): विवाह में होने वाली देरी, अनबन, या किसी अन्य तरह की रुकावट को दूर करने में सगाई मुहूर्त सिग्निफिकेंस (Sagai Muhurat Significance) बहुत अधिक है। सही मुहूर्त (Muhurat) निकाल कर की गई रस्म, विवाह तक का सफर आसान बना देती है।

सही मुहूर्त (Muhurat) का चयन करना सिर्फ एक रस्म नहीं है, बल्कि यह नए जीवन की शुरुआत में सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वरीय आशीर्वाद (Aashirwad) को आमंत्रित करने का एक ज्ञानपूर्ण (Gyanpurna) तरीका है।


बेस्ट सगाई मुहूर्त कैसे खोजें? (How to find the best Sagai Muhurat?)

बेस्ट सगाई मुहूर्त (Best Sagai Muhurat) या शुभ एंगेजमेंट मुहूर्त (Shubh Engagement Muhurat) को निकालने के लिए पंचांग को देखा जाता है। यदि आप खुद ऑस्पीशियस टाइम फॉर सगाई (Auspicious Time for Sagai) खोजना चाहते हैं, तो इन तथ्यों पर ध्यान दें:


(A) शुभ तिथि (Auspicious Date)

तिथि का अर्थ है चंद्रमास के दो पक्षों की तिथियां। सगाई जैसे शुभ कार्यों के लिए इन तिथियों को श्रेष्ठ माना जाता है:

  • द्वितीया (2)
  • तृतीया (3)
  • पंचमी (5)
  • सप्तमी (7)
  • दशमी (10)
  • एकादशी (11)
  • त्रयोदशी (13)
  • चतुर्थी (4), नवमी (9), और चतुर्दशी (14) को अशुभ माना जाता है और इन्हें टाल देना चाहिए।

(B) शुभ वार (Auspicious Day)

हफ्ते के कुछ दिन सगाई (Sagai) के लिए बहुत ही शुभ (Shubh) होते हैं:

  • सोमवार (Monday): चंद्रमा का वार, प्रेम और सौभाग्य लाता है।
  • बुधवार (Wednesday): गणेश जी का वार, बुद्धि और सफलता देता है।(बुध अस्त न हो)
  • गुरुवार (Thursday): देव गुरु (Guru) बृहस्पति का वार, ज्ञान और समृद्धि देता है।
  • शुक्रवार (Friday): प्रेम, ऐश्वर्य और वैवाहिक सुख के ग्रह शुक्र (Shukra) का वार।
  • मंगलवार (Tuesday) और रविवार (Sunday) को आम तौर पर टालने की सलाह दी जाती है, यदि अन्य शुभ (Shubh) योग उपलब्ध हों।

(C) शुभ नक्षत्र (Auspicious Constellation)

२७ नक्षत्रों में से कुछ नक्षत्र सगाई (Sagai) और विवाह संबंधी कार्यों के लिए सर्वोत्तम (Sarvottam) होते हैं:

  • रोहिणी, मृगशिर्षा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूला, उत्तरा आषाढ़, उत्तरा भाद्रपद, और रेवती।

(D) अन्य महत्वपूर्ण योग

कुछ ज्योतिषीय (Jyotishiya) (astrological) योग जैसे कि अमृत योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का होना शुभ एंगेजमेंट मुहूर्त (Shubh Engagement Muhurat) के महत्व को और भी बढ़ा देता है। सगाई (Sagai) के मुहूर्त (Muhurat) में भद्रा, राहूकाल, पाचक जैसे अशुभ समय से बचना ज़रूरी होता है।

ज्योतिषचार्य (Jyotishacharya) केवल इन पांच अंगों को नहीं देखते, बल्कि वर-कन्या दोनों की कुंडली (Kundali) (birth chart) में गुरु (Guru) और शुक्र (Shukra) ग्रहों की स्थिति, और चन्द्र (Chandra) बल (Bal) को भी देखते हैं, ताकि सबसे बेस्ट सगाई मुहूर्त (Best Sagai Muhurat) निकाला जा सके।


सगाई विधि / मेथड (Engagement Ceremony Ritual Details)

