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Muhurat Consultation

The full benefits of an auspicious task are achieved only when it is performed at the right time. But do you know that the auspicious timing (Muhurta) for each person varies according to their birth sign?

Bhumi Poojan Muhurat

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Bhumi Poojan Muhurat

Bhumi Poojan Muhurat: Auspicious Dates and Timings to Begin Your Construction.

नींव की शुभ शुरुआत: भूमि पूजन – विधि, महत्व और सटीक मुहूर्त

मानव जीवन में 'घर' केवल ईंट और सीमेंट से बनी एक संरचना नहीं है, बल्कि यह आशाओं, सपनों और परिवार के भविष्य का आधार होता है। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में, किसी भी नए निर्माण कार्य की शुरुआत करने से पहले 'धरती माता' का पूजन करना अनिवार्य माना गया है। इस अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठान को भूमि पूजन कहा जाता है। यह सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि उस स्थान को नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्त करने और उस पर निवास करने वाले लोगों के लिए सुख-समृद्धि के द्वार खोलने का एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक प्रयास है। किसी भी गृह निर्माण की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी नींव, यानी भूमि पूजन, कितनी शुद्ध और शुभ मुहूर्त में की गई है।


भूमि पूजन क्या है? (What is Bhumi Pujan?)

भूमि पूजन का तात्पर्य है 'पृथ्वी की पूजा' या 'आधारशिला समारोह'। यह वह प्रारंभिक संस्कार है जो किसी भी भूमि पर भवन, घर, या व्यावसायिक परिसर का निर्माण शुरू करने से पहले किया जाता है। इस अनुष्ठान के माध्यम से, हम भूमि के अधिष्ठाता देवता, भू-देवी (पृथ्वी माता), वास्तु पुरुष (भूमि के देवता), और पंच महाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का आह्वान करते हैं।

भूमि पूजन का मुख्य उद्देश्य भूमि को खोदने और उसे कष्ट पहुँचाने के लिए धरती माता से क्षमा मांगना है। यह नकारात्मक ऊर्जाओं, दोषों और अन्य बाधाओं को समाप्त कर भूमि को पवित्र करता है, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरा हो सके। यजमान को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह पूजा किसी विशेषज्ञ द्वारा बताए गए Bhumi Pujan Muhurat में संपन्न हो, ताकि निर्माण में दीर्घकालिक सफलता मिल सके। यदि आप त्वरित मुहूर्त की तलाश में हैं, तो जानना चाहिए कि bhumi pujan muhurat today विशेषज्ञ की गणना पर निर्भर करता है, लेकिन हमेशा दीर्घकालिक शुभ मुहूर्त का चयन करना ही श्रेष्ठ होता है।

Bhoomi Poojan Muhurt का चयन करते समय, यह सुनिश्चित किया जाता है कि ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति निर्माणकर्ता (यजमान) और भूमि दोनों के लिए पूर्णतः अनुकूल हो।


शुभ मुहूर्त का महत्व और चुनाव प्रक्रिया

वास्तु शास्त्र में Bhumi Pujan Muhurat को अत्यंत महत्व दिया गया है क्योंकि यह समय की पवित्रता और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह को निर्धारित करता है। एक सही shubh muhurat for bhumi pujan चुनना निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उसमें रहने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य और समृद्धि पर सीधा प्रभाव डालता है।


मुहूर्त चयन में विचार किए जाने वाले कारक:
  • वास्तु पुरुष की स्थिति: मुहूर्त के समय वास्तु पुरुष की निद्रा, शयन और जाग्रत अवस्था देखी जाती है। जब वास्तु पुरुष जागृत अवस्था में होते हैं, तभी निर्माण कार्य शुरू करना चाहिए।
  • मास (महीना): कुछ महीनों (जैसे चैत्र, पौष, आश्विन, ज्येष्ठ) को आमतौर पर टाला जाता है, जबकि वैशाख, मार्गशीर्ष और फाल्गुन जैसे महीने शुभ माने जाते हैं।
  • नक्षत्र और तिथि: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, हस्त, पुष्य, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती, और अनुराधा नक्षत्र शुभ माने जाते हैं। रिक्ता तिथियों (4, 9, 14) और अमावस्या से बचना चाहिए।
  • लग्न और यजमान की राशि: bhumi pujan ka shubh muhurat निकालते समय यजमान की जन्म कुंडली और राशि के अनुसार लग्न (Ascendant) का सामंजस्य देखना ज़रूरी है।

