Sanatan Logo
Ganesh Logo
raksha-bandhan
Book Anushthan
Book Anushthan
talkToAstrologer
Unlimited Talk to Astrologer
Free Match Making
Match making in Rs 99
muhuratConsultation
Muhurat Consultation
DownloadKundli
86 Pages Faladesh Kundli

रक्षाबंधन 2025

रक्षाबंधन एक प्राचीन सनातनी त्योहार है जिसका शाब्दिक अर्थ है "रक्षा का बंधन"। रक्षा बंधन का त्योहार सावन महीने की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाईयों के तिलक करके भाईयों की कलाईयों पर राखी (रक्षा सूत्र ) बांधती है और साथ ही अपने भाई की सुरक्षा और सफलता की कामना करती हैं। रक्षा बंधन का अर्थ है-एक ऐसा बंधन जिसमे रक्षा करने का वचन लिया जाए। इस त्योहार के उपलक्ष्य में जहां बहन अपने भाई के स्वास्थ्य और सफलता की कामना करती है वहीं भाई भी अपनी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेता है । यह एक ऐसा त्योहार है जो भाई-बहन के स्नेह को दर्शाता है । इस प्रकार यह त्योहार भाई बहन के रिश्ते को अटूट बनाने के साथ-साथ पारिवारिक बंधनों को भी बनाए रखने मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।

रक्षाबंधन व्रत

रक्षाबंधन के दिन बहनों द्वारा व्रत (उपवास) भी रखा जाता है, जिसे "रक्षा सूत्र व्रत" कहा जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु और कल्याण के लिए व्रत रखकर भगवान की पूजा करती हैं। कथा के अनुसार, देवी शची ने इसी दिन इंद्रदेव को रक्षा सूत्र बांधा था। इंद्र-इंद्राणी की यह कथा रक्षाबंधन व्रत से जुड़ी हुई है। पुराणों में इसी महात्म्य का वर्णन मिलता है, अतः इस दिन बहनें भाइयों के लिए व्रत रखती आई हैं।

रक्षाबंधन 2025

रक्षा बंधन का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में रक्षाबंधन का पर्व शनिवार, 9 अगस्त को मनाया जाएगा। रक्षा बंधन में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:24 तक है। राखी बांधने से पहले शुभ मुहूर्त और भद्रा का विशेष ध्यान रखना चाहिए। भद्रा में राखी बांधना वर्जित माना गया है, क्योंकि भद्रा काल का समय अशुभ समय होता है। इस समय शुभ कार्य नहीं करने चाहिए।

रक्षाबंधन क्या है?

रक्षाबंधन एक पारंपरिक हिंदू त्योहार है जो भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। यह श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी (रक्षा-सूत्र) बांधती है और उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और रक्षा के लिए प्रार्थना करती है। बदले में भाई जीवनभर बहन की रक्षा करने का वचन देता है।

यह पर्व केवल सगे भाई-बहनों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राखी उन लोगों को भी बांधी जाती है जिन्हें बहन अपने भाई जैसा मानती है। रक्षाबंधन पारिवारिक एकता और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है।

रक्षाबंधन का मूल उद्देश्य भाई-बहन के प्रेम और आदर का पुनरुत्थान करना है। आधुनिक परिप्रेक्ष्य में भी यह पर्व पारिवारिक मेलजोल, परस्पर सम्मान और निष्ठा की याद दिलाता है।

रक्षाबंधन की तिथि एवं समय 2025

  • रक्षा बंधन पर्व की तिथि: 9 अगस्त 2025
  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त 2025 को 02:13 P.M
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 9 अगस्त 2025 को 01:25 P.M
  • भद्रा का प्रारंभ: 8 अगस्त 2025 को 2:12 P.M
  • राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: 9 अगस्त 2025 को 6:00 A.M से 1:24 P.M तक

