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वरलक्ष्मी व्रत 2025

सनातन परंपरा में पूजन, व्रत, और उपासना का अपना एक विशेष महत्व है। विभिन्न देवी-देवताओं की उपासना के माध्यम से लोग धर्म, आध्यात्मिकता, और समृद्धि की प्राप्ति के लिए सदैव प्रयासरत रहते हैं। वर लक्ष्मी व्रत एक ऐसा महत्वपूर्ण पर्व है जो माता लक्ष्मी की कृपा और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। विशेष रूप से विवाहित महिलायें इस व्रत को धन, सम्पत्ति, और समृद्धि की प्राप्ति हेतु करती हैं। वर लक्ष्मी व्रत दक्षिण भारत के कुछ राज्यों जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक आदि में बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व श्रावण मास (जुलाई-अगस्त) के शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है।

वरलक्ष्मी व्रत क्या है?

वरलक्ष्मी व्रत एक धार्मिक उपवास एवं पूजा का पर्व है, जिसका उद्देश्य घर-परिवार में धन-धान्य, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति है। इस दिन घर पर गणेशजी की पूजा के बाद माँ लक्ष्मी की पूजा होती है। पूजा में पीले या लाल कपड़े पर श्री सूक्त, लक्ष्मी चालीसा आदि पाठ के बाद देवी की मूर्ति या चित्र की स्थापना की जाती है। आमतौर पर कलश पूजन करते हुए, रोली, अक्षत, फूल, फल-नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं। देवी की विशेष आरती और मंत्रों का जप कर पूजा पूर्ण होती है। व्रत के दौरान श्रद्धालु पूरे दिन उपवास रखते हैं तथा रात्रि में फलाहार या दही-पोहा आदि सेवन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत रखने से माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है और परिवार में कभी धन की कमी नहीं होती।

वरलक्ष्मी व्रत तिथि एवं समय 2025

वरलक्ष्मी व्रत 2025: स्थिर लग्नानुसार पूजा का शुभ मुहूर्त

वरलक्ष्मी व्रत श्रावण मास के शुक्ल पक्ष के अंतिम शुक्रवार को स्थिर लग्न में विधिपूर्वक किया जाता है। यह अंतिम शुक्रवार किसी भी तिथि को पड़ सकता है, जो पंचांग के अनुसार निर्धारित होता है। वर्ष 2025 में श्रावण शुक्ल पक्ष का अंतिम शुक्रवार 8 अगस्त 2025 को पड़ रहा है।

पूजा के लिए शुभ स्थिर लग्नानुसार मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

  • सिंह लग्न (प्रातः कालीन मुहूर्त): प्रातः 6:25 बजे से 8:42 बजे तक
  • वृश्चिक लग्न (दोपहर का मुहूर्त): दोपहर 1:07 बजे से 3:20 बजे तक
  • कुंभ लग्न (सायंकालीन मुहूर्त): शाम 7:13 बजे से 8:42 बजे तक
  • वृष लग्न (रात्रिकालीन मुहूर्त): रात 11:50 बजे (8 अगस्त) से 1:45 बजे (9 अगस्त) तक

इन शुभ लग्नों में पूजा करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और व्रत का पूर्ण फल मिलता है।



वरलक्ष्मी व्रत कथा

व्रत की प्रमुख कथाओं में कई प्रसंग प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने माता पार्वती को यह व्रत करने का निर्देश दिया था, ताकि उनके घर में समृद्धि और खुशी बनी रहे। पार्वती ने जिस श्रद्धा से व्रत रखा और देवी की पूजा की, उसी से यह परंपरा चली आई। दूसरी कथा में कहा गया है कि कोशल देश की चारुमती नामक धर्मपरायण कन्या को एक दिन स्वप्न में विष्णुजी ने यह व्रत करने का आशीर्वाद दिया। सपने में लक्ष्मी जी ने चारुमती को वरलक्ष्मी व्रत विधि बताई, जिसके बाद चारुमती ने श्रावण महीने के अंतिम शुक्रवार को उपवास रखकर देवी की पूजा की। इनके द्वारा सतत पूजा करने पर ही नगर में ऐश्वर्य छा गया और चारुमती को महालक्ष्मी का वरदान प्राप्त हुआ। इन कथाओं के अनुसार, वरलक्ष्मी व्रत घर में सुख-समृद्धि, वैवाहिक सौभाग्य और धन-धान्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

