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श्रावण सोमवार व्रत: पूजा विधि, कथा और धार्मिक महत्व
लेखक: रुचि

श्रावण सोमवार व्रत: पूजा विधि, कथा और धार्मिक महत्व

भगवान शिव को समर्पित श्रावण सोमवार व्रत सनातन धर्म के सबसे पवित्र और लोकप्रिय व्रतों में से एक माना जाता है। श्रावण (सावन) मास का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की विशेष आराधना के लिए समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने, शिवलिंग का जलाभिषेक करने, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र तथा "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।

हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि श्रावण सोमवार व्रत 2026 कब है, सावन का पहला सोमवार कब है, श्रावण सोमवार कब से शुरू होगा, सावन सोमवार व्रत 2026 की तिथि, श्रावण सोमवार व्रत की पूजा विधि, श्रावण सोमवार व्रत के नियम और श्रावण सोमवार व्रत का महत्व क्या है।

यदि आप भी इन सभी प्रश्नों के उत्तर एक ही स्थान पर विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए संपूर्ण मार्गदर्शिका है।

सावन सोमवार व्रत 2026 कब से शुरू है?

वर्ष 2026 में सावन सोमवार व्रत 3 अगस्त 2026, सोमवार से प्रारंभ होगा। वर्ष 2026 में श्रावण मास के दौरान कुल चार सोमवार पड़ेंगे। सनातन धर्म में इन चारों सोमवार का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों भगवान शिव का अभिषेक, व्रत, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पित करना तथा शिव मंत्रों का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।

जो श्रद्धालु पूरे श्रावण मास के सभी सोमवार का व्रत करते हैं, उनके लिए यह महीना भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर माना जाता है।

सावन सोमवार व्रत 2026 की सभी तिथियां

वर्ष 2026 में सावन सोमवार की तिथियां इस प्रकार हैं-

• पहला सावन सोमवार: 3 अगस्त 2026, सोमवार 

• दूसरा सावन सोमवार: 10 अगस्त 2026, सोमवार 

• तीसरा सावन सोमवार: 17 अगस्त 2026, सोमवार 

• चौथा सावन सोमवार: 24 अगस्त 2026, सोमवार

यदि आप श्रावण सोमवार की तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, अभिषेक का समय एवं विस्तृत पंचांग देखना चाहते हैं तो: -हमारा विस्तृत पंचांग अवश्य देखें। 

सावन सोमवार व्रत क्या है?

सावन सोमवार व्रत भगवान शिव को समर्पित एक विशेष धार्मिक व्रत है, जिसे श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार को रखा जाता है। इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान करके भगवान शिव की पूजा करते हैं, शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित करते हैं तथा पूरे दिन व्रत रखकर शिव मंत्रों का जाप करते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि श्रावण मास वह समय है जब भगवान शिव की आराधना का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। इसलिए सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलती है।

सावन सोमवार व्रत का महत्व

श्रावण मास को भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। पुराणों के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष का पान भगवान शिव ने इसी काल में किया था। विष की उष्णता को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। तभी से श्रावण मास में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई।

इसी कारण सावन सोमवार के दिन जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा भगवान शिव के मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से-

• भगवान शिव एवं माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। 

• विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होने की मान्यता है। 

• योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना की जाती है। 

• दांपत्य जीवन में सुख और प्रेम बना रहता है। 

• परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। 

• मनोकामनाओं की पूर्ति तथा आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। 

सावन सोमवार का संबंध माता पार्वती से क्यों माना जाता है?

