Muhurat Consultation
The full benefits of an auspicious task are achieved only when it is performed at the right time. But do you know that the auspicious timing (Muhurta) for each person varies according to their birth sign?
Tilak Muhurat

Tilak Muhurat
Tilak Muhurat: Best Dates and Time to Begin Wedding Rituals with Blessings
तिलक मुहूर्त
तिलक मुहूर्त को भारतीय विवाह परंपरा का प्रवेश द्वार (Entrance) कहा जाता है। यह सिर्फ लड़के-लड़की का मिलन नहीं है, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान, सहमति और पक्के वादे की पहली रस्म है। यह वह शुभ समय होता है जब लड़की वाले, लड़के को अपनी बेटी के लिए योग्य जीवनसाथी मानकर, उनके माथे पर shubh tilak muhurat के साथ तिलक लगाकर उनका स्वागत करते हैं।
इस पेज पर, आपको tilak muhurat चुनने के लिए ज़रूरी ज्योतिष के नियम, सामग्री का महत्व, और शुभ दिनों की पूरी जानकारी मिलेगी। यह सामग्री आपके मंगल कार्यों को बिना किसी रुकावट के और पूरी शुद्धता के साथ पूरा करने में मदद करेगी।
तिलक रस्म को 'टीका' या engagement tilak ceremony भी कहा जाता है। यह शादी से पहले की एक ज़रूरी रस्म है। इसमें दूल्हे के माथे पर रोली और चावल का तिलक लगाया जाता है, और उन्हें भेंट (उपहार) और शगुन दिया जाता है।
tilak muhurat का मतलब, ज्योतिष के हिसाब से वह 'सबसे अच्छा समय' है, जब ग्रहों और तारों की चाल शादी की सफलता के लिए सबसे ज़्यादा अच्छी होती है।
- औपचारिक सहमति: यह रस्म hindu tilak muhurat परंपरा निभाते हुए लड़के वालों को यह बताती है कि लड़की वालों ने इस रिश्ते को पूरी तरह से मान लिया है।
- ज्योतिष की नींव: शुभ मुहूर्त में रस्म करने से शादी के बंधन पर किसी भी ग्रह दोष (खराब ग्रह) का असर कम हो जाता है।
- वर चुनना: लड़की पक्ष के मुखिया (जैसे पिता) द्वारा दूल्हे के माथे पर तिलक लगाना, उन्हें एक 'वर' (योग्य दूल्हा) के रूप में चुनने का ऐलान है।
- शुभता का आशीर्वाद: माथे के केंद्र में स्थित आज्ञा चक्र (भ्रूमध्य) पर तिलक लगाने से दूल्हे को आत्मविश्वास, अच्छी समझ और सौभाग्य मिलता है, जिससे उनका आने वाला वैवाहिक जीवन प्यार और खुशियों से भर जाता है। इसलिए, shubh tilak muhurat चुनना बहुत ज़रूरी है।
tilak muhurat importance को शादी की दूसरी रस्मों से कम नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि यह रिश्ते की आधिकारिक शुरुआत है।
शुभ मुहूर्त में किया गया तिलक समारोह कई engagement tilak benefits देता है:
- बुरी नज़र से बचाव: रोली और अक्षत का तिलक दूल्हे के चारों ओर एक अच्छी (सकारात्मक) ऊर्जा का कवच बनाता है, जो शादी में आने वाली किसी भी नकारात्मक शक्ति या 'बुरी नज़र' से बचाता है।
- ब्रह्मांड की अच्छी ऊर्जा: जब रस्म shubh tilak muhurat पर होती है, तो उस समय की ब्रह्मांडीय ऊर्जाएँ (Cosmic Energies) सीधे दूल्हा-दुल्हन के जीवन में प्यार, स्थिरता और लंबी उम्र को बढ़ाती हैं।
- परिवारों को जोड़ना: यह रस्म दोनों परिवारों के बीच सम्मान और विश्वास बढ़ाती है। यह एक-दूसरे से मिलने और सामाजिक रूप से एक होने का पहला कदम है, जो tilak muhurat importance को ज़ाहिर करता है।
