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ओणम 2025
ओणम त्योहार क्या है?
ओणम दक्षिण भारत, विशेषकर केरल का अत्यंत प्राचीन और पारंपरिक पर्व माना जाता है। ओणम शब्द मलयालम भाषा से लिया गया है। यह संस्कृत शब्द श्रावणम से निकला माना जाता है, जो एक नक्षत्र (तारा मंडल) का नाम है। केरल के पंचांग के अनुसार जब थिरुवोणम नक्षत्र आता है, तब यह पर्व मनाया जाता है। जिस प्रकार पूरे देश में दशहरा, दुर्गापूजा और गणेशोत्सव पूरे दस दिनों तक उल्लास और भव्यता के साथ मनाए जाते हैं, उसी प्रकार केरल में ओणम का यह दस दिवसीय महोत्सव अपार उत्साह और उमंग से सम्पन्न होता है। लगातार दस दिनों तक चलने वाले इस पर्व का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन 'थिरुवोणम' कहलाता है, जिसे विशेष हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।यह परंपरागत रूप से भगवान वामन (विष्णु का पाँचवाँ अवतार) की जयन्ती और असुर राजा महाबली की धरती पर प्रति वर्ष वापसी की स्मृति में मनाया जाता है। ओणम नई फसल के आगमन और पारिवारिक मेलजोल का पर्व भी है, जिसमें घर-आँगन साफ-सुथरा कर फूलों की रंगोली (पोक्कालम) बनाकर उत्साह के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।
ओणम 2025 की तिथि और समय
- ओणम पर्व की तिथि: 5 सितंबर 2025 (शुक्रवार)
- थिरुवोणम नक्षत्र प्रारंभ: 4 सितंबर 2025 को रात 11:44 P.M
- थिरुवोणम नक्षत्र समाप्त: 5 सितंबर 2025 को रात 11:58 P.M
- ओणम पूजा का शुभ मुहूर्त: प्रातः 6:00 A.M से 8:30 A.M तक (स्थान अनुसार भिन्नता संभव)
ओणम की पौराणिक कथा
ओणम की पौराणिक कथा राजा महाबली और भगवान विष्णु के वामन अवतार से जुड़ी है। पुराणों के अनुसार महाबली एक दानवीर राजा था, जिसने सबको खुशहाल जीवन दिया। देवता उसकी बढ़ती शक्ति से चिंतित होकर भगवान विष्णु से सहायता मांगते हैं। विष्णु भगवान वामन (ब्रह्मण) रूप धारण करते हैं और महाबली से तीन पगभूमि दान में मांगते हैं। महाबली पहले दो पग से पृथ्वी और आकाश नाप लेने के बाद तीसरे पग के लिए अपने सिर की इच्छा व्यक्त करते हैं। प्रसन्न होकर वामन रूपी विष्णु महाबली को यह वरदान देते हैं कि वे हर वर्ष एक बार धरती पर आकर अपनी प्रजा से मिल सकेंगे। इस कथा के स्मरण में केरल में ओणम पर्व मनाया जाता है और कहा जाता है कि उस दिन महाबली स्वर्ग लोक से धरती पर आते हैं।
ओणम के प्रमुख अनुष्ठान
- पुष्परंगोली (पोक्कालम) सजाना: परिवार की महिलाएँ घर के आँगन में फूलों से रंगोली बनाती हैं। पुष्पों की विविध रंग-बिरंगी परतें बनाकर परिसर की शोभा बढ़ाई जाती है।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम: आन-गान-नृत्य की परंपरा रही है। थिरुवथिरा कली (महिलाओं का वृत्ताकार नृत्य), कुम्मट्टिकली (रंगीन मुखौटे वाले लोक नर्तक), पुलिकली (पिंकी/बाघ नृत्य) जैसे लोकनृत्यों का आयोजन किया जाता है। केरल की प्रसिद्ध कथकली और अन्य पारंपरिक नाट्य-नृत्यों की प्रस्तुतियाँ भी होती हैं।
- नौका दौड़ (वल्लमकाली): केरल के विभिन्न जलाशयों और नदियों में सर्पाकार विशाल नौकाओं की दौड़ लगती है। अरनमुला और नेहरू ट्रॉफी जैसी प्रसिद्ध नाव-प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं, जिनमें धीर-धड़ाका (चेन्दा) की थाप पर नौकाएँ चली जाती हैं।
- औपचारिक पूजा-अर्चना: घरों और मंदिरों में भगवान विष्णु के वामन रूप या महाबली की मूर्ति स्थापित करके पूजा की जाती है। पूजा स्थल को दीप, धूप, पुष्प और नारियल से सुशोभित किया जाता है।
