Sanatan Panchang
In Indian culture, the tradition of checking the Today Panchang has been both ancient and deeply meaningful. Whenever we undertake any auspicious acti...
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क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों कुछ लोग बेहद सफल होते हैं, जबकि कुछ को हर मोड़ पर संघर्ष करना पड़ता है? क्यों कुछ रिश्ते आसानी से बन जाते हैं और कुछ बार-बार टूटते हैं? इन सभी सवालों के जवाब छुपे होते हैं आपके जन्म के समय आकाश में मौजूद ग्रहों की स्थिति में। जी हाँ, वैदिक ज्योतिष में ग्रह केवल आकाशीय पिंड नहीं हैं। ये हमारे जीवन की अदृश्य शक्तियाँ हैं जो हमारी सोच, भाग्य, संबंध और कर्म को दिशा देती हैं।
हर ग्रह की अपनी एक कहानी होती है, एक ऊर्जा होती है और एक भूमिका होती है। ग्रह बताते हैं कि जीवन के किस मोड़ पर कौन-सी घटना घटेगी, किस दिशा में अवसर आएंगे और कहाँ सावधानी बरतनी होगी। यही कारण है कि कुंडली को समझने का पहला और सबसे ज़रूरी कदम होता है- ग्रहों की दशा और उनका प्रभाव जानना।
जब ज्योतिषी किसी की जन्मकुंडली पढ़ते हैं, तो सबसे पहले वे यह देखते है कि कौन सा ग्रह कहाँ बैठा है और वह शुभ परिणाम दे रहा है या अशुभ?” वैदिक ज्योतिष में ग्रह ही वह केंद्र बिंदु हैं जो जीवन की हर दिशा में प्रभाव डालते हैं। आपके जीवन के सुख-दुख, सफलता-विफलता, संबंध, विवाह, करियर, संतान सब कुछ किसी न किसी ग्रह की स्थिति पर निर्भर होता है। इसलिए ज्योतिष मे ग्रहों को समझना अत्यंत आवश्यक होता है।
वैदिक ज्योतिष के 9 ग्रहों का परिचय
वैदिक ज्योतिष में कुल 9 ग्रह माने गए हैं - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति (गुरु), शुक्र, शनि, राहु और केतु। ये सभी ग्रह किसी न किसी जीवन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- सूर्य (Sun) – आत्मा, आत्मविश्वास, पितृत्व और नेतृत्व का प्रतीक है। यह अग्नि तत्व ग्रह है जो व्यक्ति को राजसी गुण देता है।
- चंद्रमा (Moon) – मन, भावना, माता और मानसिक स्थिति का कारक है। यह भावनात्मक स्थिरता और आकर्षण से जुड़ा है।
- मंगल (Mars) – साहस, ऊर्जा, लड़ाई और संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यह तेज और संघर्षशील ग्रह है।
- बुध (Mercury) – बुद्धि, संवाद, गणना, वाणी और व्यवसाय का कारक है। यह अपने साथ बैठने वाले ग्रह के स्वभाव को अपनाता है।
- गुरु (Jupiter) – ज्ञान, धर्म, संतान, न्याय और भाग्य का प्रतीक है। यह सबसे शुभ ग्रहों में से एक है।
- शुक्र (Venus) – प्रेम, कला, विवाह और भौतिक सुखों से जुड़ा है। यह भोग-विलास और सौंदर्य का प्रतीक है।
- शनि (Saturn) – कर्म, अनुशासन, विलंब और संघर्ष का प्रतीक है। यह धीमे लेकिन निश्चित फल देने वाला ग्रह है।
- राहु (Rahu) – भ्रम, छल, अत्यधिक इच्छाएं और तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। यह अचानक बदलाव लाता है।
- केतु (Ketu) – त्याग, मोक्ष, रहस्य और पूर्व जन्म के कर्मों का कारक है। यह आत्मिक उन्नति का द्योतक है।
शुभ और अशुभ ग्रह
ग्रहों को उनके प्रभाव के आधार पर दो श्रेणियों में बाँटा गया है — शुभ और अशुभग्रह।
शुभ ग्रह:बृहस्पति, शुक्र, चंद्रमा (जब वह पूर्णिमा के निकट हो) और बुध (जब वह पाप ग्रहों से ग्रसित न हो) को शुभ ग्रह माना जाता है। ये ग्रह सामान्यतः अच्छे और फलदायक परिणाम देते हैं।