एक शुभ मुहूर्त में कार्य आरंभ करने से दैवीय ऊर्जा निर्माण को बल देती है, और सभी प्रकार के 'स्थल दोष' (स्थान के दोष) स्वतः समाप्त हो जाते हैं।


भूमि पूजन में पूजे जाने वाले प्रमुख देवता

भूमि पूजन विधि में कई देवताओं का आह्वान किया जाता है, जो निर्माण और निवास की विभिन्न ऊर्जाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं:

  • भगवान गणेश: इन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से ही होती है।
  • भूमि देवी: धरती माता, जो जीवन को पोषण और स्थिरता प्रदान करती हैं। वह इस अनुष्ठान की मुख्य देवी हैं, जिनसे सभी बाधाओं को दूर करने और क्षमा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • वास्तु पुरुष: निर्माण और दिशाओं के देवता। उनकी पूजा से निवासियों के जीवन में सद्भाव और शांति आती है।
  • पंच महाभूत: वास्तु शास्त्र के अनुसार, ब्रह्मांड के पाँच प्राथमिक तत्वों—पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश—को भी भूमि पूजन में सम्मान दिया जाता है। इन तत्वों का सही संतुलन और सामंजस्य घर में रहने वाले लोगों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
  • नवग्रह और दिक्पाल: नौ ग्रहों और दिशाओं के देवताओं (दिक्पाल) का आह्वान भी किया जाता है, ताकि वे सभी दिशाओं और ग्रहों के प्रतिकूल प्रभावों से रक्षा करें।

भूमि पूजन की विस्तृत विधि (Bhumi Pujan method)

भूमि पूजन एक क्रमबद्ध अनुष्ठान है, जिसे केवल एक योग्य और वेदों का ज्ञाता पंडित ही संपन्न करा सकता है। यहाँ bhumi pujan vidhi का विस्तृत वर्णन दिया गया है:


(A) पूजन स्थल की तैयारी और सामग्री संग्रह

bhumi pujan samagr का संग्रह पूजन का पहला चरण है। सभी सामग्री को ईशान कोण में साफ करके रखा जाता है। आवश्यक सामग्री में शामिल हैं:

  • मूल सामग्री: हल्दी, कुमकुम, अक्षत (चावल), गंगाजल, मौली (कलावा)।
  • अन्य सामग्री: घी, शहद, शक्कर आदि।
  • नैवेद्य और फल: ऋतु फल, मिठाई, पान, सुपारी।
  • विशेष वस्तुएँ: नारियल, पंच रत्न (या 5 सिक्के), नव धान्य, एक लाल कपड़ा, एक कलश, जनेऊ, धूप, दीप और कपूर।

(B) भूमि पूजन के मुख्य अनुष्ठान

संकल्प और शुद्धि:
पंडित जी यजमान से संकल्प करवाते हैं, जिसमें नाम, गोत्र और पूजन का उद्देश्य बताया जाता है। इसके बाद, जल और गंगाजल से स्थल और सामग्री की शुद्धि की जाती है।

गणेश पूजन:
हर शुभ कार्य की तरह, पहले गणेश जी की पूजा की जाती है ताकि कार्य निर्विघ्न संपन्न हो।

कलश स्थापना:
एक कलश में जल भरकर, उसमें सिक्का, सुपारी और पंच रत्न डालकर वरुण देव के रूप में स्थापित किया जाता है। कलश के मुख पर नारियल रखा जाता है, जो पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक है।

नवरत्न पूजन:
यह नवग्रहों को शांत करने के लिए किया जाता है, जिससे निवासियों को दीर्घकालिक धन, समृद्धि और सुरक्षा प्राप्त होती है।

वास्तु पुरुष और नाग पूजा:
वास्तु पुरुष और सर्प देवता (शेषनाग) की पूजा की जाती है। माना जाता है कि शेषनाग पृथ्वी का भार अपने फन पर धारण करते हैं, इसलिए उनसे भवन की नींव को स्थिरता प्रदान करने का अनुरोध किया जाता है।

कथा:
पंडित जी भूमि पूजन विधि (कथा) का वर्णन करते हैं, जो इस अनुष्ठान के पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व को समझाती है। यह कथा बताती है कि कैसे देवताओं ने पृथ्वी पर निर्माण कार्यों के लिए नियमों का निर्धारण किया।