वरलक्ष्मी व्रत पर किए जाने वाले मुख्य अनुष्ठान

  1. कलश स्थापना
    व्रत की शुरुआत कलश स्थापना से होती है। एक तांबे या पीतल के कलश में जल भरकर उसमें सुपारी, अक्षत, पंचमेव, सिक्के और दूर्वा डाले जाते हैं। नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश पर रखा जाता है। यह कलश मां लक्ष्मी का प्रतीक होता है।
  2. वरलक्ष्मी पूजन और श्रृंगार
    देवी लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र को लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित कर उनका पूजन किया जाता है। महिलाएं देवी का श्रृंगार करती हैं और उन्हें चूड़ियां, बिंदी, काजल, मेंहदी, केसर और कुंकुम अर्पित करती हैं।
  3. व्रत संकल्प और उपवास
    पूजा से पहले महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर उपवास करती हैं। कुछ फलाहार लेती हैं तो कुछ पूर्ण उपवास रखती हैं।
  4. व्रत कथा और आरती
    पूजन के बाद वरलक्ष्मी व्रत की कथा सुनना या पढ़ना आवश्यक होता है। इसके बाद देवी लक्ष्मी की आरती और भजन-कीर्तन किया जाता है।
  5. प्रसाद वितरण और दान
    पूजा के अंत में देवी को प्रसाद अर्पित कर वह सभी घरवालों में बांटा जाता है। साथ ही, जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र या दक्षिणा देना इस दिन पुण्यकारी माना जाता है।
  6. विशेष अनुष्ठान (इच्छानुसार)
    यदि कोई विशेष मनोकामना हो- जैसे धन की वृद्धि या ऋण मुक्ति- तो उस उद्देश्य से विशेष मंत्र जप या लक्ष्मी जी से संबंधित अनुष्ठान भी किया जा सकता है।

वरलक्ष्मी व्रत 2025: लाभ

  • माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है
  • वैवाहिक जीवन में सुख, सामंजस्य और पति की दीर्घायु मिलती है
  • धन, संपत्ति और समृद्धि में वृद्धि होती है
  • वर्षभर घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती
  • सच्चे मन से किया गया व्रत मनोकामनाओं को पूर्ण करता है
  • संतान प्राप्ति की इच्छाओं की पूर्ति में सहायक होता है
  • परिवार में प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है

वरलक्ष्मी व्रत 2025: पूजा विधि

  • प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान की सफाई करें
  • पूजा स्थल पर लाल या पीले वस्त्र का आसन बिछाएं
  • देवी लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र को ससम्मान स्थापित करें
  • कलश में जल भरें और उसमें अक्षत, सुपारी, दूर्वा, पंचमेव, सिक्के डालें
  • कलश पर नारियल रखें और उसे लाल कपड़े में लपेटें
  • पूजा से पहले सूर्यदेव और गणेशजी का पूजन करें
  • पूजा सामग्री तैयार रखें — हल्दी, रोली, अक्षत, फूल, दीपक, धूप, नैवेद्य आदि
  • देवी लक्ष्मी को केसर, चंदन, फूल और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें
  • श्रद्धा भाव से लक्ष्मी चालीसा, लक्ष्मी मंत्रों का पाठ करें
  • दीपक जलाकर "जय लक्ष्मी माता" की आरती करें
  • देवी को भोग अर्पित करें — दही-किशमिश, पीले चावल, गुड़-पूरी आदि
  • व्रत कथा का श्रवण करें या उसका पाठ करें
  • प्रसाद सभी को बांटें और आशीर्वाद लें
  • अपनी श्रद्धानुसार जरूरतमंद लोगों को दान करें।
  • दिनभर संयम और शुद्धता के साथ फलाहार या आपके रीतिरिवाजों के अनुसार व्रत में खाए जाने वाले पदार्थ ग्रहण करें।

वरलक्ष्मी व्रत 2025: मंत्र जप

वरलक्ष्मी पूजा के दौरान वैदिक मंत्र जपना शुभ माना जाता है। आमतौर पर मंत्र "ॐ श्री वरलक्ष्म्यै नमः" या "ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि" जैसे मंत्रों का जप किया जाता है। पूजा में ध्यान, आवाहन, आचमन आदि चरणों के मंत्र पढ़े जाते हैं। वरलक्ष्मी आवाहन मंत्र-

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह॥”

इस मंत्र का उच्चारण कर देवी को आमंत्रित किया जाता है। इसके अलावा लक्ष्मी ध्यान मंत्र- 'क्षीरसागर-संभूतां क्षीरवर्ण-समप्रभाम्…' एवं आरती पाठ से पूजा सम्पन्न होती है। श्रद्धा सहित मंत्र जपने से व्रत की सफलता और देवी की कृपा की प्राप्ति होती है।