- ओणम साद्या (भोजन): थिरुवोणम् के दिन केले की पत्तियों पर लजीज शाकाहारी व्यंजनों का विशेष भोजन यानी साद्या किया जाता है। इसमें दश से अधिक व्यंजन जैसे सब्जियाँ, पापड़, पयसम आदि परोसे जाते हैं। यह सामूहिक भोजन परिवार-परिवार मिलकर किया जाता है।
ओणम पर्व के लाभ
ओणम का पर्व पूरे केरल और मलयाली समुदाय के लिए सामाजिक, आर्थिक और आध्यात्मिक दृष्टि से लाभदायक है। प्राकृतिक चक्र में इसे फसलों के स्वास्थ्य और ऋतुओं के बदलाव की खुशी के रूप में देखा जाता है, इसलिए लोग माहौल के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। त्यौहार के दौरान लोक कला, संस्कृति और परंपराएं संरक्षित होती हैं, जिससे सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा मिलता है। सामाजिक रूप से यह सबको एक सूत्र में बाँधता है – सभी जाति, धर्म और समुदाय के लोग मिल-जुलकर पर्व मनाते हैं, जिससे एकता और सौहार्द बढ़ता है। आर्थिक दृष्टि से घर-परिवार नए वस्त्र, आभूषण और उपहार खरीदते हैं तथा अतिथि सत्कार के लिए फल-फूल आदि खरीदारी होती है, जिससे स्थानीय उद्योगों को प्रोत्साहन मिलता है। इसके अतिरिक्त, लोग पारिवारिक मिलन से प्रफुल्लित होते हैं और रिश्तों में सौहार्द बढ़ता है।ओणम पूजा विधि
- पूजा की शुरुआत सुबह स्नान और शुद्ध वस्त्र धारण करके करें। घर में भगवान वामन (विष्णु) और महाबली की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पूजा स्थलों को दीप, धूप, अक्षत (अक्षत-दाना) और पुष्पों से सजाएं।
- पूजा के समय उत्साहपूर्वक पूजा-सामग्री अर्पित करें: घी का दीपक जलाएं, शुद्ध जल और दूध से भगवान को अभिषेक करें। गंध, रोली, हल्दी-चावल चढ़ाएं। उपवास या अनुष्ठान के अनुसार फल-मीठे प्रसाद लगाएं।
- मंदिर में वामन अवतार की कथा सुनना या परिवार में कहानियाँ सुनाना शुभ होता है। कथा बताते हुए भगवत्पुराण का उक्त अंश पढ़ें और महाबली की महिमा का स्मरण करें।
- पूजा के दौरान शांति और भक्ति बनाए रखें। विष्णु वामन या महाबली से संबंधित मंत्र जपें, जैसे "ॐ वामनेश्वराय नमः" इत्यादि। अंत में सभी को प्रसाद वितरित करें और परिजनों को दक्षिणा दें।
ओणम मंत्र जप
ओणम पर्व पर पूजा-अर्चना के दौरान भगवान वामन और राजा महाबली की स्तुति करने वाले मंत्रों का जप किया जाता है। प्रचलित है कि इस दिन विष्णु के वामन रूप या महाबली से संबंधित जैसे "ॐ नमो भगवते वामनेश्वराय" अथवा "ॐ नमो महाबल्याय" मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। भक्त शाक्तिक स्वरूप मंत्रों के साथ सलोक-पाठ करके महाबली एवं विष्णु की महिमा का स्मरण करते हैं। (मुख्य मंत्रों की परंपरा अलग-अलग गणों में भिन्न हो सकती है।)ओणम का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
ओणम का धार्मिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि इसे भगवान विष्णु के वामन अवतार और राजा महाबली के प्रति श्रद्धा-भाव व्यक्त करने का पर्व माना जाता है। इस दिन लोग स्वर्ण-युग के आदर्श शासन की कामना करते हुए भगवान के चरणों में आभार व्यक्त करते हैं। सांस्कृतिक रूप से यह उत्सव केंद्रीय सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है लोकनृत्य, संगीत, कला और व्यंजनों के माध्यम से की जाने वाली यह परंपरा केरल के गौरव को उजागर करती है। ओणम सबको एक साथ लाता है, सभी धर्मों और समुदायों के लोग इस दिन एकता का परिचय देते हैं।ओणम आध्यात्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्व