बहुत कम लोग जानते हैं कि श्रावण सोमवार केवल भगवान शिव की उपासना का ही पर्व नहीं है, बल्कि इसका माता पार्वती से भी गहरा संबंध माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप और व्रत किए थे। इसी कारण आज भी अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति के लिए तथा विवाहित महिलाएँ अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु की कामना से श्रावण सोमवार का व्रत रखती हैं।

इसी वजह से श्रावण सोमवार के दिन भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा भी विशेष रूप से की जाती है।

यदि आप सावन सोमवार व्रत, भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप या किसी विशेष वैदिक अनुष्ठान के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो: -सनातन ज्योति के अनुभवी आचार्यों से निःशुल्क परामर्श एवं मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। 

सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि

सावन सोमवार के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा पूरे विधि-विधान, श्रद्धा और पवित्र मन से करनी चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से किया गया शिव पूजन शीघ्र फल प्रदान करता है। यदि आप पहली बार श्रावण सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो नीचे दी गई पूजा विधि का पालन कर सकते हैं।

प्रातःकाल की तैयारी

• ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय से पहले उठें। 

• स्नान करके स्वच्छ अथवा सफेद वस्त्र धारण करें। 

• पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें। 

• भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। 

यदि संभव हो तो इस दिन शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। यदि मंदिर जाना संभव न हो, तो घर में स्थापित शिवलिंग या भगवान शिव के चित्र के समक्ष भी पूजा की जा सकती है।

भगवान शिव का अभिषेक कैसे करें?

सावन सोमवार के दिन शिवलिंग पर निम्न सामग्री श्रद्धापूर्वक अर्पित की जाती है-

• गंगाजल 

• शुद्ध जल 

• कच्चा दूध 

• दही 

• शहद 

• घी 

• शक्कर 

• पंचामृत 

• बेलपत्र 

• भांग 

• धतूरा 

• आक के पुष्प 

• सफेद चंदन 

• अक्षत 

• पुष्प 

• धूप एवं दीप 

अभिषेक करते समय "ॐ नमः शिवाय" अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

इसके पश्चात शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें। ध्यान रखें कि बेलपत्र साफ, ताजा और तीन पत्तियों वाला होना चाहिए।

सावन सोमवार की पूजा में कौन-से मंत्र बोलें?

पूजा के समय निम्न मंत्रों का जाप विशेष फलदायी माना जाता है-

• ॐ नमः शिवाय

• महामृत्युंजय मंत्र

• शिव पंचाक्षरी मंत्र

यदि समय हो तो शिव चालीसा, रुद्राष्टकम अथवा शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।

सावन सोमवार व्रत के नियम

अक्सर लोग पूछते हैं- सावन सोमवार व्रत 2026 कैसे रखें?, व्रत में कौन-कौन से नियमों का पालन करना चाहिए? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण सोमवार व्रत के दौरान निम्न नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है-

• ब्रह्मचर्य का पालन करें। 

• क्रोध, झूठ और विवाद से दूर रहें। 

• मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज का सेवन न करें। 

• सात्विक भोजन करें। 

• भगवान शिव का अधिक से अधिक स्मरण करें। 

• पूरे दिन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहें। 

• जरूरतमंद लोगों की सहायता करें। 

• गौ सेवा एवं दान-पुण्य करें। 

• किसी का अपमान न करें। 

• घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें। 

श्रद्धा, संयम और सच्चे मन से किया गया व्रत ही अधिक फलदायी माना जाता है।

सावन सोमवार व्रत 2026 में क्या खाएं?

यदि आप सोमवार का व्रत रख रहे हैं, तो सामान्यतः निम्न फलाहार ग्रहण किए जा सकते हैं-

• फल 

• दूध 

• दही 

• मखाना 

• साबूदाना 

• सिंघाड़े का आटा 

• कुट्टू का आटा 

• राजगिरा 

• मूंगफली 

• नारियल पानी 

कुछ श्रद्धालु केवल फलाहार करते हैं, जबकि कुछ केवल जल ग्रहण करके भी व्रत रखते हैं। यह व्यक्ति की श्रद्धा, स्वास्थ्य और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।

श्रावण सोमवार व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए?

श्रावण सोमवार व्रत के दौरान सामान्यतः इन चीजों से बचना चाहिए-

• मांसाहार 

• मदिरा 

• तंबाकू 

• लहसुन 

• प्याज 

• तामसिक भोजन 

यदि आप फलाहार व्रत कर रहे हैं, तो सामान्य भोजन ग्रहण नहीं किया जाता।

श्रावण सोमवार व्रत 2026 कौन रख सकता है?