अशुभ ग्रह:मंगल, शनि, राहु और केतु को सामान्यतः अशुभ ग्रह माना जाता है। सूर्य एक शुभ ग्रह है, लेकिन यदि यह कुंडली में कमजोर हो या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो, तो यह भी कभी-कभी प्रतिकूल फल दे सकता है।
लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि कोई भी ग्रह स्थायी रूप से शुभ या अशुभ नहीं होता। ग्रह का प्रभाव उसकी स्थिति, युति, दृष्टि और जिस भाव में वह स्थित है, उस पर निर्भर करता है।
ग्रहों की स्थिति: उच्च, नीच और स्वराशि
ग्रह जब किसी विशेष राशि में होता है, तो उसकी शक्ति बढ़ या घट जाती है। तीन मुख्य प्रकार की स्थितियाँ होती हैं:
1. उच्च स्थिति:जब कोई ग्रह अपनी उच्च राशि में होता है, तो वह अपनी शक्ति के चरम पर होता है और पूर्ण फल देने की क्षमता रखता है। जैसे सूर्य जब मेष राशि में होता है तो वह उच्च का माना जाता है।
2. नीच स्थिति:जब ग्रह नीच राशि में होता है, तो वह दुर्बल हो जाता है और अपने अच्छे गुणों को व्यक्त नहीं कर पाता। जैसे चंद्रमा जब वृश्चिक राशि में होता है तो वह नीच का होता है।
3. स्वराशि:जब ग्रह उस राशि में होता है जिसका वह स्वामी होता है, तो वह सहजता से और स्थिरता के साथ फल देता है। जैसे मंगल मेष और वृश्चिक का स्वामी है, तो इन राशियों में यह ग्रह प्रभावशाली होता है।
इन तीनों अवस्थाओं से यह समझा जा सकता है कि ग्रह का कौन-सा स्वरूप कुंडली में प्रबल होगा — फलदायक या बाधादायक।
Panchang Chart (Gochar)
Bhadra Details 2026 | ||||
|---|---|---|---|---|
January, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 02/01/2026 | 18:54 | Swarglok | 03/01/2026 | 05:13 |
| 05/01/2026 | 20:58 | Mrityulok | 06/01/2026 | 08:01 |
| 09/01/2026 | 07:06 | Patallok | 09/01/2026 | 19:44 |
| 13/01/2026 | 01:59:00 | Patallok | 13/01/2026 | 15:17 |
| 16/01/2026 | 22:22 | Patallok | 17/01/2026 | 11:12 |
| 22/01/2026 | 14:37 | Mrityulok | 23/01/2026 | 02:28 |
| 25/01/2026 | 23:11 | Swarglok | 26/01/2026 | 10:13 |
| 29/01/2026 | 03:15:00 | Swarglok | 29/01/2026 | 13:55 |
February, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 01/02/2026 | 05:42 | Mrityulok | 01/02/2026 | 16:44:00 |
| 04/02/2026 | 12:24 | Mrityulok | 05/02/2026 | 00:09 |
| 08/02/2026 | 02:55:00 | Patallok | 08/02/2026 | 15:58 |
| 11/02/2026 | 23:10 | Swarglok | 12/02/2026 | 12:22 |
| 15/02/2026 | 17:04 | Patallok | 16/02/2026 | 05:20 |
| 21/02/2026 | 01:49:00 | Mrityulok | 21/02/2026 | 13:00 |
| 24/02/2026 | 07:02 | Swarglok | 24/02/2026 | 17:57 |
| 27/02/2026 | 11:32 | Swarglok | 27/02/2026 | 22:32 |
March, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 02/03/2026 | 17:55 | Mrityulok | 03/03/2026 | 05:31 |
| 06/03/2026 | 05:28 | Patallok | 06/03/2026 | 17:53 |
| 09/03/2026 | 23:27 | Swarglok | 10/03/2026 | 12:40 |
| 13/03/2026 | 19:19:00 | Patallok | 14/03/2026 | 08:10 |
| 17/03/2026 | 09:22 | Mrityulok | 17/03/2026 | 20:53 |
| 22/03/2026 | 10:35 | Swarglok | 22/03/2026 | 21:16 |
| 25/03/2026 | 13:49 | Swarglok | 26/03/2026 | 00:49 |
| 28/03/2026 | 20:16 | Mrityulok | 29/03/2026 | 07:46 |
April, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 01/04/2026 | 07:07 | Mrityulok | 01/04/2026 | 19:24 |
