
कामिका एकादशी 2025
सनातन धर्म में एकादशी का दिन भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। यह दिन आध्यात्मिक उन्नति, आत्म-शुद्धि और पापों से मुक्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। प्रत्येक माह में दो एकादशियाँ आती हैं – एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में, और हर एकादशी का अपना विशिष्ट महत्व होता है।
कामिका एकादशी क्या है?
कामिका एकादशी श्रावण मास (सावन माह) के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली एकादशी है । इसका शाब्दिक अर्थ है 'कामना पूर्ण करने वाली एकादशी' । यह भगवान विष्णु को समर्पित है, जो जगत के पालक और संरक्षक हैं । इस दिन विशेष पूजा और व्रत विधियों का पालन करके श्रद्धालु भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त करते हैं।कामिका एकादशी का व्रत पापों को नष्ट करने और मोक्ष की प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है । इसे केवल एक धार्मिक अनुष्ठान के रूप में नहीं, बल्कि एक 'आध्यात्मिक रीसेट' के रूप में देखा जाता है। यह भक्त को अपने गलत कार्यों और पापों से उत्पन्न होने वाले कर्मिक बोझ और आंतरिक अशांति से मुक्ति पाने का अवसर प्रदान करती है । यह व्रत पापों को मिटाने और मोक्ष की ओर ले जाने का एक शक्तिशाली साधन है, जिससे आंतरिक शांति और परमात्मा से गहरा संबंध स्थापित होता है । यह दर्शाता है कि हिंदू धर्म में व्रत केवल बाहरी प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि आंतरिक शुद्धि, पश्चाताप और आध्यात्मिक नवीनीकरण के गहरे साधन हैं, जो कर्म के सिद्धांत और मुक्ति की अवधारणा से सीधे जुड़े हैं।
कामिका एकादशी 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2025 में कामिका एकादशी 21 जुलाई, सोमवार को मनाई जाएगी । यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पड़ती है, और इस दिन भगवान विष्णु की आराधना विशेष रूप से फलदायी होती है ।
- एकादशी तिथि: 21 जुलाई 2025
- एकादशी तिथि का प्रारंभ: 20 जुलाई 2025 को 12:15 P.M
- एकादशी तिथि समाप्त: 21 जुलाई 2025 को 9:40 A.M
कामिका एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक नेक दिल लेकिन क्रोधी स्वभाव का ठाकुर रहता था । एक दिन अपने क्रोध पर नियंत्रण न कर पाने के कारण उसका एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया और हाथापाई के दौरान उसने अनजाने में ब्राह्मण की हत्या कर दी ।इस ब्रह्महत्या के गंभीर दोष के कारण ठाकुर को धार्मिक और सामाजिक कार्यों से बहिष्कृत कर दिया गया, और वह गहरे पश्चाताप से भर गया । अपने पाप से मुक्ति पाने के लिए, उसने ब्राह्मणों या एक ज्ञानी ऋषि से उपाय पूछा । ऋषि ने उसे श्रावण मास की कामिका एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करने की सलाह दी । ठाकुर ने ऋषि के बताए अनुसार व्रत का पालन किया। एक दिन उसे नींद में भगवान श्री हरि विष्णु के दर्शन हुए, जिन्होंने उसे बताया कि उसे इस पाप से मुक्ति मिल गई है । इस घटना के बाद से ही कामिका एकादशी का व्रत रखा जाने लगा । यह कथा भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर को सुनाई थी, और इससे पहले संत वशिष्ठ ने राजा दिलीप को सुनाई थी, जिन्होंने इस व्रत के प्रभाव से मोक्ष प्राप्त किया था ।
यह कथा कामिका एकादशी के व्रत की अपार शक्ति और भगवान विष्णु की कृपा को दर्शाती है, जो गंभीर पापों से भी मुक्ति दिला सकती है । कथा में 'अनजाने में' या 'क्रोध में' ब्राह्मण की हत्या का उल्लेख और साथ ही 'जानबूझकर पाप न करने' की चेतावनी एक महत्वपूर्ण नैतिक भेद स्थापित करती है । यह कथा केवल एक ऐतिहासिक वृत्तांत नहीं है, बल्कि एक नैतिक मार्गदर्शक भी है। यह भक्तों को सिखाती है कि आध्यात्मिक अनुष्ठान केवल बाहरी क्रियाएं नहीं हैं, बल्कि आंतरिक शुद्धि, पश्चाताप की भावना और नैतिक आचरण के साथ होने चाहिए। यह कर्म के सिद्धांत और प्रायश्चित की अवधारणा को गहराई से जोड़ता है।
कामिका एकादशी की पूजा विधि
व्रत पूर्व दिवस (दशमी) की तैयारी:- प्रातःकाल श्रद्धा और संकल्प के साथ स्नान करें।
- मध्याह्न (दोपहर) के समय एक बार सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- रात्रि में भूमि पर ही शयन करें (बिस्तर का उपयोग न करें)।
- प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्यकर्म और स्नान करें।
- उपवास का संकल्प निम्न मंत्र के साथ लें:
श्वो भोक्ष्ये पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत।।
अर्थ: "हे कमलनयन भगवान! आज मैं सभी भोगों का त्याग कर निराहार रहूंगा और कल भोजन करूंगा। हे अच्युत! मुझे अपनी शरण प्रदान करें।"
- भगवान श्री हरि (हरीकेश) का विधिपूर्वक पूजन करें:
- धूप, दीप, पुष्प, गंध, नैवेद्य आदि अर्पित करें।
- तुलसी पत्र अवश्य अर्पित करें।
- रात्रि में भगवान के समीप जागरण करें — भजन, कीर्तन, और विष्णु नामस्मरण करें।
- प्रातः उठकर श्री हरि की पुनः पूजा करें।
- श्रद्धापूर्वक ब्राह्मणों को भोजन कराएँ।
- तत्पश्चात, परिवारजनों (भाई, पुत्र, नाती आदि) के साथ मौन रहकर भोजन करें।
मनोकामना पूर्ति, शांति और ज्योतिषीय लाभ
