गुरु जी से प्रेरणा
सबसे पहले तो मैं अपने गुरु के चरणों की वंदना करता हूँ। उनकों बारम्बार नमस्कार है, जिन्होंने लाखों करोड़ों लोगों का अपने सद्ज्ञान से कल्याण किया, दिशाहीन जीवन को दिशा दिखाई। गुरु की शरण में जाने से ही कल्याण हो सकता है। गुरु का अर्थ होता है ' जो अंधकार को दूर करके प्रकाश का मार्ग दिखाता है। 'सनातन ज्योति' हमारे गुरु जी से प्रेरित समाज कल्याण की ओर एक पहल है। यह संगठित ज्ञान की धारा है जो हमारे जीवन में परिवर्तन ला सकती है और हमें सफलता की और प्रेरित कर सकती है। हमारे गुरु जी ने अपना सारा जीवन समाजकल्याण के लिए लगा दिया और अपने सभी शिष्यों को सही राह दिखाते रहे। गुरु के द्वारा हमें प्रेरणा मिलती है ताकि हम अपने कर्तव्यों का पालन कर सके और जीवन में शांति, समृद्धि और संतोष की प्राप्ति कर सके। वह हमे सत्य, न्याय, धर्म और उच्चतम मूल्यों के प्रतीक बनाने का कार्य सम्पादित करते है। गुरु की प्रेरणा हमें संस्कारशील और उदार मानवीय बनाती है। एक सच्चा गुरु न केवल नयी विचारधारा प्रदान करता है बल्कि हमारे अंतर्मन को भी प्रभावित करके हमें बेहतर बनने का मार्ग दिखाता है। गुरु का महत्वपूर्ण योगदान है कि वह हमें अपने अवसरों और क्षमताओं की पहचान करवातें है। वह हमें हमारी सामरिकता और इच्छाशक्ति को जागृत करने के लिए प्रेरित करतें है। जब हम गुरु से सीखते हैं, तो हमें स्वयं में छिपी प्रवृत्तियों और क्षमताओं को खोजने और उन्हें विकसित करने का अवसर मिलता है। गुरु की सच्ची प्रेरणा हमें अपने असीम शक्ति को जागृत करने में मदद करती है और हमें नई ऊँचाइयों की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है। संक्षेप में कहें तो, गुरु से प्रेरणा लेने के द्वारा हमें ज्ञान, सफलता, सामरिकता, सकारात्मकता और उच्चतम मानवीय मूल्यों की प्राप्ति होती है। गुरु की प्रेरणा हमें उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है और हमें जीवन में उज्ज्वलता, समृद्धि और आनंद का अनुभव करने की संभावना प्रदान करती है। गुरु से प्रेरणा लेकर हम अपने जीवन को उद्घाटित करते हैं और एक महान और प्रभावशाली व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।

श्री बांके बिहारी जी की कृपा
श्री बाके बिहारी साक्षात् श्री कृष्ण भगवान् है जो आज भी वृंदावन में अपनी लीलाएं करते है। सभी भक्त जो उनके दर्शन के लिए जाते है वे गोपियों के समान है और वे मानसिक रूप से श्री बाके बिहारी जी के साथ जुड़े हुए है। श्री बाके बिहारी अपने सभी भक्तों को राह दिखा रहे है, उनसे बात कर रहे, उनके कष्टों को हर रहे है, और जीवन को धर्मयुक्त बनाने की प्रेरणा दे रहे है। वह सनातन धर्म की आधारशिला है। श्री बाके बिहारी जी को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। श्री कृष्ण जी की जीवन लीला से हमें आध्यात्मिकता, प्रेम, सहानभूति, संयम, धार्मिकता और मानसिक शांति की महत्वपूर्णयता का सन्देश मिलता है। उनके दर्शन और सेवा से हम अपने जीवन में इन महत्वपूर्ण सिद्धांतों को अंकित कर सकते है और धार्मिकता, संतुलन और आनंद के उच्चतम स्तरों को प्राप्त कर सकते है। भगवान् श्री कृष्ण ने धर्म को मानवीय और सामाजिक बताया है जोकि सनातन है सांप्रदायिक नहीं। धर्म कभी भी सांप्रदायिक नहीं हो सकता। धर्म सनातन है। सनातन ज्योति श्री कृष्ण के इन्ही उपदेशों से ली हुई एक प्रेरणा है। जिसका संचालन श्री बाके बिहारी जी के हाथ में है।
सनातन ज्योति का मुख्य उद्देश्य सनातन व्यवस्था में निहित सम्पूर्ण ज्ञान, परंपराओं और मान्यताओं को जनमानस तक आसानी से पहुंचाना है। वास्तव में सनातन किसी एक विशेष धर्म से संबंध नहीं रखता है बल्कि यह एक वह व्यापक व्यवस्था है जिसमें शुभ कार्यों अर्थात मानव कल्याण एवं पर्यावरण संरक्षण हेतु निस्वार्थ भाव से किये गए सभी कार्य जिसमें किसी का अहित न हो साथ ही समाज एवं पर्यावरण के लिए स्वीकार्य हो वह सभी कार्य धर्म के अंतर्गत आते हैं। इसके विपरीत स्वार्थवश एवं समाज के लिए अस्वीकृत सभी कार्य अधर्म के अंतर्गत आते हैं। इसप्रकार सनातन एक ऐसी व्यवस्था है जो सांप्रदायिक नहीं है ,जो किसी भी संप्रदाय की अवहेलना नहीं करता है बल्कि सभी को धर्म के कार्य करने के लिए प्रेरित करता है। सनातन ज्योति का मौलिक उद्देश्य प्राचीनकाल की उन व्यवस्थाओं को वापस नए युग की सभ्यता और विचारों के सामने उजागर करना है जिन्हें प्राचीनकाल के ऋषि मुनियों द्वारा समाज कल्याण हेतु जोड़ा गया साथ ही पर्यावरण संरक्षण अर्थात वातावरण को स्वच्छ, हरा-भरा बनाए रखने, जीवों के संरक्षण और नदियों को स्वच्छ बनाए रखने हेतु व्यापक रूप से प्रयोग किया गया। यह व्यवस्थाएं हमें सीखाती है कि किस प्रकार हम अपने दैनिक कर्मों के द्वारा ही धर्म संगत कार्य कर सकते हैं और छोटी छोटी बातों में ही ईश्वर तत्व को पहचानकर जीवन को सुखमय बना सकते है या जीवन का सम्पूर्ण आनंद ले सकते हैं। आज के नवयुग में जिस प्रकार मनुष्य धन-धान्य से परिपूर्ण होते हुए भी दुखी है उस भावना से नवयुग के लोगों को उबारने की दिशा में सनातन ज्योति की यह एक खास पहल है। सनातन ज्योति प्राचीन काल में मानव कल्याण एवं जीवों के संरक्षण हेतु बनाई गई व्यवस्थाओं को एक नए ढंग में प्रस्तुत करना चाहती है जो कि नए युग की व्यवस्था के लिए लाभप्रद हो सके।