रक्षाबंधन की कथा

रक्षाबंधन की उत्पत्ति से जुड़ी अनेक लोककथाएं और किवदंतिया प्रचलित है।
  • इंद्र–इंद्राणी कथा: भविष्यपुराण के अनुसार देवताओं और दैत्यों के बीच घोर युद्ध में इंद्रदेव की हार होने लगी थी। तब देवगुरु बृहस्पति की सलाह पर देवी शची (इंद्र की पत्नी) ने श्रावण पूर्णिमा को इंद्र की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा। इस यज्ञ के प्रभाव से इंद्र को महान बल प्राप्त हुआ और उसने दैत्यों को पराजित करके अपना राज्य पुनः प्राप्त किया। इसी इंद्र-शची कथा को रक्षाबंधन की मूल कथा माना जाता है। शुरुआत में यह पत्नी द्वारा पति की सुरक्षा के लिए सूत्र बांधने की परंपरा को दर्शाती है, जो बाद में भाई-बहन के त्योहार के रूप में विकसित हुई।
  • लक्ष्मी–बली कथा: एक लोक कथा के अनुसार दैत्य राजा बली ने भगवान विष्णु को अपनी भक्ति से प्रसन्न करके अपने साथ पाताल लोक में रहने लिए प्रार्थना की। भगवान विष्णु राजा बलि के राज्य में उसके साथ रहने लगे। देवी लक्ष्मी को यह पसंद नहीं आया, अतः उन्होंने राजा बली को राखी बाँध कर अपना भाई माना और उनसे उपहार में भगवान विष्णु की सेवा मांगी। राजा बली ने अपनी बहन लक्ष्मी की हर इच्छा पूरी की। इस कथा से भी रक्षाबंधन पर्व की उत्पत्ति बताई गई है।
  • द्रौपदी–कृष्ण कथा: जब श्रीकृष्ण ने एक दिन किसी कारणवश उनकी उंगली कट गयी थी, तो उनके पास बैठी द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का एक टुकड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया। प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने वादा किया कि वह दुश्मनों के सामने द्रौपदी की रक्षा करेंगे। जब द्रौपदी जुए में हारकर निर्वस्त्र होने की स्थिति में थीं, तो श्रीकृष्ण ने चीरहरण रुकवाने हेतु उनके कोटि-कोटि रूपों की साड़ी प्रदान की। इस घटना से श्रीकृष्ण और द्रौपदी का बंधन भाई-बहन जैसा स्थापित हुआ और इसी के कारण रक्षाबंधन पर्व की प्रतिष्ठा बढ़ी।
  • इतिहास में रानी कर्णावती और हुमायूँ: यह एक ऐतिहासिक लोककथा है कि 1533 ईस्वी में चित्तौड़ की रानी कर्णावती ने मुग़ल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर भाईभाव से सहायता मांगी । हुमायूँ ने भिन्न धर्म होने पर भी सहायता की और महाराणा विक्रमादित्य की रक्षा की। इस प्रसंग से धार्मिक सहिष्णुता और रक्षा की भावना की प्रेरणा मिलती है। हालांकि यह कथा ऐतिहासिक दस्तावेजीकरण में विवादास्पद है, किंतु लोकप्रचलित मान्यता के अनुसार रानी कर्णावती का नाम रक्षाबंधन से जुड़ा है।
इन कथाओं से स्पष्ट है कि रक्षाबंधन का मूल उद्देश्य भाई-बहन के प्रेम, सुरक्षा और एक-दूसरे के प्रति नैतिक जिम्मेदारी का स्मरण करना है।

रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व

रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व बहुआयामी है। संस्कृत में "रक्षा" का अर्थ "संरक्षण" और "बन्धन" का अर्थ "बंधन" होता है। राखी का धागा एक शुभसूत्र है जो बांधे जाने पर नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रति कर्तव्य और परिवार की रक्षा की याद दिलाता है।

पौराणिक दृष्टि से रक्षा सूत्र बांधकर देवी-देवताओं और आत्मिक रक्षाओं की प्रेरणा मिलती है। अमृतपुरी के अध्यात्मिक मार्गदर्शकों के अनुसार राखी बांधने का संस्कार न केवल रक्तसंबंधी बंधनों को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भाईचारे का संदेश देता है। रक्षा सूत्र का विस्तार विवाह, गुरु-शिष्य संबंध से लेकर मित्रों और पड़ोसियों तक हो सकता है, जिससे पूरे समाज में सद्भाव और वसुधैव कुटुम्बकम् (संपूर्ण संसार एक परिवार) की भावना को बल मिलता है।