भूमि पूजन मंत्र जप:
पंडित जी वेदों में वर्णित इस bhumi pujan mantra का उच्चारण करते हैं। यजमान को इस जप में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। प्रमुख मंत्रों में शामिल हैं:

  • 'ॐ नमो भगवते वास्तु पुरुषाय नमः'
  • 'ॐ पृथ्वी देव्यै नमः'

हवन और भूमि पूजन आरती:
कुछ bhumi pujan vidhi में एक छोटा हवन भी किया जाता है। सभी देवी-देवताओं का आह्वान करने के बाद, कपूर से bhumi pujan aarti की जाती है, और अंत में प्रसाद वितरण होता है।


(C) नींव का खनन और शिलान्यास

पूजा के समापन पर, ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में एक गड्ढा खोदा जाता है। इसी गड्ढे में पंच रत्न, नव धान्य और पहली ईंट स्थापित की जाती है। यह क्रिया धन-धान्य और भवन की मज़बूती को सुनिश्चित करती है।


भूमि पूजन की कथा और उसका आध्यात्मिक महत्व (Bhumi Pujan Vidhi (Katha))

Bhumi Pujan Vidhi (Katha) का सार वास्तु पुरुष की उत्पत्ति से जुड़ा है। एक किवदंती कथा के अनुसार, जब भगवान शिव शंकर ने भयंकर दैत्य अंधकासुर का वध किया, तो युद्ध के अथाह श्रम से उनके ललाट से पसीने की कुछ बूँदें पृथ्वी पर गिरीं।

इन बूंदों से तत्काल एक अत्यंत भीषण और विकराल मुख वाला जीव प्रकट हुआ, जो 'वास्तु पुरुष' के नाम से जाना गया। समय के साथ, इस विशालकाय जीव ने पृथ्वी और आकाश में भय और आतंक फैलाना शुरू कर दिया।

इस असुर की विशालता से भयभीत होकर, समस्त देवताओं ने एक साथ क्रोधित होकर उस विशालकाय दैत्य को पकड़ा और उसका सिर नीचे करके भूमि में गाड़ दिया। इसके पश्चात्, सभी देवता स्वयं उस पर आसन जमाकर खड़े हो गए। जिस-जिस स्थान पर जो-जो देवता विराजमान हुए, वह क्षेत्र उन्हीं देवता के आधिपत्य का क्षेत्र कहलाया।

तब सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने वास्तु पुरुष को यह वरदान दिया कि:

"पृथ्वी पर जो भी मनुष्य भवन, घर या किसी संरचना का निर्माण करेगा, उसे निर्माण के समय वास्तु पुरुष की पूजा कर उसे अवश्य प्रसन्न करना होगा। जो व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा, उसे जीवन में अनेक प्रकार की कठिनाइयों और बाधाओं का सामना करना पड़ेगा।"

ब्रह्मा जी ने आगे कहा कि भवन निर्माण करने वाला व्यक्ति पूजा-पाठ, शांति के लिए यज्ञ आदि जो कुछ भी करेगा, वह सब वास्तु पुरुष को आहार के रूप में प्राप्त होगा। इसके विपरीत, वास्तु पूजा न करने वाला व्यक्ति वास्तु पुरुष के शुभ आशीर्वाद से वंचित रह जाएगा। इस प्रकार, भवन में सुख-शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए वास्तु पुरुष का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत अनिवार्य माना गया।

ब्रह्मा जी के ये वचन सुनकर, वह विशालकाय वास्तु नामक प्राणी अत्यंत प्रसन्न हुआ।

Bhumi Pujan Importance इस कथा से स्पष्ट होता है:

  • संतुलन: यह पूजा वास्तु पुरुष को शांत करती है, जिससे निर्माण स्थल पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता।
  • आभार: यह धरती माता के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है।
  • सुरक्षा: यह पूजा उस स्थान पर निवास करने वाले निवासियों के लिए आध्यात्मिक सुरक्षा कवच बनाती है, जिससे उन्हें धन, स्वास्थ्य और शांति प्राप्त होती है। इस प्रकार, Bhumi Pujan Importance केवल रस्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ा है।

भूमि पूजन के लाभ

भूमि पूजन benefits सिर्फ धार्मिक नहीं हैं, बल्कि ये मनोवैज्ञानिक और वास्तु-संबंधी लाभ भी प्रदान करते हैं:

  • वास्तु दोष निवारण: भूमि के गर्भ में कई तरह के वास्तु दोष या नकारात्मक ऊर्जा हो सकती है। यह पूजा इन दोषों को दूर करके भूमि को निवास या कार्य के लिए उपयुक्त बनाती है।
  • सकारात्मकता का संचार: इस अनुष्ठान से स्थान पर सकारात्मक ऊर्जा (Positive Vibrations) का संचार होता है, जिससे निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों से लेकर भविष्य के निवासियों तक सभी को लाभ होता है।
  • निर्माण कार्य में सफलता: भूमि पूजन से भवन निर्माण के दौरान आने वाली रुकावटें दूर होती हैं और कार्य सुचारु रूप से पूरा होता है। यह भविष्य में स्थायित्व और मजबूती का प्रतीक है।
  • बाधाओं से सुरक्षा: देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होने से निर्माण कार्य में आने वाली रुकावटें, दुर्घटनाएं और विलम्ब समाप्त होते हैं।
  • मानसिक शांति: यजमान को यह विश्वास होता है कि उन्होंने सभी धार्मिक नियमों का पालन किया है, जिससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है। यह Bhumi Pujan Importance भवन के शुभ और समृद्ध भविष्य को सुनिश्चित करता है।
  • ईश्वरीय आशीर्वाद की प्राप्ति: भूमि पूजन से भगवान विष्णु, वरुण, कुबेर और पृथ्वी माता की कृपा प्राप्त होती है। इससे जीवन में मंगल कार्य सफल होते हैं और शुभ फल मिलते हैं।

यह अनुष्ठान भूमि को 'देवत्व' प्रदान करता है, जिससे वह केवल एक भौतिक स्थान नहीं, बल्कि एक पवित्र आश्रय बन जाती है। इस Bhumi Pujan Significance को समझना हर गृह-निर्माता के लिए ज़रूरी है।


भूमि पूजन का महत्व

किसी भी मांगलिक कार्य की सफलता, उसकी सही शुरुआत पर निर्भर करती है। वास्तु शास्त्र और ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, Bhumi Pujan Muhurat का चुनाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुहूर्त एक शुभ कालखंड होता है जो ग्रहों और नक्षत्रों की अनुकूल स्थिति पर आधारित होता है।

एक सही shubh muhurat for bhumi pujan यह सुनिश्चित करता है कि:

  • नकारात्मक ऊर्जा का निवारण: मुहूर्त के दौरान किए गए कर्म, काल के दोषों को समाप्त करते हैं और निर्माण स्थल को नकारात्मक शक्तियों से मुक्त करते हैं।
  • स्थिरता और दीर्घायु: शुभ काल में शुरू किया गया निर्माण कार्य मजबूत नींव और दीर्घायु वाली संरचना में परिणत होता है।
  • समृद्धि प्राप्ति: जो व्यक्ति उस भवन में निवास करेगा, उसे स्वास्थ्य, धन और खुशहाली प्राप्त हो।

इसलिए, किसी भी निर्माण की नींव रखने से पहले, आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपने सही Bhoomi Poojan Muhurt का चयन किया है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, लोग अक्सर जल्दी में होते हैं और सोचते हैं कि क्या आज कोई bhumi pujan muhurat today है? लेकिन जल्दबाजी के बजाय, विशेषज्ञ की सलाह से दीर्घकालिक शुभ मुहूर्त का चयन करना बुद्धिमानी है।


विशेष Muhurat और auspicious days (शुभ दिन)

जैसा कि पहले बताया गया है, Bhumi Pujan Muhurat के बिना कोई भी निर्माण कार्य शुरू करना अशुभ माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, कुछ महीने और तिथियाँ विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं।

शुभ तिथियाँ: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी, एकादशी।

नक्षत्र: पुनर्वसु, रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा भाद्रपद, उत्तराषाढ़ा, चित्रा, स्वाति, हस्त, पुष्य, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती, अनुराधा और मूल नक्षत्र।

