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नाग पंचम: तिथि, पूजा विधि और नागों की कथा
लेखक: रुचि

नाग पंचम: तिथि, पूजा विधि और नागों की कथा

नाग पंचम 2026 गुजरात में 1 सितंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। गुजरात में नाग पंचम श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने, नागों से जुड़ी धार्मिक कथाओं का स्मरण करने और भगवान शिव की आराधना करने की परंपरा है। गुजरात की परंपरा में इसे नाग पंचम कहा जाता है, जबकि देश के कई अन्य हिस्सों में नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, नाग पंचम का संबंध नाग देवताओं की पूजा, भगवान शिव की आराधना और सर्पों के प्रति सम्मान की परंपरा से है। इस दिन शेषनाग, वासुकि और तक्षक आदि नागों का स्मरण किया जाता है। कई स्थानों पर नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर दूध, हल्दी, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पित किए जाते हैं।

नाग पंचम 2026 कब है?

नाग पंचम 2026 मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को है। गुजरात के पंचांग के अनुसार यह श्रावण वद पंचम यानी कृष्ण पक्ष पंचमी के दिन मनाई जाएगी। 

नाग पंचम 2026 तिथि और समय

• नाग पंचम: 1 सितंबर 2026, मंगलवार 

• पंचमी तिथि प्रारंभ: 1 सितंबर 2026, सुबह 7:44 बजे 

• पंचमी तिथि समाप्त: 2 सितंबर 2026, सुबह 6:14 बजे 

• पक्ष: कृष्ण पक्ष 

• मास: श्रावण, गुजराती कैलेंडर 

• स्थान: गुजरात 

गुजरात में नाग पंचम और उत्तर भारत में मनाई जाने वाली नाग पंचमी की तिथियों में अंतर इसलिए दिखाई देता है क्योंकि दोनों क्षेत्रों में प्रचलित चंद्र कैलेंडर की गणना अलग तरीके से होती है। गुजरात में नाग पंचम श्रावण कृष्ण पक्ष पंचमी को आती है, जबकि उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पक्ष पंचमी को मनाई जाती है। 

नाग पंचम पर सर्पों को दूध अर्पित करने की परंपरा क्यों है?

नाग पंचम पर नाग देवता की पूजा करने और दूध अर्पित करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। धार्मिक दृष्टि से दूध अर्पित करना नाग देवता के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

पूजा के दौरान नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर दूध, जल, हल्दी, अक्षत, रोली और पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं। जीवित सर्पों को पकड़कर या उन्हें जबरन दूध पिलाना आवश्यक धार्मिक विधि नहीं माना जाना चाहिए। पूजा में नाग देवता के प्रतीक या प्रतिमा का उपयोग करना अधिक सुरक्षित और उचित तरीका है।

धार्मिक मान्यता में नाग देवताओं की पूजा को सर्प भय से मुक्ति, परिवार की रक्षा और सुख-समृद्धि की कामना से जोड़ा जाता है। हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में ही समझना चाहिए।

नाग पंचम की कथा: कद्रू ने नागों को श्राप क्यों दिया?

नाग पंचम से जुड़ी प्रमुख कथाओं में कश्यप मुनि, कद्रू, विनता और उनके नाग पुत्रों का उल्लेख मिलता है।

कथा के अनुसार, दक्ष की पुत्री कद्रू का विवाह कश्यप मुनि के साथ हुआ था। कश्यप मुनि उनकी सेवा से प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। कद्रू ने सौ पुत्रों की प्राप्ति का वरदान मांगा। धार्मिक कथा के अनुसार, इसके बाद उन्हें सौ नाग पुत्र प्राप्त हुए।

एक समय समुद्र मंथन के दौरान एक सुंदर सफेद घोड़ा प्रकट हुआ, जिसे उच्चैःश्रवा कहा गया। उसे देखकर कद्रू ने अपनी सौत विनता से कहा कि घोड़े का शरीर तो सफेद है, लेकिन उसके बाल काले हैं। विनता ने कहा कि घोड़े के बाल भी सफेद हैं।

दोनों के बीच विवाद बढ़ गया और शर्त रखी गई कि यदि घोड़े के बाल काले सिद्ध हुए तो विनता कद्रू की दासी बनेगी और यदि बाल सफेद हुए तो कद्रू विनता की दासी बनेगी।

कथा के अनुसार, कद्रू ने अपने नाग पुत्रों से कहा कि वे अपना आकार छोटा करके घोड़े की पूंछ में जाकर बैठ जाएं, जिससे उसके बाल काले दिखाई दें। लेकिन कई नाग पुत्रों ने उनकी आज्ञा मानने से इनकार कर दिया और इसे अधर्म बताया।

अपने पुत्रों की अवज्ञा से क्रोधित होकर कद्रू ने उन्हें श्राप दिया कि भविष्य में राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ में नागों का विनाश होगा।

आस्तीक मुनि ने नागों को श्राप से कैसे बचाया?

कथा के अनुसार, कद्रू के श्राप से भयभीत नाग ब्रह्मा जी के पास पहुंचे। तब उन्हें बताया गया कि भविष्य में जरत्कारु के वंश से आस्तीक नामक पुत्र का जन्म होगा और वही नागों की रक्षा करेगा।

समय बीतने पर राजा जनमेजय ने अपने पूर्वजों की मृत्यु का कारण सर्पों को मानते हुए नागों के विनाश के लिए सर्प यज्ञ शुरू किया। यज्ञ में अनेक नाग आहुति के लिए खिंचे चले आने लगे।

जब आस्तीक को इस यज्ञ के बारे में पता चला, तो वे यज्ञ स्थल पर पहुंचे। उन्होंने राजा जनमेजय से यज्ञ रोकने का अनुरोध किया। धार्मिक कथा के अनुसार, आस्तीक की प्रार्थना स्वीकार की गई और सर्प यज्ञ रोक दिया गया।

इस प्रकार आस्तीक ने नागों को विनाश से बचाया। नाग पंचम की परंपरा को इसी नाग संरक्षण और नाग देवताओं के सम्मान से जुड़ी कथा के साथ भी जोड़ा जाता है।

नाग पंचम पर पूजा कैसे करें?