सबसे अच्छा shubh tilak muhurat चुनना शादी की सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है। इसके लिए सिर्फ कैलेंडर देखने के बजाय, किसी अनुभवी ज्योतिषी से best tilak muhurat के गहरे ज्योतिष के नियमों का पालन करवाना चाहिए।
best tilak muhurat खोजने के लिए इन चार बातों पर ध्यान दिया जाता है:
- वार (Day): तिलक जैसे शुभ कामों के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार सबसे अच्छे दिन माने जाते हैं। शनिवार और मंगलवार को ज़्यादातर टालना चाहिए।
- तिथि (Tithi): द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियाँ शुभ होती हैं। चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी (जिन्हें 'रिक्ता' तिथियाँ कहते हैं) शुभ कामों के लिए सही नहीं होती हैं।
- नक्षत्र (Nakshatra): engagement tilak shubh samay के लिए रोहिणी, हस्त, स्वाति, श्रवण, रेवती जैसे स्थिर और शांत नक्षत्रों को चुनना चाहिए।
- योग और करण: auspicious time for tilak के लिए प्रीति, सौभाग्य जैसे अच्छे योग और स्थिर करणों को चुना जाता है।
तिलक मुहूर्त में इन दोषों से बचना बहुत ज़रूरी है:
- गुरु अस्त और शुक्र अस्त: शादी के मुख्य ग्रह गुरु और शुक्र के डूबने (अस्त होने) पर कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।
- खरमास (मलमास): जब सूर्य धनु और मीन राशि में रहता है (लगभग 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक), तब शादी और तिलक की रस्में रोक दी जाती हैं।
- भद्रा काल: भद्रा को शुभ कामों के लिए बहुत बुरा माना जाता है, इसलिए shubh tilak muhurat में भद्रा नहीं होनी चाहिए।
auspicious time for tilak चुनते समय दूल्हे और दुल्हन दोनों की कुंडली मिलाई जाती है:
- चंद्र बल: दूल्हे की जन्म राशि से चंद्रमा की स्थिति चौथे, आठवें और बारहवें स्थान में नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये अशुभ माने जाते हैं।
- लग्न शुद्धि: तिलक की रस्म के लिए वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, धनु और मीन जैसे स्थिर और सौम्य लग्न सबसे अच्छे होते हैं।
tilak puja method को सफल बनाने के लिए, तिलक की थाली में रखी हर चीज़ का अपना खास धार्मिक महत्व होता है। यह hindu tilak muhurat की शुद्धता को पक्का करता है।
- रोली/कुमकुम (Roli/Kumkum)
- मतलब (Spiritual Significance): यह ऊर्जा और समृद्धि का रंग है। इसे सौभाग्य, शक्ति और मंगल कार्यों की सफलता का प्रतीक माना जाता है।
- उपयोग (Utility): तिलक लगाने के लिए मुख्य सामग्री।
- अक्षत (Akshat - Rice)
- मतलब (Spiritual Significance): हमेशा साथ रहने, अखंडता और अच्छे भाग्य का प्रतीक। 'अक्षत' मतलब जो टूटा न हो।
- उपयोग (Utility): तिलक पर लगाकर शुभता और स्थिरता देना।
- नारियल/श्रीफल (Coconut)
- मतलब (Spiritual Significance): भगवान गणेश और लक्ष्मी का प्रतीक। धन और खुशहाली का भंडार। दूल्हे के लिए भाग्य लाता है।
- उपयोग (Utility): शगुन के रूप में भेंट करना।