श्रावण सोमवार व्रत के बारे में एक सामान्य भ्रम है कि इसे केवल महिलाएँ ही रख सकती हैं।

वास्तव में ऐसा नहीं है।

यह व्रत-

• पुरुष 

• महिलाएँ 

• अविवाहित युवक 

• अविवाहित युवतियाँ 

• विवाहित दंपत्ति 

• वृद्ध व्यक्ति 

सभी श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार रख सकते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार-

• अविवाहित कन्याएँ योग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। 

• विवाहित महिलाएँ अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु के लिए व्रत करती हैं। 

• पुरुष परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और भगवान शिव की कृपा के लिए व्रत रखते हैं। 

श्रावण सोमवार व्रत के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखें?

श्रावण सोमवार केवल उपवास का दिन नहीं है, बल्कि आत्मसंयम और भगवान शिव के प्रति समर्पण का दिन माना जाता है।

इस दिन-

• किसी की निंदा न करें। 

• क्रोध से बचें। 

• जरूरतमंदों की सहायता करें। 

• पशु-पक्षियों को भोजन कराएँ। 

• शिव मंदिर में दीपक जलाएँ। 

• भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त पूजन करें। 

ऐसा करने से व्रत का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

सावन सोमवार व्रत की पौराणिक कथा

शिव जी की महिमा की अनेकों कथाएं प्रचलित है पर यह कथा स्कन्दपुराण से सत्यापित कथा है । जिनके मन में शिव भक्ति होती है और वे इस कथा को सुनते है और इस संसार के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त करते है । सोमवार व्रत की पुण्यकारी कथा कुछ इस प्रकार है-

बहुत समय पहले की बात है। आर्यावर्त में एक राजा राज्य करते थे जिनका नाम चित्रवर्मा था। वे दुष्टों को सजा देने के लिए यमराज के समान थे। वे कुमार्गगामी पुरुषों को दंडित करते थे तथा सभी प्रकार के यज्ञों का अनुष्ठान करने वाले और शरण में आए हुए लोगों का समर्थन करते थे। भगवान महादेव और श्री हरि में उनकी बड़ी भक्ति थी।

चित्रवर्मा ने अनेक पराक्रमी, बलशाली पुत्रों को पाकर एक सुंदर मुख वाली कन्या प्राप्त की जिसका नाम सीमन्तिनी रखा गया। गुण व दोषों तथा लक्षणों को जानने वाले विद्वानों को बुलाकर राजा चित्रवर्मा ने अपनी कन्या को दिखलाया। एक बहुज्ञ विद्वान ने कहा यह कन्या परम सुंदरी सरस्वती के समान सब कलाओं को जानने वाली तथा लक्ष्मी के समान सद्गुणों से सुशोभित होगी।

यह दस हजार वर्षों तक अपने स्वामी के साथ उत्तम सुख का उपभोग करेगी। इसके बाद एक दूसरे विद्वान ने बताया कि यह कन्या चौदहवें वर्ष में विधवा हो जाएगी। विद्वानों के इस प्रकार के वचनों को सुनकर राजा चित्रवर्मा कुछ क्षणों के लिए शोक में डूब गए। फिर विद्वानों को विदा करके ‘सब कुछ भाग्य के अनुसार ही होता है’ ऐसा विचार करके राजा ने चिंता छोड़ दी।

सीमन्तिनी धीरे-धीरे बड़ी हो गयी। विद्वान के द्वारा बताए गए कथन को अपनी सखी के मुख से सुनकर सीमन्तिनी को बहुत दुख हुआ। चिंतायुक्त होकर उसने मुनि याज्ञवल्क्य जी की पत्नी मैत्रेयी से पूछा –‘माता! मैं आपकी शरण में आयी हूँ मुझे सौभाग्य बढ़ाने वाले सत्कर्म का उपदेश दीजिए। सीमन्तिनी के वचन सुनकर मैत्रयी ने कहा- सुंदरी! तुम शिव जी सहित पार्वती जी की शरण में जाओ और प्रत्येक सोमवार को विधि पूर्वक उनका व्रत करती रहना।

भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा से तुम बड़ी से बड़ी आपत्ति से भी मुक्त हो जाओगी। चाहे कितना बड़ा संकट क्यों न आ जाए तुम पूजा करना न छोड़ना। सोमवार व्रत के प्रभाव से तुम घोर भय से भी पार पा जाओगी। इस प्रकार सीमन्तिनी को आश्वासन देकर मैत्रेयी आश्रम को चली गयी। राजकुमारी ने उनके वचन के अनुसार सोमवार व्रत करना शुरू कर दिया। 

राजा इन्द्रसेन जो की राजा नल और दमयन्ती के पुत्र थे उनका एक पुत्र था जिसका नाम चंद्रागद था । राजा चित्रवर्मा ने इन्द्रसेन के पुत्र चंद्रागद से अपनी कन्या सीमन्तिनी का विवाह कर दिया। विवाह के कुछ काल तक चंद्रागद ससुराल में ही रहे। 

एक दिन चंद्रागद अपने मित्रों के साथ यमुना पर जाने के लिए एक नाव में सवार हुए। भाग्यवश वह नाव मल्लाहों सहित यमुना में डूब गयी। यमुना के दोनों तटों पर हाहाकार मच गया। यमुना में डूबने वालों में कुछ तो मर गए कुछ जलीय जन्तुओ के पेट में चले गए और कुछ यमुना के उस महाजाल में अद्रश्य हो गए। यह समाचार सुनकर चित्रवर्मा बहुत व्याकुल हो उठे और यमुना के तट पर आकर भारी शोक के कारण वहीं बेहोश होकर गिर पड़े।

फिर कुछ मंत्रियों और बड़े वृद्धों के समझाने पर चित्रवर्मा अपनी नगरी में आए। चित्रवर्मा ने अपने दामाद का अंतिम संस्कार वहाँ आए हुए चंद्रागद के परिवार वालों से करवाया। सीमन्तिनी भी अपने पति के साथ सती हो जाने के लिए उद्गत हुयी पर स्नेहवश होने के कारण चित्रवर्मा ने अपनी पुत्री को ऐसा करने से रोक दिया।

इतना होने के बाद भी सीमन्तिनी विधवा रूप में सोमवार व्रत करती रही। उसे शिव आराधना करते-करते तीन वर्ष बीत गए। उधर शोक में डूबे इन्द्रसेन को उनके भाइयों ने बलपूर्वक दबाकर राज्य छीन लिया और पत्नी सहित उन्हे कारगर में डाल दिया। 

इधर चंद्रागद यमुना के महाजल में डूब कर पाताल लोक पहुँच गया। पाताल लोक में नागवधुएं क्रीडा कर रही थी। उन्होंने राजकुमार को देखा तो वे उसे तक्षक नाग के महल में ले गयी। राजकुमार को देखकर तक्षक नाग ने उन नागिनों से पूछा- ‘यह कौन है और कहाँ से आया है?’ उन्होंने उत्तर दिया हमने इसे यमुनाजल में देखा है, इसके कुल, नाम और पता न होने के कारण आपके पास ले आयी हूँ। तब तक्षक नाग ने राजकुमार से पूछा ‘तुम किसके पुत्र हो? कौन हो? कौन सा तुम्हारा देश है? ‘ 

राजपुत्र ने कहा- पृथ्वी लोक में निषध नामक एक देश है। वहाँ के राजा नल पुण्यश्लोक माने जाते है, उनके पुत्र इन्द्रसेन हुए और उनका पुत्र मैं हूँ, मेरा नाम चंद्रागद है। मैं अभी विवाह करके ससुराल में ही ठहरा था और यमुना जल में विहार करता हुआ डूब गया। ये नागपत्नियाँ मुझे आपके पास ले आयी।

अपने पूर्व जन्म के पुण्यों का फल मुझे आज मिल गया। मुझे आपके दर्शन हो गए और आज आपके दर्शन करके मैं धन्य हो गया हूँ । यह सुनकर तक्षक नाग बहुत प्रसन्न हो गए और अत्यंत मनोहर वचन बोले- राजकुमार! तुम डरो मत, धैर्य रखो और बताओ, तुम सम्पूर्ण देवताओं में किसकी पूजा करते हो?