एक शुभ सगाई मुहूर्त (Shubh Sagai Muhurat) पर की गई एंगेजमेंट सेरेमनी मेथड (Engagement Ceremony Method) या सगाई मुहूर्त विधि (Sagai Muhurat Vidhi) को विस्तार से जानना ज़रूरी है। सगाई विधि (Sagai Vidhi) (ritual) में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:


चरण 1: मुहूर्त और तिथि निर्धारण

सबसे पहले, परिवार के दोनों पक्ष (लड़का और लड़की) किसी विश्वसनीय (Vishwasniya) (reliable) ज्योतिषाचार्य (Jyotishacharya) से सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) निकलवाते हैं। सगाई मुहूर्त विधि (Sagai Muhurat Vidhi) की शुरुआत इसी शुभ (Shubh) घड़ी और शुभ (Shubh) तिथि के चयन से होती है। इसी समय स्थान (venue) और निमंत्रण (invitations) तय किए जाते हैं।


चरण 2: गणेश पूजन और कलश स्थापना

सगाई की रस्म प्रारंभ होने से पहले, भगवान गणेश का पूजन (Ganesh Poojan) और कलश स्थापना (Kalash Sthapana) की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता (Obstacle Remover) माना जाता है। उनका आशीर्वाद (Aashirwad) लेना सगाई (Sagai) की रस्म (Rasm) को सफल बनाने के लिए अत्यंत ज़रूरी है। इसके बाद नवग्रह (Nine Planets) की पूजा भी की जाती है ताकि सभी ग्रहों का सकारात्मक प्रभाव दम्पति पर बना रहे।


चरण 3: तिलक और उपहार आदान-प्रदान

सगाई विधि (Sagai Vidhi) में, सर्वप्रथम लड़के की माँ या बहन लड़की के तिलक लगाती हैं, जो इस बात का प्रतीक है कि उन्होंने इस रिश्ते को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद उपहार, वस्त्र, मिठाई, और फलों का आदान-प्रदान होता है।


चरण 4: अंगूठी पहनाना (The Ring Ceremony)

यह एंगेजमेंट सेरेमनी मेथड (Engagement Ceremony Method) का सबसे प्रमुख अंग है। शुभ सगाई मुहूर्त (Shubh Sagai Muhurat) के ठीक निर्धारित समय पर, लड़का और लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं। अंगूठी (ring) को प्रेम, विश्वास, और अनंत बंधन का प्रतीक माना जाता है। अंगूठी पहनते ही यह रिश्ता निश्चित हो जाता है।


चरण 5: आशीर्वाद और भोजन

अंगूठी की रस्म के बाद, सभी उपस्थित बड़े-बुजुर्ग दम्पति को आशीर्वाद (Aashirwad) (blessings) देते हैं और उनके सुखमय भविष्य की कामना करते हैं। इसके बाद भोजन (feast) का आयोजन होता है, जिसमें सभी रिश्तेदार और मेहमान शामिल होते हैं।


सगाई मुहूर्त के लाभ

सगाई मुहूर्त बेनिफिट्स (Sagai Muhurat Benefits) सिर्फ रस्म तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इसके दूरगामी और आध्यात्मिक (spiritual) लाभ भी होते हैं। सही शुभ मुहूर्त फॉर एंगेजमेंट (Shubh Muhurat for Engagement) का चयन करने के प्रमुख लाभ:

  • ग्रहों का समन्वय (Planetary Harmony): शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) में की गई सगाई, जन्म कुंडली (Kundali) में मौजूद ग्रहों के विपरीत प्रभावों को शांत कर देती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
  • समृद्धि और सफलता (Prosperity and Success): जब ग्रहों की अनुकूल (Anukul) स्थिति में एंगेजमेंट (Engagement) की जाती है, तो दम्पति के जीवन में आर्थिक समृद्धि (financial prosperity) और व्यावसायिक सफलता (career success) आती है।
  • संतति सुख (Bliss of Progeny): माना जाता है कि सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) का चयन भविष्य में होने वाली संतति (children) के लिए भी शुभ (Shubh) होता है, और उनका स्वास्थ्य (Swasthya) और भाग्य (Bhagya) अच्छा होता है।
  • प्रेम और समझौता (Love and Understanding): सगाई के मुहूर्त का पालन करने से, विवाहित जीवन में प्रेम, आदर, और mutual understanding बनी रहती है, जो लंबे समय तक रिश्ते को मज़बूत बनाती है।

