Muhurat Consultation
The full benefits of an auspicious task are achieved only when it is performed at the right time. But do you know that the auspicious timing (Muhurta) for each person varies according to their birth sign?
Vivah Muhurat

Vivah Muhurat
Vivah Muhurat: Auspicious Dates and Time To Get Married
एक नए जीवन की शुभ शुरुआत: विवाह मुहूर्त
मानव जीवन के सोलह संस्कारों में 'विवाह' (Marriage) को सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। यह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और दो आत्माओं का एक वैदिक अनुबंध है, जिसका उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की संयुक्त प्राप्ति है। हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में, इस पवित्र बंधन की शुरुआत shubh vivah muhurat में करना अनिवार्य माना गया है। सही marriage muhurat केवल एक तारीख नहीं है; यह वह ब्रह्मांडीय समय है जब ग्रहों और नक्षत्रों का संयोग वर और वधू दोनों के लिए सबसे अनुकूल होता है।
शुभ vivah muhurat में विवाह करने से दंपति को सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और कुल वृद्धि की प्राप्ति होती है। यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि उस नए जीवन को सकारात्मक ऊर्जाओं से भरने और आने वाले वैवाहिक जीवन के लिए सौभाग्य के द्वार खोलने का एक आध्यात्मिक प्रयास है। किसी भी विवाह की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका आरंभ, कितनी शुद्ध और शुभ घड़ी में किया गया है। यदि आप vivah muhurat today की तलाश में हैं, तो ध्यान रखें कि विवाह जैसे महत्वपूर्ण कार्य के लिए हमेशा दीर्घकालिक शुभ मुहूर्त का चयन करना ही श्रेष्ठ होता है।
विवाह मुहूर्त वह विशिष्ट शुभ समय होता है, जो ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर निर्धारित किया जाता है। इस मुहूर्त का चयन वर और वधू की जन्म कुंडली, तिथि, वार, नक्षत्र और लग्न की स्थिति को देखकर किया जाता है। एक अनुकूल vivah muhurt में किया गया विवाह न केवल दांपत्य जीवन में सुख-शांति लाता है, बल्कि भावी पीढ़ी के कल्याण और समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आज के आधुनिक युग में भी, हर कोई अपने बच्चे के विवाह के लिए vivah muhurat today या अगले कुछ महीनों के शुभ मुहूर्त की तलाश करता है, क्योंकि इस Hindu marriage muhurat के बिना विवाह संपन्न करना उचित नहीं माना जाता है। इस लेख में हम vivah muhurt के वैज्ञानिक आधार, विधि और महत्व का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।
विवाह के लिए मुहूर्त का महत्व ज्योतिषीय और आध्यात्मिक दोनों दृष्टिकोणों से अद्वितीय है। विवाह की आधारशिला ही vivah shubh muhurat पर टिकी होती है।
vivah muhurat importance इस बात से तय होती है कि यह समय ऊर्जा और ग्रहों के संतुलन को दर्शाता है। एक शुभ मुहूर्त यह सुनिश्चित करता है कि:
- ग्रहों का अनुकूलन: वर और वधू के लिए अनुकूल ग्रहों की स्थिति सुनिश्चित होती है, जिससे उनके जीवन में नकारात्मक ऊर्जाओं का प्रवेश नहीं होता।
- बाधाओं का निवारण: विवाह समारोह से जुड़े सभी विघ्न, बाधाएँ और अप्रिय घटनाएँ टल जाती हैं।
- दीर्घकालिक सुख: ज्योतिषीय रूप से अनुकूल मुहूर्त में किया गया विवाह, दोनों पक्षों के बीच प्रेम, सम्मान और आपसी समझ को बढ़ाता है, जिससे दांपत्य जीवन सफल और दीर्घायु होता है। vivah Muhurta का चयन इसलिए ही इतनी गहनता से किया जाता है।
विवाह का vivah shubh muhurat निर्धारित करने के लिए 'पंचांग' के पाँच अंगों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण) का गहन अध्ययन किया जाता है। इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य प्राथमिक कारकों पर ध्यान दिया जाता है:
- मास और वर्जित काल: विवाह के लिए 'गुरु' (बृहस्पति) और 'शुक्र' (वीनस) का उदित होना आवश्यक है। जब ये ग्रह गुरु अस्त या शुक्र अस्त होते हैं, तो कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता है। इसके अलावा, मलमास/खरमास, चातुर्मास (देवशयनी एकादशी से देवोत्थानी एकादशी तक), और पितृ पक्ष (श्राद्ध काल) में विवाह करना अशुभ माना जाता है।
- तिथि (Tithi): रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14), अमावस्या और पूर्णिमा से बचना चाहिए। द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी और त्रयोदशी तिथियाँ शुभ मानी जाती हैं।
- नक्षत्र (Nakshatra): रोहिणी, मृगशिरा, मघा, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र विवाह के लिए अत्यंत शुभ हैं।
- बल शुद्धि: तारा बल (नक्षत्रों की शक्ति) और चंद्र बल (चंद्रमा की स्थिति) का अनुकूल होना सबसे आवश्यक है। ये दोनों बल वर और वधू की जन्म कुंडली से सीधे जुड़े होते हैं और सुखी दांपत्य जीवन के लिए आवश्यक ऊर्जा सुनिश्चित करते हैं।
- लग्न शुद्धि: वर और वधू की कुंडली के अनुसार shubh vivah muhurat में 'लग्न शुद्धि' सबसे आवश्यक है।
- गुण मिलान (Kundali Milan): विवाह मुहूर्त निकालने से पहले, वर-वधू की कुंडली का गुण मिलान या Kundali Milan अनिवार्य है। इसमें 36 गुणों में से न्यूनतम 18 गुणों का मिलना शुभ माना जाता है।
vivah muhurat Vidhi (Katha) स्वयं में एक विस्तृत प्रक्रिया है, जिसमें मुहूर्त के निर्धारण से लेकर विवाह के वास्तविक अनुष्ठानों तक सब कुछ शामिल है।
विवाह से पूर्व कई छोटे-छोटे अनुष्ठान किए जाते हैं, जो vivah muhurat importance को दर्शाते हैं:
- सगाई: यह विवाह का वचन देने का समारोह है, जिसे shubh vivah muhurat में किया जाता है।
- गणेश पूजन: हर शुभ कार्य की तरह, निर्विघ्नता के लिए भगवान गणेश की पूजा आवश्यक है।
- मंडप स्थापना: विवाह समारोह के लिए मंडप की स्थापना भी एक shubh muhurat में की जाती है।
- हल्दी और मेहंदी: ये रस्में भी शुभ समय में की जाती हैं, ये रस्मे वर वधू को वैवाहिक जीवन के लिए तैयार करती हैं।
विवाह समारोह का मुख्य भाग मंत्रों का उच्चारण है। vivah muhurat mantra केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि यह वर और वधू को पवित्र ऊर्जा से जोड़ते हैं।
- सप्तपदी मंत्र: सात फेरों के दौरान उच्चारण किए जाने वाले ये मंत्र जीवन भर के सात वचन होते हैं, जो उनके भविष्य की दिशा तय करते हैं।
- कन्यादान मंत्र: यह मंत्र कन्या के पिता द्वारा अपनी पुत्री को समर्पित करने के दौरान बोला जाता है, जो त्याग और समर्पण का प्रतीक है।
- विवाह हवन मंत्र: विवाह के दौरान अग्नि देवता (अग्नि साक्षी) के समक्ष आहुति देते हुए बोले जाने वाले मंत्र, हम अग्नि को विवाह का अनन्त और पवित्र साक्षी मानते हैं। vivah muhurat mantra जाप ही इस अनुष्ठान को आध्यात्मिक बनाता है।
vivah muhurat vidhi में न केवल दूल्हा-दुल्हन के बीच होने वाली रस्में शामिल हैं, बल्कि इसमें vivah muhurat pujan यानी देवताओं का आह्वान भी शामिल है।
विवाह के दौरान vivah samagri का सही संग्रह अत्यंत आवश्यक है। प्रमुख सामग्री में शामिल हैं:
- यज्ञ सामग्री: हवन कुंड, समिधा (हवन की लकड़ी), घी, जौ, तिल, कपूर।
- पूजा सामग्री: अक्षत, हल्दी, कुमकुम, सुपारी, पान के पत्ते, मौली, फूल, मिठाई, और नवग्रहों की स्थापना के लिए सामग्री।
- वस्त्र और आभूषण: वर-वधू के लिए नए वस्त्र, मंगलसूत्र, और सिंदूर।
विवाह के समय निम्नलिखित shubh vivah pujan किए जाते हैं:
- गणेश और गौरी पूजन: shubh vivah pujan में सर्वप्रथम गणेश और माता गौरी की पूजा होती है, ताकि विवाह में कोई विघ्न न आए और दांपत्य जीवन में सौभाग्य बना रहे।
- नवग्रह पूजन: विवाह से पहले सभी नौ ग्रहों को शांत करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए navgrah pujan किया जाता है।
