षटतिला एकादशी क्या है?
षटतिला एकादशी सनातन में मनाया जाने वाला एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। नाम के अनुसार, 'षट' का अर्थ है 'छह' और 'तिल' का अर्थ है 'Sesame Seeds' यानी तिल। इस प्रकार, यह एकादशी तिल के छह प्रकार के उपयोग के लिए जानी जाती है। यह माना जाता है कि जो भक्त इस दिन तिल का उपयोग छह अलग-अलग तरीकों से – जैसे तिल का उबटन, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल का हवन, तिल का दान, तिल का सेवन और तिल मिश्रित जल का पान करते हैं, उन्हें जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिलती है और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
षटतिला एकादशी का महत्व (Shattila Ekadashi Significance) बहुत अधिक है क्योंकि यह तिथि सीधे तौर पर भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना और व्रत करने से व्यक्ति को संसार के सभी भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है और उसके जीवन में कष्ट नहीं रहता है। जो भक्त सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा के साथ षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) रखते हैं, उन्हें पुण्य फल की प्राप्ति होती है और उनका जीवन सफल होता है। षटतिला एकादशी (Sattila Ekadashi) का पालन करना आपके जीवन में सकारात्मकता ला सकता है।
षटतिला एकादशी 2026 की तिथि व समय
हर भक्त को यह जानना जरूरी है कि इस वर्ष षटतिला एकादशी कब है (Shattila Ekadashi Kab Hai)। वर्ष 2026 में, माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी 2026 (Shattila Ekadashi 2026) का यह व्रत रखा जाएगा।
पंचांग के अनुसार षटतिला एकादशी 2026 तारीख (Shattila Ekadashi 2026 Date) और षटतिला एकादशी 2026 तिथि (Shattila Ekadashi 2026 Tithi) से जुड़ी महत्वपूर्ण और सटीक जानकारी नीचे दी गई है, यदि आप अपनी राशि के अनुसार पूजा की विशेष विधि जानना चाहते हैं, तो आप विशेषज्ञ से मुहूर्त परामर्श भी ले सकते हैं:
• एकादशी व्रत की तारीख: 14 जनवरी 2026, बुधवार ।
• एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 जनवरी 2026, मंगलवार को दोपहर 3:20 PM बजे से शुरू होगी।
• एकादशी तिथि समाप्त: 14 जनवरी 2026, बुधवार को 5:54 PM बजे तक रहेगी।
• व्रत की तिथि: यदि आप जानना चाहते है कि षटतिला एकादशी 2026 में कब है (Shattila Ekadashi 2026 Mein Kab Hai) तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सनातन में उदया तिथि को प्रधानता दी जाती है, इसलिए यह व्रत बुधवार, 14 जनवरी 2026 को रखा जाएगा। यह Ekadashi January 2026 की महत्वपूर्ण तिथि है।
• पारण का समय: व्रत का पारण 15 जनवरी 2026 को सूर्योदय के बाद किया जाएगा। यह समय पारण समय षटतिला एकादशी (Parana Time Shattila Ekadashi) कहलाता है और व्रत संपन्न करने के लिए इसी समय में व्रत पारण करना चाहिए। यह भी जानना आवश्यक है कि षटतिला एकादशी समय 2026 (Ekadashi Paran Time 2026) का पालन करना क्यों जरूरी है।
जो लोग षटतिला एकादशी 2026 तारीख और समय (Shattila Ekadashi 2026 Date and Time) की सटीक जानकारी चाहते हैं, उन्हें उपर्युक्त समय पर ध्यान देना चाहिए।
क्यों है खास इस वर्ष की षटतिला एकादशी?
