





योगिनी एकादशी 2025
योगिनी एकादशी क्या है ?
योगिनी एकादशी सनातन धर्म में आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत पापों से मुक्ति और रोगों के नाश का मार्ग है। योगिनी एकादशी को लेकर मान्यता है कि इसका व्रत करने से व्यक्ति को 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत विशेष रूप से मोक्ष की प्राप्ति और सभी रोगों से छुटकारा दिलाने वाला माना गया है।
योगिनी एकादशी तिथि और समय 2025
तिथि: मंगलवार, 21 जून 2025
एकादशी तिथि प्रारंभ: 21 जून 2025 को सुबह 07:20 से
एकादशी तिथि समाप्त: 22 जून 2025 को सुबह 04:27 पर
योगिनी एकादशी कथा
अलकापुरी में राजाधिराज कुबेर रहते हैं। वे सदा भगवान शिव की भक्ति में तत्पर रहने वाले हैं। उनका हेममाली नाम वाला एक यक्ष सेवक था, जो पूजा के लिए फूल लाया करता था। हेममाली की पत्नी बहुत सुंदर थी। उसका नाम विशालाक्षी था। वह यक्ष कामपाश में आबद्ध होकर सदा अपनी पत्नी में आसक्त रहता था। एक दिन की बात है, हेममाली मान सरोवर से फूल लाकर अपने घर में ही ठहर गया और पत्नी के प्रेम का रसास्वादन करने लगा; अत: कुबेर के भवन में ना जा सका। इधर कुबेर मंदिर में बैठकर शिव का पूजन कर रहे थे। उन्होंने दोपहर तक फूल आने की प्रतीक्षा की। जब पूजा का समय व्यतीत हो गया तो यक्षराज ने कुपित होकर सेवकों से पूछा- यक्षों ! दुरात्मा हेममाली क्यों नहीं आ रहा है, इस बात का पता तो लगाओ।
यक्षों ने कहा- राजन! वह तो पत्नी की कामना में आसक्त हो अपनी इच्छा के अनुसार घर में ही रमण कर रहा है। उसकी बात सुनकर कुबेर क्रोध से भर गए और तुरंत ही हेममाली को बुलवाया। देर हुई जानकर हेममाली के नेत्र भय से व्याकुल हो रहे थे। वह आकर कुबेर के सामने खड़ा हुआ। उसे देखकर कुबेर की आंखें क्रोध से लाल हो गई। वे बोले-ओ पापी! ओ दुष्ट! ओ दुराचारी! तूने भगवान की अवहेलना की है, अत: कोढ़ से युक्त और अपनी उस प्रियतमा से वियुक्त होकर इस स्थान से कहीं दूर चला जा। कुबेर के ऐसा कहने पर वह उसी स्थान पर नीचे गिर गया। उस समय उसके हृदय में अत्यंत दुख हो रहा था। कोढ़ से सारा शरीर पीड़ित था। परंतु शिव पूजा के प्रभाव से उसकी स्मरण शक्ति लुप्त नहीं हुई थी। पातक से दबा होने पर भी वह अपने पूर्व कर्म को याद रखता था। तदनन्तर इधर-उधर घूमता हुआ वह पर्वतों में श्रेष्ठ मेरुगिरी के शिखर पर गया। वहाँ उसे तपस्या के पुंज मुनिवर मार्कण्डेयजी का दर्शन हुआ। पापकर्म यक्ष ने दूर से ही मुनि के चरणों में प्रणाम किया। मुनिवर मार्कण्डेय ने उसे भय से काँपते देख परोपकार की इच्छा से निकट बुलाया और कहा- तुझे कोढ़ के रोग ने कैसे दबा लिया ? तू क्यों इतना अधिक निंदनीय जान पड़ता है? यक्ष बोले-मुने! मैं कुबेर का अनुचर हूँ। मेरा नाम हेममाली है। मैं प्रतिदिन मान सरोवर से फूल ले आकर शिव पूजा के समय कुबेर को दिया करता था। एक दिन पत्नी सहवास के सुख में फँस जाने के कारण मुझे समय का ज्ञान नहीं रहा; अत: राजाधिराज कुबेर ने कुपित होकर मुझे शाप दे दिया, जिससे मैं कोढ़ से आक्रांत होकर अपनी प्रियतमा से बिछुड़ गया। मुनि श्रेष्ठ ! इस समय किसी शुभ कर्म के प्रभाव से मैं आपके निकट आ पहुँचा हूँ। संतो का चित्त स्वभावता परोपकार में लगा रहता है, यह जानकर मुझ अपराधी को कतर्व्य का उपदेश दीजिये।
मार्कण्डेयजी ने कहा- तुमने यहाँ सच्ची बात कही है, असत्य -भाषण नहीं किया है ; इसलिए मैं तुम्हे कल्याणप्रद व्रत का उपदेश करता हूँ। तुम आषाढ़ के कृष्णा पक्ष में योगिनी एकादशी का व्रत करो। इस व्रत के पुण्य से तुम्हारा कोढ़ निश्चय ही दूर हो जायेगा।
भगवान श्री कृष्ण कहते है - मार्कण्डेय जी के उपदेश से उसने योगिनी एकादशी का व्रत किया, जिससे उसके शरीर का कोढ़ दूर हो गया। मुनि के कथनानुसार उस उत्तम व्रत का अनुष्ठान करने पर वह पूर्ण सुखी हो गया। नृप श्रेष्ठ! यह योगिनी का व्रत ऐसा ही बताया गया है।
योगिनी एकादशी 2025: पूजा विधि
व्रत की तैयारी (दशमी तिथि पर):
