सूर्यग्रहण 2025
सूर्यग्रहण एक खगोलीय घटना है, जब चंद्रमा संपूर्ण या आंशिक रूप से पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य के प्रकाश को पूरी तरह या आंशिक रूप से रोक देता है। इस दौरान सूर्य की किरणे पृथ्वी पर न पहुँच पाने के कारण कुछ समय के लिए दिन में भी अंधकार छा जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से यह घटना सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति के कारण घटित होती है, जबकि धार्मिक मान्यताओं में इसे विशेष आध्यात्मिक महत्व दिया जाता है। इस दौरान विशेष नियमों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है और नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है।
सूर्यग्रहण कैसे होता है?
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है। जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तो वह सूर्य की किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देता है। यह घटना केवल अमावस्या के दिन होती है और इस दौरान सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से छिप जाता है।
सूर्यग्रहण के प्रकार
1. पूर्ण सूर्यग्रहण (Total Solar Eclipse) – जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेता है, तो पृथ्वी के एक हिस्से में दिन में रात जैसा अंधेरा छा जाता है।
2. आंशिक सूर्यग्रहण (Partial Solar Eclipse) – जब चंद्रमा सूर्य के केवल कुछ हिस्से को ढकता है और बाकी भाग दिखाई देता है।
वर्ष का पहला सूर्यग्रहण
सूर्यग्रहण 2025: तिथि और समय
• ग्रहण की तिथि: 29 मार्च 2025 (शनिवार)
• ग्रहण प्रारंभ: 29 मार्च 2025 दोपहर 02:21 बजे
• ग्रहण समाप्त: 29 मार्च 2025 शाम 06:14 बजे
• दिखाई देने का स्थान: यूरोप, एशिया के उत्तरी भाग में उत्तरी- दक्षिणी अमेरिका, पश्चिमी अफ्रीका, अटलांटिक महसागरीय देश तथा आर्कटिक क्षेत्र आदि हिस्सों में देखा जाएगा।
नोट- इस वर्ष का यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहां किसी भी प्रकार के नियम या मान्यताएं प्रभावी नहीं होंगी।
सूर्यग्रहण का सूतक काल:
सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है, शास्त्रों के अनुसार इस समय को अत्यंत अशुभ काल माना जाता है।
वर्ष का दूसरा सूर्यग्रहण
सूर्य ग्रहण 2025: तिथि और समय
• ग्रहण की तिथि: 21 सितम्बर 2025 (रविवार)
• ग्रहण प्रारंभ: 21 सितम्बर 2025, रात्रि 11:00 बजे
• मध्यकाल: 22 सितम्बर 2025, प्रातः 1:12 बजे
• ग्रहण समाप्त: 22 सितम्बर 2025, प्रातः 3:24 बजे
• दिखाई देने का स्थान: न्यूजीलैंड, पूर्वी मलेशिया, दक्षिणी पोलिनेशिया, पश्चिमी अंटार्कटिका आदि हिस्सों में देखा जाएगा।
नोट: यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, अतः भारत के निवासियों पर सूतक का प्रभाव लागू नहीं होगा।
सूर्य ग्रहण का सूतक काल:
सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पहले शुरू होता है, शास्त्रों के अनुसार इस समय को अत्यंत अशुभ काल माना जाता है।
क्या न करें?- मंदिर में प्रवेश, मूर्ति स्पर्श, भोजन, और यात्रा वर्जित।
क्या करें?- वृद्ध, बालक और रोगी आवश्यकता अनुसार हल्का आहार ले सकते हैं। दूध, दही, घी आदि में कुश या तुलसी पत्ता डालें।
नोट- ग्रहण के बाद स्नान करें, गंगाजल छिड़कें और मंत्र जप करें।
सूर्यग्रहण के दौरान क्या करें और क्या न करें?
क्या करें?
• मंत्र जप: ग्रहण के दौरान मंत्र जप और भगवान का स्मरण करें।
• दान-पुण्य: अन्न, वस्त्र और धन का दान शुभ माना जाता है।
• ध्यान-प्रार्थना: आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए ध्यान करें।
• सूर्यग्रहण को देखने के लिए चश्मे का उपयोग करें।
• सूतक काल का पालन करें
क्या न करें?
• भोजन न करें: इस दौरान भोजन पकाना और खाना वर्जित माना जाता है।
• अशुद्धता न रखें: सोना, कंघी करना, नाखून काटना वर्जित है।
• नकारात्मक विचारों से बचें: क्रोध और ईर्ष्या से दूर रहें।
• गर्भवती महिलाएँ विशेष सावधानी रखें।
ग्रहण के बाद स्नान व गंगाजल का छिड़काव करें।