राजकुमार ने कहा- जो देवो के देव महादेव है, उन्ही विश्वात्मा उमापति भगवान शिव की मैं पूजा करता हूँ। 

यह सुनकर तक्षक नाग बहुत प्रसन्न हो गए और बोले- मैं तुमपर प्रसन्न हूँ, देखो यह रत्नमय लोक है, मनोवांछित कामना पूर्ण करने वाले कल्पवृक्ष है ,यहाँ न तो बुढ़ापे की पीड़ा होती है और न किसी प्रकार का दुख ही है। तुम अपनी इच्छानुसार यही रहो और यथायोग्य सुख का उपयोग करो। 

नागराज के ऐसा कहने पर राजकुमार हाथ जोड़कर बोले- नागराज! मेरा अभी-अभी विवाह हुआ है। मेरी पत्नी उत्तम व्रत का पालन करने वाली तथा शिव भक्ति करने वाली है। मैं अपने माता-पिता का एकलौता पुत्र हूँ। वे इस समय मुझे मृत मानकर महान शोक से घिरे होंगे। अतः मुझे किसी प्रकार से यहाँ अधिक समय तक नहीं ठहरना चाहिए। 

यह सुनकर नागराज तक्षक ने कहा- तुम जब भी मुझे याद करोगे मैं तुम्हारे सामने प्रकट हो जाऊंगा। इस प्रकार कहकर सभी सहायकों सहित, बहुत से रत्न, आभूषण दिए और एक दिव्य अश्व भेट किया जो इच्छानुसार चलने वाला था। और जाओ, तुम्हारा कल्याण हो कहकर नागराज ने उन्हे विदा किया । 

अश्व पर आरूढ़ हो चंद्रागद थोड़े ही समय में यमुना के जल से बाहर आ गए । वहीं तट पर सीमन्तिनी स्नान के लिए आयी हुयी थी। उसने मनुष्य रूप धारी नागराजों के साथ अश्व पर सवार राजकुमार को देखा। चंद्रागद ने भी सीमन्तिनी को देखा। राजकुमार ने समीप आकर सीमन्तिनी से पूछा- तुम किसकी स्त्री हो? तुम्हारा क्या नाम है? तुम किसकी कन्या हो? लज्जावश सीमन्तिनी कुछ कह न सकी तब उनकी एक सखी ने कहा- ये चित्रवर्मा की पुत्री है। इन्द्रसेन के पुत्र चंद्रागद की पत्नी है।

भाग्यवश इनके पति यमुना नदी में डूब गए, इनके श्वसुर का राज्य भी उनके भाइयों ने बलपूर्वक छीन लिया है और इनके ससुर और सास को कैद में डाल दिया है। पति के डूब जाने के कारण इसे बहुत दुख है । आज सोमवार है इसलिए यह यमुना तट पर स्नान करने के लिए आयी हुयी है। जब सारी बाते सखी ने बता दी तो सीमन्तिनी फूट -फूट कर रोने लगी और राजकुमार से कहने लगी -तुम कौन हो? और स्नेहवश मेरी बाते क्यों सुन रहे हो? मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि तुम मेरे अपने ही हो। 

क्योंकि मेरा ह्रदय तुम्हारे लिए ही अनुरक्त हो रहा है। शोक में डूब कर चंद्रागद भी दो घड़ी चुप बैठे रहे। राजकुमार ने कहा -तुम्हारे पति तुम्हें अवश्य ही मिलेंगे। तुम्हारा कल्याण हो। ऐसा कहकर चंद्रागद वहाँ से अपनी नगरी की ओर चले।

सीमन्तिनी राजकुमार के अंगों, लक्षणों और वचनों का परीक्षण करके सोचने लगी- ऐसा प्रतीत होता है कि यही मेरे पति है, पर क्या एक विधवा को अपने मरे हुए पति के दर्शन हो सकते है? मेरे सोमवार व्रत की पूजा का कहीं यही फल तो नहीं? मैत्रेयी माता ने कहा था कि सोमवार व्रत पूजा से तुम महान से भी महान दुख से पार पा जाओगी।

