गरुड जी के श्री कृष्ण जी से प्रश्न
एक बार गरुड जी के मन में इस ब्रह्मांड के सभी लोको को देखने की इच्छा हुयी। अतः श्री हरि का नाम लेते हुए उन्होंने पाताल लोक, पृथ्वी लोक व स्वर्ग लोक का भ्रमण किया। पृथ्वीलोक के दुःख से अत्यंत दुःखित और अशांत चित्त होकर वे पुनः वैकुंठ लोक वापस लौट आए। जब गरुड जी वैकुंठ लोक आए तो उनके आँखों से आंसुओं की धारा बह रही थी। वैकुंठधाम में आकर गरुड जी ने भगवान श्री विष्णु जी को प्रणाम किया। गरुड जी को प्रणाम करते हुए देख श्री हरि ने पूछा इतने दिनों में आपने किस भूमि का परिभ्रमण किया है। श्री हरि के पूछने पर गरुड जी ने कहा- आपकी कृपा से मैंने तीनों लोको का भ्रमण कर लिया है। सभी लोको की अपेक्षा भू-लोक अधिक प्राणियों से परिपूर्ण है। यमलोक को छोड़कर पृथ्वीलोक से सत्यलोक तक सब कुछ मेरे द्वारा देखा जा चुका है। सभी योनियों में मृत्युलोक मे मनुष्य जाति ही भोग और मोक्ष का भागी है। सभी लोको की तुलना में सिर्फ मनुष्य ही परेशानियों और दुखों से भरा हुआ है। मुझे मृत्युलोक के प्राणियों को देखकर मन में बड़ा दुःख होता है और कई सारे प्रश्न उत्पन्न होते है जिन्हे मैं आपसे पूछना चाहता हूँ। श्री कृष्ण बोले कि गरुड वैसे तो तुम बहुत ज्ञानी हो, पर यह प्रश्न तुम सभी के कल्याण के लिए मुझसे पूछ रहे हो जिससे की मनुष्य लोक में सभी इन्हे जानकर और विशेष वैदिक विधि के माध्यम से कल्याण को प्राप्त कर सके। यह सुनकर गरुड जी ने श्री हरि से कुछ विशेष प्रश्न किये जो इस प्रकार है:- गरुड जी ने श्री हरि से कहा - हे प्रभु! आप यह बताने की कृपा करे-
1. मृत आत्मा को किस कारण से धरती पर डाला जाता है?
2. मरे हुए प्राणी के मुख में पंचरत्न क्यों डाला जाता है?
3. उसके दोनों पैर दक्षिण दिशा की ओर क्यों कर दिए जाते है?
4. मृत्यु को प्राप्त हुए प्राणी के नीचे लोग कुश क्यों बिछा देते है कुश बिछाने का क्या आशय है?
5. किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उसके बेटे-पोते सामने क्यों खड़े होते हैं?
6. मृत्यु के समय विभिन्न वस्तुओं का दान और गाय का दान क्यों किया जाता है?
7. सम्बन्धी, मित्र, शत्रु आदि सब एक साथ आकर क्षमा क्यों मांगते हैं?
8. किससे प्रेरित होकर लोग मृत्यु के समय तिल, लोहा, सोना, कपास, नमक, सात प्रकार के अन्न, जमीन और गाय का दान करते हैं?
9. किसी प्राणी की मृत्यु कैसे होती है और मरने के बाद वह कहाँ जाता है?
10. उस समय उसे भोग शरीर की प्राप्ति कैसे होती है?
11. अग्नि देने वाले पुत्र और पौत्र उस मरे हुये व्यक्ति को कंधे पर क्यों ले जाते है?
12. मृत शरीर पर घी क्यों लगाया जाता है?
13. उस समय एक आहुति देने की परम्परा कहाँ से आयी ?
14. शव को जमीन से क्यों छुवाया जाता है?
15. स्त्रियाँ मरे हुए व्यक्ति के लिए शोक मनाते हुए क्यों रोती है?
16. शव की उत्तर दिशा में 'यमसूक्त' का पाठ करने का क्या कारण है?
17. मृत व्यक्ति को केवल एक कपड़ा पहनकर ही पानी क्यों दिया जाता है?
18. उस समय पत्थर पर स्थापित जौ का पौधा, सरसों, दूर्वा और नीम की पत्तियों को छूकर सूर्य की छवि देखने की परंपरा क्यों है?
19. उस समय पुरुष और महिला दोनों ऊपर और नीचे एक जैसे कपड़े क्यों पहनते हैं?