मासिक Sagai Muhurat अवलोकन

Hindu sagai muhurat की गणना में चंद्रमा और सूर्य की गति के साथ-साथ गुरु और शुक्र का अस्त होना प्रमुख भूमिका निभाता है। सगाई के लिए शुभ महीनों को ऋतुओं के अनुसार वर्गीकृत किया गया है, जिससे sagai Muhurt की उपलब्धता को समझना आसान हो जाता है:


A. शीत ऋतु और बसंत (उत्तम Sagai Muhurt की शुरुआत)

साल की शुरुआत में Hindu sagai muhurat की स्थिति मिश्रित रहती है। जनवरी (पौष/माघ मास) में खरमास होने के कारण sagai Muhurt कम होते हैं, और पौष मास को वर्जित माना जाता है। हालाँकि, फरवरी (माघ/फाल्गुन) और मार्च (फाल्गुन/चैत्र) में मध्यम शुभ मुहूर्त मिलने लगते हैं। फाल्गुन मास में शुभता होती है, बशर्ते गुरु और शुक्र ग्रह अस्त न हों। चैत्र मास में पुनः sagai Muhurt कम हो जाते हैं।


B. ग्रीष्म ऋतु (सगाई के लिए सर्वोत्तम काल)

सगाई Muhurta के लिए ग्रीष्म ऋतु का समय सबसे उत्तम माना जाता है। अप्रैल (चैत्र/वैशाख) में वैशाख मास की शुरुआत के साथ sagai Muhurat की संख्या बढ़ जाती है और इसे सगाई के लिए अति उत्तम माना गया है। ठीक इसी प्रकार, मई (वैशाख/ज्येष्ठ) में भी Sagai Muhurta के लिए अच्छे और शुभ मुहूर्त मिलते हैं।जून (ज्येष्ठ/आषाढ़) में आषाढ़ मास के आरंभ तक मध्यम शुभ मुहूर्त प्राप्त हो सकते हैं, जिसके बाद शुभता कम हो जाती है।


C. चातुर्मास और वर्षा ऋतु (सगाई के लिए पूर्णतः वर्जित)

जुलाई (आषाढ़/श्रावण), अगस्त (श्रावण/भाद्रपद), और सितंबर (भाद्रपद/आश्विन) के महीने चातुर्मास के अंतर्गत आते हैं। चातुर्मास (देवशयनी एकादशी से शुरू) के कारण सगाई और अन्य मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित हो जाते हैं। Sagai Muhurt के लिए यह समय इसलिए भी त्याज्य है क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और दैवीय शक्तियों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है। इसके अतिरिक्त, सितंबर में आने वाला पितृ पक्ष भी सगाई के लिए वर्जित है।


D. शरद ऋतु (उत्तम Sagai Muhurt का पुनरागमन)

चातुर्मास की समाप्ति (देवोत्थानी एकादशी) से sagai Muhurt फिर से शुरू होते हैं। नवंबर (कार्तिक/मार्गशीर्ष) में मार्गशीर्ष (अगहन) का महीना उत्तम sagai Muhurta प्रदान करता है। दिसंबर (मार्गशीर्ष/पौष) में भी अच्छे sagai Muhurt मिलते हैं, लेकिन पौष मास (जो जनवरी में शुरू होता है) के आगमन से पहले सगाई संपन्न कर लेना चाहिए।


Auspicious Days, Time & Month for Sagai Muhurat (सामान्य माह और समय)

ऊपर दी गई सगाई मुहूर्त 2025 (Sagai Muhurat 2025) की सूची के अलावा, यहाँ कुछ सामान्य नियम दिए गए हैं जो ऑस्पीशियस टाइम फॉर सगाई (Auspicious Time for Sagai) और सगाई मुहूर्त मंथ (Sagai Muhurat Month) के बारे में जानकारी देते हैं।

