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पापमोचनी एकादशी: तिथि, व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व
लेखक: रुचि

पापमोचनी एकादशी: तिथि, व्रत कथा, पूजा विधि और महत्व

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पाप कर्मों से मुक्ति और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

पापमोचनी एकादशी 2027 में 2 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। उत्तर भारतीय पूर्णिमांत पंचांग के अनुसार यह चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जबकि अमांत पंचांग में इसे फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी कहा जाता है।

पापमोचनी एकादशी 2027 कब है?

वर्ष 2027 में पापमोचनी एकादशी 2 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है।

पापमोचनी एकादशी 2027: 2 अप्रैल 2027, शुक्रवार

एकादशी तिथि प्रारंभ: 1 अप्रैल 2027 की रात्रि

एकादशी तिथि समाप्त: 2 अप्रैल 2027 की रात्रि

तिथि और पारण के समय में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने शहर के स्थानीय: - पंचांग के अनुसार एकादशी और द्वादशी का समय देखना चाहिए।

पापमोचनी एकादशी का महत्व

युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पूछा कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में कौन-सी एकादशी होती है। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें पापमोचनी एकादशी के महत्व के बारे में बताया।

श्रीकृष्ण ने कहा कि इस विषय में महर्षि लोमश ने चक्रवर्ती नरेश मान्धाता को पापमोचनी एकादशी की कथा सुनाई थी।

मान्धाता ने महर्षि लोमश से पूछा कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में कौन-सी एकादशी होती है, उसके क्या नियम हैं और उससे किस फल की प्राप्ति होती है।

महर्षि लोमश ने बताया कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह एकादशी पापों का नाश करने वाली और मनुष्य को आध्यात्मिक शुद्धि की ओर ले जाने वाली मानी जाती है।

पापमोचनी एकादशी की व्रत कथा

महर्षि लोमश ने राजा मान्धाता को पापमोचनी एकादशी की कथा सुनाते हुए बताया कि एक बार चैत्ररथ नामक वन में गंधर्व कन्याएं नृत्य और गायन किया करती थीं। उन्हीं में मंजुघोषा नामक एक अप्सरा थी।

मंजुघोषा मुनिवर मेधावी को मोहित करने के लिए उनके पास गई। महर्षि मेधावी उस वन में रहकर ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए तपस्या कर रहे थे।

एक दिन मंजुघोषा ने वीणा बजाते हुए मधुर संगीत गाना शुरू किया। संगीत से प्रभावित होकर महर्षि मेधावी उसके प्रति आकर्षित हो गए। धीरे-धीरे वे उसकी ओर मोहित हो गए और अपनी तपस्या से विमुख हो गए।

मुनि और मंजुघोषा के साथ रहते हुए काफी समय बीत गया। एक दिन मंजुघोषा ने देवलोक लौटने की इच्छा व्यक्त की और मुनि से जाने की अनुमति मांगी।

मेधावी ने उससे कहा कि संध्या होने तक वह उनके साथ रहे। तब मंजुघोषा ने उन्हें बीते हुए समय का स्मरण कराया।

महर्षि ने जब बीते समय की गणना की तो उन्हें पता चला कि मंजुघोषा के साथ रहते हुए 57 वर्ष बीत चुके थे। अपनी तपस्या नष्ट होने का विचार करके उन्हें बहुत क्रोध आया और उन्होंने मंजुघोषा को पिशाची बनने का श्राप दे दिया।

मंजुघोषा ने विनम्रता से मुनि से अपने श्राप से मुक्ति का उपाय पूछा।

तब महर्षि मेधावी ने बताया कि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से उसके पाप और पिशाच योनि का प्रभाव समाप्त हो सकता है।

इसके बाद मेधावी अपने पिता महर्षि च्यवन के आश्रम पहुंचे। च्यवन ऋषि ने भी उन्हें पापमोचनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी।

