
कनकधारा स्तोत्रम् पाठ क्या है?
कनकधारा स्तोत्रम् से धन की देवी माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। कनक का अर्थ होता है -सोना और धारा का अर्थ है वर्षा करना अर्थात कनकधारा स्तोत्रम् पाठ का अर्थ हुआ सोने की वर्षा कराने वाला पाठ जो श्री शंकराचार्य द्वारा रचित माता लक्ष्मी को समर्पित है । कनकधारा पाठ माता लक्ष्मी जी का अतिप्रिय पाठ है । इस पाठ से जातक की दरिद्रता का नाश होता है और जातक पर माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है । कनकधारा स्तोत्रम् धन प्राप्त करने का एक शक्तिशाली स्तोत्रम् है। इस ऋणमोचन मंगल -स्त्रोत से जो लोग मंगल की स्तुति करते हैं उनको निश्चय ही भरपूर मात्रा में धन की प्राप्ति होती है और जातक को सभी प्रकार की मुसीबतों से छुटकारा मिल जाता है ।
कनकधारा स्तोत्रम् पाठ की उत्पत्ति
कनकधारा स्तोत्रम् पाठ अनुष्ठान को सबसे पहले गुरु शंकराचार्य जी ने किया था और माता लक्ष्मी ने प्रसन्न होकर एक निर्धन ब्राह्मण स्त्री के आँगन मे धन की वर्षा की थी । आइए जानते है वह पुण्यकारी कथा –
एक समय की बात है आदि गुरु शंकराचार्य भीक्षा प्राप्त करने हेतु एक गृहस्थ ब्राह्मण के द्वार पर गए । ब्राह्मण अत्यंत ही गरीब था परंतु सत्यवादी और धर्मनिष्ठा युक्त था । जब ब्राह्मण की पत्नी ने द्वार पर खड़े आचार्य को देखा (जो एक विख्यात विदद्वान प्रतीत हो रहे थे) तो ब्राह्मणी असमंजस मे पड़ गई क्योंकि वह ब्राह्मणी इतनी गरीब थी कि आचार्य को देने के लिए उस समय उसके पास कुछ भी नहीं था । बहुत खोजने के बाद अंत मे उसे एक आंवले का फल घर मे मिला जिसे लेकर वह सन्यासी आचार्य के पास पहुँची और अत्यंत संकोच भाव के साथ वह फल आचार्य को अर्पित किया ।
आचार्य शंकराचार्य उस ब्राह्मणी की दयनीय स्थिति को भाप गए परंतु उस ब्राह्मणी के दान भाव को देखकर आचार्य जी बहुत खुश हुए । ब्राह्मणी की दीन-दुर्दशा को देखकर आचार्य को बहुत दुख हुआ और आचार्य जी ने ब्राह्मणी की दयनीय स्थिति से विदीर्ण होकर मन मे निश्चय किया की वे माँ लक्ष्मी को खुश करके ब्राह्मणी का उद्धार करने की प्रार्थना अवश्य करेंगे ।
अतः शंकराचार्य जी ने ऐश्वर्य की अधिष्ठात्री , भगवान नारायण की अर्धागिनी वात्सल्यमयी लक्ष्मी देवी की सप्रेम स्तुति प्रारंभ की । शंकराचार्य की सप्रेम स्तुति से प्रसन्न होकर भगवन्ती महालक्ष्मी आचार्य के सामने अपने त्रिभुवन मोहित रूप मे प्रकट हो गई और सुमधुर शब्दों में पूछने लगी – हे ! आदि पुरुष शंकराचार्य जी कहो आपने मुझे कैसे याद किया ?
आचार्य ने सर्वप्रथम माता लक्ष्मी का वंदन किया तत्पश्चात अत्यंत दुखी होकर निर्धन ब्राह्मणी की दयनीय दशा को बताया और माता लक्ष्मी से प्रार्थना की कि- हे ! माता उस गरीब ब्राह्मण परिवार पर दया करें ।
शंकराचार्य जी की प्रार्थना सुनकर माता लक्ष्मी ने कहा की-हे ! आदि पुरुष उस ब्राह्मण का प्रारब्ध ऐसा नहीं है कि उसे इस जन्म मे धन प्राप्त हो । तब आचार्य ने बड़े विनीत शब्दों में करुणामयी याचना और निवेदन किया और कहा – हे ! माता यह बात सत्य है कि “पूर्व जन्म में इस ब्राह्मण ने कोई भी अच्छा सत्कर्म व दान -पुण्य नहीं किया कि जो उसे इस जन्म मे धन प्राप्त हो। आचार्य ने कहा कि- हे माता परंतु उसने इस जन्म में मेरे जैसे भिक्षुक को एक आँवला देकर महान पुण्य अर्जित किया है । अतः ब्राह्मण उस पुण्य के प्रभाव से अपार धन संपत्ति का अधिकारी हो गया है। आचार्य ने बड़े विनीत होकर पुनः करुणामयी स्वर के साथ माता से उस ब्राह्मण पर कृपा करने का आग्रह किया ।
माता लक्ष्मी शंकराचार्य के इस प्रकार की करुणामयी याचना को देखकर उनकी याचना का खंडन न कर सकी और उसी समय माता लक्ष्मी की कृपा से उस निर्धन ब्राह्मण कर घर पर सोने की वर्षा हुयी और इस प्रकार उस निर्धन ब्राह्मण की दरिद्रता सदैव के लिए खत्म हो गयी और वह ब्राह्मण परिवार भी अपार धन -संपदा का अधिकारी हो गया । इस प्रकार माता लक्ष्मी की कृपा से ब्राह्मण के यहा सोने की वर्षा हुयी अतः सोने की वर्षा के कारण ही इस स्तोत्रम् का नाम “कनक धारा “ हो गया ।
कनकधारास्तोत्रम् पाठ
माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला कनकधारा स्तोत्रम् पाठ, दरिद्रता मिटाए, अचानक धन लाभ कराए और आर्थिक समृद्धि व सुख-शांति प्रदान करता है।
Price : INR 2100/-
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