





श्रावण मास 2025
श्रावण मास में 'सोमवार का व्रत' विशेष महत्व रखता है, जिसे 'श्रावण सोमवार व्रत' कहा जाता है। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शुद्धि का माध्यम है, बल्कि मानसिक शांति और पापों के क्षय का भी मार्ग प्रदान करता है।
विशेष रूप से महिलाएँ यह व्रत अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और पारिवारिक कल्याण की कामना से करती हैं। यह व्रत आत्म-संयम, तप और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो साधक को आंतरिक बल और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करता है।
श्रद्धा एवं नियमपूर्वक श्रावण मास में व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
श्रावण मास क्या है?
श्रावण मास, जिसे सावन भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का पाँचवाँ महीना है। यह भगवान शिव को समर्पित वह विशेष समय होता है, जब भक्त उनकी आराधना में लीन हो जाते हैं। इस मास में किए गए जप, तप, उपवास और पूजा से भगवान शिव विशेष रूप से प्रसन्न होते हैं। यह मास आध्यात्मिक उन्नति, आत्मिक शुद्धि और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर होने का श्रेष्ठ मास माना गया है। इस दौरान भक्त शिवलिंग पर जल, दूध, दही, बेलपत्र, समी पत्र, भस्म, भांग, धतूरे का फल और धतूरे का फूल आदि अर्पित करते हैं और श्रावण सोमवार को विशेष व्रत रखते हैं।
श्रावण सोमवार का महत्व
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को "श्रावण सोमवार व्रत" रखा जाता है, जिसे अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।
- कुंवारी कन्याएँ अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।
- विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और पारिवारिक सुख-शांति के लिए व्रत रखती हैं।
- भक्तजन आत्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और शिव कृपा की प्राप्ति के लिए इस दिन उपवास करते हैं।
उत्तर भारत में श्रावण मास की परंपराएँ
उत्तर भारत में श्रावण मास के दौरान:
- कांवड़ यात्रा का आयोजन होता है, जिसमें भक्त पवित्र नदियों से जल भरकर शिव मंदिरों में अर्पित करते हैं।
- लोग व्रत रखते हैं और सात्विक भोजन करते हैं।
- मंदिरों में भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और सामूहिक पूजा होती है।
श्रावण माह 2025: महत्वपूर्ण तिथियाँ
उत्तर भारत (पूर्णिमांत पंचांग)- श्रावण मास आरंभ: 11 जुलाई 2025 (शुक्रवार) : 02:08 A.M
- श्रावण मास समाप्ति: 09 अगस्त 2025 (शनिवार) : 01:26 P.M
- श्रावण मास आरंभ: 25 जुलाई 2025 (शुक्रवार) : 12:41 A.M
- श्रावण मास समाप्ति: 23 अगस्त 2025 (शनिवार) : 11:36 A.M
श्रावण सोमवार 2025 की तिथियाँ
उत्तर भारतश्रावण मास 2025 उत्तर भारत में 11 जुलाई (शुक्रवार) से शुरू होकर 9 अगस्त (शनिवार) को समाप्त होगा। इस अवधि में चार श्रावण सोमवार आएंगे, जो भगवान शिव की उपासना, व्रत और आत्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
श्रावण सोमवार की तिथियाँ (2025):
- 14 जुलाई 2025 – पहला श्रावण सोमवार
- 21 जुलाई 2025 – दूसरा श्रावण सोमवार
- 28 जुलाई 2025 – तीसरा श्रावण सोमवार
- 4 अगस्त 2025 – चौथा श्रावण सोमवार
दक्षिण भारत में श्रावण सोमवार को "सोमवारा व्रतम्" कहा जाता है। यहाँ अमांत पंचांग का पालन होता है, जिसमें माह का अंत अमावस्या से होता है। दक्षिण भारत में श्रावण सोमवार की पूजा बहुत नियमपूर्वक, सही विधि और पारंपरिक तरीके से की जाती है।
श्रावण सोमवार की तिथियाँ (2025):
- 28 जुलाई 2025 – पहला श्रावण सोमवार
- 4 अगस्त 2025 – दूसरा श्रावण सोमवार
- 11 अगस्त 2025 – तीसरा श्रावण सोमवार
- 18 अगस्त 2025 – चौथा श्रावण सोमवार
श्रावण माह का धार्मिक महत्व
- शिव तत्त्व का जागरण: श्रावण मास ध्यान और आत्मचिंतन के लिए सर्वोत्तम समय होता है, जो हमारे अंदर की शांति (शिव चेतना) को जागृत करता है।