- सुपारी (Betel Nut)
- मतलब (Spiritual Significance): पक्के इरादे और वादे का प्रतीक। यह बताता है कि रिश्ता अब पक्का हो चुका है।
- उपयोग (Utility): पूजा में गठबंधन के लिए इस्तेमाल होती है।
- मिठाई (Sweets)
- मतलब (Spiritual Significance): जीवन में प्यार और मिठास घोलने का प्रतीक।
- उपयोग (Utility): शुभ काम की शुरुआत के तौर पर खिलाया जाता है।
- शगुन की राशि (Shagun)
- मतलब (Spiritual Significance): धन की लगातार बढ़ोतरी और बरकत का प्रतीक। इसमें 'एक' का अंक शुभ होता है।
- उपयोग (Utility): दूल्हे को पैसे की स्थिरता का आशीर्वाद देना।
- हल्दी/चंदन (Turmeric/Sandal)
- मतलब (Spiritual Significance): सेहत और ठंडक का प्रतीक। बुरी चीज़ों को दूर रखता है।
- उपयोग (Utility): तिलक में मिलाना।
यह tilak samagri ही engagement tilak ceremony को पूरा और पवित्र बनाती है।
engagement tilak ceremony एक सलीके से और पारंपरिक तरीके से की जाने वाली रस्म है, जिसे आदर और श्रद्धा से पूरा किया जाता है।
- दूल्हे का आसन और स्वागत: दूल्हे को एक सजी हुई जगह पर बिठाया जाता है। लड़की पक्ष के मुखिया और बड़े लोग लड़के वालों का खुशी से स्वागत करते हैं।
- सामग्री रखना और शुद्ध करना: tilak puja method के अनुसार, चौकी पर सारी सामग्री (रोली, अक्षत, नारियल, मिठाई, शगुन) को अच्छे से रखा जाता है। शुभ मुहूर्त से ठीक पहले पंडित जी सामग्री को पवित्र करते हैं।
- संकल्प (वादा): tilak muhurat vidhi की शुरुआत में, लड़की पक्ष के मुखिया हाथ में जल लेकर, दूल्हे के सामने शादी को बिना रुकावट के पूरा कराने का वादा (संकल्प) करते हैं, और दोनों परिवारों के सुख की कामना करते हैं।
- तिलक लगाना: मुखिया दूल्हे के माथे पर रोली/कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाते हैं, और उन्हें आशीर्वाद देते हैं।
- श्रीफल और शगुन देना: दूल्हे को नारियल (श्रीफल) और शगुन के पैसे भेंट किए जाते हैं। शगुन की रकम में अक्सर 'एक' का अंक होता है (जैसे ₹5001, ₹11000) जो रिश्ते में लगातार बढ़ोतरी का प्रतीक है।
- वस्त्र और आशीर्वाद: दूल्हे को तोहफे के रूप में कपड़े (वर भेट) दिए जाते हैं। आखिर में, सभी बड़े-बुजुर्ग आशीर्वाद देते हैं।
इस प्रक्रिया को tilak vidhi कहते हैं।
शुभ shubh muhurat for engagement में तिलक करने से सिर्फ दूल्हे को ही नहीं, बल्कि दोनों परिवारों को फायदा होता है।
- धार्मिक और ज्योतिषीय लाभ: shubh muhurat for engagement में किया गया यह संस्कार नवग्रहों और कुल देवताओं का आशीर्वाद दिलाता है, जिससे आने वाले वैवाहिक जीवन में शांति और धर्म बना रहता है।
- पारिवारिक बंधन: engagement tilak puja benefits में सबसे खास है- दोनों परिवारों के बीच आपसी समझ, सम्मान और प्यार का बढ़ना। यह रिश्तेदारों के लिए एक-दूसरे से औपचारिक रूप से मिलने का मौका होता है।
- मानसिक शांति और फोकस: तिलक लगाने से माथे के उस बिंदु पर हल्का दबाव पड़ता है, जो नसों को शांत करता है। इससे तनाव कम होता है, दूल्हे को मानसिक स्थिरता मिलती है, और वे शादी की ज़िम्मेदारियों के लिए बेहतर फोकस कर पाते हैं।