| 04/04/2026 | 23:04 | Patallok | 05/04/2026 | 11:59 |
| 08/04/2026 | 19:01 | Patallok | 09/04/2026 | 08:09 |
| 12/04/2026 | 12:56 | Patallok | 13/04/2026 | 01:16 |
| 15/04/2026 | 22:32 | Mrityulok | 16/04/2026 | 09:39 |
| 20/04/2026 | 17:51 | Swarglok | 21/04/2026 | 04:15 |
| 23/04/2026 | 20:49 | Mrityulok | 24/04/2026 | 08:04 |
| 27/04/2026 | 06:10 | Mrityulok | 27/04/2026 | 18:15 |
| 30/04/2026 | 21:12 | Patallok | 01/05/2026 | 10:02 |
May, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 04/05/2026 | 16:12 | Swarglok | 05/05/2026 | 05:24 |
| 08/05/2026 | 12:21 | Patallok | 09/05/2026 | 01:12 |
| 12/05/2026 | 03:08 | Mrityulok | 12/05/2026 | 14:52 |
| 15/05/2026 | 08:31 | Swarglok | 15/05/2026 | 18:51 |
| 20/05/2026 | 00:42 | Swarglok | 20/05/2026 | 11:06 |
| 23/05/2026 | 05:04 | Mrityulok | 23/05/2026 | 16:45 |
| 26/05/2026 | 17:45 | Patallok | 27/05/2026 | 06:21 |
| 30/05/2026 | 11:57 | Swarglok | 31/05/2026 | 01:06 |
June, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 03/06/2026 | 08:11 | Patallok | 03/06/2026 | 21:21 |
| 07/06/2026 | 02:42 | Mrityulok | 07/06/2026 | 15:03 |
| 10/06/2026 | 13:46 | Mrityulok | 11/06/2026 | 00:58 |
| 13/06/2026 | 16:07 | Swarglok | 14/06/2026 | 03:13 |
| 18/06/2026 | 08:16 | Mrityulok | 08/06/2026 | 18:58 |
| 21/06/2026 | 15:21 | Mrityulok - Patallok | 22/06/2026 | 03:30 |
| 25/06/2026 | 07:11 | Patallok | 25/06/2026 | 20:09 |
| 29/06/2026 | 03:06 | Patallok | 29/06/2026 | 16:17 |
July, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 02/07/2026 | 22:29 | Patallok | 03/07/2026 | 11:20 |
| 06/07/2026 | 13:47 | Mrityulok | 07/07/2026 | 01:35 |
| 09/07/2026 | 21:27 | Swarglok | 10/07/2026 | 08:16 |
| 12/07/2026 | 22:29 | Swarglok | 13/07/2026 | 08:39 |
| 17/07/2026 | 17:35 | Mrityulok | 18/07/2026 | 04:43 |
| 21/07/2026 | 04:02 | Patallok | 21/07/2026 | 16:39 |
| 24/07/2026 | 22:23 | Swarglok | 25/07/2026 | 11:35 |
| 28/07/2026 | 18:18 | Patallok | 29/07/2026 | 08:11 |
August, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 01/08/2026 | 10:49 | Mrityulok | 01/08/2026 | 23:07 |
| 04/08/2026 | 22:03 | Swarglok | 05/08/2026 | 09:23 |
| 08/08/2026 | 03:17 | Swarglok | 08/08/2026 | 13:59 |
| 11/08/2026 | 04:54 | Mrityulok | 11/08/2026 | 15:24 |
| 16/08/2026 | 05:10 | Patallok | 16/08/2026 | 16:52 |
| 19/08/2026 | 19:20 | Patallok - Swarglok | 20/08/2026 | 08:19 |
| 23/08/2026 | 15:10 | Patallok | 24/08/2026 | 04:18 |
| 27/08/2026 | 09:08 | Patallok - Mrityulok | 27/08/2026 | 21:28 |
| 30/08/2026 | 21:14 | Mrityulok | 31/08/2026 | 08:51 |
September, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 03/09/2026 | 04:26 | Swarglok | 03/09/2026 | 15:31 |
| 06/09/2026 | 08:41 | Swarglok | 06/09/2026 | 19:30 |
| 09/09/2026 | 12:30 | Mrityulok | 09/09/2026 | 23:31 |
| 14/09/2026 | 19:25 | Patallok | 15/09/2026 | 07:44 |
