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शनि स्तोत्र (दशरथ कृत): शनि पीड़ा से रक्षा करने वाला दिव्य स्तोत्र
लेखक: कृष्णा

शनि स्तोत्र (दशरथ कृत): शनि पीड़ा से रक्षा करने वाला दिव्य स्तोत्र

शनि स्तोत्र क्या है?

शनि स्तोत्र (दशरथ कृत) एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र माना जाता है, जिसकी रचना महाराजा दशरथ द्वारा भगवान शनि देव को प्रसन्न करने के लिए की गई थी।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत प्राप्त होती है।

यह स्तोत्र केवल शनि देव की स्तुति नहीं, बल्कि उनके कठोर प्रभावों को शांत करने का एक शक्तिशाली आध्यात्मिक माध्यम भी माना जाता है।

यदि आप शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या या बार-बार आने वाली बाधाओं से परेशान हैं तो:-शनि जप अनुष्ठान के बारे में विस्तार से जान सकते हैं। 

शनि स्तोत्र (दशरथ कृत)

नमः कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च । नमः कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नमः ॥

हिंदी अर्थ: हे श्यामवर्ण वाले, हे नीलकण्ठ वाले। कालाग्नि रूप वाले, हल्के शरीर वाले।। स्वीकारो नमन मेरे, शनि देव हम तुम्हारे। सच्चे सुकर्म वाले हैं, मन से हो तुम हमारे।। स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे।।

नमो निर्मासदेहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च । नमो विशालनेत्राय शुष्कोदरभयाकृते ॥

हिंदी अर्थ: हे दाढ़ी-मूँछों वाले, लम्बी जटाएँ पाले। हे दीर्घ नेत्र वाले, शुष्कोदरा निराले।। भय आकृति तुम्हारी, सब पापियों को मारे। स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे।।

नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णे च वै पुनः । नमो दीर्घाय शुष्काय कालदंष्ट्र नमोऽस्तु ते ॥

हिंदी अर्थ: हे पुष्ट देहधारी, स्थूल-रोम वाले। कोटर सुनेत्र वाले, हे वज्र देह वाले।। तुम ही सुयश दिलाते, सौभाग्य के सितारे। स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे।। 

नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नमः । नमो घोराय रौद्राय भीषणाय करालिने ॥

हिंदी अर्थ: हे घोर रौद्र रूपा, भीषण कपाल भूपा। हे नमन सर्वभक्षी, बलमुख शनि अनूपा।। हे भक्तों के सहारे, शनि! सब हवाले तेरे। हैं पूज्य चरण तेरे। स्वीकारो नमन मेरे।। 

नमस्ते सर्वभक्षाय बलीमुख नमोऽस्तु ते । सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च ॥

हिंदी अर्थ: हे सूर्य-सुत तपस्वी, भास्कर के भय मनस्वी। हे अधोदृष्टि वाले, हे विश्वमय यशस्वी।। विश्वास श्रद्धा अर्पित, सब कुछ तू ही निभाले। स्वीकारो नमन मेरे। हे पूज्य देव मेरे।। 

अधोदृष्टे नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तु ते । नमो मन्दगते तुभ्यं निस्त्रिशाय नमोऽस्तु ते ॥

हिंदी अर्थ: अति तेज खड्गधारी, हे मन्दगति सुप्यारी। तप-दग्ध-देहधारी, नित योगरत अपारी।। संकट विकट हटा दे, हे महातेज वाले। स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे।।

तपसा दग्धदेहाय नित्यं योगरताय च । नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः ॥

हिंदी अर्थ: नित प्रिय सुधा में रत हो, अतृप्ति में निरत हो। हो पूज्यतम जगत में, अत्यंत करुणा नित हो।। हे ज्ञान नेत्र वाले, पावन प्रकाश वाले। स्वीकारो भजन मेरे। स्वीकारो नमन मेरे।।

ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मजसूनवे । तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ॥

हिंदी अर्थ: जिस पर प्रसन्न दृष्टि, वैभव सुयश की वृष्टि। वह जग का राज्य पाये, सम्राट तक कहाये।। उत्तम स्वभाव वाले, तुमसे तिमिर उजाले। स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे।।