योगिनी एकादशी व्रत रखने वाले व्यक्ति को व्रत से एक दिन पहले, यानी दशमी तिथि के दिन, सुबह स्नान कर लेना चाहिए। दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन करें और रात को जमीन पर सोएं।
व्रत का संकल्प (एकादशी तिथि पर):
अगली सुबह यानी एकादशी के दिन, नित्यकर्म करके स्नान करें और फिर भगवान विष्णु को ध्यान में रखते हुए व्रत का संकल्प करें। संकल्प का भाव इस प्रकार हो:
"हे भगवान कमलनयन नारायण! आज मैं भोजन और सभी भोगों से दूर रहकर उपवास करूंगा, और कल भोजन करूंगा। आप मुझे अपनी शरण में ले।"
भगवान विष्णु की पूजा:
व्रत का संकल्प लेने के बाद धूप, दीप, फूल, गंध और भक्ति के साथ भगवान श्री विष्णु की पूजा करें।
रात्रि जागरण करें:
रात को भगवान विष्णु के समीप रहकर जागरण करें, यानी भजन-कीर्तन करें और हो सके तो सोए नहीं।
द्वादशी तिथि (अगले दिन):
अगली सुबह, यानी द्वादशी के दिन, पुनः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। फिर किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं।
व्रत का पारण (उपवास समाप्त करना):
अंत में अपने परिवार के सदस्यों के साथ मौन होकर व्रत का पारण करें यानी भोजन करें।
योगिनी एकादशी 2025: मंत्र जप
विष्णु मंत्र:
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
एकादशी व्रत मंत्र:
"एकादश्यां नरः स्नात्वा जपेत् विष्णुं जनार्दनम्। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥"
इन मंत्रों के जप से मानसिक शांति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।
योगिनी एकादशी 2025: लाभ
1. पापों से मुक्ति
योगिनी एकादशी व्रत को महापापों का नाशक कहा गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, यह व्रत जन्मों-जन्मों के पापों को नष्ट करता है। यह व्यक्ति को ऐसे पापों से भी मुक्त कर सकता है जो ब्रह्महत्या जैसे घोर कर्मों के तुल्य माने जाते हैं।
2. मोक्ष की प्राप्ति
शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत नरकगामी प्राणियों के लिए नौका के समान है- यानी यह उन्हें जीवन-मरण के बंधनों से मुक्ति देकर मोक्ष की ओर अग्रसर करता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से यह व्रत करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
3. कालसर्प दोष, पितृ दोष और ग्रहदोषों से राहत
ज्योतिष दृष्टिकोण से भी यह व्रत अत्यंत फलदायक है। योगिनी एकादशी का व्रत करने से जातक की कुंडली में उपस्थित कालसर्प दोष, पितृ दोष, राहु-केतु से संबंधित दोषों में राहत मिलती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
4. स्वास्थ्य और मानसिक शांति में लाभ
इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में मानसिक संतुलन, शारीरिक आरोग्यता, और चिंताओं से मुक्ति मिलती है। उपवास और ध्यान से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
5. कर्ज़ मुक्ति और आर्थिक सुधार
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को करने से ऋण मुक्ति संभव होती है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से कर्ज़ से परेशान है, तो योगिनी एकादशी का श्रद्धा से व्रत उसे आर्थिक सुधार और प्रगति का मार्ग देता है।
6. पारिवारिक सुख और वैवाहिक जीवन में सुधार
योगिनी एकादशी का व्रत करने से परिवार में प्रेम, एकता और सौहार्द बढ़ता है। वैवाहिक जीवन में यदि कोई परेशानी है, तो वह भी दूर होती है। यह व्रत वैवाहिक सामंजस्य के लिए अत्यंत प्रभावी माना गया है।
7. कर्म सुधार और आत्मशुद्धि
यह व्रत व्यक्ति के अधम कर्मों को बदलकर सत्कर्मों की ओर प्रेरित करता है। यह आत्मा की शुद्धि करता है और मनुष्य को ईश्वर की भक्ति में स्थिर करता है।
योगिनी एकादशी 2025: महत्व
योगिनी एकादशी का महत्व सभी एकादशियों में विशेष है। इस दिन व्रत और जागरण से सभी पाप कट जाते हैं। यह व्रत शारीरिक, मानसिक और आत्मिक शुद्धि का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा होती है, जिससे जीवन में सुख, शांति और धन की प्राप्ति होती है।
FAQ
1. हम योगिनी एकादशी क्यों मनाते हैं?