हिन्दू धर्म में रक्षाबंधन

  • रक्षाबंधन हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पारंपरिक पर्व है।
  • यह श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है।
  • बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती है।
  • भाई बहन को उपहार देता है और उसकी रक्षा करने का वचन देता है।
  • धार्मिक मान्यता है कि यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक है।
  • ऐतिहासिक और पौराणिक कथाओं में रक्षाबंधन का उल्लेख भी मिलता है (जैसे द्रौपदी और कृष्ण की कथा)।

जैन धर्म में रक्षाबंधन

  • रक्षाबंधन जैन धर्म का धार्मिक पर्व नहीं है।
  • जैन आगम ग्रंथों या धार्मिक परंपराओं में रक्षाबंधन का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
  • कुछ जैन परिवार सामाजिक या सांस्कृतिक दृष्टि से इस पर्व को मनाते हैं।
  • राखी को भाई-बहन के प्रेम और जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया जाता है।
  • इसे मनाना या न मनाना पूरी तरह व्यक्ति की व्यक्तिगत भावना और परिवार की परंपरा पर निर्भर करता है।

सिख धर्म में रक्षाबंधन

  • रक्षाबंधन सिख धर्म का त्योहार नहीं है।
  • गुरु ग्रंथ साहिब या अन्य सिख धार्मिक ग्रंथों में इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता।
  • कुछ सिख इसे भारतीय संस्कृति के रूप में स्वीकार करते हैं और सामाजिक पर्व की तरह मनाते हैं।
  • इसे मनाना या न मनाना पूरी तरह व्यक्ति की व्यक्तिगत सोच और सांस्कृतिक जुड़ाव पर निर्भर करता है।
  • सिख धर्म में भाई-बहन के प्रेम को महत्व मिलता है, लेकिन राखी बांधने की कोई धार्मिक परंपरा नहीं है।

इस्लाम में रक्षाबंधन

  • इस्लाम में रक्षाबंधन का कोई धार्मिक महत्व नहीं है।
  • कुरान या हदीस में इसका कोई आदेश नहीं दिया गया है।
  • अगर कोई मुसलमान इसे पूजा या धार्मिक भावना से मनाता है, तो यह इस्लामी नजरिए से सही नहीं है।
  • कुछ लोग इसे केवल सामाजिक रूप से, भाई-बहन के रिश्ते के रूप में मनाते हैं, लेकिन ऐसा करना भी व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है।

ईसाई धर्म में रक्षाबंधन

  • रक्षाबंधन ईसाई धर्म का त्योहार नहीं है।
  • बाइबिल में इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता।
  • कुछ ईसाई इसे भारतीय संस्कृति के रूप में स्वीकार करते हैं और सामाजिक पर्व की तरह मनाते हैं।
  • इसे मनाना या न मनाना पूरी तरह व्यक्ति के विवेक और आस्था पर निर्भर करता है।

रक्षाबंधन के अनुष्ठान

रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते का प्रतीकात्मक और आध्यात्मिक बंधन है। इस पर्व में केवल राखी बांधने का ही महत्व नहीं होता, बल्कि इसके पीछे अनेक धार्मिक अनुष्ठान और भावनात्मक परंपराएँ भी छिपी होती हैं।
  1. श्रावणी पूर्णिमा पर स्नान व व्रत: रक्षाबंधन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके व्रत रखने का विधान है। महिलाएँ और कन्याएँ इस दिन व्रत करती हैं और अपने भाई की दीर्घायु की कामना करती हैं।
  2. राखी पूजन की तैयारी:
    • थाली में राखी के साथ कुमकुम, चावल (अक्षत), दीपक, मिठाई और रक्षा सूत्र रखा जाता है।
    • थाली को सुंदर रंगोली या पुष्पों से सजाया जाता है।
  3. आरती और तिलक अनुष्ठान:
    • बहन अपने भाई को रोली और अक्षत से तिलक करती है।
    • फिर दीपक से आरती उतारती है और "रक्षासूत्र" यानी राखी को भाई की दाहिनी कलाई में बाँधती है।
  4. रक्षा सूत्र बाँधना: तिलक अनुष्ठान सम्पन्न करने के बाद बहने अपने भाई की कलाई में रक्षा सूत्र बांधती हैं।
  5. भाई का आशीर्वाद और उपहार: राखी बांधने के बाद भाई अपनी बहन को आशीर्वाद देता है और उसे उपहार, वस्त्र या धन देता है। यह उसकी बहन के प्रति कर्तव्य और प्रेम का प्रतीक होता है।
  6. भगवान की पूजा और संकल्प: कई घरों में इस दिन भगवान विष्णु, गणेश या अपने कुलदेवता की पूजा की जाती है, ताकि पूरे परिवार की रक्षा हो। बहन भाई के कल्याण का संकल्प लेती है और भाई जीवनभर उसकी रक्षा का वचन देता है।
  7. रक्षाबंधन अनुष्ठान का आध्यात्मिक भाव:
    • यह पर्व केवल राखी बांधने का ही नहीं, बल्कि संकल्प, दायित्व, और आत्मीयता का पर्व है।
    • बहन राखी के रूप में अपने प्रेम, विश्वास और सुरक्षा की भावना को प्रस्तुत करती है।
    • भाई उसे जीवनभर हर परिस्थिति में सहारा और सम्मान देने का वचन देता है।

