Muhurat Consultation
The full benefits of an auspicious task are achieved only when it is performed at the right time. But do you know that the auspicious timing (Muhurta) for each person varies according to their birth sign?
Vadhu Pravesh Muhurat

Vadhu Pravesh Muhurat
Vadhu Pravesh Muhurat: Shubh Dates and Time for Bride’s First Entry
वधू प्रवेश मुहूर्त
भारतीय संस्कृति में विवाह केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कृतियों का समागम होता है। विवाह के पश्चात, जब नववधू अपने पति के घर में पहली बार प्रवेश करती है, तो इस पवित्र क्षण को वधू प्रवेश कहा जाता है। यह एक ऐसा संस्कार है जो नवविवाहित जोड़े के जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और खुशहाली लाता है। वधू प्रवेश मुहूर्त का निर्धारण ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह प्रवेश अत्यंत शुभ और मंगलमय हो।
वधू प्रवेश मुहूर्त वह विशिष्ट समय अवधि होती है जिसे ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार नवविवाहित वधू के लिए अपने ससुराल में पहली बार प्रवेश करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में, किसी भी नए कार्य की सफलता के लिए मुहूर्त का पालन करना अनिवार्य माना जाता है। वधू प्रवेश Muhurt भी इसी परंपरा का एक हिस्सा है।
यह केवल एक दरवाजा खोलकर अंदर जाने की क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जो यह सुनिश्चित करता है कि नववधू के आगमन से घर में देवी लक्ष्मी का वास हो और परिवार में सुख-शांति बनी रहे। सही Vadhu pravesh muhurat में प्रवेश करने से नववधू अपने साथ सकारात्मक ऊर्जा और सौभाग्य लेकर आती है, जिससे गृहस्थ जीवन खुशहाल होता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वधू प्रवेश Muhurta का निर्धारण तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण जैसे पाँच तत्वों (पंचांग) के संयोजन से होता है। विशेष रूप से, Vadhu pravesh muhurat today की गणना करते समय चंद्रमा की स्थिति और नववधू की जन्म कुंडली का भी ध्यान रखा जाता है।
ज्योतिष में, हर कार्य की सफलता और निर्विघ्नता के लिए मुहूर्त देखा जाता है। वधू प्रवेश चूंकि जीवन का एक निर्णायक मोड़ है, इसलिए इसे 'विवाह' जितना ही महत्व दिया जाता है। एक शुभ मुहूर्त के चयन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि:
- सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश: वधू प्रवेश सही Muhurta में होने से घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- सौभाग्य और समृद्धि: नववधू को देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। शुभ Vadhu pravesh shubh muhurat में उसका आगमन परिवार के लिए आर्थिक समृद्धि, वंश वृद्धि और खुशहाली लाता है।
- ग्रहों की अनुकूलता: Vadhu pravesh muhurat benefits में सबसे प्रमुख है ग्रहों के हानिकारक प्रभावों से सुरक्षा। शुभ मुहूर्त उस समय को चुनता है जब विवाह और गृहस्थ जीवन से संबंधित ग्रह (जैसे शुक्र, बृहस्पति) अनुकूल स्थिति में होते हैं।
- रिश्तों में मधुरता: यह माना जाता है कि शुभ वधू प्रवेश परिवार के सदस्यों और नवविवाहित जोड़े के बीच स्नेह और सामंजस्य को बढ़ावा देता है।
- संतान सुख: सही समय पर प्रवेश स्वस्थ और भाग्यशाली संतान की प्राप्ति में सहायक माना जाता है।
- दीर्घायु और स्वास्थ्य: यह अनुष्ठान नववधू और उसके पति के दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी प्रार्थना का प्रतीक है।
यही कारण है कि हर Hindu Vadhu pravesh muhurat को अत्यधिक महत्व दिया जाता है और इसे विधिवत संपन्न किया जाता है।
वधू प्रवेश के लिए मुहूर्त का चयन विवाह मुहूर्त जितना ही सूक्ष्म और महत्वपूर्ण होता है। इसमें वधू की कुंडली, घर की दिशा और ग्रहों की तत्कालीन स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
एक शुभ वधू प्रवेश मुहूर्त यह सुनिश्चित करता है:
- समृद्धि और स्थायित्व: वधू का प्रवेश शुभ समय में होने से घर में धन-धान्य और स्थायित्व आता है। यह वधू को 'गृहलक्ष्मी' का दर्जा प्रदान करता है।