एक विद्वान ने कहा था कि मैं दस हजार वर्षों तक अपने पति के साथ सुखपूर्वक रहूँगी । ऐसा विचार करती हुयी सीमन्तिनी अपनी सखियों के साथ महल में वापस आ गई । 

इधर चंद्रागद नागकुमारो के साथ अपनी नगरी में आए और नागकुमारों को अपने परिवारजनों के पास भेजा जिन्होंने बलपूर्वक इन्द्रसेन का राज्य छीन लिया था। नागकुमारों ने उन परिवारजनों से कहा- तुम सब लोग महाराज इन्द्रसेन को कारागार से मुक्त करो और सिंहासन छोड़कर हट जाओ। महाराज के पुत्र चंद्रागद पाताल लोक से लौटकर यहाँ आए है।

ये यमुना जल में डूबकर नागराज तक्षक के घर जा पहुंचे थे। वहाँ से उनकी सहायता पाकर वे यहाँ पुनः लौट आए है। अगर आप लोगों ने सिंहासन से हटने में आना कानी की तो चंद्रागद के बाण तुम्हारे प्राण हर लेंगे। यह सुनकर भय से व्याप्त होकर राजा चंद्रागद के परिवरीजनों ने राजा इन्द्रसेन को कैद से आजाद कर दिया और सिंहासन लौटा दिया।

राजा इन्द्रसेन को जब अपने पुत्र के वापस लौट आने की सूचना मिली तो इन्द्रसेन की आँखों से आँसू छलक पड़े और अपने पुत्र के दर्शन को उनके नेत्र व्याकुल हो उठे। यही दशा रानी की भी थी। उसी समय चंद्रागद अपने माता पिता के पास पहुंचे और उनके चरणों में प्रणाम किया, यह देख राजा ने अपने पुत्र को अपने हृदय से लगा लिया और राजा इन्द्रसेन ने अपने पुत्र का राज्याभिषेक कराया। 

इन्द्रसेन ने अपने पुत्र चंद्रागद के वापस लौट आने की खबर चित्रवर्मा को पहुंचायी। खबर पाकर राजा चित्रवर्मा हर्षमग्न हो गए और अपनी पुत्री के विधवा स्वरूप के चिन्हों को हटवाकर उसे रत्न और आभूषण पहनवाएं। इसके बाद चित्रवर्मा ने अपनी पुत्री सीमन्तिनी को चंद्रागद के साथ अपने घर से विदा किया जिसके बाद वे सुख पूर्वक रहने लगे।

सीमन्तिनी और चंद्रागद ने दस हजार वर्षों तक नाना प्रकार के विषयों का उपभोग किया। सीमन्तिनी प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा करती हुयी सुख पूर्वक रहने लगी। इस प्रकार सोमवार व्रत के प्रभाव से सीमन्तिनी ने अपना खोया हुआ सौभाग्य पुनः प्राप्त कर लिया।

श्रावण सोमवार व्रत 2026 का धार्मिक महत्व

श्रावण मास सनातन धर्म में भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय निकले कालकूट (हलाहल) विष को भगवान शिव ने संपूर्ण सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष की तीव्रता को शांत करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

इसी घटना के कारण श्रावण मास में भगवान शिव पर जल, गंगाजल, दूध और बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

श्रावण सोमवार का व्रत केवल मनोकामना पूर्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, श्रद्धा, सेवा, भक्ति और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से-

• जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। 

• विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होने की मान्यता है। 

• योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना की जाती है। 

• दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। 

• परिवार में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। 

• मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। 

सावन सोमवार व्रत के लाभ

सावन सोमवार का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से धार्मिक ग्रंथों में अनेक शुभ फलों का उल्लेख मिलता है।