| 18/09/2026 | 13:00 | Swarglok - Patallok | 19/09/2026 | 02:13 |
| 22/09/2026 | 08:51 | Patallok | 22/09/2026 | 21:43 |
| 25/09/2026 | 23:06 | Mrityulok | 26/09/2026 | 10:43 |
| 29/09/2026 | 06:12 | Swarglok | 29/09/2026 | 17:10 |
October, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 02/10/2026 | 10:15 | Swarglok | 02/10/2026 | 21:07 |
| 05/10/2026 | 15:00 | Mrityulok | 06/10/2026 | 02:07 |
| 08/10/2026 | 22:15 | Mrityulok - Patallok | 09/10/2026 | 09:55 |
| 14/10/2026 | 12:20 | Swarglok | 15/10/2026 | 01:14 |
| 18/10/2026 | 08:28 | Patallok | 18/10/2026 | 21:39 |
| 22/10/2026 | 02:29 | Mrityulok | 22/10/2026 | 14:48 |
| 25/10/2026 | 11:57 | Mrityulok - Swarglok | 25/10/2026 | 22:49 |
| 28/10/2026 | 14:36 | Swarglok | 29/10/2026 | 01:06 |
| 31/10/2026 | 16:57 | Swarglok - Mrityulok | 01/11/2026 | 03:44 |
November, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 03/11/2026 | 23:28 | Mrityulok | 04/11/2026 | 11:03 |
| 07/11/2026 | 10:48 | Patallok | 07/11/2026 | 23:07 |
| 13/11/2026 | 07:26 | Patallok | 13/11/2026 | 20:42 |
| 17/11/2026 | 04:19 | Patallok - Mrityulok | 17/11/2026 | 17:12 |
| 20/11/2026 | 18:53 | Mrityulok | 21/11/2026 | 06:32 |
| 23/11/2026 | 23:42 | Swarglok | 24/11/2026 | 10:03 |
| 26/11/2026 | 20:32 | Swarglok | 27/11/2026 | 09:48 |
| 30/11/2026 | 01:46 | Mrityulok | 30/11/2026 | 12:59 |
December, 2026 | ||||
| Start | Bhadra Name | End | ||
| Date | Time | Date | Time | |
| 03/12/2026 | 10:57 | Patallok | 03/12/2026 | 23:03 |
| 07/12/2026 | 02:21 | Patallok - Swarglok | 07/12/2026 | 15:17 |
| 13/12/2026 | 03:26 | Patallok | 13/12/2026 | 16:47 |
| 16/12/2026 | 22:45 | Mrityulok | 17/12/2026 | 11:10 |
| 20/12/2026 | 09:12 | Swarglok | 20/12/2026 | 20:14 |
| 23/12/2026 | 10:48 | Swarglok | 23/12/2026 | 20:53 |
| 26/12/2026 | 09:45 | Mrityulok | 26/12/2026 | 20:04 |
| 29/12/2026 | 13:25 | Mrityulok - Patallok | 30/12/2026 | 01:00 |
भद्रा (Bhadra) क्या है?
भद्रा का हिंदू पंचांग और ज्योतिष में बहुत महत्व है। इसे आमतौर पर भद्रा काल कहा जाता है। जब भी कोई शुभ कार्य तय किया जाता है, तो सबसे पहले भद्रा काल समय देखा जाता है। इस अवधि को अशुभ माना गया है और इसमें धार्मिक या उत्सव संबंधी कार्यों की शुरुआत करना निषिद्ध बताया गया है। पंचांग की गणना में इसका विशेष स्थान है और इसके बारे में जानकारी रखना सबके लिए उपयोगी माना जाता है।
शास्त्रों में कहा गया है कि भद्रा काल में शुरू किए गए कार्य निष्फल हो सकते हैं या बाधाओं का सामना कर सकते हैं। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय की शुरुआत या किसी भी नए कार्य को इस समय में टालने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसका उद्देश्य केवल निषेध करना नहीं है, बल्कि सही समय के महत्व को रेखांकित करना है। यह काल आत्म-अनुशासन, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इसे केवल नकारात्मक रूप में न देखकर, एक ऐसे ठहराव के रूप में देखें जो हमें सही समय चुनने में मदद करता है—धैर्य, संयम, जागरूकता और सही अवसर की पहचान के साथ।
भद्रा काल का महत्व क्यों है जानना आवश्यक?