यह 'कामना पूर्ण करने वाली' एकादशी है, जिससे इच्छित फल की प्राप्ति होती है । भक्तों को आंतरिक शांति, समृद्धि और मन की शांति प्राप्त होती है । ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, यह चंद्र दोष के नकारात्मक प्रभावों को कम करने, मानसिक स्पष्टता लाने और बृहस्पति और बुध जैसे ग्रहों की ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करता है । यह पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है और पूर्वजों को लाभ पहुंचाता है ।
तुलसी का विशेष महत्व
भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है । एक दल तुलसी चढ़ाने से एक भार स्वर्ण और चार भार चांदी दान करने का फल मिलता है । तुलसी के दर्शन मात्र से पाप भस्म हो जाते हैं, स्पर्श से मनुष्य पवित्र होता है, और भगवत चरणों में अर्पित करने से मुक्ति मिलती है । तुलसी और दान के महत्व पर बार-बार जोर देना यह भी इंगित करता है कि ये केवल सहायक क्रियाएं नहीं, बल्कि व्रत के प्रभाव को कई गुना बढ़ाने वाले आवश्यक घटक हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
कामिका एकादशी पूजा भारत में कहाँ मनाई जाती है?
कामिका एकादशी का पर्व पूरे भारत में हिंदू धर्म के अनुयायियों द्वारा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह किसी विशेष राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि एक अखिल भारतीय और विश्वव्यापी हिंदू त्योहार है। यह नई दिल्ली, जयपुर, देवघर, अयोध्या, उज्जैन जैसे विभिन्न शहरों में विशेष रूप से मनाया जाता है।
कामिका एकादशी पूजा क्यों मनाई जाती है?
यह भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने, सभी पापों से मुक्ति पाने (विशेषकर ब्रह्महत्या जैसे पापों से), मनोकामनाएं पूर्ण करने और मोक्ष प्राप्त करने के लिए मनाई जाती है। यह आध्यात्मिक शुद्धि और आंतरिक शांति के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है।
कामिका एकादशी पूजा में क्या करें?
- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.
- भगवान विष्णु का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु की पूजा करें।
- घी का दीपक जलाएं।
- मंत्रों का जप करें।
- कामिका एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- रात भर जागरण करें।
- दान-पुण्य करें।
कामिका एकादशी पूजा घर पर कैसे करें?
घर पर पूजा करने के लिए, सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें, भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें, पीले फूल, तुलसी के पत्ते, धूप, मिठाई और फल चढ़ाएं। "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" जैसे मंत्रों का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या भगवद गीता का एक अध्याय पढ़ें। नकारात्मकता से बचें और अपने विचारों को शुद्ध रखें। किसी जरूरतमंद को दान करें।
कामिका एकादशी की पूजा कैसे करें?
दशमी के दिन हल्का, सात्विक भोजन करें और तामसिक चीजों से बचें। एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ कर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पीले फूल, तुलसी के पत्ते, धूप, मिठाई, फल और पंचामृत चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर आरती करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जैसे मंत्रों का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। कामिका एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें। पूरे दिन और रात भर जागकर भगवान का स्मरण करें, भजन-कीर्तन करें। द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें और ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं या दान करें।
कामिका एकादशी पूजा 2025 में कब शुरू होगी?
कामिका एकादशी का व्रत 21 जुलाई 2025 को मनाया जाएगा। एकादशी तिथि 20 जुलाई 2025 को दोपहर 12:15 बजे शुरू होगी और 21 जुलाई 2025 को सुबह 09:40 बजे समाप्त होगी।
कामिका एकादशी पर क्या न करें?
- दशमी को तामसिक भोजन और नशीले पदार्थ का सेवन न करें।
- एकादशी के दिन गपशप, क्रोध, झूठ या किसी भी प्रकार की तामसिक गतिविधियों से बचें।
- नकारात्मक विचारों और विकर्षणों से दूर रहें।
- एकादशी की रात सोना नहीं चाहिए, अन्यथा व्रत अधूरा माना जाता है।
- जानबूझकर पाप करने के इरादे से व्रत का पालन न करें।
कामिका एकादशी के दिन क्या करें?
- दशमी के दिन सात्विक भोजन करें।
- एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी के पत्ते, धूप, मिठाई, फल और पंचामृत चढ़ाएं।
- घी का दीपक जलाएं और आरती करें।
- "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" जैसे मंत्रों का जप करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
- कामिका एकादशी व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- पूरे दिन और रात भर जागकर भगवान का स्मरण करें, भजन-कीर्तन करें।
- द्वादशी के दिन शुभ मुहूर्त में पारण करें और ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं या दान करें।
- घर पर सरल तरीके से पालन करने के लिए: 10 मिनट ध्यान करें, तुलसी का पत्ता चढ़ाएं, भगवद गीता का अध्याय पढ़ें।