- कलश स्थापना: vivah muhurat pujan में कलश की स्थापना, वरुण देव का आह्वान करती है, जो संपन्नता और शुद्धता का प्रतीक है।
Hindu marriage muhurat की गणना में चंद्रमा और सूर्य की गति के साथ-साथ गुरु और शुक्र का अस्त होना प्रमुख भूमिका निभाता है। विवाह के लिए शुभ महीनों को ऋतुओं के अनुसार वर्गीकृत किया गया है, जिससे vivah Muhurt की उपलब्धता को समझना आसान हो जाता है:
साल की शुरुआत में Hindu marriage muhurat की स्थिति मिश्रित रहती है। जनवरी (पौष/माघ मास) में खरमास होने के कारण vivah Muhurt कम होते हैं, और पौष मास को वर्जित माना जाता है। हालाँकि, फरवरी (माघ/फाल्गुन) और मार्च (फाल्गुन/चैत्र) में मध्यम शुभ मुहूर्त मिलने लगते हैं। फाल्गुन मास में शुभता होती है, बशर्ते गुरु और शुक्र ग्रह अस्त न हों। चैत्र मास में पुनः vivah Muhurt कम हो जाते हैं।
विवाह Muhurta के लिए ग्रीष्म ऋतु का समय सबसे उत्तम माना जाता है। अप्रैल (चैत्र/वैशाख) में वैशाख मास की शुरुआत के साथ vivah Muhurat की संख्या बढ़ जाती है और इसे विवाह के लिए अति उत्तम माना गया है। ठीक इसी प्रकार, मई (वैशाख/ज्येष्ठ) में भी Vivah Muhurta के लिए अच्छे और शुभ मुहूर्त मिलते हैं। जून (ज्येष्ठ/आषाढ़) में आषाढ़ मास के आरंभ तक मध्यम शुभ मुहूर्त प्राप्त हो सकते हैं, जिसके बाद शुभता कम हो जाती है।
जुलाई (आषाढ़/श्रावण), अगस्त (श्रावण/भाद्रपद), और सितंबर (भाद्रपद/आश्विन) के महीने चातुर्मास के अंतर्गत आते हैं। चातुर्मास (देवशयनी एकादशी से शुरू) के कारण विवाह और अन्य मांगलिक कार्य पूर्णतः वर्जित हो जाते हैं। Vivah Muhurt के लिए यह समय इसलिए भी त्याज्य है क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं और दैवीय शक्तियों का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है। इसके अतिरिक्त, सितंबर में आने वाला पितृ पक्ष भी विवाह के लिए वर्जित है।
चातुर्मास की समाप्ति (देवोत्थानी एकादशी) के बाद vivah Muhurt फिर से शुरू होते हैं। अक्टूबर (आश्विन/कार्तिक) में चातुर्मास के अंत में vivah Muhurt कम शुभ रहते हैं, लेकिन इसके बाद शुभता में वृद्धि होती है। नवंबर (कार्तिक/मार्गशीर्ष) में मार्गशीर्ष (अगहन) का महीना उत्तम vivah Muhurta प्रदान करता है, जो विवाह के लिए सबसे शुभ काल में से एक है। दिसंबर (मार्गशीर्ष/पौष) में भी अच्छे vivah Muhurt मिलते हैं, लेकिन पौष मास (जो जनवरी में शुरू होता है) के आगमन से पहले विवाह संपन्न कर लेना चाहिए।
Vivah muhurat benefits सिर्फ धार्मिक नहीं हैं, बल्कि ये मनोवैज्ञानिक और ज्योतिष-संबंधी लाभ भी प्रदान करते हैं:
- बाधाओं से सुरक्षा: देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होने से विवाह के बाद जीवन में आने वाली रुकावटें, और बाधाओं का समना नहीं करना पड़ता है।
- सकारात्मकता का संचार: शुभ मुहूर्त में विवाह सम्पन्न होने से वैवाहिक संबंध में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Vibrations) का संचार होता है।
- वंश वृद्धि: शुभ मुहूर्त में किया गया विवाह स्वास्थ्य और भाग्यशाली संतान की प्राप्ति में सहायक होता है।
- मानसिक शांति: यजमान को यह विश्वास होता है कि उन्होंने सभी धार्मिक नियमों का पालन किया है, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है।
शुभ Vivah Muhurat के बिना विवाह आरंभ करना अनुकूल नहीं माना जाता है। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, कुछ महीने और तिथियाँ विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं।
- शुभ वार (दिन): सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार विवाह के लिए शुभ माने जाते है तथा मंगलवार और शनिवार को आमतौर पर टाला जाता है।
- शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, एकादशी, त्रयोदशी।