- ग्रहों की अनुकूलता: यह समय वर और वधू के लिए प्रतिकूल ग्रहों के प्रभाव को कम करता है और उनके आपसी रिश्ते में प्रेम और सामंजस्य बढ़ाता है।
- स्वास्थ्य और वंश वृद्धि: यह मुहूर्त वधू के स्वास्थ्य और परिवार की वंश वृद्धि के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करता है।
वधू प्रवेश के लिए समय का निर्धारण करते समय निम्नलिखित घटकों की शुद्धता जाँची जाती है:
- जिस प्रकार विवाह मुहूर्त में तारा बल (नक्षत्रों की शक्ति) और चंद्र बल आवश्यक है, उसी प्रकार प्रवेश के समय वधू के जन्म नक्षत्र से चंद्रमा की शुभ स्थिति (3, 6, 7, 10, 11वें भाव में) सुनिश्चित की जाती है।
- यह प्रवेश उस नक्षत्र में होना चाहिए जो वधू के लिए कल्याणकारी (जैसे संपत, क्षेम, साधक, मित्र, परम मित्र) हो।
- वधू प्रवेश मुहूर्त के समय लग्न (Ascendant) का शुद्ध होना सर्वोपरि है। प्रवेश लग्न में शुभ ग्रहों (जैसे बृहस्पति, शुक्र, बुध) का होना और लग्न के केंद्र या त्रिकोण भावों में शुभ ग्रहों की स्थिति अत्यंत उत्तम है।
- प्रवेश के समय लग्न पर अशुभ ग्रहों (शनि, मंगल, राहु, केतु) का प्रभाव कम से कम होना चाहिए।
वधू प्रवेश को द्विरागमन (विवाह के बाद वधू का पहली बार अपने माता-पिता के घर जाकर वापस ससुराल आना) के साथ भी जोड़ा जाता है।
कुछ समुदायों में, विवाह के तुरंत बाद वधू को एक विशिष्ट शुभ दिन पर ही ससुराल में स्थायी रूप से प्रवेश दिलाया जाता है, जिसे द्विरागमन कहते हैं।
- यह मुहूर्त आमतौर पर विवाह के बाद के कुछ दिन या महीने में आता है।
- इसके लिए चंद्रमा, बृहस्पति और शुक्र की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि वधू का द्वितीय प्रवेश और भी अधिक शुभ और फलदायी हो।
वधू प्रवेश मुहूर्त के लिए गोधूलि वेला (शाम का वह समय जब गाय जंगल से चर के वापस घर को लौटती हैं और दिन-रात का मिलन होता है) को अत्यंत शुभ माना जाता है।
- माना जाता है कि यह समय अपने आप में शुभ होता है और इसमें किया गया प्रवेश अत्यंत फलदायी होता है, क्योंकि यह दिन और रात की शक्तियों का संगम होता है।
वधू प्रवेश muhurat vidhi एक विस्तृत और आनंदमय प्रक्रिया है जिसका पालन पंडित जी के मार्गदर्शन में किया जाता है। यहाँ Vadhu pravesh muhurat Rituals और shubh Vadhu pravesh pujan की चरण-दर-चरण प्रक्रिया दी गई है:
- द्वार की सज्जा: घर के मुख्य द्वार को आम के पत्तों, फूलों, और रंगोली से सजाया जाता है। दरवाजे पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाना अनिवार्य है।
- कलश स्थापना: प्रवेश द्वार पर Vadhu pravesh samagri का हिस्सा, एक जल से भरा तांबे का कलश रखा जाता है, जिसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल स्थापित होता है।
- दीपक प्रज्वलन: प्रवेश के समय प्रवेश द्वार पर दीपक जलाए जाते हैं।
- आरती और तिलक: सास या परिवार की कोई बुजुर्ग महिला नववधू और वर की आरती उतारती है और उनके माथे पर तिलक लगाती है।
- कलश गिराना: नववधू अपना दाहिना पैर उठाकर धीरे से चावल (या गेहूं) से भरे हुए कलश को गिराती है। यह कार्य इस विश्वास के साथ किया जाता है कि नववधू घर में अन्न और धन का भंडार लाएगी।
- लाल महावर: नववधू कुमकुम (महावर) से भरी थाली में अपने पैर रखकर घर के अंदर चलती है। उसके पैरों के निशान घर में देवी लक्ष्मी के पदचिह्न माने जाते हैं।
- देवी-देवता का आवाहन: नववधू को सीधे रसोई में ले जाने से पहले पूजा स्थल पर ले जाया जाता है।
- गणेश पूजा: सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है ताकि सभी विघ्न दूर हों।
- कुलदेवी/देवता पूजा: नववधू अपने ससुराल के कुलदेवी/देवता के समक्ष नतमस्तक होकर उनसे आशीर्वाद मांगती है।
- Vadhu pravesh mantra Jaap: पंडित जी के निर्देशानुसार, नवदंपति एक साथ वधू प्रवेश मंत्र का जाप करते हैं।
Auspicious days, time and month for Vadhu pravesh muhurat का चयन अत्यंत सावधानी से किया जाता है। Vadhu pravesh shubh muhurat को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
वधू प्रवेश के लिए निम्नलिखित महीने सबसे उत्तम माने जाते हैं:
