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नाग पंचमी 2025

नाग पंचमी क्या है?

नाग पंचमी, हिंदू धर्म के महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जो नाग देवताओं को समर्पित है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन नागों की पूजा, उन्हें दूध अर्पण और उनसे संरक्षण का आशीर्वाद प्राप्त करने की परंपरा है। यह त्योहार सर्प दंश से बचाव और कालसर्प दोष के निवारण के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है।

देश के कुछ राज्यों में यह त्योहार श्रवण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। वहीं गुजरात में नाग पंचमी का यह त्योहार श्रवण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। गुजरात में नाग पंचमी त्योहार को नाग पंचम के नाम से जाना जाता है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। इस दिन लोग अपने घरों में शिव जी और पार्वती जी की पूजा करते है साथ ही साथ नाग देव की भी पूजा आराधना करते है। इस दिन सर्पों को दूध पिलाने का भी विधान है। कहा जाता है कि इस दिन सर्पों को दूध पिलाने से सर्प दोष जैसे भयानक दोषों से छुटकारा प्राप्त होता है साथ ही व्यक्ति का जीवन बाधाओं से मुक्त होकर प्रगति की ओर अग्रसर होता है।

नाग पंचमी 2025

नाग पंचमी, श्रावण मास में मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण और श्रद्धा से परिपूर्ण पर्व है। यह त्योहार नागों की पूजा और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने का दिन होता है, जिसे देशभर में विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2025 में नाग पंचमी का पर्व उत्तर भारत में 29 जुलाई, मंगलवार के दिन मनाया जाएगा।

नाग पंचमी 2025 की तिथि और समय:

नाग पंचमी पर्व की तिथि: 29 जुलाई 2025
  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 28 जुलाई 2025 को रात 11:25 P.M
  • पंचमी तिथि समाप्त: 30 जुलाई 2025 को 12:48 A.M
  • नाग पूजा का शुभ मुहूर्त: 7:00 A.M से 9:00 A.M तक (सुबह का समय अत्यंत शुभ माना गया है)
हालाँकि, पंचमी तिथि के अंदर किसी भी समय श्रद्धापूर्वक नागदेवता की पूजा की जा सकती है।

नाग पंचमी की कथा (Nag Panchami Katha)

दक्ष की पुत्री कद्रू का विवाह कश्यप मुनि के साथ हुआ था। उसकी सेवा से प्रसन्न होकर कश्यप मुनि ने कद्रू माता से वरदान मांगने को कहा तब कद्रू माता ने सौ पुत्रो की प्राप्ति का वरदान माँगा। जिसके उपरांत उन्हें एक सौ सर्प पुत्रों की प्राप्ति हो गयी।

एक समय की बात है जब समुद्र मंथन हो रहा था तब उस मंथन से एक सफ़ेद रंग का घोड़ा उत्पन्न हुआ। उसे देखकर कद्रू माता ने अपनी सौत विनता से कहा कि यह घोड़ा बहुत सुन्दर है पर पूरी तरह से सफ़ेद नहीं है इसके बाल काले है। इस पर विनता ने कहा कि यह घोड़ा पूरा सफ़ेद ही है इसके बाल भी सफ़ेद है। दोनों में इस बात को लेकर बहस छिड़ गई । इस पर कद्रू माता ने कहा कि यदि मैंने तुम्हे इस घोड़े के बाल काले रंग के दिखा दिए तो तुम्हे मेरी दासी बनकर रहना पड़ेगा और यदि सफ़ेद हुए तो मैं तुम्हारी दासी बनकर रहूंगी। इस पर विनता राजी हो गयी । कद्रू माता के मन में छल उत्पन्न हो गया था। माता कद्रु ने अपने सर्प पुत्रों से कहा कि तुम लोग अपनी आकृति छोटी करके उस घोड़े के बालों में बैठ जाओ। जिससे घोड़े के बाल काले दिखने लगेंगे। माता की ऐसी बातों को सुनकर पुत्रों ने कहा कि माताश्री आप धर्म को छोड़कर अधर्म कर रही है। हम ऐसा नहीं कर सकते और उनके पुत्रों ने उनकी आज्ञा को अस्वीकार्य कर दिया । पुत्रों द्वारा आज्ञा की अवहेलना को देखकर कद्रू माता ने कुपित होकर अपने पुत्रों को शाप दे दिया की आने वाले पांडव वंश में जनमेजय नामक राजा जब सर्प यज्ञ करेंगे तो उस यज्ञ में तुम सब नष्ट हो जाओगे। माता के शाप से घबराकर सभी नाग ब्रह्मा जी के पास गए उन्होंने कहा कि घबराओ मत आने वाले युगों में जरत्कारु नामक राजा का जन्म होगा। तुम उनसे अपनी बहन का विवाह करा देना उनके योग से एक पुत्र उत्पन्न होगा जिसका नाम आस्तीक होगा वह पुत्र जनमेजय द्वारा किये गए सर्प यज्ञ को रोकेगा। आने वाले समय में ऐसा ही हुआ जब राजा जनमेजय को पता चला कि उनके पूर्वजों की मृत्यु का कारण सर्प है। तब उन्होंने सर्पों के वंश को खत्म करने का संकल्प लिया और तब राजा ने सभी सर्पो के नाश के लिए सर्पयज्ञ करना प्रारम्भ कर दिया। जब जनमेजय के पुत्र आस्तीक को यह बात पता चली कि उनके मामा के प्राण संकट में है तो वे यज्ञ के पास पहुंचे और उन्होंने उस यज्ञ को भंग कर दिया । इस प्रकार आस्तीक ने यज्ञ को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को भंग कर सर्पों को भयमुक्त किया व सर्पो की रक्षा की और तभी से इस दिन को सर्पों की रक्षा के लिए नाग पंचमी के रूप मे मनाया जाने लगा।