हिंदू पंचांग में भद्रा काल का विशेष उल्लेख मिलता है और इसे दैनिक जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह समय शुभ और अशुभ मुहूर्तों के बीच संतुलन को दर्शाने वाला माना जाता है।
भद्रा का महत्व पाँच बिंदुओं में इस प्रकार समझा जा सकता है:
- करण संकेत: यह विष्टि करण (Vishti Karana) से जुड़ा हुआ है, जिसे सभी करणों में सबसे अधिक अशुभ माना जाता है।
- शुभ कार्यों पर रोक:भद्रा काल के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और अन्य धार्मिक कार्यों को करना वर्जित माना जाता है।
- बाधाकारी समय: इसे बाधा और अशांति का काल कहा गया है, जिसमें आरंभ किए गए कार्य अक्सर सफल नहीं होते।
- सावधानी का प्रतीक: यह हमें सिखाता है कि हर कार्य केवल उचित और शुभ समय पर ही करना चाहिए।
- ध्यान और साधना का समय: यद्यपि इसे अशुभ माना जाता है, लेकिन यह काल आत्मचिंतन, पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
भद्रा काल की कथा (Bhadra Kaal Story)
कहा जाता है कि भद्रा, शनिदेव की बहन और सूर्यदेव व उनकी पत्नी छाया की पुत्री थीं। स्वभाव से वह उग्र और शक्तिशाली मानी जाती थीं। प्राचीन कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने भद्रा को पृथ्वी पर प्राणियों की परीक्षा लेने के लिए भेजा था, ताकि लोग धर्म, सत्य और धार्मिक आचरण का पालन करने में अनुशासित रहें। लोगों को अंधाधुंध सांसारिक कार्यों में दौड़ने से रोकने के लिए भद्रा को बाधाएँ और कठिनाइयाँ उत्पन्न करने का कार्य सौंपा गया था।
इसी कारण, भद्रा काल को अशुभता और बाधाओं का समय माना जाता है। किंतु इसका गहरा उद्देश्य धैर्य, सजगता और सही समय पर कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करना है। यही कारण है कि भद्रा काल आज को एक चेतावनीपूर्ण समय माना जाता है, जो हमें सही समय और उचित ढंग से कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
भद्रा काल का समय: (Check the Starting and Ending Time of Bhadra Kaal)
हर दिन भद्रा काल का समय (Bhadra kaal time) बदलता है और इसकी अवधि निश्चित नहीं होती। यह तिथि, करण और नक्षत्र की गति पर आधारित होता है। प्रायः भद्रा काल की अवधि 7 से 13 घंटे तक रहती है। कुछ दिनों में यह सुबह जल्दी शुरू हो सकता है, जबकि अन्य दिनों में यह दिन के बाद के हिस्से में आरंभ हो सकता है।
इसे सही रूप से जानने के लिए व्यक्ति को Bhadra Kaal Start Time Today and Bhadra Kaal End Time Today देखना आवश्यक होता है। ज्योतिष और पंचांग में इस समय की गणना विशेष विधियों से की जाती है। आजकल लोग इसे Bhadra online check Tools के माध्यम से भी देख सकते हैं, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कोई विशेष समय शुभ है या अशुभ।
इसलिए, भद्रा काल की सही शुरुआत और अंत का समय जानना आवश्यक है, ताकि जीवन में सफलता, सामंजस्य और शांति बनी रहे।
Panchak Details 2026 | ||||
|---|---|---|---|---|
January, 2026 | ||||
| Start | End | |||
| Date | Time | Date | Time | |
| 21/01/2026 | 01:32 | 25/01/2026 | 13:35 | |