best tilak muhurat का चुनाव पंचांग शुद्धि से भी आगे बढ़कर किया जाता है। इसमें लड़का और लड़की की कुंडली के हिसाब से ग्रहों की ताकत (Graha Bal) को देखा जाता है। auspicious time for tilak के लिए इन ग्रहों की शक्ति देखना ज़रूरी है:
- गुरु (Jupiter): गुरु को 'जीव' यानी जीवन और वैवाहिक सुख का मालिक माना जाता है। shubh tilak muhurat के समय गुरु का अच्छी जगह (केंद्र या त्रिकोण) में होना और अस्त न होना बहुत ज़रूरी है। गुरु की शक्ति ही लंबी उम्र और खुशहाली लाती है।
- शुक्र (Venus): शुक्र पति-पत्नी के सुख, प्रेम और भौतिक चीज़ों का मालिक है। शुक्र का अस्त होना या कमज़ोर राशि में होना engagement tilak shubh samay के लिए मना है।
- सूर्य (Sun): सूर्य इज़्ज़त और आत्मविश्वास का मालिक है। best tilak muhurat के समय सूर्य का छठे, आठवें या बारहवें घर में होना अच्छा नहीं माना जाता, क्योंकि यह लड़के वालों की इज़्ज़त पर असर डाल सकता है।
- चंद्र (Moon): चंद्र मन और भावनाओं की स्थिरता का मालिक है। तिलक मुहूर्त के समय चंद्र बल वर और वधू दोनों के लिए शुभ होना चाहिए (4, 8, 12 भावों में चंद्र वर्जित है)।
तिलक के लिए auspicious time for tilak निकालते समय ज्योतिषी गोचर (Transit) में गुरु और शुक्र की स्थिति देखते हैं। इसके साथ ही, नवमांश कुंडली को भी देखते हैं। नवमांश कुंडली को शादी और वैवाहिक जीवन की गहराई जानने के लिए सबसे ज़रूरी माना जाता है।
कुछ खास दिन ऐसे होते हैं जिन्हें शास्त्रों में 'अबूझ मुहूर्त' (अपने आप में शुभ दिन) माना गया है। इन दिनों किसी भी शुभ काम को करने के लिए ज्योतिषी से अलग से tilak muhurat निकलवाने की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि ये दिन खुद ही दोषरहित और बहुत शुभ होते हैं।
- बसंत पंचमी: माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि। यह माँ सरस्वती के आशीर्वाद का दिन है और शादी या तिलक के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
- अक्षय तृतीया: वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि। 'अक्षय' का मतलब है जो कभी खत्म न हो। इस दिन किया गया काम या shubh tilak muhurat बहुत अच्छा फल देता है।
- फुलेरा दूज: फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि। यह दिन राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है और बिना किसी मुहूर्त के तिलक के लिए बहुत अच्छा है।
- देवउठनी एकादशी: कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की नींद से जागते हैं, और इस दिन से सभी मांगलिक काम शुरू हो जाते हैं।
अगर आपको tilak muhurat खोजने में मुश्किल हो रही है, तो आप इन अबूझ मुहूर्तों में से किसी को चुन सकते हैं।
तिलक रस्म को सफल और दोषमुक्त बनाने के लिए इन ज़रूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- सही मुहूर्त का पालन: तिलक की रस्म shubh tilak muhurat के सही समय पर ही शुरू करें, देर या जल्दी न करें।
- शगुन में 'एक' का अंक: शगुन की राशि हमेशा ₹1 के साथ खत्म होनी चाहिए (जैसे ₹1101, ₹5001), जो लगातार बढ़ोतरी का प्रतीक है।