इस दिन दीवार पर शेषनाग, तक्षक नाग, वासुकि नाग आदि नागों की आकृति बनाकर हल्दी, अक्षत, रोली और पुष्प चढ़ाकर इनकी पूजा करनी चाहिए। इस दिन कच्चे दूध में घी मिलाकर नाग देवताओं को याद करके उन्हें अर्पित किया जाता है। जो महिलाएं पूरी श्रध्दा भाव से इस दिन नागों की पूजा करती हैं उनके वंश को सर्प का भय नहीं रहता है साथ ही उनके घर पर शिवजी, विष्णु जी और नागदेवता की कृपा हमेशा बनी रहती है। जिनके घर पर तीन-तीन देवताओं की कृपा हो उनके घर पर कभी दुःख वास नहीं करता उनके घर में सुख और धन की कभी कमी नहीं होती है।

नाग पंचमी 2025: पूजा विधि

आवश्यक सामग्री:
  • चांदी का पात्र
  • लाल मिट्टी
  • गाय का गोबर
  • लकड़ी या पत्थर से बनी नाग की मूर्ति या तस्वीर
  • ताजा दूध
  • मीठा (गुड़ या मिठाई)
  • ताजे फल
  • ताजे फूल
  • दालें (मूंग, मसूर आदि)
  • हल्दी का पेस्ट
  • कपूर
  • अंकुरित अनाज
  • धूपबत्ती या अगरबत्ती
  • तुलसी के पत्ते और साफ पानी
पूजा विधि
  • स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थल को साफ करें और लाल कपड़ा बिछाए।
  • नाग की मूर्ति या तस्वीर को पूजा स्थान पर स्थापित करें।
  • दूध लेकर नाग देवता को चढ़ाएं ।
  • हल्दी का तिलक लगाएं और कपूर जलाएं।
  • पूजा मंत्रों का जप करें, जैसे "ॐ नमः शिवाय नागदेवाय नमः।"
  • मीठा, फल, फूल, दालें और अंकुरित अनाज अर्पित करें।
  • नाग पंचमी कथा सुनें या पढ़ें।
  • पूजा के बाद प्रसाद वितरण करें।

नाग पंचमी 2025: मंत्र जप

नाग गायत्री मंत्र: ॐ नवकुलाय विद्महे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्।
अर्थ- हम नवकुल (नागों के वंश) को जानते हैं, विषदंत वाले (विषधारी) नाग का ध्यान करते हैं, वह सर्प हमें प्रेरणा दे।

