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Muhurat Consultation

The full benefits of an auspicious task are achieved only when it is performed at the right time. But do you know that the auspicious timing (Muhurta) for each person varies according to their birth sign?

Griha Pravesh Muhurat

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Griha Pravesh Muhurat

Griha Pravesh Muhurat: Shubh Dates and Time for Moving into Your New Home

गृह प्रवेश मुहूर्त (Griha Pravesh Muhurat)

हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना भवन हो। हिंदू धर्म में, जब एक परिवार अपने नए, निर्मित या जीर्णोद्धार किए गए भवन में पहली बार प्रवेश करता है, तो इसे केवल जगह बदलना नहीं, बल्कि गृह प्रवेश मुहूर्त (Griha Pravesh Muhurat) नामक एक पवित्र अनुष्ठान के रूप में किया जाता है।
शुभ गृह प्रवेश मुहूर्त (Shubh Griha Pravesh Muhurat) में प्रवेश करने से वास्तु दोष का शमन होता है, भवन में स्थिरता आती है, और देवी-देवताओं की अक्षय कृपा प्राप्त होती है। इस गाइड में, हम आपको गृह प्रवेश विधि (Griha Praharesh Vidhi), भवन के लिए ज्योतिषीय नियम, और सर्वश्रेष्ठ गृह प्रवेश मुहूर्त (Best Griha Pravesh Muhurat) चुनने के बारे में सटीक जानकारी देंगे।


1. गृह प्रवेश: भवन का शुद्धिकरण और स्थिरता (Purification and Stability of the Building)

गृह प्रवेश (Griha Pravesh) का मौलिक अर्थ है 'अपने निवास में प्रवेश करना'।


गृह प्रवेश का अर्थ और वास्तुगत महत्व (Vastu Significance)

गृह प्रवेश मुहूर्त (Griha Pravesh Muhurat) वह पवित्र समय है, जिसे पंचांग, ग्रहों की स्थिति और वास्तु पुरुष की प्रसन्नता के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

  • भवन की ऊर्जा का संतुलन: जब हम शुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश करते हैं, तो उस समय की ब्रह्मांडीय ऊर्जा वास्तु क्षेत्र (Building Area) में सबसे अधिक सकारात्मक होती है। यह ऊर्जा भवन में खुशहाली और सुरक्षा का संचार करती है।
  • वास्तु पुरुष की पूजा: गृह प्रवेश पूजा का मुख्य उद्देश्य वास्तु पुरुष (जो भवन के अधिष्ठाता देवता हैं) को जागृत करना और उनसे भवन में स्थायी निवास की अनुमति मांगना है, जिससे हर कोने में कल्याण बना रहे।
  • नकारात्मकता का निष्कासन: गृह प्रवेश लाभ के तहत, विशेष पूजा-हवन से भवन निर्माण या खाली रहने के दौरान जमा हुई किसी भी नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जाता है।

हिन्दू गृह प्रवेश मुहूर्त (Hindu Home Entry Muhurat) परिवार की सुख-शांति और संपत्ति के दीर्घकालिक स्थायित्व की कुंजी है।


2. गृह प्रवेश मुहूर्त के नियम और अनिवार्यता (Rules and Necessity for Muhurat)

गृह प्रवेश मुहूर्त का महत्व घर को भौतिक स्थान से हटाकर एक 'पवित्र आश्रम' बनाने तक जाता है।


भवन में सुख, शांति और संपत्ति की वृद्धि के लिए
  • स्थायित्व और सुरक्षा: शुभ समय पर प्रवेश करने से भवन में आने वाली प्राकृतिक या मानवीय आपदाओं से सुरक्षा मिलती है। यह मुहूर्त संपत्ति के स्थायित्व को सुनिश्चित करता है।
  • धन की निरंतरता: यदि प्रवेश स्थिर मुहूर्त में किया जाए, तो माता लक्ष्मी स्थायी रूप से भवन में वास करती हैं, जिससे आर्थिक उन्नति और धन संग्रह में लगातार बढ़ोतरी होती है।
  • पारिवारिक सौहार्द: शुभ गृह प्रवेश मुहूर्त पारिवारिक सदस्यों के बीच प्रेम और सहयोग को बढ़ाता है, जिससे नए घर में मानसिक और भावनात्मक शांति बनी रहती है।
  • वास्तु शुद्धि की पूर्णता: यह पूजा भवन के हर कोने में दैवीय ऊर्जा का संचार करती है, जिससे सभी तरह के वास्तु दोष निष्प्रभावी हो जाते हैं।

3. सर्वश्रेष्ठ गृह प्रवेश मुहूर्त का चयन (Selecting the Best Griha Pravesh Muhurat)

सर्वश्रेष्ठ गृह प्रवेश मुहूर्त खोजने के लिए ज्योतिषीय गणना के साथ भवन स्वामी की कुंडली का भी विश्लेषण आवश्यक है।


ज्योतिष के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त निकालने के नियम

सर्वश्रेष्ठ गृह प्रवेश मुहूर्त निकालने के लिए स्थिरता पर सबसे अधिक जोर दिया जाता है।


