Janma Kundli - Planetary Details
Planetary details explain their positions at the time of birth. Through this, their influence on personality, fortune, health, and life events can be understood.
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View allक्या आपने कभी सोचा है कि क्यों कुछ लोग बेहद सफल होते हैं, जबकि कुछ को हर मोड़ पर संघर्ष करना पड़ता है? क्यों कुछ रिश्ते आसानी से बन जाते हैं और कुछ बार-बार टूटते हैं? इन सभी सवालों के जवाब छुपे होते हैं आपके जन्म के समय आकाश में मौजूद जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति (Planetary Positions in Birth Chart) में। जी हाँ, वैदिक ज्योतिष में ग्रह केवल आकाशीय पिंड नहीं हैं। ये हमारे जीवन की अदृश्य शक्तियाँ हैं जो हमारी सोच, भाग्य, संबंध और कर्म को दिशा देती हैं। ज्योतिष में नवग्रह (Navagraha in Astrology) का अध्ययन हमें यह समझने में मदद करता है कि ये शक्तियाँ कैसे काम करती हैं।
हर ग्रह की अपनी एक कहानी होती है, एक ऊर्जा होती है और एक भूमिका होती है। ग्रह बताते हैं कि जीवन के किस मोड़ पर कौन-सी घटना घटेगी, किस दिशा में अवसर आएंगे और कहाँ सावधानी बरतनी होगी। यही कारण है कि जन्म कुंडली को समझने का पहला और सबसे ज़रूरी कदम होता है- ग्रहों की दशा और उनका प्रभाव जानना।
जब ज्योतिषी किसी की जन्मकुंडली पढ़ते हैं, तो सबसे पहले वे यह देखते हैं कि कौन सा ग्रह कहाँ बैठा है और वह शुभ परिणाम दे रहा है या अशुभ? वैदिक ज्योतिष ग्रह (Vedic Astrology Planets) ही वह केंद्र बिंदु हैं जो जीवन की हर दिशा में प्रभाव डालते हैं। आपके जीवन के सुख-दुख, सफलता-विफलता, संबंध, विवाह, करियर, संतान सब कुछ किसी न किसी ग्रह की स्थिति पर निर्भर होता है। इसलिए ज्योतिष में ग्रहों को समझना अत्यंत आवश्यक होता है, और इन्हीं ग्रहों की चाल को अपने पक्ष में करने के लिए सही समय पर मुहूर्त परामर्श लेना आपके कार्यों की सफलता सुनिश्चित कर सकता है।
वैदिक ज्योतिष के 9 ग्रहों का परिचय
वैदिक ज्योतिष में कुल 9 ग्रह माने गए हैं - सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु। ये सभी 9 कुंडली में ग्रह (9 Planets in Kundli) किसी न किसी जीवन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। आप अपने दैनिक राशिफल में भी इनका प्रभाव देख सकते हैं।
- सूर्य (Sun): आत्मा, आत्मविश्वास, पितृत्व और नेतृत्व का प्रतीक है। यह अग्नि तत्व ग्रह है जो व्यक्ति को राजसी गुण देता है।
- चंद्रमा (Moon): मन, भावना, माता और मानसिक स्थिति का कारक है। यह भावनात्मक स्थिरता और आकर्षण से जुड़ा है।
- मंगल (Mars): साहस, ऊर्जा, लड़ाई और संपत्ति का प्रतिनिधित्व करता है। यह तेज और संघर्षशील ग्रह है।
- बुध (Mercury): बुद्धि, संवाद, गणना, वाणी और व्यवसाय का कारक है। यह अपने साथ बैठने वाले ग्रह के स्वभाव को अपनाता है।
- गुरु (Jupiter): ज्ञान, धर्म, संतान, न्याय और भाग्य का प्रतीक है। यह सबसे शुभ ग्रहों में से एक है।
- शुक्र (Venus): प्रेम, कला, विवाह और भौतिक सुखों से जुड़ा है। यह भोग-विलास और सौंदर्य का प्रतीक है।
- शनि (Saturn): कर्म, अनुशासन, विलंब और संघर्ष का प्रतीक है। यह धीमे लेकिन निश्चित फल देने वाला ग्रह है।
- राहु (Rahu): भ्रम, छल, अत्यधिक इच्छाएं और तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। यह अचानक बदलाव लाता है।
- केतु (Ketu): त्याग, मोक्ष, रहस्य और पूर्व जन्म के कर्मों का कारक है। यह आत्मिक उन्नति का द्योतक है।
शुभ और अशुभ ग्रह
ग्रहों को उनके ग्रहों के प्रभाव (Graho ka Prabhav) के आधार पर दो श्रेणियों में बाँटा गया है — शुभ और अशुभ ग्रह।
