हरियाली तीज 2026 में कब है?
वर्ष 2026 में हरियाली तीज शनिवार, 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। सनातन धर्म में यह पावन पर्व श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है और भगवान शिव तथा माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
हरियाली तीज का पर्व विशेष रूप से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा और दिल्ली सहित उत्तर भारत के अनेक क्षेत्रों में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति हेतु माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। सावन की हरियाली के बीच मनाया जाने वाला यह पर्व प्रेम, भक्ति, सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।
हरियाली तीज की कथा
माता पार्वती भगवान शिव जी की प्राप्ति हेतु उनकी तपस्या में इतनी लीन थी कि उन्हे तपस्या करते-करते हजारों वर्ष बीत चुके थे। वह स्वयं को भी भूल चुकी थी।माता पार्वती की कठिन तपस्या को देखकर शिव जी उनकी तपस्या से प्रसन्न हो गए और उन्होंने उनको अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया। माता पार्वती की स्मरण शक्ति को वापस लाने के लिए भगवान शिव जी ने उन्हे एक कथा सुनायी थी। जिस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को कथा सुनाई वह दिन सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया का था। इसलिए इस दिन हरियाली तीज मनायी जाती है। इसी दिन शिव जी ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
शिव जी ने माता पार्वती को जो कथा सुनायी थी वह कुछ इस प्रकार है
भगवान शिव जी माता पार्वती जी से कहते है कि तुमने मुझे पति रूप में पाने के लिए बहुत कठिन तप किया है, तुमने अन्न का त्याग किया और पत्ते खाकर हजारों वर्षों तक तप किया ।
तुम्हारी तपस्या से ही प्रसन्न होकर मैंने अपनी अर्धांगिनी रूप में तुम्हारा वरण किया है। तुम शुरू से ही मुझे पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थी इसलिए तुम मेरी तपस्या में और मेरे ध्यान में लीन रहती थी। तुम्हारे पिता तुम्हारी इस प्रकार की दशा देखकर बहुत दुखी और चिंतित रहते थे। एक दिन नारद जी तुम्हारे पिता के घर पधारे और उन्होंने कहा कि श्री विष्णु जी आपकी कन्या से विवाह करना चाहते हैं । मुझे भगवान विष्णु जी ने ही आपके पास भेजा है।
आप अपनी राय बताएं। नारद जी की बात सुनकर हिमालयराज बहुत प्रसन्न हो गए और तुम्हारा विवाह विष्णु जी के साथ करने के लिए तैयार हो गए। जब इस बात का तुम्हें पता चला तो तुम्हें बहुत दुख हुआ। तुम्हारे असहाय दुख को देख कर तुम्हारी सखियों ने तुम्हारा हरण कर लिया और पहाड़ों की गुफाओं में तुम्हें छिपा दिया।
तुमने वही बालू की शिवलिंग की प्रतिमा बना कर मेरी पूजा करनी शुरू कर दी। तुम्हारे हरण की खबर पर तुम्हारे पिता हिमालय राज ने तुम्हारी खोज करनी प्रारंभ कर दी। पर वे तुम्हें खोज नहीं पाए। तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न होकर मैंने तुम्हारा वरण किया। मेरी लीला के अनुसार हिमालय राज उसी गुफा तक पहुंच गए जहाँ तुम मेरी तपस्या में डूबी हुई थी। उस समय तुम मुझे अपने पति के रूप में वरण कर चुकी थी। तुम्हारे पिता जी ने तुमसे वापस घर चलने का आग्रह किया।
तुमने अपने पिता जी से कहा यदि आप मेरा विवाह विष्णु जी से न कराकर शिव जी से कराएंगे तो ही मैं घर वापस जाऊँगी अन्यथा यही प्राण त्याग दूँगी। तुम्हारे कहने के अनुसार तुम्हारे पिता ने मुझसे तुम्हारा विवाह कराया। इस कथा को मैंने तुमसे कहा है जो बहुत ही कल्याणकारी और अखण्ड सौभाग्य देने वाला है। जो भी महिला हरियाली तीज का व्रत करके इस कथा को सुनेगी या पढ़ेगी। उसे अखण्ड सौभाग्य की तथा अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होगी।
हरियाली तीज की पूजा विधि
सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को महिलायें सुबह उठकर समस्त नित्यकर्मों को समाप्त कर स्वच्छ हो ले। फिर पूजा वाले स्थान को साफ करके गंगाजल छिड़क कर उस स्थान को पवित्र कर ले। पूजा स्थान पर बैठकर निर्जल या सजल व्रत रखने का संकल्प ले। माता पार्वती और भगवान शिव जी की प्रतिमा को चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर स्थापित करे। आप चाहे तो मिट्टी की मूर्ति भी बनाकर स्थापित कर सकते है।
सबसे पहले गणेश जी की पूजा करे, फिर शिव और माता पार्वती जी की पूजा करे। शिव जी को चंदन, अक्षत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शहद, चीनी, दूध, गंगाजल, पंचामृत, सुपारी, नारियल, कपूर, घी, तेल, गुलाल, कच्चा सूत, जनेऊ अर्पित करे। माता पार्वती को श्रृंगार की चीजें जैसे बिंदी, कुमकुम, सिंदूर, चूड़ी, मेंहदी, लाल रंग, बिछिया, इत्र, कंघी आदि थाली में सजाकर अर्पित करे। इस सामग्रियों को अर्पित करने के बाद हरियाली तीज की कथा सुने, आरती करे तथा अगले दिन व्रत का पारण करे।
यदि आप हरियाली तीज व्रत की पूजा विधि, व्रत नियम, कथा, धार्मिक महत्व अथवा भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़े आध्यात्मिक लाभों के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो: -सनातन ज्योति के अनुभवी आचार्यों से निःशुल्क परामर्श एवं विस्तृत मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।
हरियाली तीज का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यदि अविवाहित कन्या के विवाह में देरी हो रही हो तो उस कन्या को इस व्रत को विशेष रूप से करना चाहिए, इस व्रत को करने से विवाह के योग शीघ्र ही बनते है। यही मान्यता विवाहित महिलाओं पर भी है, यदि किसी महिला का दाम्पत्य जीवन संघर्षों में व्यतीत हो रहा हो तो उस महिला को इस व्रत का पालन करना चाहिए। यह व्रत पूर्ण रूप से माता पार्वती और शिव जी को समर्पित है।
माता पार्वती और भगवान शिव जी व्रती महिला की सभी कठिनाइयों को दूर कर देती है और इस प्रकार महिला का दाम्पत्य जीवन सुखमय हो जाता है। इस व्रत के फल से सुहागिन महिलाओं को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से विवाहित महिलाओं और अविवाहित कन्याओं को मनोवांछित फल मिलता है।
यदि आप अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन, दांपत्य प्रेम, मनोकामना पूर्ति तथा भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो: -रुद्राभिषेक अनुष्ठान के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।