A. अनुकूल दिन (Auspicious Day/War)
  • सोमवार (Moon): भवन में मानसिक शांति और स्थिरता के लिए।
  • बुधवार (Mercury): व्यापार, बुद्धि और संपत्ति की वृद्धि के लिए।
  • गुरुवार (Jupiter): ज्ञान, धर्म और सौभाग्य के लिए सर्वोत्तम।
  • शुक्रवार (Venus): सुख, ऐश्वर्य, सौंदर्य और समृद्धि के लिए।
  • वर्जित दिन: मंगलवार (उग्र ग्रह, भवन को क्षति), शनिवार (मंद गति, काम में देरी) और रविवार को टालना चाहिए।

B. शुभ तिथियाँ (Auspicious Date/Tithi)

गृह प्रवेश के लिए स्थिर और पूर्ण तिथियाँ शुभ होती हैं:

  • शुक्ल पक्ष की: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी।
  • वर्जित तिथियाँ (Rikta Tithi): चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी को टालना चाहिए।

C. सबसे शुभ नक्षत्र (Best Nakshatras)

गृह प्रवेश के लिए केवल स्थिर नक्षत्र को प्राथमिकता दी जाती है:

  • स्थिर नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रोहिणी, और धनिष्ठा।
  • सौम्य नक्षत्र: मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती, पुष्य, और पुनर्वसु।

D. टालने वाले दोष (Prohibited Periods)

best griha pravesh muhurat में इन समयों में प्रवेश नहीं करना चाहिए:

  • खरमास/मलमास: जब सूर्य धनु या मीन राशि में होता है (लगभग 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक)।
  • अस्त काल: गुरु और शुक्र के अस्त (Combust) होने पर।
  • ग्रहण काल: सूर्य या चंद्र ग्रहण के दौरान।
  • भद्रा काल: भद्रा के अशुभ प्रभाव के कारण।
  • श्राद्ध पक्ष: पितरों के लिए समर्पित होने के कारण।

4. गृह प्रवेश विधि: भवन में मंगल प्रवेश (Auspicious Entry into the Dwelling)

गृह प्रवेश विधि (Griha Pravesh Vidhi) एक विस्तृत अनुष्ठान है जिसका मुख्य ध्यान वास्तु देवता को प्रसन्न करना है।


गृह प्रवेश पूजा के मुख्य चरण (Home Entry Puja Steps)
  • द्वार पूजा और कलश स्थापना: सबसे पहले, शुभ गृह प्रवेश मुहूर्त में मुख्य द्वार पर कलश स्थापित किया जाता है। पति-पत्नी, कलश (जल, सिक्के, नारियल, अनाज से भरा) को लेकर दाहिना पैर पहले अंदर रखते हुए भवन में प्रवेश करते हैं।
  • वास्तु शांति पूजा: घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में वास्तु शांति पूजा (Vastu Shanti Puja) और वास्तु पुरुष का आह्वान किया जाता है। यह भवन की नींव को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
  • अग्नि स्थापन (हवन): शुद्ध वातावरण के लिए हवन किया जाता है। यह हवन घर के कोने-कोने से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करके दैवीय सुरक्षा कवच बनाता है।
  • रसोई का अनुष्ठान: रसोई (Kitchen) में सबसे पहले पूजा की जाती है। इस दिन दूध को उबालकर उसे बर्तन से बाहर गिराया जाता है, जो यह दर्शाता है कि घर में समृद्धि और धन की अधिकता उफान पर रहेगी।
  • अन्न और दान: पूजा संपन्न होने के बाद, आचार्यों और कन्याओं को भोजन कराकर दान दिया जाता है।

5. गृह प्रवेश मुहूर्त के लाभ (Griha Pravesh Muhurat Benefits)

गृह प्रवेश लाभ का सीधा संबंध भवन की आयु और उसमें रहने वालों के सौभाग्य से है।


भवन की दीर्घायु, सुख और सौभाग्य
  • आर्थिक स्थिरता: शुभ गृह प्रवेश लाभ के तहत, यह माना जाता है कि शुभ समय पर प्रवेश करने से सुख समृद्धि और संपत्ति में वृद्धि होती है।
  • वास्तु ऊर्जा का स्थायित्व: घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा के कारण पारिवारिक सदस्यों के बीच सामंजस्य बढ़ता है और भवन की सकारात्मक ऊर्जा पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती है।
  • वास्तु दोष से मुक्ति: यह पूजा घर के वास्तु दोषों को दूर करती है, जिससे घर में मानसिक और भौतिक स्थिरता आती है।

6. गृह प्रवेश के शुभ और वर्जित महीने (Auspicious and Prohibited Months)

1) अत्यधिक शुभ महीने (Highly Auspicious):

  • माघ (Magha)
  • फाल्गुन (Phalguna)
  • ज्येष्ठ (Jyeshth)
  • वैशाख (Vaishakha)

2) वर्जित महीने (Strictly Prohibited):

  • पौष (Paush)
  • आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन, कार्तिक
  • अधिक मास (Malmas/Kharmas)

