शारदा पूजा 2026 में कब है?
शारदा पूजा 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु माता शारदा (सरस्वती) की पूजा-अर्चना कर ज्ञान, विद्या, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
दिवाली के शुभ अवसर पर जब घरों में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, तो साथ ही माता शारदा, जिन्हें मां सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है, की पूजा का भी विशेष विधान है। इसे अत्यंत शुभ माना जाता है, क्योंकि मां शारदा को बुद्धि, ज्ञान, और विद्या की देवी के रूप में पूजा जाता है। दिवाली पर उनकी आराधना से न केवल भौतिक समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है, बल्कि जीवन में ज्ञान और विवेक की वृद्धि होती है। खासतौर पर विद्यार्थियों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि मां सरस्वती की कृपा से शिक्षा में सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
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शारदा पूजा का महत्व व्यापारियों के लिए भी अत्यधिक होता है। गुजरात जैसे राज्यों में इस दिन 'चोपड़ा' यानी नए बहीखातों की शुरुआत की जाती है। माना जाता है कि भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और देवी सरस्वती की एक साथ पूजा करने से न केवल धन और संपन्नता प्राप्त होती है, बल्कि व्यापार में समझदारी और बुद्धिमत्ता का भी आशीर्वाद मिलता है। दिवाली के दिन लक्ष्मी, गणेश और कुबेर जी के साथ माता शारदा की पूजा करने से समृद्धि और विद्या का संपूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे जीवन में संतुलन और सफलता दोनों का मार्ग प्रशस्त होता है।
शारदा पूजन विधि
दीवाली पर शारदा पूजा का आयोजन घर, कार्यालय, या व्यापारिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है, जो सरल होते हुए भी अत्यधिक प्रभावी होती है। पूजा की शुरुआत सफेद वस्त्र से ढकी स्वच्छ चौकी पर माँ सरस्वती की मूर्ति या चित्र की स्थापना से होती है, क्योंकि सफेद रंग ज्ञान और शांति का प्रतीक है। पूजा सामग्री में धूप, दीप, सफेद पुष्प, फल, मिठाई, और कमल के फूल आदि शामिल करें, और शुद्ध घी का दीपक जलाकर शंख घंटा आदि बजायें। माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए सरस्वती वंदना का पाठ करें। सभी विद्यार्थी पूजन के दौरान अपनी किताबों और लेखन सामग्री को पूजन स्थान पर रखते है, ताकि माँ सरस्वती का आशीर्वाद उन पर बना रहे। पूजा के दौरान भक्त माँ सरस्वती से जीवन में ज्ञान, विवेक और सही दिशा प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं।
शारदा पूजन का महत्त्व
दीवाली, जो रोशनी और उल्लास का पर्व है, जीवन में समृद्धि और आनंद के सभी पहलुओं का उत्सव है। इस पावन अवसर पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी के साथ-साथ देवी शारदा या माता सरस्वती का पूजन भी विधिपूर्वक किया जाता है।
हमारी सनातन परंपरा में, माता लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि माता शारदा को बुद्धि और विवेक की देवी के रूप में पूजा जाता है। धन केवल सुख और समृद्धि का साधन नहीं है; इसके उचित उपयोग और संरक्षण के लिए बुद्धि और विवेक का होना अनिवार्य है।
इसलिए, भक्त इस दिन माँ लक्ष्मी से धन और समृद्धि की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं और इसके बाद माता शारदा की पूजा कर उनसे बुद्धि और विवेक की प्राप्ति की कामना करते हैं। विशेष रूप से छात्रों के लिए, शारदा पूजा का यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन, छात्र देवी सरस्वती की आराधना करते हैं, जिससे उन्हें शिक्षा और अध्ययन में उत्कृष्टता प्राप्त करने का आशीर्वाद मिलता है।
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