20. शव का अंतिम संस्कार करने के बाद उस व्यक्ति को जिसने अंतिम संस्कार किया है, उसे अपने परिवार के सदस्यों के साथ बैठकर खाना क्यों नहीं
खाना चाहिए?
21. मरे हुए व्यक्ति के पुत्र एवं पौत्र उन दस दिन मे किसलिए पिंडों का दान देते है?
22. चबूतरे पर पक्के मिट्टी के बर्तन में दूध क्यों रखा जाता है?
23. गाँव के चौराहे पर एकांत स्थान पर रात के समय रस्सी से बाँधी गई तीन लकड़ियों (तिगोड़िया) पर एक वर्ष तक हर दिन दीपक क्यों जलाया जाता है?
24. मरे हुए व्यक्ति का अंतिम संस्कार एवं जल तर्पण संस्कार अन्य लोगों के साथ क्यों किया जाता है?
25. मृत्यु के बाद वह प्राणी प्रेत शरीर में चला जाता है, उसके लिए नौ पिंड देने चाहिए, इसका क्या उद्देश्य है?
26. किस परंपरा के अनुसार पितरों को पिंड दान दिया जाना चाहिए और उन्हें उस पिंड को स्वीकार करने के लिए कैसे बुलाया जाता है?
27. यदि ये सभी कर्म मृत्यु के तुरंत बाद पूरे हो जाते हैं तो पिंडदान बाद में फिर से क्यों किया जाता है?
28. पिछले पिंडदान के बाद दोबारा पिंडदान या अन्य कार्य करने की क्या आवश्यकता है?
29. दाह-संस्कार के बाद अस्थि-संगृहीत और घड़ा फोड़ने का प्रयोजन क्यों है?
30. दूसरे दिन और चौथे दिन साग्निक द्विज ( वह गृहस्थ जो सदा घर में अग्निहोत्र की अग्नि रखता हो) स्नान की परंपरा क्यों है?
31. दसवें दिन शुद्धिकरण के लिए परिवार के सभी सदस्यों के साथ स्नान क्यों किया जाता है?
32. दसवें दिन तेल और उबटन का उपयोग क्यों किया जाता है?
33. उस तेल और उबटन का प्रयोग भी एक नदी या तालाब (हैंडपंप,कुआं भी हो सकता है ) के तट पर होना उचित है, इसका क्या कारण है?
34. दसवें दिन पिंडदान क्यों करना चाहिए?
35. एकादशाह के दिन मृत व्यक्ति के नाम पर वृषोंत्सर्ग (साँड़ के साथ बछिया को दाग कर छोड़ देने का धार्मिक कृत्य) करने के साथ पिंडदान करने का
क्या उद्देश्य है?
36. बर्तन, चप्पल एवं जूते, छाता, कपड़े और अंगूठी आदि वस्तुएं दान क्यों की जाती हैं?
37. पादुका का दान तेरवें दिन क्यों किया जाता है?
38. वर्ष भर में सोलह श्राद्ध क्यों किये जाते हैं तथा तीन सौ साठ सन्नोन्दक घड़े क्यों दिए जाते है?
39. प्रेत की तृप्ति करने के लिए प्रतिदिन भोजन से भरा बर्तन क्यों दान करना चाहिए?
40. प्राणी के शरीर में स्थित किस छिद्र से पृथ्वी, जल, मन, तेज, वायु और आकाश निकल जाते है?
41. शरीर मे रहने वाली पाँच कर्म इंद्रिया और पाँच ज्ञान इंद्रिया और पाँच वायु किस प्रकार निकल जाते है। छिपे हुए लोभ, मोह, तृष्णा, वासना और
अहंकार रूपी पाँच चोर कहाँ से निकलते हैं?
42. जीव अपने जीवन में जो भी पुण्य या पाप कर्म करता है, जो भी दान करता है, अच्छे या बुरे कर्म अर्थात अर्जित पुण्य या पाप शरीर के नष्ट हो जाने पर वे
सभी उसके साथ कैसे चले जाते हैं?
43. एक साल पूरा हो जाने पर भी मरे हुए प्राणी के लिए सपिंडीकरण क्यों होता है?
44. कृपया बताएं कि उस प्रेत कर्म (सपिंडन) में प्रेत शरीर को किसके साथ और किस प्रकार जोड़ा जाना चाहिए।
45. मूर्छा से या पतन से असामयिक मौत जिनकी होती है उनके लिए क्या होना चाहिए।
46. जो मनुष्य जलाए गए या नहीं जलाए गए उनके लिए क्या क्रिया होनी चाहिए।
47. जो लोग पापी, दुराचारी या मानसिक रूप से बीमार होते हैं उन्हें मृत्यु के बाद कौन सी गति प्राप्त होती है?
48. किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय उसकी भलाई के लिए क्या करना चाहिए? दान करने की विधि क्या है?
49. मृत्यु से लेकर श्मशान तक पहुंचने के बीच किस विधि की आवश्यकता होती है?
50. शव को चिता में जलाने की क्रिया क्या है?
51. उस जीव को तुरंत या देर से दूसरा शरीर कैसे मिल जाता है?
52. यमलोक जाने वाले व्यक्ति को साल भर कौन सा कार्य करना चाहिए?
53. मूर्ख अथवा दुष्ट व्यक्ति की मृत्यु का प्रायश्चित क्या है वह किस प्रकार अपने किये गये पाप कर्मों को भोगने से बच सकता है?
54. यदि पंचक के दौरान मृत्यु हो तो पंचकशांति के लिए क्या करना चाहिए?
55. जो व्यक्ति आत्महत्या करता है, सोना चुराता है, मित्र को धोखा देता है, आदि उसका क्या होता है?
56. यदि कोई शूद्र कपिला गाय का दूध पीता है या प्रणव महामंत्र का जाप करता है या ब्रह्मसूत्र यानी जनेऊ धारण करता है, तो मृत्यु के बाद उसका क्या
होता है?
57. जब कोई शूद्र किसी ब्राह्मणी को अपनी पत्नी बनाता है तो उस पापी की क्या स्थिति होती है?
गरुड़ जी श्रीहरि से कहते हैं कि जिज्ञासावश मैं पूरी दुनिया में घूमकर लोगों को देखता रहा हूं, मैंने वहां रहने वाले लोगों को देखा है कि वे सभी दुख में डूबे हुए हैं। उनका कष्ट देखकर मेरा हृदय पीड़ा से भर जाता है। स्वर्ग में राक्षसों के वैर का भय | पृथ्वी लोक में लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को न प्राप्त कर पाने के कारण, मृत्यु, रोग आदि से पीड़ित होकर वहाँ के प्राणी दुःखी होते हैं। मेरे भय से पाताल में रहने वाले प्राणी दुःखी रहते हैं। आपके इस वैकुंठपुरी के अतिरिक्त अन्य किसी लोक में ऐसी निडरता देखने को नहीं मिलती। मृत्यु के प्रभाव से इस संसार की स्थिति सपने में दिखने वाली माया के समान असत्य है। इसमें भी भारत में रहने वाले लोगों को काफी दुख झेलना पड़ रहा है। मैंने वहां देखा है कि उस देश के लोग प्रिय वस्तुओ के प्रति आसक्ति, घृणा और मोह आदि में बहुत अधिक डूबे हुए हैं। उस देश में कुछ लोग अंग भंग से पीड़ित है, कुछ बुरी भाषा का प्रयोग करने वाले है , कुछ गूंगे और बहरे है, कोई कोढ़ी, कोई अत्यधिक बालों वाला, कोई अनेक रोगों से घिरा हुआ है और कोई झूठ बोलकर अभिमान के नशे में चूर है। उसके इस प्रकार की त्रुटियों को व उसकी मृत्यु को देखकर मेरे मन में जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि यह मृत्यु क्या है? इस भारत वर्ष में विचित्र होने की स्थिति क्या है? मैंने पहले ही ऋषियों से सुना है कि जो व्यक्ति एक वर्ष तक चलने वाले अनुष्ठान या तर्पण विधि को पूरी विधि विधान से नहीं करता, उसे दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है।
उपर्युक्त कृत्य गरुण पुराण से लिए गए है। इस पुराण में मानव जाति के कल्याण हेतु अनेक संस्कार बताए गए है। यह सभी प्रश्न गरुण द्वारा भगवान श्री कृष्ण से पूछे गए थे । इसमें लिखी सभी बातें गरुण पुराण में मानव जाति के कल्याण हेतु बताई गई है जो पूर्वकाल में संभव थी परंतु आज कलियुग में इनमें से लिखे कुछ कार्य असंभव से लगते हैं । परंतु हमे इन सभी कर्मों को जहां तक संभव हो सके अवश्य करना चाहिए ताकि मरणोपरांत व्यक्ति को प्रेत योनि से मुक्ति मिल सके और यमलोक में मिलने वाले दारुण दुखों से छुटकारा मिल सके।