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वैकसी विसाकम: भगवान मुरुगन जन्मोत्सव, इतिहास, महत्व, पूजा विधि और लाभ
लेखक: रुचि

वैकसी विसाकम: भगवान मुरुगन जन्मोत्सव, इतिहास, महत्व, पूजा विधि और लाभ

वैकसी विसाकम 2026 में कब है?

वैकसी विसाकम 2026 तमिल कैलेंडर के अनुसार शनिवार, 30 मई को मनाया जाएगा। इस दिन विसाकम् नक्षत्र 29 मई को सुबह 10:39 बजे से शुरू होकर 30 मई को दोपहर 1:21 बजे तक रहेगा।

यह दिन भगवान मुरुगन (कार्तिकेय) के जन्मोत्सव के रूप में पूरे तमिलनाडु में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

वैकसी विसाकम कब आता है?

तमिल कैलंडर के अनुसार वैकसी(वैशाख) महीने में जब विशाखम नक्षत्र होता है तो इस शुभ दिन को भगवान मुरूगन के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

तमिल में लोग इस दिन भगवान मुरुगन की विशेष पूजा-अर्चना करते है। भगवान मुरूगन शिव और पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ही है।

तमिल लोग इन्हे शत्रुनाशक व देवताओं के सेनापति के रूप में पूजते है । तमिल लोग भगवान कार्तिकेय को प्रमुख प्राचीन देवता मनाते है। भगवान मुरूगन का जन्म वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को विशाखा नक्षत्र में हुआ था। इसलिए इस शुभ दिन को तमिल लोग बहुत ही धूमधाम से मनाते है।

भगवान मुरूगन कौन है? क्या है इनकी कथा

स्कन्दपुराण के अनुसार तारकासुर नामक एक राक्षस था। उसने ब्रह्मा जी की बहुत ही घोर तपस्या की। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ब्रह्मा प्रकट हुए और तारकासुर से वर मांगने को कहा। तारकासुर ने अजेय और अमर होने का वरदान मांगा, उसके इस वरदान पर ब्रह्मा जी कहने लगे कि इस सृष्टि में कोई भी अजेय और अमर नहीं हो सकता।

तुम्हें अपनी मृत्यु का एक कारण तो बताना ही पड़ेगा। ब्रह्मा जी की बात सुनकर तारकासुर ने कहा कि मेरी मृत्यु भगवान शिव के पुत्र के अलावा किसी से न हो। तारकासुर जानता था की भगवान शिव वैरागी है वे कभी भी विवाह नहीं करेंगे और न ही उनके पुत्र होगा इसलियए मैं सदैव ही अजय और अमर ही रहूँगा।

ब्रह्मा जी वरदान देकर चले गए। इसके बाद से तारकासुर ने देवताओं से तीनों लोक छीन लिये और तीनों लोको का स्वामी स्वयं बन बैठा। चारों ओर उसके आतंक का भय व्याप्त हो गया।

भयभीत होकर देवता विष्णु भगवान के पास गए। इसके बाद ब्रह्मा, विष्णु और समस्त देवताओं ने भगवान शिव जी को विवाह के लिए तैयार किया। शिव जी का विवाह माता पार्वती से हुआ। भगवान शिव और माँ पार्वती के ध्यान से एक शक्ति प्रकट हुयी।

उस शक्ति ने छह मुँह वाले एक बालक का रूप धारण कर लिया जिसका पालन-पोषण कृतिकाओं ने किया इसलिए उनका नाम ‘कार्तिकेय’ पड़ा। इसके बाद उन्होंने तारकासुर का वध कर दिया और उसके वध से सभी नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो गयी।

सभी देवताओं ने कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति घोषित कर दिया। इनके छह मुख है। हाथ में एक शक्तिशाली ‘बरछा’ है। उनका वाहन ‘मोर’ है। वे साहस और निडरता के प्रतीक है।

वैकसी विसाकम के शुभ दिन में क्या करते है?

वैकसी मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि जब विशाखम नक्षत्र से युक्त होती है तो तमिलनाडु में इसे मुरूगन जयंती के रूप में मनाते है। इस दिन श्रद्धालु भगवान मुरूगन के मंदिर में दूध ले जाते है और उसी दूध से उनका अभिषेक करते है।

भोग में मिठाई, फल आदि नैवेद्य अर्पित करते है, भजन-कीर्तन करते है, अनुष्ठान करते है, हवन करते है, यज्ञ करते है, इनके मंत्रों का जाप करते है।

इनकी भव्य आरती करते है और अपनी मनोकामना पूर्ण करने के लिए प्रार्थना करते है। विशाखा नक्षत्र से युक्त वैशाख मास की पूर्णिमा की तिथि बहुत ही शुभ होती है।

इस दिन सच्चे मन से पूजा अर्चना करने से साधक को आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। आध्यात्मिक ऊर्जा से ही सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है जिससे लोभ, क्रोध, अहंकार जैसे शत्रुओं का नाश हो जाता है।

इस शुभ दिन पर सही मुहूर्त में पूजा करने से अधिक फल प्राप्त होता है। अपने शहर के अनुसार सटीक शुभ मुहूर्त और पूजा मार्गदर्शन के लिए हमारे अनुभवी आचार्यों से संपर्क करें। 

भगवान मुरूगन के पूजा का महत्व

भगवान मुरूगन अच्छाई का प्रतीक है। इनकी पूजा करने से परिवार की सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। मन शांत रहता है। ये अपने भक्तों की सभी कामनाओं को पूर्ण करते है।

परिवार में उत्पन्न हुयी नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और परिवार के सदस्यों के बीच सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है। यज्ञ करने से संसार की परिस्थितियों का समना करने के लिए आत्मबल और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।

भगवान मुरूगन अपने भक्तों की हानिकारक शक्तियों से सदैव ही रक्षा करते है। भगवान मुरूगन के भक्तों के घर में कभी भी हानिकारक शक्तियां नहीं प्रवेश कर सकती।

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