- शुभ नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद उत्तराषाढ़ा, रेवती।
- गुरु अस्त और शुक्र अस्त: जब बृहस्पति (गुरु) और शुक्र ग्रह अस्त होते हैं, तो उनका शुभ प्रभाव समाप्त हो जाता है।
- चातुर्मास: जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में होते हैं (देवशयनी एकादशी से देवोत्थानी एकादशी तक)।
- पितृ पक्ष (श्राद्ध): पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का काल, जो शुभ कार्यों के लिए वर्जित है।
- मलमास या खरमास: जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है।
विवाह जैसे मांगलिक, विस्तृत और जटिल वैदिक संस्कार बिना किसी विशेषज्ञ पंडित के मार्गदर्शन के सफल नहीं हो सकते। इसीलिए Book a pandit for vivah muhurat सेवाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि आपको न केवल एक सही vivah Muhurt मिले, बल्कि संपूर्ण vivah muhurat vidhi (विवाह संस्कार) का पालन वैदिक मंत्रों और शुद्ध रीति-रिवाजों के अनुसार हो।
एक योग्य पंडित या आचार्य ही यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि विवाह लग्न सभी अशुभ स्थितियों से मुक्त हो, shubh vivah pujan सही ढंग से हो और vivah muhurat mantra का उच्चारण दोष रहित हो। इस प्रकार, विशेषज्ञ की सहायता से, आप केवल एक समारोह नहीं, बल्कि एक सफल और सुखी वैवाहिक जीवन की आधारशिला रखते हैं, जिसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा का पूर्ण समर्थन प्राप्त होता है।
विवाह के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार सबसे शुभ दिन माने जाते हैं। शनिवार, मंगलवार और रविवार को आमतौर पर टालना चाहिए। shubh vivah muhurat चयन के लिए इन दिनों के साथ शुभ नक्षत्रों और तिथियों का मेल ज़रूरी है।
vivah samagri की मुख्य सूची में यज्ञ के लिए हवन सामग्री, गणेश-गौरी पूजन सामग्री, नवग्रह पूजन सामग्री, कलश, पंचामृत, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, सिंदूर, मंगलसूत्र, और वर-वधू के लिए पारंपरिक वस्त्र शामिल होते हैं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विवाह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के सबसे अनुकूल समय में हो, ताकि वर-वधू का वैवाहिक जीवन आनंदमय, स्वस्थ और समृद्ध हो। यह उनके भाग्य, कुंडली और ग्रहों के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।
vivah muhurat स्वयं में कोई व्यक्ति नहीं है, बल्कि यह समय की गणना की एक इकाई है। इसे vivah Muhurta के नाम से जाना जाता है, जो विवाह के लिए ग्रहों द्वारा अनुकूलित 'समय' को दर्शाता है।
विवाह और shubh vivah pujan का अनुष्ठान विवाह स्थल के 'मंडप' में किया जाता है। मंडप को अक्सर उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या पूर्व दिशा में स्थापित किया जाता है, जहाँ से सूर्य और देवों की ऊर्जा प्राप्त होती है।
vivah muhurat Consultancy एक विशेषज्ञ ज्योतिषीय सेवा है जहाँ आचार्य, वर और वधू दोनों की जन्म कुंडली का गहन विश्लेषण करते हैं। वे दोनों की राशियों, नक्षत्रों और ग्रहों की स्थिति का मिलान करते हैं, जिसमें तारा बल और चंद्र बल की गणना प्रमुख है। इस मिलान (गुण मिलान) के आधार पर ही, वह Hindu marriage muhurat निर्धारित किया जाता है जो दोनों के लिए अधिकतम सुख और समृद्धि सुनिश्चित करे।
- वर और वधू दोनों का नाम, जन्मतिथि, जन्म स्थान और जन्म का सटीक समय।
- विवाह की संभावित समय सीमा (जैसे, किस वर्ष या महीने में विवाह की योजना है)।
- गोत्र/कुल (Gotra/Kul) की जानकारी ताकि समान गोत्र से बचा जा सके।
कुंडली मिलान और विस्तृत पंचांग गणना (जिसमें गुरु और शुक्र की स्थिति, मलमास, तारा बल आदि का विश्लेषण शामिल है) करने में एक विशेषज्ञ ज्योतिषी को आमतौर पर कुछ घंटे का समय लग सकता है, ताकि त्रुटि रहित vivah shubh muhurat की सिफारिश की जा सके।