शुभ ग्रह: बृहस्पति, शुक्र, चंद्रमा (जब वह पूर्णिमा के निकट हो) और बुध (जब वह पाप ग्रहों से ग्रसित न हो) को शुभ ग्रह माना जाता है। ये ग्रह सामान्यतः अच्छे और फलदायक परिणाम देते हैं। सटीक गणना के लिए आप पंचांग की मदद ले सकते हैं।
अशुभ ग्रह: मंगल, शनि, राहु और केतु को सामान्यतः अशुभ ग्रह माना जाता है। सूर्य एक शुभ ग्रह है, लेकिन यदि यह कुंडली में कमजोर हो या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो, तो यह भी कभी-कभी प्रतिकूल फल दे सकता है।
लेकिन यह समझना बेहद जरूरी है कि कोई भी ग्रह स्थायी रूप से शुभ या अशुभ नहीं होता। ग्रह का प्रभाव उसकी स्थिति, युति, दृष्टि और जिस भाव में वह स्थित है, उस पर निर्भर करता है।
ग्रहों की स्थिति: उच्च, नीच और स्वराशि
ग्रह जब किसी विशेष राशि में होता है, तो उसकी शक्ति बढ़ या घट जाती है। इसके लिए एक विस्तृत ग्रह विश्लेषण रिपोर्ट (Detailed Planetary Analysis Report) को समझना आवश्यक है। तीन मुख्य प्रकार की स्थितियाँ होती हैं:
- उच्च स्थिति: जब कोई ग्रह अपनी उच्च राशि में होता है, तो वह अपनी शक्ति के चरम पर होता है और पूर्ण फल देने की क्षमता रखता है। जैसे सूर्य जब मेष राशि में होता है तो वह उच्च का माना जाता है।
- नीच स्थिति: जब ग्रह नीच राशि में होता है, तो वह दुर्बल हो जाता है और अपने अच्छे गुणों को व्यक्त नहीं कर पाता। जैसे चंद्रमा जब वृश्चिक राशि में होता है तो वह नीच का होता है।
- स्वराशि: जब ग्रह उस राशि में होता है जिसका वह स्वामी होता है, तो वह सहजता से और स्थिरता के साथ फल देता है। जैसे मंगल मेष और वृश्चिक का स्वामी है, तो इन राशियों में यह ग्रह प्रभावशाली होता है।
इन तीनों अवस्थाओं से यह समझा जा सकता है कि ग्रह का कौन-सा स्वरूप कुंडली में प्रबल होगा — फलदायक या बाधादायक।
ग्रह की शक्ति – उच्च, नीच और स्वराशि:
- उच्च ग्रह: पूरी शक्ति के साथ फल देता है।
- नीच ग्रह: कमजोर और भ्रमित फल देता है।
- स्वराशि ग्रह: स्थिर और प्राकृतिक रूप से फलदायक होता है।
मित्र और शत्रु ग्रह
ग्रहों के बीच भी संबंध होते हैं। कुछ ग्रह एक-दूसरे के मित्र होते हैं, कुछ शत्रु और कुछ सम। यह सिद्धांत कुंडली मिलान में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ग्रह मित्र होते हैं:
- यदि वे स्वभाव में समान हों,
- या एक-दूसरे की राशियों के स्वामी हों,
- या एक-दूसरे से शुभ दृष्टि में हों।
ग्रह शत्रु होते हैं:
- जब उनका तत्व मेल न खाता हो,
- या जब वे विपरीत स्वभाव के हों।
उदाहरण के लिए:
- सूर्य का मित्र चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति है, लेकिन शनि और शुक्र इसके शत्रु माने जाते हैं।
- मंगल और गुरु परस्पर मित्र हैं।
- बुध एक ऐसा ग्रह है जो जिस ग्रह के साथ होता है, उसकी प्रकृति को ग्रहण कर लेता है।
यदि कोई ग्रह अपनी मित्र राशि या मित्र ग्रह के साथ बैठा हो तो वह शुभ परिणाम देता है। वहीं, ग्रह शत्रु राशि में होने से उस ग्रह के नकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं।
कुंडली में ग्रहों की स्थिति समझने की सही विधि
कुंडली पढ़ते समय ग्रहों की स्थिति का अध्ययन करना एक वैज्ञानिक प्रक्रिया की तरह है। इसके लिए आप किसी विशेषज्ञ से ज्योतिषी परामर्श भी ले सकते हैं और निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
- सबसे पहले यह देखें कि ग्रह किस भाव (house) में स्थित है और वह भाव जीवन के किस क्षेत्र को दर्शाता है। जैसे 7वां भाव विवाह से संबंधित होता है, 10वां भाव करियर से।
- फिर यह समझें कि वह ग्रह किस राशि में बैठा है — क्या वह अपनी उच्च, नीच या स्वराशि में है?