- मानसिक और भावनात्मक संतुलन: जल तत्त्व की अधिकता से मन चंचल होता है, शिव पूजा व व्रत से भावनाएँ स्थिर होती हैं और मानसिक शांति मिलती है।
श्रावण मास का आध्यात्मिक महत्व
श्रावण मास केवल पूजा-पाठ का समय नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और आंतरिक शुद्धि का पावन अवसर है। यह महीना शिव तत्व से जुड़कर साधना, संयम और मौन के माध्यम से आत्मा को परमात्मा के निकट लाने का मार्ग प्रशस्त करता है।
- शिव तत्व से जुड़ाव: श्रावण भगवान शिव का प्रिय मास है। शिव आराधना से भक्तों में शांति, संतुलन और साक्षी भाव जाग्रत होता है।
- संयम और आत्मनियंत्रण: व्रत, ब्रह्मचर्य और सात्विक जीवन से मन व इंद्रियों पर नियंत्रण आता है, जिससे ध्यान की गहराई बढ़ती है।
- भावनात्मक शुद्धि: जल तत्त्व की प्रधानता के कारण यह समय भावनात्मक संतुलन और मानसिक शांति का होता है।
- कर्मों का शोधन: श्रद्धा से किए गए व्रत और पूजा पापों का क्षय करते हैं और आत्मा को निर्मल बनाते हैं।
- मौन और साधना का महत्व: यह समय स्वयं से जुड़ने और आत्मसाक्षात्कार का होता है।
श्रावण माह 2025 में व्रत
श्रावण मास सनातन परंपरा में सबसे पवित्र और शुभ महीनों में से एक माना जाता है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है, इसलिए इस दौरान व्रत करना अत्यंत फलदायक माना जाता है। श्रावण मास 2025 में व्रत करने वाले श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करते हैं और अपने जीवन में शांति, समृद्धि एवं स्वास्थ्य की कामना करते हैं।
श्रावण माह में व्रत के प्रकार
- निराहार व्रत: केवल जल पर निर्भर रहना
- फलाहार व्रत: फल, दूध, और सूखे मेवे का सेवन
- एक समय भोजन: दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन
- श्रावण सोमवार का व्रत: सबसे लोकप्रिय व्रत है, जिसमें मास के हर सोमवार उपवास रखा जाता है। कुछ फलाहार करते हैं।
- सोलह सोमवार का व्रत: सोलह सोमवार व्रत श्रावण मास से प्रारंभ होकर लगातार 16 सोमवार तक रखा जाता है।
- पूजा और जलाभिषेक के साथ उपवास: कुछ भक्त व्रत के दौरान शिवलिंग पर विशेष पंचामृत से अभिषेक करते हैं और पूजा के बाद ही भोजन करते हैं।
हिंदू पंचांग में श्रावण माह के पीछे की कथा
समुद्र मंथन की कथा अनुसार जब देवताओं और असुरों ने मिलकर सागर का मंथन किया, तब उसमें से हलाहल विष निकला। यह विष अत्यंत घातक था, जिससे संपूर्ण सृष्टि को विनाश का खतरा उत्पन्न हो गया। तब भगवान शिव ने करुणावश उस विष को पीकर अपने कंठ में धारण किया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया। यह घटना श्रावण मास में हुई थी, जिसे स्मरण करते हुए शिवभक्त इस मास में उपवास, पूजा और साधना करते हैं।
श्रावण माह की पूजा विधि
- स्नान और शुद्धिकरण: प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहेन ले।
- शिवलिंग की स्थापना: मंदिर जाएँ या घर में शिवलिंग/तस्वीर के सामने पूजा करें।
- अभिषेक: पंचामृत और शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएँ।
- अर्पण: बेलपत्र, पुष्प, धतूरा, चंदन, अक्षत अर्पित करें।
- मंत्र जाप: "ॐ नमः शिवाय" का जप करें। शिव तांडव स्तोत्र या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करें।
- प्रसाद: फल, मिठाई या जल से प्रसाद अर्पित करें और बाँटें।
- व्रत और संयम: दिनभर संयमित आचरण और फलाहार करें।
श्रावण मास में किए जाने वाले विशेष अनुष्ठान
- रुद्राभिषेक
- महा मृत्युंजय जप (108 बार या 1.25 लाख बार)
- रुद्राष्टाध्यायी पाठ
- भस्म आरती व रुद्राक्ष अर्पण
श्रावण माह व्रत मंत्र
श्रावण मास में व्रत और पूजा के दौरान शिवजी का ध्यान और मंत्र जप बहुत महत्वपूर्ण होता है।
प्रमुख मंत्र- ॐ नमः शिवाय
- महामृत्युंजय मंत्र
- शिव पंचाक्षर स्तोत्र
- ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्...