- शुद्धता: तिलक के दिन लड़के और लड़की दोनों के परिवार को शुद्ध (सात्विक) भोजन करना चाहिए और किसी भी तरह के मांसाहार या शराब से बचना चाहिए।
- आदर और सम्मान: लड़की पक्ष को दूल्हे के माता-पिता और बड़े रिश्तेदारों को पूरा सम्मान और तोहफे भेंट करने चाहिए।
- भद्रा काल में प्रवेश: भद्रा काल में तिलक की सामग्री लेकर लड़के के घर में प्रवेश न करें और न ही तिलक लगाएं। tilak muhurat हमेशा भद्रा मुक्त होना चाहिए।
- शिकायत करना: तिलक के दौरान दूल्हे के परिवार को किसी भी इंतज़ाम या तोहफे की कमी के लिए शिकायत नहीं करनी चाहिए। यह अशुभ माना जाता है।
- नारियल को ज़मीन पर न रखें: शगुन में दिया गया नारियल (श्रीफल) बहुत पवित्र होता है। दूल्हे को इस नारियल को शादी होने तक अपने पास सुरक्षित और पवित्र जगह पर रखना चाहिए।
- जल्दीबाज़ी: तिलक की रस्म को जल्दी-जल्दी खत्म न करें। इसे शांति और प्यार से पूरा करें।
शादी या तिलक की किसी भी तारीख को पक्का करने से पहले, अपने लोकल पंचांग और अपनी कुंडली के लिए एक अनुभवी ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें। आपकी चुनी हुई तारीख का चुनाव दिन, तिथि, नक्षत्र और दोनों पक्षों के चंद्र बल की अनुकूलता देखकर किया जाना चाहिए।
तिलक मुहूर्त विवाह से पहले किया जाने वाला शुभ संस्कार है, जिसमें दोनों परिवार एक-दूसरे के प्रति अपने संबंध की औपचारिक स्वीकृति देते हैं। इस दिन किया गया तिलक न केवल सामाजिक परंपरा है, बल्कि ग्रहों की शुभ स्थिति से दांपत्य जीवन में सौहार्द और स्थायित्व लाने वाला आध्यात्मिक कर्म भी माना जाता है।
सही तिलक मुहूर्त का निर्धारण वर-वधू की कुंडली, नक्षत्र, तिथि और ग्रह स्थिति देखकर किया जाता है। योग्य आचार्य ज्योतिषीय गणना के आधार पर सबसे शुभ समय का चयन करते हैं। सनातन ज्योति पर अनुभवी ज्योतिषी आपकी कुंडली के अनुसार उपयुक्त तिलक मुहूर्त बताते हैं, जिससे विवाह जीवन में सुख, सौभाग्य और स्थिरता बनी रहती है।
तिलक मुहूर्त तय करते समय चंद्रमा की स्थिति, वर-वधू के जन्म नक्षत्र, तिथि, वार और योग का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अशुभ काल जैसे भद्रा, राहुकाल और अमावस्या से बचना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त परिवार के ज्येष्ठ सदस्य और पंडित की सलाह से मुहूर्त निश्चित करने से शुभता और सौभाग्य में वृद्धि होती है।
तिलक मुहूर्त का मुख्य उद्देश्य वैवाहिक जीवन की शुभ शुरुआत करना है। यह संस्कार दोनों परिवारों को प्रेम, सम्मान और एकता के सूत्र में जोड़ता है। धार्मिक दृष्टि से यह संस्कार ग्रहों की सकारात्मक ऊर्जा को सक्रिय कर आने वाले दांपत्य जीवन को मंगलमय और समृद्ध बनाता है।
सही तिलक मुहूर्त में किया गया तिलक पारिवारिक संबंधों में प्रेम, सौहार्द और स्थायित्व लाता है। इससे ग्रहों की अनुकूलता बढ़ती है और आने वाला वैवाहिक जीवन शुभ, समृद्ध और सफल बनता है। इस दिन किया गया तिलक केवल संस्कार नहीं, बल्कि एक मंगल संकल्प होता है जो जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