नाग पंचमी 2025: लाभ

  • नाग देवता की कृपा प्राप्ति: नाग देवताओं की पूजा करने से जीवन की परेशानियाँ, रोग और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। उनकी कृपा से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
  • दुर्भाग्य और दोषों का नाश: विशेषकर ग्रह दोषों जैसे राहु और केतु के प्रभाव को कम करने के लिए नाग पंचमी व्रत और पूजा अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। उनकी पूजा से घर और आसपास के क्षेत्र में बुरी शक्तियों का नाश होता है।
  • कालसर्प दोष और सर्पदोष से मुक्ति: जिन व्यक्तियों की कुंडली में कालसर्प दोष या नाग दोष होता है, उनके लिए नाग पंचमी का दिन विशेष फलदायक माना जाता है। इस दिन पूजा करने से इन दोषों का प्रभाव कम होता है और जीवन में बाधाएं दूर होती हैं।
  • पारिवारिक प्रेम: नाग पंचमी के दिन पूजा करने से परिवार के सदस्यों के बीच मेलजोल और प्रेम बढ़ता है। नाग पंचमी का व्रत और पूजा परंपरागत रूप से नाग देवताओं को प्रसन्न करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। यह व्रत स्वास्थ्य, समृद्धि और लंबी आयु के लिए भी लाभकारी माना जाता है।
  • नाग पंचमी का महत्व: सनातन धर्म में नागों को दिव्य शक्तियों का प्रतीक माना गया है। नाग केवल सांप नहीं हैं, बल्कि उन्हें देवता स्वरूप समझा जाता है। भगवान शिव के गले में वासुकि नाग, और भगवान विष्णु की शैय्या पर शेषनाग विराजमान रहते हैं। ये दोनों ही रूप नागों की पूज्यता और दिव्यता को दर्शाते हैं।

नाग पंचमी और ज्योतिष शास्त्र

नाग पंचमी का महत्व केवल धार्मिक नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। जन्म कुंडली में कालसर्प दोष, राहु-केतु दोष, या अन्य ग्रहदोषों की शांति के लिए इस दिन विशेष पूजन करना लाभकारी माना गया है। श्रद्धा से नाग देवता की पूजा करने से ग्रह दोषों का प्रभाव कम होता है और जीवन में सुख-शांति आती है। कालसर्प दोष और राहू-केतु दोष कुंडली में होने से जीवन में कई रुकावटे आती है जिससे कार्य में सफलता देरी से मिलती है या मिलती ही नहीं है। नाग पंचमी के दिन पूजन करने से कुंडली के दोष का प्रभाव क्षीण हो जाता है, जिससे जीवन की सभी समस्याओं से राहत मिलती है इसलिए नाग पंचमी के दिन पूजा व व्रत करने का अधिक महत्व है।

नाग पंचमी FAQ

1. हम नाग पंचमी क्यों मनाते हैं?
नाग पंचमी सनातन धर्म का एक पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, इस दिन श्रद्धालु नाग देवता की पूजा करके सुख, समृद्धि और जीवन की सुरक्षा की कामना करते हैं। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन सर्प दोष, कालसर्प योग और अन्य ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है, जिससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। नाग देवता को भगवान शिव के गले का अलंकार और भगवान विष्णु की शैय्या माना जाता है, इसलिए इनकी पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक है। नागों को प्रकृति और धर्म में शक्ति और संरक्षण के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है, और उनकी कृपा से परिवार में शांति, उन्नति और समृद्धि बनी रहती है।

2. नाग पंचमी पर क्या करना चाहिए?
  • प्रातःकाल स्नान करें और शुद्ध मन से व्रत रखने का संकल्प लें।
  • अपने घर में भगवान शिव, माता पार्वती और नाग देवता की पूजा करें।
  • नाग देवता की प्रतिमा को दूध, पुष्प, धूप और फल अर्पित करें।
  • यदि संभव हो तो मंदिर जाकर नाग देवता को दूध चढ़ाना शुभ माना जाता है।
  • व्रत के दौरान शुद्ध और सात्विक आहार लें ।

