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मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहाँ है? जानें कथा और धार्मिक महत्व
लेखक: कृष्णा

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहाँ है? जानें कथा और धार्मिक महत्व

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग क्या है?

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर स्थित भगवान शिव का द्वितीय ज्योतिर्लिंग माना जाता है। यह पवित्र स्थान कृष्णा नदी के तट पर स्थित है और “दक्षिण का कैलाश” के नाम से भी प्रसिद्ध है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से व्यक्ति पापों से मुक्त होकर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त करता है।

यदि आप भगवान शिव के प्रथम ज्योतिर्लिंग के बारे में जानना चाहते हैं तो:-

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा और उसका धार्मिक महत्व भी अवश्य पढ़ें। 

मल्लिकार्जुन नाम का अर्थ क्या है?

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग भगवान शिव और माता पार्वती के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।

• “मल्लिका” का अर्थ माता पार्वती 

• “अर्जुन” का अर्थ भगवान शिव 

इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग को शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक कहा जाता है।

श्रीशैल पर्वत का धार्मिक महत्व

आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले में स्थित श्रीशैल पर्वत अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। शिव पुराण के अनुसार अमावस्या के दिन भगवान शिव स्वयं यहाँ आते हैं और पूर्णिमा के दिन माता पार्वती का आगमन होता है।

इसी कारण यह स्थान भक्तों के लिए अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के आविर्भाव की कथा

गणेश और कार्तिकेय के विवाह का प्रसंग

शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश और कार्तिकेय के बीच पहले विवाह को लेकर प्रतियोगिता हुई।

भगवान शिव और माता पार्वती ने शर्त रखी कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा, उसका विवाह पहले किया जाएगा।

कार्तिकेय अपने मोर पर बैठकर तुरंत पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। वहीं भगवान गणेश के लिए अपनी छोटी सवारी चूहे के साथ यह कार्य कठिन था।

भगवान गणेश की बुद्धिमत्ता

भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता माने जाते हैं। उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए माता पार्वती और भगवान शिव की सात बार परिक्रमा की और कहा कि माता-पिता ही संपूर्ण पृथ्वी के समान हैं।

इस प्रकार भगवान गणेश ने अपनी बुद्धिमत्ता से विजय प्राप्त की और उनका विवाह पहले संपन्न हुआ।

कार्तिकेय का क्रोध और क्रोंच पर्वत

जब कार्तिकेय पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटे और उन्हें भगवान गणेश के विवाह के बारे में पता चला, तो वे अत्यंत क्रोधित हो गए।

क्रोध में वे क्रोंच पर्वत की ओर चले गए। भगवान शिव और माता पार्वती ने उन्हें समझाने और वापस लाने का प्रयास किया, लेकिन कार्तिकेय नहीं माने और और भी दूर चले गए।

शिव और पार्वती का ज्योतिर्मय स्वरूप

अपने पुत्र के वियोग से दुखी होकर भगवान शिव और माता पार्वती ने उसी स्थान पर ज्योतिर्मय स्वरूप धारण कर लिया।

तभी से भगवान शिव “मल्लिकार्जुन” नाम से तीनों लोकों में प्रसिद्ध हुए। इस ज्योतिर्लिंग में भगवान शिव और माता पार्वती दोनों की दिव्य ज्योतियाँ प्रतिष्ठित मानी जाती हैं।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को शिव और शक्ति के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहाँ दर्शन और पूजा करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

यह ज्योतिर्लिंग विशेष रूप से परिवारिक सुख, आध्यात्मिक उन्नति और मनोकामना पूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त कृपा प्राप्त करने हेतु यहाँ अति रुद्र अनुष्ठान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह अनुष्ठान परिवारिक अशांति, ग्रह बाधाओं और जीवन में चल रही नकारात्मकता को दूर कर आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक माना जाता है।

सनातन ज्योति में अति रुद्र अनुष्ठान अनुभवी वैदिक आचार्यों के मार्गदर्शन में पूर्ण विधि-विधान और श्रद्धा के साथ सम्पन्न करवाए जाते हैं।

यदि आप अति रुद्र अनुष्ठान की वैदिक विधि, धार्मिक महत्व और शिव-शक्ति कृपा से जुड़े आध्यात्मिक प्रभावों के बारे में जानना चाहते हैं तो:-

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यदि आप भगवान शिव के अगले ज्योतिर्लिंग के बारे में जानना चाहते हैं तो:-महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा, उज्जैन का धार्मिक महत्व और बाबा महाकाल की दिव्य महिमा भी अवश्य पढ़ें।  

अमावस्या और पूर्णिमा का विशेष महत्व

शिव पुराण के अनुसार:

• अमावस्या के दिन भगवान शिव स्वयं यहाँ आते हैं। 

• पूर्णिमा के दिन माता पार्वती यहाँ विराजमान होती हैं। 

इसी कारण अमावस्या और पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ दर्शन और पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग दर्शन का फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से:

• पापों से मुक्ति मिलती है 

• मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं 

• परिवार में सुख-शांति आती है 

• भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है 

• आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है 

भगवान शिव के अन्य ज्योतिर्लिंगों की कथा, धार्मिक महत्व और उनके पौराणिक रहस्यों को जानने के लिए:-

12 ज्योतिर्लिंगों से संबंधित विस्तृत लेख भी अवश्य पढ़ें।  

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहाँ स्थित है?

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के श्रीशैल पर्वत पर कृष्णा नदी के तट पर स्थित है। इसे भगवान शिव का द्वितीय ज्योतिर्लिंग और “दक्षिण का कैलाश” भी कहा जाता है।

2. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की पौराणिक कथा क्या है?

शिव पुराण के अनुसार भगवान गणेश और कार्तिकेय के विवाह प्रसंग के बाद क्रोधित होकर कार्तिकेय क्रोंच पर्वत चले गए। तब भगवान शिव और माता पार्वती ने वहीं ज्योतिर्मय स्वरूप धारण किया, जो आगे चलकर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहलाया।

3. मल्लिकार्जुन नाम का क्या अर्थ है?

“मल्लिका” माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है और “अर्जुन” भगवान शिव का स्वरूप है। इसलिए मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक कहा जाता है।

4. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का धार्मिक महत्व क्या है?

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग को शिव और शक्ति के संयुक्त स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ दर्शन और पूजा करने से पापों से मुक्ति, मानसिक शांति और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।

5. मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन से क्या फल मिलता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं, परिवार में सुख-शांति आती है और भगवान शिव-पार्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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