
रुद्राभिषेक
क्या है रुद्राभिषेक ?
रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रूद्र अर्थात् शिव का अभिषेक।अभिषेक शब्द का अर्थ है स्नान कराना। पृथ्वी पर भगवान शिव का रूप शिवलिंग में होता है अर्थात शिवलिंग का विविध औषधियों एवं विविध पदार्थों(जल, दूध, पंचामृत, गन्ने का रस, नारियल के जल व गंगाजल आदि) से अभिषेक करना ही रुद्राभिषेक कहलाता है। ‘शिव’ और ‘रुद्र’ ब्रह्म के ही पर्यायवाची शब्द है। शिव को रुद्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये ‘रुतम’ - दु:ख , ‘द्रावयति’ – नाशयतीति अर्थात दु:ख को पूरी तरह नष्ट कर देते है।
रुद्राभिषेक क्यों होता है विशेष पूजन ?
रुद्राभिषेक करने से मनुष्य को उसका मनोवांछित फल प्राप्त होता है अर्थात मनुष्य जिस फल को प्राप्त करने के उद्देश्य से रुद्राभिषेक करता है, उसे वह दुर्लभ फल भी सुगमता से प्राप्त हो जाता है।
वायु पुराण में तो रुद्राभिषेक की महत्ता के बारे में यहाँ तक लिखा है कि रुद्राभिषेक के एक पाठ से प्राप्त पुण्य उस मनुष्य के पुण्य से कहीं ज्यादा होता है जो धन – धान्य से परिपूर्ण पृथ्वी का दान करके पुण्य कमाता है।
रुद्राभिषेक के जप ,पाठ और अभिषेक आदि से मनुष्य को इस जीवन मे भगवान की भक्ति,शांति ,पुत्र आदि की प्राप्ति , धन -धान्य की संपन्नता एवं उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है वही मरणोपरांत उसे सद्गति व परम मोक्ष भी प्राप्त होता है ।
रुद्राभिषेक मे कौन कौन सी मूर्तिया बनाई जाती है ?
रुद्राभिषेक में शिव परिवार की मूर्तियाँ बनायी जाती है। सबसे पहले गणेश जी की मूर्ति बनायी जाती है। इसके बाद पार्वती, कार्तिकेय, नंदी और सर्प सहित शिवलिंग बनायी जाती है।
रुद्राभिषेक तीन प्रकार का बताया गया है।
लघुरुद्राभिषेक, अतिरुद्राभिषेक और महारुद्राभिषेक, सभी की संख्या और पाठ की आवृत्ती अलग-अलग होती है।
लघुरुद्र रुद्राभिषेक :- एकादशिनी रुद्री की ग्यारह आवृत्ति पाठ ब्राह्मण द्वारा सम्पन्न करना लघुरुद्र अनुष्ठान कहलाता है ।
महारुद्र रुद्राभिषेक :- लघुरुद्र की ग्यारह या एकादशिनी रुद्री की 121 आवृत्ति पाठ ब्राह्मण द्वारा सम्पन्न करना महारुद्र अनुष्ठान कहलाता है।
अतिरुद्र रुद्राभिषेक :- महारुद्र की ग्यारह या एकादशिनी रुद्री की 1331 आवृत्ति पाठ ब्राह्मण द्वारा सम्पन्न करना अतिरुद्र अनुष्ठान कहलाता है।
रुद्राभिषेक
रुद्राभिषेक क्या है, इसकी विधि, लाभ, पूजा सामग्री और अभिषेक के प्रकार जानिए। रुद्राभिषेक से कैसे मिलती है शांति, समृद्धि और मोक्ष?
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