  • सर्वोत्तम महीने (Best Months): कार्तिक, मार्गशीर्ष, माघ, फाल्गुन, वैशाख, और ज्येष्ठ। सगाई मुहूर्त जनवरी (Sagai Muhurat January) से सगाई मुहूर्त जून (Sagai Muhurat June) तक का समय आम तौर पर शुभ (Shubh) माना जाता है, और फिर सगाई मुहूर्त नवम्बर (Sagai Muhurat November) और सगाई मुहूर्त दिसंबर (Sagai Muhurat December) में।
  • टालने वाले महीने (Avoidable Months): आषाढ़, भाद्रपद, अश्विन, और पौष (चातुर्मास का समय) में सगाई (Sagai) का कार्य टाल देना चाहिए।
  • शुभ तिथि (Auspicious Tithi): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी।
  • शुभ वार (Auspicious Days): सोमवार, बुधवार, गुरुवार, और शुक्रवार।

पंडित से परामर्श और मुहूर्त बुकिंग

सगाई (Engagement) की सफलता और निर्बाध आयोजन के लिए एक योग्य पंडित या मुहूर्त सलाहकार से परामर्श लेना बहुत महत्वपूर्ण है।

क्यों ज़रूरी है?: पंडित जी आपकी पारिवारिक परंपराओं और क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार पूजा की विधि को सुनिश्चित करते हैं, और सटीक ग्रह गणना करके शुभ समय प्रदान करते हैं।

प्रक्रिया: जन्म कुंडली (Birth Chart) की जानकारी देने के बाद, पंडित जी कुछ विकल्प प्रदान करते हैं। आपको एक विकल्प चुनकर बुकिंग करनी होती है। शुल्क और समय की जानकारी पहले से ही निश्चित कर लेनी चाहिए।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सगाई मुहूर्त क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?+

सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) ज्योतिष शास्त्र द्वारा निर्धारित वह सबसे शुभ समय (Auspicious Time) होता है, जो ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थितियों पर तय होता है। इस शुभ सगाई मुहूर्त (Shubh Sagai Muhurat) में की गई रस्म से दम्पति के वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, और यह सगाई मुहूर्त इंपॉर्टेंस (Sagai Muhurat Importance) दांपत्य सुख के लिए नींव रखती है।

कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत सगाई मुहूर्त कैसे प्राप्त करें?+

सबसे सटीक सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) या बेस्ट सगाई मुहूर्त (Best Sagai Muhurat) प्राप्त करने के लिए किसी अनुभवी आचार्य से संपर्क करना चाहिए। वे लड़के और लड़की दोनों की जन्म कुंडली (Kundali) का गहन विश्लेषण करते हैं। इस प्रक्रिया में गुरु-शुक्र की स्थिति, चन्द्र बल, और नवग्रहों की शुभता देखकर ही सबसे उत्तम शुभ एंगेजमेंट मुहूर्त (Shubh Engagement Muhurat) निकाला जाता है, जो दम्पति के लिए कल्याणकारी होता है।

सगाई के लिए शुभ मुहूर्त चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?+
सगाई के शुभ मुहूर्त (Sagai Muhurat) का चयन करते समय सबसे पहले कुंडली मिलान और पंचांग की जांच जरूरी होती है। शुभ तिथि वही मानी जाती है जिसमें राहु काल, गुलिक काल, भद्रा काल या विष्णु शयन काल (चातुर्मास) न हो।

इसके अलावा, लग्न, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति भी अनुकूल होनी चाहिए ताकि विवाह का प्रारंभिक चरण मंगलमय रहे।

सनातन परंपरा के अनुसार, योग्य आचार्य से मुहूर्त निकलवाना और भगवान गणेश की पूजा से सगाई की शुरुआत करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
सगाई मुहूर्त का उद्देश्य क्या है?+

सगाई मुहूर्त (Sagai Muhurat) का प्रमुख उद्देश्य निश्चय की रस्म को ग्रह शांति और ब्रह्मांडीय अनुकूल ऊर्जा के साथ शुरू करना है। एंगेजमेंट मुहूर्त (Engagement Muhurat) का गहरा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाला दांपत्य जीवन सुख-शांति, सौभाग्य और लंबी आयु से भरपूर रहे, जिससे इस नए बंधन की आध्यात्मिक शुद्धता स्थापित हो।

सही मुहूर्त पर सगाई करने के क्या लाभ हैं?+

सही शुभ मुहूर्त फॉर एंगेजमेंट (Shubh Muhurat for Engagement) पर सगाई करने के कई लाभ हैं, जिनमें पारिवारिक समृद्धि, आर्थिक रूप से सुखी जीवन, और पति-पत्नी के बीच प्रेम व समझ की वृद्धि शामिल है।

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