श्रावण माह का महत्व
श्रावण मास, जिसे प्रचलित रूप से सावन कहा जाता है, हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महीना माना जाता है। यह महीना मुख्यतः जुलाई और अगस्त के बीच आता है और इसे वर्षा ऋतु के आगमन तथा प्रकृति के नवजीवन से गहराई से जोड़ा जाता है।
श्रावण माह 2025 में पर्व और उत्सव
- श्रावण सोमवार: 14 जुलाई से 4 अगस्त 2025
- नाग पंचमी: 29 जुलाई 2025
- हरियाली तीज: 27 जुलाई 2025
- रक्षा बंधन: 9 अगस्त 2025
श्रावण माह में शिव पूजा के लाभ
- पापों का नाश: श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
- आध्यात्मिक उन्नति: इस मास में की गई शिव पूजा से मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास होता है।
- संकटों का समाधान: शिव पूजा से जीवन में आने वाली कठिनाइयाँ, रोग, मानसिक तनाव और संकट दूर होते हैं।
- स्वास्थ्य लाभ: श्रावण मास में व्रत और शिव पूजा से शरीर का शुद्धिकरण होता है।
- सुख-समृद्धि की प्राप्ति: भगवान शिव की पूजा से धन, सम्मान, परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
- विवाह जीवन में सौहार्द: शिव पूजा से विवाहित जीवन में प्रेम बढ़ता है।
- मनोकामनाओं की पूर्ति: श्रावण मास में शिवजी की भक्ति और पूजा से इच्छित फल प्राप्त होते हैं।
श्रावण माह में व्रत के दौरान क्या खाएं
- फल और मेवे
- सिंघाड़ा और कुट्टू का आटा
- दूध और दूध से बने पदार्थ
श्रावण माह में व्रत के दौरान क्या न खाएं
- साधारण आयोडीन युक्त नमक का सेवन वर्जित है।
- अन्न खाना वर्जित है।
- तामसी भोजन वर्जित है।
सावन माह में क्षेत्रीय उत्सव
सावन का महीना भक्ति, प्रेम और परंपराओं का अनुपम संगम लेकर आता है। इस मास में कांवड़ यात्रा, हरियाली तीज, नारीयल पूर्णिमा, झूला उत्सव, और रक्षा बंधन जैसे उत्सव लोगों के जीवन में उमंग और आस्था का संचार करते हैं।
सामान्य प्रश्न
श्रावण मास की पूजा घर पर कैसे करें?श्रावण महीने में आप स्वयं अपने घर पर ही पूजा कर सकते है। सुबह नहा-धोकर साफ कपड़े पहेन ले। घर के पूजा स्थान पर शिवलिंग या शिव की तस्वीर रखें। दूध, पानी, शहद, बेलपत्र, फूल और धतूरा अर्पित करें। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप करें। पूरे दिन व्रत रखें और शाम को दीप जलाकर शिवजी की आरती करें।
सावन में सोमवार क्यों महत्वपूर्ण होते हैं?सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय होता है और सोमवार का दिन शिवजी का विशेष दिन माना जाता है। भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं और भक्तों की पूजा को जल्दी स्वीकार करते हैं।
श्रावण मास में बाल क्यों नहीं काटे जाते?श्रावण मास बहुत पवित्र माना जाता है। इस महीने लोग भगवान शिव की पूजा, व्रत और साधना करते हैं। ऐसे में बाल काटना, शेव करना या नाखून काटना ठीक नहीं माना जाता।
श्रावण मास के नियम क्या हैं?- व्रत और पूजा करें
- सात्विक भोजन करें
- बाल और नाखून न काटें
- नशे और गलत आदतों से बचें
- ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करें
- दान-पुण्य करें
- मांसाहार
- तामसिक पदार्थ
- बाल/नाखून काटना और शेविंग
- झूठ बोलना, क्रोध करना, अपवित्र विचार
श्रावण और सावन दोनों एक ही मास के नाम हैं, इनमें कोई अंतर नहीं है:
- "श्रावण" संस्कृत नाम है, जो शास्त्रों में प्रचलित है।
- "सावन" हिंदी भाषा में प्रचलित रूप है।
दोनों शब्द एक ही माह को दर्शाते हैं, इसलिए ये पर्यायवाची हैं।