स्थिर लग्न – 2, 5, 8, 11
द्वि स्वभाव लग्न – 3, 6, 12


मासिक Bhumi Pujan Muhurat का अवलोकन

चूँकि विशिष्ट Bhumi Pujan Muhurat की गणना हर साल ग्रहों की चाल के अनुसार बदलती है, यहाँ केवल सामान्य रूप से उपयुक्त महीनों का उल्लेख किया गया है। यदि आप आज ही कोई शुभ मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो आपको किसी विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए, लेकिन नीचे दी गई जानकारी आपको सामान्य Bhumi Pujan Muhurat के लिए एक आधार प्रदान करेगी।

  • Bhoomi Pujan Muhurat January (जनवरी): यह महीना आमतौर पर पौष माह में आता है। पौष मास को शुभ नहीं माना जाता है, इसलिए जनवरी में विशेष Bhoomi Poojan Muhurt की उपलब्धता कम होती है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat Feburary (फरवरी): यह महीना आमतौर पर माघ माह में आता है। माघ और फाल्गुन का पूर्वार्ध माह शुभ माना जाता है, इसलिए फरवरी में विशेष Bhoomi Poojan Muhurt की उपलब्धता होती है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat March (मार्च): फाल्गुन मास में आता है। फाल्गुन का समय अनुकूल हो सकता है। लेकिन फाल्गुन माह में होलाष्टक को ध्यान में रखते हुए शुभ मुहूर्त का विचार किया जाना चाहिए।
  • Bhoomi Pujan Muhurat April (अप्रैल): चैत्र मास में आता है। चैत्र मास का माह शुभ नहीं होता। इस माह में कोई भी मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat May (मई): वैशाख का महीना अत्यंत शुभ माना जाता है, विशेष रूप से अक्षय तृतीया जैसे पर्व Bhumi Pujan Muhurat के लिए उत्कृष्ट हैं। इस महीने विशेष मुहूर्त उपलब्ध होते है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat June (जून): ज्येष्ठ मास का भूमि पूजन के लिए शुभ होता है। इस माह में विशेष मुहूर्त की अधिकता रहती है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat July (जुलाई): आषाढ़ मास भूमि पूजन के लिए अशुभ है, इस माह में कोई भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat Aug (अगस्त): श्रावण मास भूमि पूजन के लिए अत्यंत शुभ है, इस माह में शुभ मुहूर्त की अधिकता रहेगी।
  • Bhoomi Pujan Muhurat Sep (सितंबर): भाद्रपद माह भूमि पूजन के लिए शुभ है। इस माह में शुभ मुहूर्त की अधिकता होती है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat Oct (अक्टूबर): आश्विन मास भूमि पूजन के लिए अशुभ है। इस माह में भूमि पूजन के लिए कोई भी शुभ मुहूर्त उपलब्ध नहीं होते है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat Nov (नवंबर): कार्तिक मास भूमि पूजन के लिए शुभ है इस मास में भूमि पूजन किया जा सकता है, इस माह में कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध होते है।
  • Bhoomi Pujan Muhurat Dec (दिसंबर): अगहन मास भूमि पूजन के लिए शुभ होता है, इस माह में भूमि पूजन किया जा सकता है, कई मुहूर्त उपलब्ध होते है।

एक योग्य पंडित की बुकिंग

इतने विस्तृत और महत्वपूर्ण अनुष्ठान के लिए, एक योग्य पंडित की सेवाएं लेना अनिवार्य है। Bhumi Pujan जैसा गंभीर और विस्तृत अनुष्ठान बिना किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन के बिना नहीं किया जाना चाहिए। Book a pandit for Bhoomi Pujan सेवाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि आपको केवल एक सही Bhumi Pujan Muhurat ही न मिले, बल्कि संपूर्ण पूजा वैदिक मंत्रों और शुद्ध bhumi pujan vidhi के अनुसार संपन्न हो।

Sanatan Jyoti के आचार्य, जो भूमि पूजन में विशेष दक्षता प्राप्त हैं, आपकी कुंडली के अनुसार उत्तम Bhoomi Poojan Muhurt प्रदान करते हैं। उनकी Book a pandit for Bhoomi Pujan सेवाएँ यह सुनिश्चित करती हैं कि आपको केवल एक सही Bhumi Pujan Muhurat ही न मिले, बल्कि संपूर्ण पूजा वैदिक मंत्रों और शुद्ध bhumi pujan vidhi के अनुसार संपन्न हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भूमि पूजन के लिए शुभ दिन कौन से होते हैं?+