देवासुरमनुष्याश्च सिद्धविद्याधरोरगाः । त्वया विलोकिताः सर्वे नाशं यान्ति समूलतः ।

हिंदी अर्थ: हो वक्र दृष्टि जिस पर, तत्क्षण विनष्ट होता। मिट जाती राज्यसत्ता, हो के भिखारी रोता।। डूबे न भक्त-नैया, पतवार दे बचा ले। स्वीकारो नमन मेरे। शनि पूज्य चरण तेरे।। 

प्रसादं कुरु मे देव वरार्हो ऽहमुपागतः ॥

हिंदी अर्थ: हो मूलनाश उनका, दुर्बुद्धि होती जिन पर। हो देव असुर मानव, हो सिद्ध या विद्याधर।। देकर प्रसन्नता प्रभु, अपने चरण लगा ले। स्वीकारो नमन मेरे। स्वीकारो भजन मेरे।।

शनि स्तोत्र का पाठ कब और कैसे करें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि स्तोत्र का पाठ शनिवार के दिन करना अत्यंत शुभ माना जाता है, विशेष रूप से प्रातःकाल या सूर्यास्त के बाद।

भक्तजन श्रद्धा और नियमपूर्वक स्तोत्र का पाठ करते समय तिल के तेल का दीपक जलाते हैं तथा काले तिल या शमी पत्र अर्पित करते हैं।

मान्यता है कि नियमित रूप से शनि स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक शक्ति और शनि संबंधी कष्टों से राहत प्राप्त होती है।

शनि स्तोत्र पाठ के प्रमुख लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि स्तोत्र का नियमित पाठ करने से:

• शनि दोष और अशुभ ग्रह प्रभाव शांत होने लगते हैं। 

• मानसिक तनाव और भय कम होता है। 

• करियर और व्यापार में आ रही बाधाओं से राहत मिलती है। 

• आर्थिक स्थिरता और सकारात्मकता बढ़ती है। 

• दुर्घटना, विवाद और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा प्राप्त होती है। 

• आत्मविश्वास और आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि होती है। 

शनि दोष से राहत के लिए क्या करें?

यदि आपकी कुंडली में शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या या अशुभ शनि का प्रभाव चल रहा है, तो विधि-विधान से किया गया शनि जप अनुष्ठान अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

सनातन ज्योति में अनुभवी वैदिक आचार्य पूर्ण वैदिक विधि और उचित संकल्प के साथ शनि जाप अनुष्ठान संपन्न करवाते हैं। यदि आप भी यह अनुष्ठान करवाना चाहते हैं तो:-आप सनातन ज्योति से संपर्क कर सकते है।  

यदि आप शनि देव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं, शनि पीड़ा से राहत पाना चाहते हैं तथा शनि स्तोत्र (दशरथ कृत) के पाठ एवं अनुष्ठान की विधि के बारे में जानना चाहते हैं: - तो शनि स्तोत्र (दशरथ कृत) अनुष्ठान के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शनि स्तोत्र (दशरथ कृत) क्या है?

शनि स्तोत्र (दशरथ कृत) महाराजा दशरथ द्वारा रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र है, जिसे शनिदेव को प्रसन्न करने वाला अत्यंत प्रभावशाली पाठ माना जाता है।

2. शनि स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन प्रातःकाल या सूर्यास्त के बाद शनि स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है।

3. क्या शनि स्तोत्र से साढ़ेसाती और ढैय्या में राहत मिलती है?

मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक शनि स्तोत्र का पाठ करने से साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष के अशुभ प्रभावों को शांत करने में सहायता मिलती है।

4. शनि स्तोत्र पाठ के क्या लाभ हैं?

शनि स्तोत्र का नियमित पाठ मानसिक शांति, आत्मविश्वास, ग्रह शांति, बाधाओं से राहत और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।

5. क्या शनि जप अनुष्ठान शनि दोष में लाभकारी होता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि-विधान से किया गया शनि जप अनुष्ठान शनि दोष, साढ़ेसाती और अशुभ ग्रह प्रभावों को शांत करने में अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

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