मेधावी ने विधिपूर्वक पापमोचनी एकादशी का व्रत किया। धार्मिक कथा के अनुसार, व्रत के प्रभाव से उनके पाप नष्ट हुए और वे पुनः तपस्या में लीन हो गए। मंजुघोषा ने भी इस व्रत का पालन किया और पिशाच योनि से मुक्त होकर दिव्य रूप धारण करके स्वर्गलोक चली गई।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत करने और इसकी कथा सुनने से व्यक्ति को पाप कर्मों से मुक्ति प्राप्त होती है तथा भगवान विष्णु की कृपा मिलती है।

पापमोचनी एकादशी की पूजा विधि

पापमोचनी एकादशी से एक दिन पहले दशमी तिथि को श्रद्धापूर्वक स्नान करके सात्विक भोजन करना चाहिए। इसके बाद संयम का पालन करते हुए एकादशी व्रत की तैयारी करें।

एकादशी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।

व्रत का संकल्प लेते समय निम्न मंत्र का पाठ किया जा सकता है-

अद्य स्थित्वा निराहारः सर्वभोगविवर्जितः।

श्वो भोक्ष्ये पुण्डरीकाक्ष शरणं मे भवाच्युत।।

इसका भावार्थ है- हे कमलनयन भगवान नारायण! आज मैं सभी भोगों का त्याग करके निराहार रहूंगा। हे अच्युत! आप मेरी शरण स्वीकार करें।

इसके बाद भगवान विष्णु या शालिग्राम शिला की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। भगवान को धूप, दीप, गंध, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें। भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और दिनभर अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।

पूजा के बाद ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को भोजन या दान देना भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है।

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पापमोचनी एकादशी पर रात्रि जागरण

एकादशी की रात भगवान विष्णु के समीप जागरण करने की परंपरा भी बताई गई है। भक्त इस दौरान भगवान विष्णु का स्मरण, भजन, कीर्तन और मंत्र-जाप कर सकते हैं।

अपनी श्रद्धा और स्वास्थ्य के अनुसार रात्रि जागरण करना चाहिए।

पापमोचनी एकादशी का पारण

द्वादशी तिथि को प्रातः स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं तथा दान-दक्षिणा दें।

इसके बाद उचित समय पर व्रत का पारण करें। पारण का समय स्थान के अनुसार अलग होता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार द्वादशी पारण का समय देखना उचित है।

पापमोचनी एकादशी के नियम

पापमोचनी एकादशी के दिन भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रख सकते हैं। धार्मिक परंपरा में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, संयम, सात्विक आहार और भगवान के नाम का स्मरण करने का महत्व बताया गया है।

व्रत के दौरान अनाज और सामान्य भोजन का त्याग करने की परंपरा कई वैष्णव परंपराओं में मिलती है। व्रत का स्वरूप अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार निर्धारित करना उचित है।

पापमोचनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पापमोचनी एकादशी को भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मशुद्धि से जुड़ा महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को पाप कर्मों से मुक्ति और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।

पापमोचनी एकादशी की कथा व्यक्ति को यह संदेश भी देती है कि गलत कर्मों का त्याग करके प्रायश्चित, संयम और भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए।

पापमोचनी एकादशी पर क्या करें?

• प्रातःकाल स्नान करके भगवान विष्णु का ध्यान करें।

• श्रद्धापूर्वक एकादशी व्रत का संकल्प लें।

• भगवान विष्णु या शालिग्राम की पूजा करें।

• विष्णु मंत्र का जाप करें।

• अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखें।

• एकादशी की रात भजन, कीर्तन या भगवान का स्मरण करें।

• जरूरतमंदों को भोजन और दान दें।

• द्वादशी तिथि में उचित समय पर व्रत का पारण करें।

एकादशी व्रत की उत्पत्ति, इसकी पौराणिक कथा और भगवान विष्णु से जुड़े धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानने के लिए: -हमारा एकादशी की उत्पत्ति लेख पढ़ें। 

पापमोचनी एकादशी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष में आने वाला महत्वपूर्ण एकादशी व्रत है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पाप कर्मों से मुक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

वर्ष 2027 में पापमोचनी एकादशी 2 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। स्थान के अनुसार एकादशी तिथि और द्वादशी पारण के समय में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित है।

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