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत से-

• भगवान शिव एवं माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। 

• मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। 

• परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। 

• आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। 

• विवाह संबंधी बाधाएँ दूर होने की मान्यता है। 

• दांपत्य जीवन में मधुरता आती है। 

• मानसिक तनाव कम होता है। 

• आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित होती है। 

• आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। 

ध्यान रखें कि इन लाभों को धार्मिक आस्था और परंपराओं के संदर्भ में देखा जाता है।

सावन सोमवार व्रत 2026 का उद्यापन

यदि किसी श्रद्धालु ने लगातार कई वर्षों तक श्रावण सोमवार का व्रत किया हो या किसी विशेष संकल्प के साथ व्रत रखा हो, तो उसकी पूर्णता पर उद्यापन किया जाता है।

उद्यापन के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, मंत्र जाप एवं आरती के पश्चात ब्राह्मण, साधु-संत या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जाता है। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार वस्त्र, अन्न या दक्षिणा का दान करना भी शुभ माना जाता है।

सावन सोमवार के दिन कौन-से कार्य शुभ माने जाते हैं?

श्रावण सोमवार पर निम्न धार्मिक कार्य विशेष शुभ माने जाते हैं-

• भगवान शिव का जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक 

• रुद्राभिषेक 

• महामृत्युंजय मंत्र का जाप 

• "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जप 

• शिव चालीसा एवं रुद्राष्टकम का पाठ 

• बेलपत्र अर्पित करना 

• गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को दान देना 

• गौ सेवा 

• पीपल एवं बेल के वृक्ष की सेवा 

भगवान शिव की विशेष कृपा कैसे प्राप्त करें?

यदि आप भगवान शिव की विशेष कृपा, परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, विवाह, संतान सुख अथवा जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए वैदिक अनुष्ठान करवाना चाहते हैं तो: - रुद्राभिषेक अनुष्ठान के बारे में विस्तृत जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव की आराधना का अत्यंत प्रभावशाली माध्यम माना जाता है।

सावन सोमवार व्रत 2026 से जुड़े सामान्य प्रश्न

1. श्रावण सोमवार व्रत 2026 कब से शुरू होगा?

वर्ष 2026 में सावन सोमवार व्रत 3 अगस्त, सोमवार से प्रारंभ होगा।

2. वर्ष 2026 में श्रावण सोमवार कितने हैं?

वर्ष 2026 में श्रावण मास के दौरान चार श्रावण सोमवार पड़ेंगे-

• 3 अगस्त 2026 

• 10 अगस्त 2026 

• 17 अगस्त 2026 

• 24 अगस्त 2026 

3. क्या सभी सावन सोमवार का व्रत करना आवश्यक है?

नहीं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा, स्वास्थ्य और क्षमता के अनुसार एक या सभी सोमवार का व्रत रख सकते हैं।

4. क्या पुरुष भी श्रावण सोमवार का व्रत रख सकते हैं?

हाँ। यह व्रत पुरुष, महिलाएँ, अविवाहित युवक-युवतियाँ तथा विवाहित दंपत्ति सभी रख सकते हैं।

5. श्रावण सोमवार पर शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चाहिए?

गंगाजल, शुद्ध जल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, पुष्प, दूध, पंचामृत आदि अर्पित किए जा सकते हैं।

6. श्रावण सोमवार का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र कौन-सा है?

"ॐ नमः शिवाय" तथा महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है।

7. क्या श्रावण सोमवार व्रत में फलाहार कर सकते हैं?

हाँ। अधिकांश श्रद्धालु फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़े का आटा और अन्य सात्विक फलाहार ग्रहण करते हैं।

8. क्या श्रावण सोमवार व्रत अविवाहित कन्याएँ रख सकती हैं?

हाँ। धार्मिक मान्यता के अनुसार योग्य वर की प्राप्ति की कामना से अविवाहित कन्याएँ भी यह व्रत रखती हैं।

श्रावण सोमवार व्रत भगवान शिव की भक्ति, आत्मसंयम, श्रद्धा और सकारात्मक जीवन का प्रतीक है। वर्ष 2026 में श्रावण सोमवार व्रत 3 अगस्त से प्रारंभ होकर 24 अगस्त तक चार सोमवारों में मनाया जाएगा। यदि श्रद्धा, नियम और विधि-विधान के साथ भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना की जाए, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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