February, 2026 | ||||
| Start | End | |||
| Date | Time | Date | Time | |
| 17/02/2026 | 09:01 | 21/02/2026 | 19:06 | |
March, 2026 | ||||
| Start | End | |||
| Date | Time | Date | Time | |
| 16/03/2026 | 18:08 | 21/03/2026 | 02:27 | |
April, 2026 | ||||
| Start | End | |||
| Date | Time | Date | Time | |
| 13/04/2026 | 3:38 | 17/04/2026 | 12:02 | |
May, 2026 | ||||
| Start | End | |||
| Date | Time | Date | Time | |
| 10/05/2026 | 12:06 | 14/05/2026 | 22:43 | |
June, 2026 | ||||
| Start | End | |||
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भारतीय ज्योतिष शास्त्र (Jyotish Shastra) और पंचांग (Panchang) में पंचक (Panchak) को एक अत्यंत अशुभ समय (Ashubh Samay) माना जाता है। यह वह विशिष्ट अवधि है जिसमें कोई भी मांगलिक कार्य (Maanglik Karya) या नया उद्यम शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है। पंचक (Panchak) अनिवार्य रूप से पाँच दिनों की अवधि होती है, जो कुछ विशेष नक्षत्रों के संयोग से बनती है। इस समय को हिन्दू धर्म में विशेष महत्व (Vishesh Mahatva) दिया जाता है।
पंचक (Panchak) शब्द का शाब्दिक अर्थ है 'पाँच का समूह' (Panch Ka Samooh)। यह समूह पाँच नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती) तथा पाँच दिनों तक चलने वाले अशुभ मुहूर्त (Ashubh Muhurat) का प्रतिनिधित्व करता है।
पंचक का वैज्ञानिक और खगोलीय आधार
-वैदिक ज्योतिष (Vedic Jyotish) के अनुसार, चंद्रमा लगभग सवा दो दिन (Sawa Do Din) में एक राशि को पार करता है। जब चंद्रमा (Chandra) कुंभ (Kumbh Rashi) और मीन राशि (Meen Rashi) में भ्रमण करता है, तो यह पाँच नक्षत्रों (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती) से होकर गुजरता है। यह पांच दिनों की अवधि (Paanch Dino Ki Avadhi) ही पंचक (Panchak) कहलाती है।
भारतीय ज्योतिष में 27 नक्षत्र हैं, और पंचक (Panchak) अंतिम पाँच नक्षत्रों के संयोग से बनता है। ये पाँच नक्षत्र (Paanch Nakshatra) अपनी प्रकृति में उग्र और अस्थिर माने जाते हैं, जिससे इस अवधि में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ जाता है।
पंचक कब लगता है? (Panchak Kab Lagta Hai)
पंचक (Panchak) की शुरुआत चंद्रमा के धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishtha Nakshatra) के तीसरे चरण में प्रवेश करने के साथ होती है, और इसका समापन रेवती नक्षत्र (Revati Nakshatra) के चौथे चरण की समाप्ति पर होता है।
नक्षत्रों का क्रम जो पंचक बनाता है:- धनिष्ठा नक्षत्र (Dhanishtha Nakshatra) का अंतिम भाग (उत्तरांश)
- शतभिषा नक्षत्र (Shatabhisha Nakshatra)
- पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र (Purva Bhadrapada Nakshatra)
- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र (Uttara Bhadrapada Nakshatra)
- रेवती नक्षत्र (Revati Nakshatra)
यह संपूर्ण प्रक्रिया लगभग पाँच दिनों तक चलती है।
पंचांग क्या होता है?
