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दिवाली पर चोपड़ा पूजा: बही-खाता पूजन का महत्व और संपूर्ण विधि
लेखक: Pawan Shukla

दिवाली पर चोपड़ा पूजा: बही-खाता पूजन का महत्व और संपूर्ण विधि

चोपड़ा पूजा 2026 में कब है?

वर्ष 2026 में चोपड़ा पूजा 8 नवंबर, रविवार को दीपावली के शुभ अवसर पर की जाएगी। यह विशेष पूजन मुख्य रूप से व्यापारियों और व्यवसाय से जुड़े लोगों द्वारा किया जाता है, जिसमें नए बही-खातों, लेखा-पुस्तकों, कंप्यूटर, लैपटॉप तथा व्यापार में उपयोग होने वाले उपकरणों का पूजन किया जाता है।

सनातन ज्योति में अनुभवी आचार्यों द्वारा विभिन्न देवी-देवताओं के वैदिक अनुष्ठान पूर्ण विधि-विधान के साथ संपन्न कराए जाते हैं। यदि आप किसी विशेष अनुष्ठान की विधि, धार्मिक महत्व या उससे जुड़े आध्यात्मिक लाभों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो: - अनुष्ठानों से संबंधित निःशुल्क परामर्श एवं विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि दीपावली के दिन भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और माँ शारदा के साथ चोपड़ा पूजा करने से व्यापार में वृद्धि, आर्थिक समृद्धि, शुभ लाभ तथा आने वाले वर्ष में सफलता प्राप्त होती है। इसलिए यह दिन नए वित्तीय कार्यों और लेखा-जोखा के शुभारंभ के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को दिवाली के दिन गणेश लक्ष्मी जी की पूजा होती है। जो व्यापारी लोग है वे दिवाली के दिन नई पुस्तिका खरीदते है और गणेश लक्ष्मी जी के साथ माँ शारदा और नई पुस्तिका का भी पूजन करते है तथा उसी दिन से उस पुस्तिका में अपना बही खाता लिखना शुरू करते है। उस बही-खाते में इस दिन शुभ लाभ लिखने का विशेष महत्व है। इस दिन एक विशेष प्रकार का अनुष्ठान होता है जिसे अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है- यह गुजरात में चोपड़ा पूजन, उत्तर भारत में बही खाता, शारदा पूजा, महालक्ष्मी पूजन और मुहूर्त पूजन के नाम से जाना जाता है।

चोपड़ा पूजा क्या होती है?

अधिकांश व्यापारी इस दिवाली के अवसर पर अपनी दुकाने अधिकतर बंद कर देते है, इसके बाद शुभ समय में अनुष्ठान के लिए अपने कर्मचारियों को आमंत्रित करते है। इस दिन गणेश-लक्ष्मी जी की पूजा के साथ उस व्यापार में उपयोग की जाने वाली नई बही-खातों की पूजा का अनुष्ठान करते है। पहले पूजा में केवल पुस्तके ही शामिल होती थी पर आज के जमाने में कंप्यूटर से प्रिन्ट किये हुए पेपर, कंप्यूटर या लेपटॉप जिसमे व्यापार का हिसाब-किताब लिखा होता है उसे भी शामिल कर लेते है। दिवाली के दिन किये जाने वाले इस प्रकार के अनुष्ठान को ही ‘चोपड़ा पूजा’ कहते है।

ऐसा माना जाता है की बही-खाते की पुस्तकों को गणेश-लक्ष्मी और माँ शारदा को समर्पित करके उनका पूजन करने से व्यापार के लेन-देन में आने वाली सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती है और गणेश भगवान, माँ लक्ष्मी और शारदा देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है तथा आने वाले भविष्य में सफलता मिलती है।

पूजा विधि

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन सायंकाल पूजा करने का विधान है। वैसे तो यह पूजा व्यापारी लोग अपने दुकानों या व्यापार वाले स्थानों पर भी करते है पर जो छोटे व्यापारी है वे इस पूजा को घर पर ही कर सकते है। सर्वप्रथम पूजा वाले स्थान को साफ सुथरा कर ले। फिर एक स्वच्छ चौकी पर सफेद या लाल कपड़ा बिछा दे। गणेश, लक्ष्मी और शारदा माँ की मूर्ति या तस्वीर को उस चौकी पर स्थापित कर दे। अपने पुराने बही-खाता की पुस्तिका और नई पुस्तिका को वही पर रखे। धूप, दीप, घी, मिष्ठान आदि नैवेद्यों से उनकी पूजा करे, माला चढ़ाए, भोग लगाए अगर हो सके तो वैदिक मंत्रों का जप करे फिर आरती करे। तदन्तर अपने व्यापार की बरक्कत के लिए उनसे प्रार्थना करे।

चोपड़ा पूजन का महत्व

गुजरात में दिवाली के दिन विशेष प्रकार का अनुष्ठान होता है जिसे चोपड़ा पूजा के नाम से जाना जाता है। चौपड़ा पूजा में गणेश, लक्ष्मी और माँ शारदा की पूजा होती है। कारोबार से संबंधित जितनी वस्तुएं होती है उनकी भी पूजा करने से कारोबार में वृद्धि और कार्य-क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। भगवान गणेश बुद्धि प्रदान करते है, माँ लक्ष्मी धन देती है और माँ शरदा ज्ञान और विद्या की देवी है इसलिए कारोबार में तरक्की के लिए अच्छी बुद्धि, धन और अच्छे ज्ञान की आवश्यकता होती है इसलिए जीवन में व्यवसाये संबंधी सफलता प्राप्त करने के लिए दिवाली के दिन चोपड़ा पूजा की जाती है। आने वाला वाला वर्ष फलदायी होता है, सुख और शांति प्राप्त होती है।

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