रक्षाबंधन के नियम

रक्षाबंधन के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाना शुभ माना जाता है। मुख्यतः ये नियम हैं:
  • साफ-सफाई बनाए रखें: राखी बांधने से पहले घर, पूजा स्थल तथा अपने शरीर का पवित्रिकरण कर लेना चाहिए।
  • चौकी पर बैठाना: भाई को लकड़ी की चौकी पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। बहन जमीन पर या चौकी के समक्ष बैठकर पूजा करें। सोफे या कुर्सी पर बैठकर यह संस्कार न करें।
  • भद्रा काल में पूजा न करें: भारतीय मुहूर्तशास्त्रानुसार 'भद्रा' नामक समयावधि (दोपहर के बाद कुछ समय) अशुभ माना जाता है। इस दौरान राखी बांधने या अन्य पूजा-पाठ न करें।
  • मुहूर्त का ध्यान रखें: राखी बांधने का सर्वोत्कृष्ट समय पारण काल दोपहर बाद का माना गया है। सुबह के बाद से दोपहर में राखी बांधना शुभ होता है। रात्रि में या संध्या के बाद राखी नहीं बांधनी चाहिए।
इन नियमों का पालन करने से राखी संबंधी संस्कार की गरिमा बनी रहती है और कार्य मंगलमय होता है।


रक्षाबंधन के लाभ

रक्षाबंधन के आयोजन से व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर कई लाभ होते हैं:
  • भाई-बहन के प्रेम की पुष्टि: राखी बांधने की प्रक्रिया भाई-बहन के बीच भावनात्मक निकटता को सुदृढ़ करती है। इससे पारिवारिक संबंधों में दृढ़ता आती है और बच्चों के बीच आपसी प्रेम और विश्वास की बुनियाद मज़बूत होती है।
  • सुरक्षा की अनुभूति: भाई को राखी बाँधकर बहन अपनी सुरक्षा का भाव व्यक्त करती है, और भाई बहन को रक्षा का संकल्प देता है। इस प्रकार दोनों को सहायक और रक्षक का अहसास होता है।
  • सकारात्मक गुणों का विकास: रक्षाबंधन सामाजिक संस्कारों, आदर और कर्तव्यों की शिक्षा देता है। यह हमें सकारात्मक विचार, निष्ठा और पारिवारिक मूल्य बनाए रखने की प्रेरणा प्रदान करता है।
  • परिवार में समरसता: भिन्न-भिन्न जगह रहने पर भी यह पर्व परिवार के लोगों को एकत्र करने का अवसर देता है। रक्षाबंधन के उत्सव में सारा परिवार जुटता है, जिससे पारिवारिक एकता और सामाजिक समर्थन की भावना मजबूत होती है।
इन लाभों की वजह से रक्षाबंधन न केवल पारिवारिक स्तर पर बल्कि सामाजिक सद्भाव के लिए भी महत्वपूर्ण पर्व है।

