मासिक कार्तिगई 2026 कब है?
मासिक कार्तिगई दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला एक प्रमुख धार्मिक पर्व है, जो प्रत्येक माह कृतिका (कार्तिगई) नक्षत्र के प्रभाव में मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव और भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।
सितंबर 2026 में मासिक कार्तिगई 3 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन कृतिका नक्षत्र का प्रारंभ 3 सितंबर को रात 1:45 बजे होगा और इसकी समाप्ति 4 सितंबर को रात 12:30 बजे होगी।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मासिक कार्तिगई के दिन दीप प्रज्वलित कर भगवान शिव के ज्योति स्वरूप की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
मासिक कार्तिगई 2026 की तिथि और नक्षत्र समय
• मासिक कार्तिगई: 3 सितंबर 2026, गुरुवार
• कृतिका नक्षत्र प्रारंभ: 3 सितंबर, रात 1:45 बजे
• कृतिका नक्षत्र समाप्त: 4 सितंबर, रात 12:30 बजे
मासिक कार्तिगई और कार्तिगई दीपम क्या है? जानें महत्व और पूजा का कारण
मासिक कार्तिगाई दक्षिण भारत में मनाया जाने वाला एक प्रमुख पर्व है। यह पर्व प्रत्येक माह में जब कार्तिगई नक्षत्र प्रबल होता है उसी दिन मनाया जाता है परंतु तमिल कैलेंडर के अनुसार कार्तिगई मास में जब कार्तिगई नक्षत्र प्रबल होता है जो भारतीय पंचांग के अनुसार नवंबर से दिसंबर मास के बीच पड़ता हैं, के दिन यह त्योहार मुख्य रूप से कार्तिगई दीपम के रूप में मनाया जाता है ।
इस दिन भगवान शिव और उनके पुत्र मुरुगन की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। माना जाता है कि कार्तिगई पर्व के दिन शंकर जी ने अपने आप को ज्योति रूप में परिवर्तित किया था।
इसलिए इस पर्व पर भगवान शिव के ज्योति स्वरूप का पूजन करते है साथ ही भगवान कार्तिकेय की पूजा भक्तों को शक्ति, साहस और धैर्य प्रदान करती है।
इस अवसर पर केरल और तमिलनाडु के सभी मंदिरों में विशेष पूजा और अनुष्ठान आदि किए जाते हैं साथ ही तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई अरुणाचलेश्वर मंदिर में कार्तिगई दीपम के पर्व पर विशाल आयोजन करते हैं ।
इस दिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु अरुणाचलेश्वर मंदिर में एकत्रित होते हैं और विशाल दीपक जलाते हैं । उस विशाल दीपक को महादीपम कहा जाता है। यह दीपक भगवान शिव के ज्योति रूप का प्रतीक माना जाता है।
दक्षिण भारत में इस त्योहार को दीपावली की तरह मनाया जाता है। सभी लोग अपने अपने घरों को दिन में कोलम अर्थात रंगोली से सजाते हैं और शाम को मिट्टी के दीपक जलाकर उत्सव मनाते हैं।
उस दिन दीप उत्सव इसलिए भी मानते है क्योंकि उस दिन भगवान शिव अग्नि स्तम्भ क रूप में ब्रह्म और विष्णु जी के विवाद को रोकने के लिए उत्पन्न हुए थे इसलिए उनके इसी स्वरूप को दीप जलाकर पूजते हैं ।
मासिक कार्तिगई पूजा विधि
इस दिन सर्वप्रथम सुबह उठकर नित्यकर्म आदि से निव्रत हो लें। भगवान शिव के स्वरूप को ध्यान करते हुए उन्हे प्रणाम करें साथ ही व्रत करने का संकल्प लें ।
भगवान शंकर और कार्तिकेय (मुरुगन) जी की पूजा अपने रीतिरिवाजों के अनुसार फल, फूल, भांग, धतूरा, धूप, दीप आदि चीजों से करें साथ ही आरती करने के बाद सुख, समृद्धि और परिवार के कुशल मंगल की कामना करें। दिनभर उपवास रखें और शाम के समय पूजन करने के बाद फलाहार करें।
मासिक कार्तिगई का महत्त्व
मासिक कार्तिगाई एक पारिवारिक उत्सव है जिसमें परिवार के सदस्य एकजुट होते हैं और साथ में धार्मिक कार्यक्रम और पूजा करते हैं। यह परिवार में एकता और सम्बन्धों को मजबूत करने का मौका प्रदान करता है।
मासिक कार्तिगाई उत्सव तमिलनाडु और केरल में महत्त्वपूर्ण है और यहां की स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा है।
इस उत्सव के दौरान, लोग धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, और धार्मिक समारोहों में भाग लेते हैं और अपनी आध्यात्मिकता को संदर्भित करते हैं।