प्रस्तावना
भारतीय पंचांग में कुछ समय ऐसे आते हैं, जिन्हें केवल तिथियों का क्रम नहीं माना जाता, बल्कि जीवन की गति को समझने का अवसर माना जाता है।
पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास भी कहा जाता है, ऐसा ही एक विशेष काल है-जहाँ बाहरी उपलब्धियों से अधिक आंतरिक साधना का महत्व होता है।
यह मास हर वर्ष नहीं आता, और न ही किसी एक निश्चित महीने में आता है। यही कारण है कि इसे समझना आवश्यक हो जाता है, केवल श्रद्धा से नहीं, बल्कि समझ के साथ।
पुरुषोत्तम मास 2026 कब है?
वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम मास 17 मई 2026 (रविवार) से प्रारंभ होकर 15 जून 2026 (सोमवार) तक रहेगा।
• प्रारंभ तिथि: 17 मई 2026
• समाप्ति तिथि: 15 जून 2026
• अवधि: लगभग 30 तिथियाँ
यह मास तब आता है जब एक चंद्र मास के भीतर सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती।
पुरुषोत्तम मास कब और कैसे आता है? (गणना समझें)
अब प्रश्न यह उठता है कि यह मास हर वर्ष क्यों नहीं आता, और इसकी गणना कैसे होती है।
हिंदू पंचांग दो आधारों पर चलता है-
• चंद्रमा (तिथियाँ)
• सूर्य (संक्रांति)
एक चंद्र मास लगभग 29.5 दिन का होता है, जबकि सूर्य की गति अलग होती है। समय के साथ इन दोनों के बीच अंतर बढ़ता जाता है।
जब किसी एक चंद्र मास (अमावस्या से अमावस्या) के बीच सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, तो वह पूरा मास अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) कहलाता है।
इसे सरल तरीके से समझें
• चंद्र मास - अमावस्या से अमावस्या
• उस दौरान देखें - क्या सूर्य ने राशि बदली?
यदि नहीं बदली - वही अधिक मास
यह कितने समय बाद आता है?
लगभग हर 32 महीने 16 दिन के आसपास एक अधिक मास आता है।
किस महीने में पड़ेगा?
जिस चंद्र मास में यह स्थिति बनेगी, उसी के नाम से अधिक मास जाना जाएगा
जैसे:
• अधिक श्रावण
• अधिक आश्विन
यही कारण है कि यह हर बार अलग महीने में आता है।
पुरुषोत्तम मास की कथा
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब यह अतिरिक्त मास उत्पन्न हुआ, तो किसी भी देवता ने उसे स्वीकार नहीं किया। सभी ने उसे तुच्छ समझकर अस्वीकार कर दिया। तब यह मास भगवान विष्णु के पास पहुँचा।
भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम दिया “पुरुषोत्तम मास” और कहा कि इस मास में किया गया जप, तप, दान और व्रत विशेष फल देगा।
इस मास का वास्तविक महत्व
यह केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं है, बल्कि-
• आत्मचिंतन
• संयम
• और जीवन को संतुलित करने का अवसर
इस मास में बाहरी कार्य कम और आंतरिक साधना अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है।
क्या नहीं करना चाहिए?
• विवाह
• गृह प्रवेश
• नए शुभ कार्य
• बड़े निर्णय
यह समय रुकने और सोचने का है।
क्या करना चाहिए?
• भगवान विष्णु की पूजा
• मंत्र जप
• धार्मिक ग्रंथों का पाठ
• दान और सेवा
यह सब इस मास में विशेष फलदायी माना गया है।
क्या यह सभी के लिए समान होता है?
यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
हालाँकि यह मास सभी के लिए शुभ माना जाता है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति की कुंडली के अनुसार बदल सकता है।
• किसी के लिए यह साधना का समय होता है।
• किसी के लिए जीवन दिशा बदलने का।
इस विषय को और गहराई से समझें
• मुहूर्त और शुभ समय कैसे निर्धारित होता है?
• अपनी कुंडली का विस्तृत विश्लेषण कैसे करें।
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अंतिम विचार
पुरुषोत्तम मास केवल एक अतिरिक्त महीना नहीं है। यह एक ऐसा समय है जहाँ जीवन की गति थोड़ी धीमी होती है, ताकि हम स्वयं को समझ सकें।
“जब बाहरी गति रुकती है, तभी भीतर की यात्रा शुरू होती है और पुरुषोत्तम मास उसी यात्रा का अवसर है।”
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. पुरुषोत्तम मास अगली बार किस साल आएगा?
पुरुषोत्तम मास हर वर्ष नहीं आता। यह लगभग हर 32 महीने 16 दिन के अंतराल पर आता है।
इसलिए अगली बार यह मास कब आएगा, यह पंचांग की गणना देखकर ही निश्चित किया जा सकता है।
2. क्या पुरुषोत्तम मास हर साल आता है?
नहीं, पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) हर साल नहीं आता है। यह तभी आता है जब किसी चंद्र मास के दौरान सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, जिससे वह महीना अधिक मास कहलाता है। अधिक मास लगभग हर तीसरे साल आता है, जो चंद्र और सौर कैलेंडर के संतुलन के कारण होता है। पिछला पुरुषोत्तम मास 2023 में सावन महीने में (18 जुलाई से 16 अगस्त 2023) पड़ा था। वहीं अगला पुरुषोत्तम मास 2029 में 16 मार्च से 13 अप्रैल 2029 तक रहेगा।
3. कैसे पता करें कि कौन सा महीना अधिक मास होगा?
जिस चंद्र मास (अमावस्या से अमावस्या) के बीच सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, वही मास अधिक मास कहलाता है। इसलिए हर बार इसका नाम अलग हो सकता है, जैसे-अधिक श्रावण, अधिक आश्विन आदि।
4. क्या पुरुषोत्तम मास में सभी शुभ कार्य वर्जित होते हैं?
सामान्यतः विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्य इस मास में नहीं किए जाते। लेकिन पूजा, व्रत, जप और दान जैसे आध्यात्मिक कार्य अत्यंत शुभ माने जाते हैं।
5. क्या पुरुषोत्तम मास का प्रभाव सभी लोगों पर समान होता है?
नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की कुंडली के अनुसार बदल सकता है। किसी के लिए यह साधना का समय होता है, तो किसी के लिए जीवन में बदलाव का।