3. घर पर नाग पंचमी की पूजा कैसे करें?
नाग पंचमी के पावन दिन घर पर नाग देवता की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। यदि आप मंदिर न जाकर अपने घर में ही पूजा कर सकते है। इस दिन की दीवार पर शेषनाग, तक्षक नाग, पद्मा नाग, वासुकि नाग, कोकोर्टक नाग, महापद्म नाग, शंख नाग और कुलिक नाग की चोटी पर हल्दी, अक्षत, रोली और पुष्प चढ़ाकर सर्प देवताओं की पूजा की जाती है। जो महिलाएं इस पूजा को श्रद्धा से रखती हैं, उनके वंश को सर्प का भय नहीं होता। उनके घर पर शिवजी, विष्णु जी और नागदेवता की कृपा सदैव बनी रहती है उनके घर पर तीन-तीन देवताओं की कृपा होने से उनके घर में कभी भी दुख नहीं रहता है और उनके घर में कभी भी सुख और धन की कमी नहीं होती है।
घर पर नाग पंचमी पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
  • मिट्टी या धातु से बनी नाग प्रतिमा
  • दूध
  • ताजा फूल
  • हल्दी और कुमकुम
  • मिठाई (प्रसाद के लिए)
  • धूप और दीप
घर पर पूजा के फायदे
  • घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
  • नाग देवता की कृपा से परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ और सुखी रहते हैं।
  • व्रत और पूजा से राहु, केतु जैसे ग्रहों के प्रभाव कम होते हैं।

4. नाग पंचमी पर पूजा कैसे करें?
नाग पंचमी का पर्व नाग देवताओं को समर्पित एक पवित्र अवसर है, जिसे श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। नाग पंचमी की पूजा प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद की जाती है। पूजा स्थल पर या घर की दीवार पर आठ प्रमुख नाग देवताओं – शेषनाग, तक्षक नाग, पद्मा नाग, वासुकि नाग, कर्कोटक नाग, महापद्म नाग, शंख नाग और कुलिक नाग – का चित्र बनाएं। फिर उन पर हल्दी, रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित कर विधिपूर्वक पूजन करें। इस दौरान नाग पंचमी के विशेष मंत्रों का जाप करें और नाग देवताओं से अपने परिवार की रक्षा, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा के उपरांत दिन भर सात्त्विकता एवं पवित्रता बनाए रखें। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति और जीवों के प्रति श्रद्धा भाव प्रकट करने का माध्यम भी है।

5. नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
  • जमीन की खुदाई या खोदना वर्जित है।
  • पेड़-पौधों की कटाई या नुकसान नहीं करना चाहिए।
  • झूठ बोलना या बुरे कर्म करना उचित नहीं।
  • तामसिक भोजन जैसे मांस, प्याज, लहसुन आदि का सेवन वर्जित है।
  • इस दिन सर्पों को हानि पहुँचाना अशुभ और पाप माना जाता है।
  • पूजा के दौरान अशुद्धता या अव्यवस्था से बचें।

6. नाग पंचमी के दिन क्या करें?
  • शिव और नाग देवता की पूजा करें।
  • दूध, फूल और मिठाई अर्पित करें।
  • नाग पंचमी व्रत रखें और कथा पढ़ें या सुनें।
  • कालसर्प दोष की शांति के लिए विशेष जाप करें।
  • मंदिर जाकर नाग देवता को दूध चढ़ाएं।

7. नाग पंचमी पर क्या खाएं?
  • नाग पंचमी के दिन सभी राज्यों में अलग-अलग परंपराएं हो सकती हैं।
  • सामान्यतः इस दिन सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है।
  • व्रत रखने वाले लोग फल, दूध, और हल्का सात्विक भोजन करते हैं।
  • मांसाहार, तामसिक भोजन जैसे प्याज, लहसुन और भारी भोजन से परहेज किया जाता है।
  • फलाहार और दही-चावल जैसे सरल और शुद्ध भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।
  • सात्विक भोजन से मन और शरीर दोनों पवित्र रहते हैं, जो व्रत के लिए उत्तम माना जाता है।

8. बत्तीस शिराला नाग पंचमी: एक विशेष परंपरा
बत्तीस शिराला, महाराष्ट्र के सांगली जिले में स्थित एक छोटा सा कस्बा है, जो अपनी अनूठी नाग पंचमी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ नाग पंचमी का उत्सव विशेष रूप से भव्य और पारंपरिक तरीके से मनाया जाता है। इस पर्व के दौरान, गाँव के लोग जंगलों से जीवित नागों को पकड़कर उन्हें पूजा के लिए गाँव में लाते हैं। पूजा के बाद, इन नागों को सुरक्षित रूप से उनके प्राकृतिक आवास में वापस छोड़ दिया जाता है। इस प्रक्रिया में नागों को कोई हानि नहीं पहुँचाई जाती और उनकी सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। बत्तीस शिराला की नाग पंचमी को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि मानव और प्रकृति के बीच संतुलन और सह-अस्तित्व का भी संदेश देती है।
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Nag Panchami 2025: Puja Vidhi, Date, Story and Significance.