आध्यात्मिक रूप से ओणम वामन अवतार की भक्ति और महाबली की महानता की याद दिलाता है। यह त्यौहार हमें कृतज्ञता और दया की सीख देता है – महाबली की उदारता को स्मरण करते हुए भक्ती का भाव जागृत होता है। सामाजिक दृष्टि से ओणम सबको समता से जोड़ता है: सब जाति-धर्म के लोग घर पर बैठकर एक साथ भोजनकरते हैं और इस पर्व की खुशियाँ बाँटते हैं। स्कूलों, मंदिरों और सामुदायिक आयोजनों में सब मिल-जुलकर लोक कला का आनंद लेते हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की भावना बढ़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- Why is Onam celebrated?
This festival is celebrated to welcome the blessed return of King Mahabali and to express gratitude for a good harvest. According to the legend, after donating three paces of land to Lord Vishnu in the Vamana form, Mahabali was granted permission to visit his devotees every year, which is remembered through this festival. - What should be done during Onam?
First, clean the house, decorate the puja area with floral rangoli, and worship Lord Vamana and King Mahabali. Watch traditional performances like folk dances, Kathakali, and Pulikali, and share prasad with loved ones. All family members wear new clothes and take part in the Onam Sadya (special feast served on banana leaves). - How to celebrate Onam at home?
Start the day with a bath and prayer. Decorate a small mandap for the puja, make a floral rangoli, and install an idol of Lord Vamana or Mahabali. Prepare simple traditional food on banana leaves and invite family and friends. In the evening, light a ghee lamp and enjoy traditional songs and music. - How to perform the Onam Worship?
Take a bath in the morning and wear clean clothes. During the puja, worship Lord Vishnu (in Vamana form), and offer flowers, sandalwood paste, and light a lamp. Listen to the story of Mahabali and chant appropriate mantras. At the end, distribute fruits and sweets as prasad. - What should not be done during Onam?
Avoid anger, conflicts, or any negative activities during the festival. After the morning cleaning, do not sweep or mop again until evening. Do not offer impure items at the puja place. Stay humble and devoted during worship and meals. - What should be done on Onam day?
Participate in worship throughout the day, watch folk performances, and visit family homes to exchange gifts. Visit temples and donate food to the needy. In the evening, enjoy delicious dishes prepared on fresh leaves and celebrate joyfully with family. - What to eat during the Onam fast?
There is no separate strict fast specifically for Onam, but those who observe a fast can eat fruits, milk, peanuts, sago, and fasting grains (like buckwheat). Light dishes made with ghee, curd, and coconut can also be consumed in moderation. - What not to eat during the Onam fast?
Avoid tamasic (heavy or non-vegetarian) food during the fast. If you are fasting, refrain from eating regular grains.

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