नाग पंचम के दिन श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार नाग देवता की पूजा कर सकते हैं।

पूजा सामग्री

• नाग देवता का चित्र या प्रतिमा 

• जल 

• कच्चा दूध 

• हल्दी 

• अक्षत 

• रोली या कुमकुम 

• पुष्प 

• धूप और दीप 

• नैवेद्य 

नाग पंचम पूजा विधि

1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 

2. पूजा स्थान को साफ करके नाग देवता का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। 

3. भगवान शिव और माता पार्वती का भी स्मरण करें। 

4. नाग देवता को जल और दूध अर्पित करें। 

5. हल्दी, अक्षत, रोली और पुष्प चढ़ाएं। 

6. धूप और दीप जलाकर नाग देवता की पूजा करें। 

7. शेषनाग, वासुकि, तक्षक और अन्य नाग देवताओं का स्मरण करें। 

8. अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप और आरती करें। 

9. परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना करें। 

धार्मिक परंपरा में नाग पंचम को नाग देवताओं के प्रति कृतज्ञता और प्रकृति में उनके महत्व को स्मरण करने का अवसर भी माना जा सकता है।

नाग पंचम पर किन नाग देवताओं की पूजा की जाती है?

परंपरा में कई नाग देवताओं का स्मरण किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से:

• शेषनाग 

• वासुकि नाग 

• तक्षक नाग 

• अनंत नाग 

• कर्कोटक नाग 

• पद्म नाग 

• महापद्म नाग 

इन नाग देवताओं का उल्लेख अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और कथाओं में मिलता है।

नाग पंचम का धार्मिक महत्व

नाग पंचम का महत्व केवल सर्प पूजा तक सीमित नहीं है। यह पर्व प्रकृति, नाग परंपरा और भगवान शिव से जुड़े धार्मिक विश्वासों से भी जुड़ा हुआ है।

मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय दूर होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कई श्रद्धालु इस दिन नाग देवता से परिवार की सुरक्षा और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

यह दिन हमें जीव-जंतुओं और प्रकृति के प्रति सम्मान रखने की भावना की भी याद दिलाता है।

नाग पंचम पर क्या करना चाहिए?

• नाग देवता की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। 

• भगवान शिव का स्मरण और पूजन करें। 

• नाग देवता के चित्र या प्रतिमा पर दूध, जल और पुष्प अर्पित करें। 

• नागों से जुड़ी धार्मिक कथाओं का श्रवण करें। 

• जीवित सर्पों को परेशान या नुकसान न पहुंचाएं। 

• अपनी परंपरा के अनुसार व्रत या सात्त्विक आहार का पालन करें। 

नाग पंचम पर क्या नहीं करना चाहिए?

नाग पंचम के दिन सर्पों को पकड़ना, उन्हें परेशान करना या उनके साथ किसी प्रकार का दुर्व्यवहार करना उचित नहीं है। पूजा के लिए नाग देवता की प्रतिमा या चित्र का उपयोग किया जा सकता है।

धार्मिक पर्व का उद्देश्य श्रद्धा, पूजा और संरक्षण की भावना को बढ़ाना होना चाहिए।

नाग पंचम 2026 से जुड़े सवाल

नाग पंचम 2026 कब है?

गुजरात में नाग पंचम 1 सितंबर 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा। यह श्रावण कृष्ण पक्ष पंचमी तिथि है। 

गुजरात में नाग पंचम और नाग पंचमी अलग क्यों हैं?

गुजरात में नाग पंचम श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है, जबकि भारत के कई अन्य क्षेत्रों में नाग पंचमी श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। 

नाग पंचम पर दूध क्यों चढ़ाया जाता है?

धार्मिक परंपरा में दूध अर्पित करना नाग देवता के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसे नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर अर्पित किया जा सकता है।

नाग पंचम पर किन नाग देवताओं की पूजा की जाती है?

शेषनाग, वासुकि, तक्षक, अनंत और अन्य नाग देवताओं का स्मरण एवं पूजन करने की परंपरा मिलती है।

नाग पंचम की कथा में आस्तीक कौन थे?

धार्मिक कथा के अनुसार, आस्तीक ने राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ को रुकवाकर नागों को विनाश से बचाया था। इसी कथा को नागों की रक्षा से जुड़ी परंपरा के साथ जोड़ा जाता है।

क्या नाग पंचम पर जीवित सांप को दूध पिलाना जरूरी है?

नहीं। धार्मिक पूजा के लिए नाग देवता की प्रतिमा या चित्र पर दूध अर्पित करना पर्याप्त है। जीवित सर्पों को पकड़ना या जबरन दूध पिलाना उचित नहीं है।

नाग पंचम गुजरात की विशिष्ट धार्मिक परंपरा से जुड़ा पर्व है, जिसमें नाग देवताओं की पूजा, भगवान शिव का स्मरण और नागों के प्रति सम्मान की भावना प्रमुख है। कद्रू के श्राप और आस्तीक द्वारा नागों की रक्षा की कथा इस पर्व के धार्मिक महत्व को और गहरा बनाती है।

नाग पंचम पर पूजा के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना रखना भी इस पर्व की सकारात्मक सीख के रूप में देखा जा सकता है।

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