वरलक्ष्मी व्रत 2025: महत्व

वरलक्ष्मी व्रत एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। इस अनुष्ठान में भक्त श्रद्धापूर्वक माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस अनुष्ठान से महिलाओं को धन, समृद्धि, साहस, बुद्धि और माता लक्ष्मी का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत को करने का कोई कठोर नियम नहीं हैं। भक्तों की श्रद्धा के अनुसार साधारण पूजा करने मात्र से भी माता लक्ष्मी अपने भक्तों का कल्याण करती हैं। वरलक्ष्मी व्रत मुख्य रूप से माता लक्ष्मी के प्रति भक्ति प्रदर्शित करने और माता लक्ष्मी से आशीर्वाद लेने का एक तरीका है, जिसका उद्देश्य जीवन में समृद्धि और खुशहाली प्राप्त करना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. हम वरलक्ष्मी व्रत क्यों मनाते हैं?
    वरलक्ष्मी व्रत माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने का वरदान है। इस व्रत को करने से देवी लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। यह व्रत पति-परिवार की सुख-शांति और सामर्थ्य के लिए भी रखा जाता है।
  2. वरलक्ष्मी व्रत में क्या करें?
    व्रत वाले दिन सुबह उठकर स्नान करें। स्वच्छ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की सफाई करके गणेश-वंदना करें, फिर माँ लक्ष्मी की मूर्ति पर लाल/पीले वस्त्र का आसन बिछाकर पूजा करें। पूजा के बाद कथा सुनें, लक्ष्मी स्तोत्र या चालीसा का पाठ करें। पूरा दिन शुद्ध शाकाहारी भोजन करें और नकारात्मक विचार न रखें। शाम को रोली-फूल अर्पित करें व दीपक जलाकर आरती करें।
  3. घर पर वरलक्ष्मी व्रत पूजा कैसे करें?
    वर लक्ष्मी व्रत वाले दिन सुबह उठकर नित्य कर्म आदि से निव्रत होकर स्नान कर शुद्ध हो लें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर व्रत करने का संकल्प लें। सर्वप्रथम एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर माँ लक्ष्मी जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। चौकी के पास ही एक मिट्टी का कलश स्थापित करें। कलश को चंदन के पेस्ट से रंगे। कलश को कच्चे चावल, सिक्के, हल्दी और पत्तों आदि से भरे और उस पर 'स्वस्तिक' का चिन्ह बनाएं। अंत में, कलश में आम के पत्ते बांधकर उसे हल्दी लगे नारियल से ढक दें। माता लक्ष्मी को फूल, फल, अक्षत, धतूरा, कुमकुम, दूध, दही, पंचामृत आदि नैवेद्यों को अर्पित करें। माता को भोग लगाए, आरती करे साथ ही माता लक्ष्मी की कथा या श्री सूक्ति का पाठ करे और अपनी सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करे। महिलाएं अपने हाथों पर पीले धागे बांधे और प्रसाद एवं मिठाईयों (उबली हुई फलियाँ, पोंगल और गुड़ से बनी मिठाइयाँ) का आदान-प्रदान करें। पूरे दिन उपवास रखे, शाम के समय आरती करके फल आदि खा लें साथ ही अपने सामर्थ्य के अनुसार गरीब बच्चों को भोजन कराकर उन्हें उनकी जरूरत की चीजें दान करें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखती हैं।
  4. वरलक्ष्मी व्रत पर क्या न करें?
    व्रत के दिन श्राद्ध भोजन, लहसुन- प्याज, मांसाहार और मद्य का त्याग करें। नकारात्मक विचार, गुस्सा, झूठ या कलह से दूर रहें। सम्पत्ति विवाद के कार्य न करें। व्रतधारिणी को सवेरे से दोपहर तक व्रत कथा या लक्ष्मी स्तोत्र का पठन करना चाहिए। शाम को हल्का फलाहार या प्रसाद ग्रहण करें।
  5. वरलक्ष्मी व्रत के दिन क्या करें?
    इस दिन सुबह-सुबह लक्ष्मी-जी की पूजा करें, पूजा में चावल, फूल, दीपक अर्पित करें। अपनी सामर्थ्य के अनुसार धन-धान्य दान करें और व्रत कथा श्रवण करें। ब्राह्मणों को भोजन करवाकर पुण्य प्राप्त करें। पति की दीर्घायु के लिए विशेष रूप से मँगलसूत्र पहनकर लक्ष्मी वंदना करें। दिन भर स्तोत्र पाठ और ध्यान लगाएँ। रात में लक्ष्मी आरती के बाद शंख-घंटा बजाकर देवी को विदा करें।
  6. वरलक्ष्मी व्रत के दौरान क्या खाएं?
    व्रत वाले दिन शाम तक हल्का शुद्ध शाकाहारी भोजन करें। दही-खीर, फल, सूखे मेवे, दूध से बने व्यंजन व उपमा-पोहे आदि ले सकते हैं। भोजन में पान-धनिया, हल्दी-नारियल-सहित चीजें उपयोग करें। आलू, प्याज, लहसुन, अंडा, मांस न खाएँ। भोजन में गुड़, मखाना, चने, उड़द आदि शुभ हैं। रात को भी दूध या खीर आदि से उपवास तोड़ सकते हैं।
  7. वरलक्ष्मी व्रत में व्रत के दौरान क्या नहीं खाना चाहिए?
    पूरी तरह से शाकाहारी और सात्विक भोजन करें। व्रत के दिन लहसुन-प्याज, मासाहार, मद्यपान, अंडे, प्याज़, कट्टे प्रकार के अनाज व भारी-तलहन से परहेज करें। गंदे या विषैले पदार्थ (जैसे नॉनवेज के प्रसाद) बिलकुल न खाएं। तामसीय खाद्य पदार्थों से दूर रहकर पवित्रता बनाये रखें।
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