रक्षाबंधन पूजा विधि

  1. पूजा की तैयारी करें
    • पूजा थाली सजाएं जिसमें हो:
    • राखी (रक्षा सूत्र)
    • चावल (अक्षत)
    • कुमकुम या रोली
    • दीपक (घी या तेल का)
    • मिठाई (लड्डू या कोई भी पसंदीदा मिष्ठान्न)
    • नारियल (वैकल्पिक)
  2. भाई को पूजा के लिए बैठाएं
    • भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठाएं।
    • बहन स्वयं उसके सामने बैठ जाए।
  3. तिलक लगाना
    • सबसे पहले बहन भाई के माथे पर कुमकुम और चावल से तिलक करती है।
  4. आरती करना
    • बहन दीपक जलाकर भाई की आरती उतारती है और उसकी दीर्घायु की कामना करती है।
  5. राखी बांधना
    • तिलक और आरती के बाद भाई की दाईं कलाई पर राखी बांधी जाती है।
    • राखी बांधते समय बहन मंत्र पढ़ सकती है:
    • रक्षा सूत्र मंत्र: "येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥"
  6. मिठाई खिलाना
    • राखी बांधने के बाद बहन भाई को मिठाई खिलाती है।
  7. भाई का वचन और उपहार देना
    • भाई बहन की रक्षा का संकल्प लेता है और उपहार स्वरूप कोई वस्तु या धन प्रदान करता है।

रक्षाबंधन मंत्र जप

राखी बांधते समय बहनें विशेष संस्कृत मंत्र बोलती हैं जिसे रक्षासूत्र मंत्र कहते हैं। प्रमुख मंत्र इस प्रकार है:
ॐ येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
इसका अर्थ है: जिस रक्षासूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांध रही हूँ। यह रक्षा-सूत्र तुम्हारी रक्षा करे, और तुम्हारा संकल्प कभी डगमगाए नहीं। मंत्र का जप करते हुए राखी बांधने से रक्षा सूत्र की शक्ति दृढ़ होती है। बहन इस मंत्र से भाई की रक्षा की कामना करती है। कुछ परिवारों में क्षेत्रीय भेद से भिन्न मंत्रोच्चारण या जप भी होता है, पर मूल भाव रक्षा की कसम और सुरक्षा की कामना का ही होता है।


रक्षाबंधन का महत्त्व

आज के समय में दिन प्रतिदिन सामाजिक कुरीतियाँ बढ़ती हुई नजर आ रही हैं । भाई -भाई , बहन -बहन व भाई -बहन के पारस्परिक संबंधों मे दूरिया बढ़ती जा रही हैं । इन बढ़ती हुई दूरियों को समाप्त करने के लिए आज रक्षाबंधन का त्योहार एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है । रक्षाबंधन पर्व टूटते हुए परिवारों के बीच पुनः आपसी प्रेम व सामंजस्य स्थापित करने में अपनी अहम भूमिका निभा रहा है । आज के सीमित परिवारों में बहुत से ऐसे परिवार हैं जिनमे केवल 2 भाई ही हैं या 2 बहन ही हैं । इस प्रकार की स्थितियों में यह पर्व अन्य परिवारों के बीच प्रेम बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाता हैं अर्थात भाई परिवार या समाज में किसी को भी अपनी बहन मान कर राखी बँधवा सकते है या बहन परिवार व समाज में किसी को भी भाई मानकर राखी बांध सकती है।

राखी बांधने का मतलब है रक्षा करने का वचन लेना। हम सभी को एक राखी वृक्षों को भी बांधनी चाहिए और मन में ये संकल्प लेना चाहिए की आज से हम तुम्हारी रक्षा करेंगे। क्योंकी अगर वृक्ष फल नहीं दे सकता लेकिन छाया तो अवश्य ही देगा । वृक्ष सदैव ही निस्वार्थ रहते है, सदा उपकार करते है और मानव जीवन में कई अन्य प्रकार से लाभ पहुंचाते हैं , इसलिए हमे वृक्ष जरूर लगाने चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए तथा रक्षा बंधन वाले दिन वृक्षों पर राखी बांधकर उनकी रक्षा करने का वचन लेना चाहिए।