हालांकि हर वर्ष षटतिला एकादशी का महत्व समान होता है, 2026 में यह 14 जनवरी, बुधवार को पड़ रही है, जो अपने आप में एक अत्यंत शुभ योग है। यह संयोग कई मायनों में इस एकादशी को और भी फलदायी बना रहा है। यदि आप अपनी राशि के अनुसार विशेष अनुष्ठान करना चाहते हैं, तो किसी विद्वान ज्योतिषी से परामर्श लेना आपके लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है।
• बुधवार का विष्णु योग: बुधवार का दिन स्वयं भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण और बुद्धि के कारक बुध ग्रह को समर्पित माना जाता है। एकादशी भी विष्णु जी का प्रिय व्रत है। जब यह एकादशी बुधवार को पड़ती है, तो भक्तों को भगवान विष्णु और बुद्धिमत्ता के देवता की संयुक्त कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रत करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि ज्ञान, विवेक और निर्णय लेने की क्षमता में भी वृद्धि होती है। इस दिन विशेष अनुष्ठान विष्णु सहस्रनाम करने से निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है।
• मकर संक्रांति और उत्तरायण का महा-संयोग: यह तिथि (14 जनवरी) मकर संक्रांति यानी सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश करने का महापर्व भी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण के दौरान किए गए दान, तप और स्नान का फल अनंत होता है। षटतिला एकादशी का मुख्य विधान तिलों का छह प्रकार से उपयोग और दान है। मकर संक्रांति के दिन तिल दान की परंपरा भी है। इन दोनों पर्वों का एक साथ आना भक्तों को तिल दान और गंगा स्नान (या पवित्र जल से स्नान) का अक्षय पुण्य एक ही दिन में अर्जित करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है, जिससे पापों का नाश सुनिश्चित माना जाता है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी यह समय बहुत शुभ होता है; जिस प्रकार विवाह या मांगलिक कार्यों के लिए कुंडली मिलान के माध्यम से ग्रहों की अनुकूलता देखी जाती है, उसी प्रकार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश ग्रहों की स्थिति में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाता है।
• अधिक मास के कारण बढ़ी हुई महिमा: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वर्ष 2026 में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) भी है, जिसके कारण साल भर में कुल 26 एकादशी होंगी। जिस वर्ष अधिक मास पड़ता है, उस वर्ष सभी व्रत-त्योहारों का प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है। इस प्रकार, यह वर्ष न केवल अधिक एकादशी वाला है, बल्कि प्रत्येक एकादशी के पुण्य फल को भी कई गुना बढ़ा देता है, जिससे यह षटतिला एकादशी आध्यात्मिक उन्नति के लिए एक अत्यंत शक्तिशाली तिथि बन जाती है, जिसका शुभ प्रभाव आपके राशिफल के अनुसार आपके जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
षटतिला एकादशी की कथा
षटतिला एकादशी कथा (Shattila Ekadashi Katha) का विस्तृत वर्णन पद्म पुराण में मिलता है। यह कथा हमें इस व्रत के आध्यात्मिक महत्व और दान के पुण्य फल को समझाती है:
प्राचीन काल में, देवर्षि नारद मुनि ने भगवान विष्णु से एकादशी व्रत के फल और विधि के बारे में पूछा। तब भगवान विष्णु ने उन्हें विस्तार से एक कथा सुनाई:
एक समय की बात है, पृथ्वी पर एक धर्मपरायण ब्राह्मणी निवास करती थी। वह भगवान विष्णु की परम भक्त थी और पूरे वर्ष श्रद्धा से हर एकादशी का व्रत रखती थी और पूजा-पाठ भी करती थी, लेकिन कभी भी अन्न दान नहीं करती थी। वह अपने घर की गरीबी से बहुत दुखी थी और हमेशा मोक्ष की कामना करती थी।
जब उसकी मृत्यु हुई, तो वह अपने पुण्य कर्मों के कारण बैकुंठ धाम पहुँच गई, लेकिन वहाँ उसे रहने के लिए केवल एक खाली कुटिया प्राप्त हुई। उसने भगवान विष्णु से इस बारे में पूछा कि इतनी भक्ति और व्रत के बाद भी उसे खाली स्थान क्यों मिला, जबकि उसने जीवन भर पूजा की थी।