भूमि पूजन के लिए सोमवार, बुधवार, गुरुवार, रविवार और शुक्रवार को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके अतिरिक्त द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, दशमी, एकादशी जैसी तिथियाँ भी अनुकूल मानी जाती हैं। मंगलवार और शनिवार को भूमि पूजन से यथासंभव परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये दिन निर्माण कार्य आरंभ करने के लिए अशुभ माने जाते हैं।

भूमि पूजन हेतु आवश्यक सामग्री+
पूजा सामग्री:
  • गंगाजल
  • आम एवं पान के पत्ते
  • पुष्प एवं पुष्पमाला
  • रोली (कुमकुम), हल्दी एवं चंदन
  • अक्षत (चावल)
  • कलावा (मौली)
  • लाल सूती वस्त्र
  • कपूर एवं देसी घी
  • धातु या मिट्टी का कलश
  • विभिन्न प्रकार के फल
  • दूर्वा घास
  • नाग-नागिन की मूर्तियाँ (मिट्टी या धातु की)
  • लौंग, इलायची एवं सुपारी
  • धूप एवं अगरबत्ती
  • सिक्के
  • हल्दी पाउडर
  • नारियल
  • अबीर-गुलाल
अन्य आवश्यक सामग्री:
  • पंचगव्य: गोबर, गोघृत (घी), गोमूत्र
  • नवधान्य (नौ प्रकार के अनाज)
  • दीपक (मिट्टी या धातु के)
  • रंग एवं चूना
  • बताशे
  • खुदाई के उपकरण (फावड़ा, कुदाल आदि)
  • शुद्ध की गई भूमि
  • आधारशिला (ईंट, पत्थर या धातु की)
भूमि पूजन का उद्देश्य क्या है?+

भूमि पूजन का मुख्य उद्देश्य भवन निर्माण से पूर्व भूमि को पवित्र करना और देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त करना है। यह अनुष्ठान भूमि की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। साथ ही, यह वास्तु दोषों को दूर करने, कार्य में आने वाली बाधाओं को कम करने और निर्माण कार्य की सफलता एवं समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

वास्तु पुरुष कौन हैं?+

वास्तु पुरुष को भूमि एवं भवनों का अधिष्ठाता देवता माना जाता है। यह प्रत्येक भूखंड में विद्यमान ऊर्जा का प्रतीक हैं, जो भवन की रक्षा करते हैं और वास्तु संतुलन बनाए रखते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, उनका सिर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में और पैर नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) में स्थित माने जाते हैं।

भूमि पूजन कहाँ किया जाना चाहिए?+

भूमि पूजन हमेशा निर्माण स्थल के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) में किया जाना सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिशा ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में सूर्य की स्थिति और राहु-काल के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए दिशा में आवश्यक परिवर्तन किए जा सकते हैं।

मुहूर्त कंसल्टेंसी क्या है और यह कैसे कार्य करती है?+

मुहूर्त कंसल्टेंसी एक ज्योतिषीय सेवा है जिसके माध्यम से किसी भी शुभ कार्य — जैसे विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन या व्यवसाय आरंभ — के लिए सबसे अनुकूल समय (शुभ मुहूर्त) निर्धारित किया जाता है। इस प्रक्रिया में तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और राहु-काल आदि का विश्लेषण किया जाता है ताकि कार्य सफलता, समृद्धि और शुभ फल प्रदान करे।

मुहूर्त कंसल्टेंसी के लिए कौन-सी जानकारी आवश्यक होती है?+
सटीक मुहूर्त निकालने के लिए निम्न जानकारी आवश्यक होती है:
  • यजमान का नाम
  • जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान
  • संबंधित कार्य का प्रकार (जैसे भूमि पूजन, गृह प्रवेश, विवाह आदि)
इन विवरणों के आधार पर ज्योतिषाचार्य कुंडली एवं पंचांग का विश्लेषण कर शुभ मुहूर्त निर्धारित करते हैं।
मुहूर्त की सलाह प्राप्त करने में कितना समय लगता है?+

मुहूर्त की गणना और सलाह प्राप्त करने में लगने वाला समय प्रत्येक स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकता है। आम तौर पर, अनुभवी ज्योतिषाचार्य आवश्यक विवरण प्राप्त करने के बाद कुछ ही समय के भीतर शुभ मुहूर्त की सटीक जानकारी प्रदान कर सकते हैं।

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भूमि पूजन मुहूर्त | निर्माण प्रारंभ के लिए शुभ दिन