- कार्तिक: इस मास को अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है।
- मार्गशीर्ष: यह मास भी नए कार्यों के लिए अनुकूल होता है।
- माघ और फाल्गुन: ये मास भी वधू प्रवेश muhurat के लिए उत्तम होते हैं।
- वैशाख: हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह मास भी शुभ होता है।
Vadhu pravesh muhurat today की गणना करते समय ये दिन सबसे शुभ माने जाते हैं:
- सोमवार (Monday): चंद्रमा का दिन, शांति और शीतलता प्रदान करता है।
- बुधवार (Wednesday): बुद्धि और ज्ञान का दिन, गृहस्थी के लिए उत्तम।
- गुरुवार (Thursday): बृहस्पति का दिन, सौभाग्य और समृद्धि लाता है।
- शुक्रवार (Friday): देवी लक्ष्मी का दिन, धन और वैभव के लिए सबसे शुभ।
द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी।
नक्षत्र शुद्धि वधू प्रवेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। वधू के कल्याण, स्वास्थ्य और सौभाग्य के लिए कुछ विशिष्ट नक्षत्र ही लिए जाते हैं:
- ध्रुव (स्थिर): रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद। (स्थिरता और दीर्घकालिक संबंध के लिए)
- चर (चल): पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, स्वाति। (गतिशील सुख और अनुकूलता के लिए)
- हस्त, चित्रा, अनुराधा, मृगशिरा, रेवती, अश्विनी, पुष्य। (इनका प्रयोग उत्तम नक्षत्रों की अनुपस्थिति में किया जाता है।)
- आर्द्रा, आश्लेषा, मघा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, भरणी, कृतिका। (ये नक्षत्र उग्र, तीक्ष्ण या दारुण प्रकृति के होते हैं, जो अशुभ फल देते हैं।)
वधू प्रवेश के लिए लग्न का चयन अत्यंत सावधानी से किया जाता है। प्रवेश के समय 'लग्न' (Ascendant) वधू की कुंडली के 'अष्टम भाव' (Eighth House) से कभी भी संबंधित नहीं होना चाहिए, अन्यथा यह वधू के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए कष्टकारी हो सकता है।
- उत्तम लग्न: वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, धनु, कुम्भ। (इन लग्नों में शुभ ग्रहों का होना, जैसे शुक्र या बृहस्पति, अत्यंत फलदायी होता है।)
- वर्जित लग्न: मेष, वृश्चिक, मकर, मीन। (इनके चर या द्विस्वभाव होने और क्रूर ग्रहों से संबंधित होने के कारण इन्हें टाला जाता है।)
- गोचर: प्रवेश के समय गोचर में बृहस्पति (Guru) का शुभ स्थान में होना (जैसे 2, 5, 7, 9, 11वें भाव में) आवश्यक है। शुक्र का गोचर भी मजबूत होना चाहिए।
निम्नलिखित अशुभ योगों में वधू प्रवेश पूर्णतः वर्जित है, क्योंकि ये दांपत्य जीवन में संघर्ष और अस्थिरता लाते हैं:
- भद्रा काल: भद्रा में कोई भी मांगलिक कार्य आरंभ नहीं किया जाता है।
- ग्रहण काल: सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान।
- यमघंट, राहुकाल और गुलिक काल: ये दैनिक अशुभ काल हैं, जिनसे बचना अनिवार्य है।
- देव शयन काल: चातुर्मास के दौरान (वर्जित मास)।
वधू प्रवेश muhurat के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को सबसे शुभ माना जाता है। मंगलवार और शनिवार को आमतौर पर वधू प्रवेश के लिए टालना चाहिए।
पूजा की विस्तृत सूची के लिए किसी योग्य पंडित से परामर्श करना चाहिए।
वधू प्रवेश muhurat का उद्देश्य नववधू के नए घर में प्रवेश को ग्रहों के सबसे अनुकूल समय पर सुनिश्चित करना है ताकि वह अपने साथ सौभाग्य, समृद्धि और पारिवारिक सामंजस्य लेकर आए। यह नववधू को देवी लक्ष्मी के रूप में स्वीकार करने का एक शुभ अनुष्ठान है।
वधू प्रवेश muhurat का पूजन ससुराल के मुख्य प्रवेश द्वार पर होता है, इसके बाद घर के पूजा स्थल और अंत में रसोई में रस्में पूरी की जाती हैं।
Vadhu pravesh muhurat Consultancy एक सेवा है जहाँ ज्योतिष विशेषज्ञ नवदंपति की जन्म कुंडली और पंचांग के आधार पर सबसे सटीक और शुभ वधू प्रवेश Muhurta का निर्धारण करते हैं। यह ऑनलाइन या व्यक्तिगत रूप से हो सकता है, जहाँ विशेषज्ञ Vadhu pravesh vidhi की पूरी जानकारी प्रदान करते हैं।
- नववधू और वर की जन्म तिथि।
- जन्म का समय और स्थान।
- विवाह की तिथि।
- नए घर (ससुराल) में प्रवेश की अनुमानित तिथि सीमा।