नोट: गृह प्रवेश मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए सनातन पंचांग और सनातन ज्योति के अनुभवी व दक्ष आचार्यों की सलाह लें।


7. गृह प्रवेश मुहूर्त की तैयारी (Preparation for Muhurat)

शुभ मुहूर्त का पूरा लाभ लेने के लिए गृह प्रवेश विधि शुरू होने से पहले भवन को तैयार करना ज़रूरी है:

  • पूर्ण भवन शुद्धि: प्रवेश से पहले पूरे भवन की सफाई होनी चाहिए।
  • मुख्य द्वार की साज-सज्जा: मुख्य द्वार को आम के पत्तों और फूलों के तोरण से सजाएँ। यह मंगल प्रवेश का प्रतीक है।
  • वास्तु शांति की सामग्री: पंडित जी से सभी ज़रूरी पूजा सामग्री की सूची लें।
  • रसोई में चूल्हे की स्थापना: रसोई में चूल्हा/गैस पहले से न रखें। इसे रस्म के दिन स्थापित किया जाता है और उस पर कुछ मिठाई बनाना शुभ माना जाता है।

8. गृह प्रवेश के बाद क्या करें और क्या न करें (Dos and Don'ts After Griha Pravesh)

गृह प्रवेश संस्कार पूर्ण होने के बाद भवन की ऊर्जा को बनाए रखना ज़रूरी है।


क्या करें –
  • अखंड दीपक: गृह प्रवेश के बाद 40 दिन तक घर को खाली न छोड़ें। रोज सुबह-शाम दीपक जलाएँ और देवताओं का ध्यान करें।
  • सामाजिक समरसता: गृह प्रवेश मुहूर्त के बाद दोस्तों, रिश्तेदारों को भोजन कराएं।
  • नमक का प्रयोग: नियमित रूप से घर में नमक के पानी का पोंछा लगाना नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष को दूर रखता है।

ज़रूरी बातें जो नहीं करनी हैं (Don'ts)
  • तामसिक भोजन से बचें: गृह प्रवेश के दिन और उसके बाद 40 दिन तक घर में तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • कलह: नए घर में प्रवेश के बाद किसी भी तरह का कलह करने से बचें। भवन में शांति और प्रेम बनाए रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गृह प्रवेश मुहूर्त का वास्तु शास्त्र में क्या महत्व है?+

गृह प्रवेश मुहूर्त का महत्व वास्तु में भवन की ऊर्जा को स्थायी और सकारात्मक बनाने से है। यह शुभ समय वास्तु पुरुष को जागृत करता है और भवन को सभी नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त करके उसमें रहने वालों के लिए आरोग्य और संपत्ति का मार्ग खोलता है।

नए भवन में प्रवेश करने से पहले क्या सबसे ज़रूरी है?+

नए भवन में प्रवेश करने से पहले वास्तु शांति पूजा और हवन सबसे ज़रूरी हैं। इसके बाद, मुख्य द्वार पर मंगल कलश लेकर प्रवेश करना और रसोई में दूध उबालने का अनुष्ठान करना आवश्यक है। यह प्रक्रिया भवन को दिव्य सुरक्षा प्रदान करती है।

गृह प्रवेश के दिन रसोई में दूध उबालने (दूध उफनाने) की रस्म क्यों की जाती है?+

यह रस्म घर में समृद्धि और खुशहाली की निरंतरता का प्रतीक है। जब दूध उबलकर बर्तन से बाहर आता है (उफनता है), तो यह दर्शाता है कि परिवार में धन और संपन्नता भी इसी तरह बढ़ती रहेगी और कभी कमी नहीं आएगी। यह रस्म रसोई (जो अन्नपूर्णा का स्थान है) की पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो परिवार के पोषण और आर्थिक बरकत की कामना के लिए की जाती है।

गृह प्रवेश के लिए स्थिर नक्षत्रों का चयन क्यों किया जाता है?+

गृह प्रवेश के लिए उत्तरा फाल्गुनी और रोहिणी जैसे स्थिर नक्षत्रों का चयन इसलिए किया जाता है ताकि भवन में रहने वालों का जीवन सुख-समृद्धि के साथ स्थिर रहे। अस्थिर नक्षत्रों में प्रवेश करने से घर में बार-बार परिवर्तन या अस्थिरता आने का भय रहता है।

गृह प्रवेश के समय मुख्य द्वार पर तोरण (आम के पत्तों का) क्यों लगाया जाता है और इसका क्या महत्व है?+

यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण वास्तु नियम है। तोरण (Taran), आम के पत्तों और गेंदे के फूलों से बनाया जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा और मंगल प्रवेश का प्रतीक है। आम के पत्ते विषैले तत्वों को सोखकर घर में शुद्धि लाते हैं, जबकि पीला और नारंगी रंग शुभता और उत्साह को आकर्षित करते हैं। यह द्वार पर दैवीय शक्तियों के स्वागत की तैयारी होती है, जिससे घर में लक्ष्मी का आगमन होता है।

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गृह प्रवेश मुहूर्त | नए घर में प्रवेश की शुभ तिथि