ज्योतिष अनुसार राखी बाँधने का समय

रक्षा बंधन का त्योहार 9 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि रहेगी, जो शुरू होगी 8 अगस्त को दोपहर 2:13 बजे और खत्म होगी 9 अगस्त को दोपहर 1:25 बजे।

लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि 8 अगस्त को दोपहर 2:12 बजे से भद्रा काल शुरू हो जाएगा, जो चलेगा 9 अगस्त को रात 1:28 बजे (A.M) तक। भद्रा काल में शुभ कार्य जैसे राखी बांधना वर्जित माना जाता है।

इसलिए राखी बांधने का शुभ समय रहेगा – 9 अगस्त को सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक। इस समय के भीतर बहनें अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं। यही समय पूजा और रक्षा सूत्र बांधने के लिए सबसे अच्छा रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  1. राखी बंधन की शुरुआत किसने की?
    रक्षाबंधन की प्राचीन उत्पत्ति के बारे में अलग-अलग कथाएँ हैं। इंद्र–इंद्राणी, लक्ष्मी–बली और द्रौपदी–कृष्ण की कथाएँ मिलती हैं। इतिहास में भी महारानी कर्णावती का नाम जुड़ा है – ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजकर भाईभाव से रक्षा की कामना की। तथापि, किसी एक व्यक्ति को "शुरुआतकर्ता" नहीं माना जाता; यह एक धार्मिक व सामाजिक परम्परा है जो सदियों से चली आ रही है।

  2. हम रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं?
    रक्षाबंधन का मूल कारण भाई-बहन के प्यार और सुरक्षा की भावना को संजोना है। इस पर्व के माध्यम से बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए कामना करती हैं और भाई अपनी रक्षा की कसम लेते हैं। यह आत्मीयता और दायित्व का समारोह है। साथ ही, इसे धार्मिक दृष्टि से कार्यों और गुणों में सकारात्मकता बनाए रखने का संदेश भी माना जाता है। परिवार और समाज में प्रेम, आदर तथा कर्तव्यनिष्ठा को बनाए रखने के लिए हम रक्षाबंधन की महत्ता को स्वीकार करते हैं।

  3. रक्षाबंधन में क्या करें?
    रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके घर की सफाई करें, देवी-देवताओं का पूजन करें, राखी की थाली तैयार करें। फिर बहन भाई को तिलक लगाकर राखी बाँधें और आशीर्वाद लें। इस अवसर पर मिठाइयाँ बाँटें और उपहार देकर भाई-बहन अपने प्रेम का आदान-प्रदान करें। भाई अपनी बहन को दिये-उपहार या पैसे देकर उसका सम्मान करें। संक्षेप में, पूरे दिन प्रेम भाव रखते हुए परम्पराओं के अनुसार पूजा-पाठ व मिलन करें।

  4. घर पर रक्षाबंधन कैसे मनाएं?
    घर पर रक्षाबंधन मनाना बेहद सरल है: अपने घर को साफ़ रखें, पूजा स्थल सजाएँ, राखी, रोली, दीप आदि सामग्री इकठ्ठा करें। सभी परिवार के सदस्य जुटकर पूजा करें। बहन भाई को कलाई पर राखी बांधें, आशीर्वाद लेकर मिठाई शेयर करें और छोटे उपहार दें।

  5. रात में राखी क्यों नहीं बाँधी जाती?
    ज्योतिषानुसार रात का समय अशुभ माना जाता है, क्योंकि उस समय 'राहु काल' और 'भद्रा काल' जैसी अवधि होती हैं जिसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते। रक्षाबंधन के दिन मुहूर्त सुबह से दोपहर तक निर्धारित किया गया है। इसलिए रात्रि में राखी बाँधने से यह शुभ मुहूर्त निकल जाएगा। इसीलिए परंपरानुसार राखी रात तक नहीं बांधी जाती।
Book Anushthan
Book Anushthan
talkToAstrologer
Unlimited Talk to Astrologer
Free Match Making
Match making in Rs 99
muhuratConsultation
Muhurat Consultation
DownloadKundli
86 Pages Faladesh Kundli
Youtube
Facebook
Instagram
Astrologer
हम से बात करें
Raksha Bandhan 2025: Date, Muhurat, Vrat Story & Significance