- देखें कि उसके साथ कौन-कौन से ग्रह हैं। क्या वह अकेला है या युति में है? अगर युति में है तो उन ग्रहों के आपसी संबंध क्या हैं?
- ग्रह की दृष्टि किन भावों और ग्रहों पर पड़ रही है? ग्रहों की दृष्टियाँ भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं जितनी उनकी स्थिति।
- क्या ग्रह वक्री है या अस्त? इन स्थितियों में ग्रह का फल बदल सकता है।
- अंततः ग्रह की महादशा, अंतर्दशा और गोचर (transit) को भी देखें। ये सभी मिलकर बताएंगे कि ग्रह इस समय व्यक्ति को क्या फल देने जा रहा है।
उदाहरण से समझें: मंगल का विश्लेषण यदि मंगल आपकी कुंडली के 4वें भाव में कर्क राशि में स्थित हो, तो यह मंगल नीच का माना जाएगा। परिणामस्वरूप यह ग्रह पारिवारिक शांति, माँ से संबंध, घर की सुख-सुविधाओं में परेशानी ला सकता है। वहीं, यदि मंगल मकर राशि में 10वें भाव में बैठा हो, तो यह उच्च का मंगल कहलाता है और करियर, निर्णय क्षमता, साहस और नेतृत्व में जबरदस्त लाभ देता है।
दृष्टि और युति:
- हर ग्रह अपनी 7वीं दृष्टि डालता है।
- मंगल: 4वीं, 7वीं, 8वीं दृष्टि
- गुरु: 5वीं, 7वीं, 9वीं दृष्टि
- शनि: 3वीं, 7वीं, 10वीं दृष्टि
यदि कोई पापग्रह शुभ ग्रह पर दृष्टि डालता है, तो उसका प्रभाव नकारात्मक हो सकता है। वहीं, शुभ ग्रह की दृष्टि किसी भाव या ग्रह पर पड़े तो वह सुधार ला सकता है।
युति यानी दो या अधिक ग्रह एक ही भाव में- मित्र हों तो प्रभाव अच्छा, शत्रु हों तो विरोध और संघर्ष संभव।
दशा और गोचर:
दशा किसी ग्रह की तय समय की अवधि होती है, जब वह जीवन पर प्रमुख प्रभाव डालता है। यह विंशोत्तरी दशा प्रणाली से मापी जाती है।
- शुक्र: 20 वर्ष
- शनि: 19 वर्ष
- बुध: 17 वर्ष
- गुरु: 16 वर्ष
- राहु: 18 वर्ष
- केतु: 7 वर्ष
- सूर्य: 6 वर्ष
- चंद्र: 10 वर्ष
- मंगल: 7 वर्ष
गोचर- गोचर यानी ग्रहों की वर्तमान चाल। जब कोई ग्रह जन्मकुंडली के भावों से गुजरता है, तो वह उन भावों को सक्रिय करता है। कुंडली में सभी ग्रहों के गोचर महत्त्वपूर्ण होते हैं जिनमें से शनि, गुरु और राहु-केतु के गोचर विशेष रूप से प्रभावशाली माने जाते हैं।
दशा और गोचर जब एक ही भाव या ग्रह को सक्रिय करें, तब प्रभाव तीव्र और निर्णायक होता है। ग्रहों को समझना, पहचानना और उनका सही विश्लेषण करना कुंडली पढ़ने की पहली और सबसे महत्वपूर्ण सीढ़ी है। यदि ग्रह दोष हो, तो उचित नव ग्रह शांति उपाय (Navagraha Shanti Upay) और अनुष्ठान द्वारा शांति प्राप्त की जा सकती है।
ग्रह विवरण आपकी जन्म कुंडली में सभी ग्रहों की सटीक स्थिति दिखाते हैं, जिसमें उनके राशि, घर, अंश और दृष्टि शामिल हैं। यह जानकारी यह समझने में मदद करती है कि प्रत्येक ग्रह आपके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को कैसे प्रभावित करता है।
सभी ग्रह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सूर्य (आत्मा), चंद्रमा (मन), और लग्न (व्यक्तित्व) को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इन तीनों की स्थिति आपके जीवन और व्यक्तित्व के मूल पहलुओं को निर्धारित करती है।
एक उच्च ग्रह अपने सबसे अनुकूल राशि में होता है, जो अधिकतम सकारात्मक प्रभाव देता है। एक नीच ग्रह अपने सबसे कमजोर राशि में होता है, जिसके प्रभाव को मजबूत करने के लिए उपायों की आवश्यकता होती है।