पंचांग, जिसे हम हिन्दू पंचांग या वैदिक पंचांग के रूप में जानते हैं, भारतीय ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण और प्राचीन साधन है। यह न केवल समय और तिथियों को निर्धारित करने में सहायक होता है, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को शुभ और सफल बनाने में भी मदद करता है।
"पंचांग" शब्द संस्कृत से लिया गया है, जिसमें "पंच" का अर्थ है पाँच और "आंग" का अर्थ है भाग। इसे पंचांग इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पांच महत्वपूर्ण तत्वों या अंगों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) से मिलकर बना है ।
हिन्दी पंचांग, जिसे हिन्दू पंचांग, वैदिक कैलेंडर व वैदिक पंचांग के नाम से भी जाना जाता है, जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों की योजना बनाने और दैनिक खगोलीय प्रभावों को समझने का एक प्रमुख साधन है। चाहे शादी के लिए शुभ तिथि तय करनी हो या किसी पूजा के लिए तिथि का निर्धारण करना हो, डेली पंचांग सभी को मार्गदर्शन प्रदान करता है।
आज के समय में इंटरनेट और मोबाइल एप्स ने हिंदी पंचांग को और भी आसान बना दिया है। अब आप घर बैठे अपने फ़ोन पर हिंदी पंचांग कैलेंडर या दैनिक पंचांग खोलकर दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त और राहुकाल जैसी जरूरी जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं।
हिंदू पंचांग कैलेंडर संपूर्ण भारतीय धार्मिक प्रणाली का मूल है। यह केवल तिथियाँ ही नहीं बल्कि सारे व्रत, त्योहार, ऋतु परिवर्तन, अमावस्या, पूर्णिमा, ग्रहण और नक्षत्रों की स्थिति का भी उल्लेख करता है।
पंचांग दर्पण से आप केवल समय ही नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय ऊर्जा और शुभ-अशुभ प्रभावों को भी समझ सकते हैं।
दैनिक पंचांग न केवल पूजा-पाठ के लिए बल्कि दैनिक जीवन के निर्णयों के लिए भी मार्गदर्शन प्रदान करता है। चाहे व्रत हो या विवाह, घर की यात्रा हो या नया व्यापार आज हिन्दू पंचांग हर काम में आपकी सफलता सुनिश्चित करता है।
- हर कार्य की शुरुआत अगर आज का पंचांग देखकर की जाए, तो सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
- यह हमें बताता है कि किस समय कौन-सा कार्य करना चाहिए और कौन-से समय को टालना चाहिए।
- इसलिए आज की तिथि का पंचांग और तिथि पंचांग का उपयोग विशेष रूप से आवश्यक हो जाता है।
आज का दिन समाप्त होने से पहले लोग अक्सर कल का पंचांग देखना पसंद करते हैं ताकि वे अपने आगामी दिन की योजना बेहतर बना सकें। कल का पंचांग यह बताता है कि कौन-सी तिथि, वार, नक्षत्र और मुहूर्त आने वाला है।
भारत विविधताओं से भरा देश है और यहां विभिन्न भाषाओं में पंचांग उपलब्ध हैं। गुजराती पंचांग, तेलुगु पंचांग, तमिल पंचांग आदि क्षेत्रीय पंचांगों में स्थानीय समय और रीति-रिवाजों के अनुसार विवरण होता है।
आज डिजिटल युग में सबकुछ ऑनलाइन है, और इसलिए ऑनलाइन पंचांग का महत्व काफी बढ़ गया है। आज इंटरनेट पर अनेक वेबसाईट हैं जहाँ से आप आज का पंचांग हिंदी में, अंग्रेजी या अन्य भाषाओं में आसानी से देख सकते हैं।
चाहे आप कहीं भी हों- दिल्ली, कानपुर, या आज का पंचांग मुंबई देखना हो, ऑनलाइन पंचांग से आपको अपने स्थान के अनुसार सूर्योदय, तिथि और नक्षत्र की पूरी जानकारी तुरंत मिल जाती है।
पंचांग कैलेंडर एक दैनिक, मासिक और वार्षिक दृष्टि देता है जिसमें तिथियों, पर्वों, ग्रहणों और शुभ मुहूर्तों की सटीक जानकारी होती है।
यदि आप किसी विशेष दिन की योजना बना रहे हैं तो पहले उस दिन का तिथि पंचांग या आज की तिथि का पंचांग ज़रूर देखें।
पंचांग की गणना एक जटिल प्रक्रिया है जो खगोलीय गणनाओं पर आधारित होती है। इसमें सूर्य, चंद्रमा और कुछ अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर समय और तिथियों को निर्धारित किया जाता है।
- सौर गणना: सूर्य की गति पर आधारित होती है। इसमें बारह सौर मास होते हैं, जैसे मेष, वृषभ, मिथुन आदि, जो सूर्य के विभिन्न राशियों में प्रवेश पर आधारित होते हैं।
- चंद्र गणना: चंद्रमा के चरणों पर आधारित होती है। चंद्र मास में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष के माध्यम से तिथियाँ निर्धारित होती हैं।
धार्मिक कार्यों में इन दोनों प्रणालियों का समन्वय आवश्यक होता है, जिससे कि शुभ कार्यों के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त निकाला जा सके।