योगिनी एकादशी व्रत मनुष्य को मोक्ष दिलाने, पापों से मुक्त करने और रोगों से राहत दिलाने के लिए किया जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का एक सशक्त माध्यम है।
2. योगिनी एकादशी में क्या करें?
• उपवास रखें और व्रत का संकल्प लें।
• भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें।
• व्रत कथा सुनें और मंत्रों का जाप करें।
• रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन करें।
3. घर पर योगिनी एकादशी पूजा कैसे करें?
• सुबह स्नान और संकल्प: सूर्योदय से पहले उठकर शुद्ध होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें, जैसे- "मैं आज योगिनी एकादशी का व्रत रखूंगा/रखूंगी और परमेश्वर विष्णु की विशेष पूजा करूँगा/करूँगी।"
• पूजा स्थल सजाएँ: घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ-सुथरा करें। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पूजा में आमतौर पर पीले फूल, तुलसी के पत्ते, दीपक, धूप, चंदन, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) आदि का उपयोग होता है।
• पंचामृत अभिषेक: मूर्ति/चित्र को पहले पंचामृत और फिर गंगाजल से स्नान-आचमन कराएँ। उसके बाद हल्दी-कुंकुम का तिलक लगाएँ और पीले फूल अर्पित करें। घी का दीपक जलाकर भगवान की पूजा करें।
• फल और प्रसाद अर्पण: पूजा के दौरान भगवान विष्णु को अन्न, फल, मिठाई एवं तुलसी के पत्ते अर्पित करें। इससे पहले गाय, ब्राह्मण आदि को भी फल-मिष्ठान्न दान करें।
• मन्त्र-जप: पूजा के बाद मनौतीपूर्वक विष्णु मंत्रों का जाप करें। विशेषकर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र जपना शुभ माना जाता है। साथ ही "ॐ विष्णवे नमः" मंत्र का जप करें और विष्णु सहस्रनाम (विष्णु के १००० नामों का पाठ) अवश्य करें।
• भजन-कीर्तन और ध्यान: दिन भर भगवान की भक्ति में रहें। विष्णु भजन-कीर्तन सुनें, स्वाध्याय करें और ध्यान करें। रात्रि में जागरण करके विष्णु की आरती-भजन करना भी शुभ है।
4. योगिनी एकादशी की पूजा कैसे करें?
• दशमी तिथि (व्रत की तैयारी):
व्रत से एक दिन पहले (दशमी को) सुबह स्नान करें। दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन लें और रात को जमीन पर सोएं।
• एकादशी तिथि (व्रत का संकल्प और पूजा):
अगले दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें: फिर धूप, दीप, फूल आदि से श्री विष्णु की पूजा करें और रात्रि में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।
• द्वादशी तिथि (व्रत का पारण):
अगली सुबह फिर स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करें। फिर ब्राह्मण को भोजन कराएं और अंत में अपने परिवार के साथ मौन होकर व्रत का पारण करें।
5. योगिनी एकादशी पर क्या न करें?
• झूठ न बोलें।
• तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज आदि का सेवन न करें।
• क्रोध और लोभ से बचें।
• भूमि खुदाई और पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाएं।
6. योगिनी एकादशी के दिन क्या करें?
• प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
• भगवान विष्णु की पूजा करें।
• व्रत कथा और मंत्रों का जप करें।
• शाम को दीपदान करें और भजन-कीर्तन करें।
7. योगिनी एकादशी व्रत के दौरान क्या खाएं?
इस दिन केवल सात्विक और फलाहारी आहार ही ग्रहण किया जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति दिनभर निराहार या फलाहार रहकर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। इस प्रकार, व्रत में हल्का और सात्विक भोजन ही उपयुक्त माना जाता है।
8. योगिनी एकादशी के व्रत के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए?
योगिनी एकादशी व्रत में भक्तगण अन्न, विशेष रूप से चावल, गेहूं और तामसिक भोजन का त्याग करते हैं। तेल-मसालेदार और भारी भोजन से भी बचना चाहिए ताकि व्रत की पवित्रता बनी रहे। इसके अलावा जंक फूड और नशे वाली चीजें व्रत के दौरान बिल्कुल न लें।