भगवान विष्णु ने बताया, "हे देवी! तुमने व्रत और पूजा तो खूब की, लेकिन तुमने कभी भी अन्न का दान नहीं किया, इसलिए तुम्हें यह खाली स्थान मिला। अब तुम जाओ और देवियों से षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) की विधि पूछो। जब वे तुम्हारे पास आएं, तो तुम उनसे एकादशी व्रत का विधान पूछना, लेकिन जब तक वे विधान न बता दें, तब तक द्वार मत खोलना।"
ब्राह्मणी ने भगवान की आज्ञा का पालन किया। देवियों ने उसे षटतिला एकादशी व्रत विधि (Shattila Ekadashi Vrat Vidhi) बताई। ब्राह्मणी ने श्रद्धापूर्वक इस एकादशी का व्रत किया और छह प्रकार के तिल का दान किया। इस व्रत के और तिल दान के प्रभाव से उसकी कुटिया धन-धान्य और सभी प्रकार के सुखों से भर गई और उसे अंततः मोक्ष की प्राप्ति हुई।
तब से ही तिल एकादशी व्रत (Til Ekadashi Vrat) का महत्व बढ़ गया और षटतिला एकादशी (Shat Tila Ekadashi) को तिल दान और अन्न दान के महत्व को समझने के लिए मनाया जाने लगा।
षटतिला एकादशी व्रत विधि
1. प्रातःकाल की तैयारी
• प्रातःकाल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
• कुछ तिल जल में मिलाकर स्नान करना श्रेष्ठ माना जाता है।
• स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
• एकादशी व्रत का संकल्प लें और मन को शांत रखें।
2. पूजा-स्थान की व्यवस्था
• पूजा स्थान की पूर्ण सफाई करें।
• पीला या सफेद कपड़ा बिछाएँ।
• भगवान विष्णु की प्रतिमा को पूर्व दिशा में स्थापित करें।
• कलश स्थापित करें और उसमें स्वच्छ जल भरकर थोड़े से तिल डालें।
3. पूजन सामग्री
• तिल (काला/सफेद), चावल (अक्षत), चंदन, जल, पुष्प, तुलसी दल
• धूप, दीप, नैवेद्य, पंचामृत
• दान सामग्री: तिल, गुड़, वस्त्र, अन्न, दीपदान के लिए घी या तिल का तेल
4. भगवान विष्णु का पूजन क्रम
• दीप प्रज्वलित करें।
• चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
• तुलसीदल अवश्य अर्पित करें।
• घड़े (कलश) पर तिल छिड़ककर चंदन एवं पुष्प अर्पित करें।
5. विधिवत मंत्र-पाठ
पूजा और अर्घ्य के दौरान नीचे दिए गए शुद्ध मंत्र स्पष्ट उच्चारण के साथ पढ़ें:
कृष्ण कृष्ण कृपालुस्त्वमगतिनां गतिर्भव । संसारार्णवमग्नानां प्रसीद पुरुषोत्तम ॥
नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन । सुब्रह्मण्य नमस्तेऽस्तु महापुरुष पूर्वज ॥
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं लक्ष्म्या सह जगत्पते ।
6. तिल का विशेष उपयोग (षट् रूप)
शास्त्रों में शटतिला एकादशी पर तिल का उपयोग छह प्रकार से करने का विधान है—
• तिल स्नान
• तिल से अभिषेक
• तिल का भोजन
• तिल का दान
• तिल से हवन
• तिल से पूजा
इनका उपयोग करने से व्रत पूर्ण फलदायी माना जाता है।
7. अन्न और वस्त्र दान
• तिल, गुड़, वस्त्र, अन्न, घड़ा और दीपदान का दान अत्यंत शुभ है।
• किसी साधु, ब्राह्मण या जरूरतमंद को तिल युक्त वस्तुओं का दान करें।
8. व्रत नियम एवं आहार
• दिनभर सात्त्विकता और संयम रखें।
• फलाहार करें या पारंपरिक एकादशी आहार ग्रहण करें।
• लहसुन-प्याज और तामसिक भोजन से पूर्ण परहेज करें।
9. कथा-वाचन
• षटतिला एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना फलदायी होता है।
10. रात्रि उपासना व समापन
• शाम को पुनः भगवान विष्णु की आरती करें।
• भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि, पाप-निवारण और कल्याण की प्रार्थना करें।
• अगले दिन द्वादशी तिथि में व्रत का पारण करें।
षटतिला एकादशी पूजा सामग्री
षटतिला एकादशी पूजा (Shattila Ekadashi Puja) के लिए आवश्यक सामग्री को षटतिला एकादशी पूजा समय (Shattila Ekadashi Puja Time) से पहले एकत्रित कर लेना चाहिए। पूजा में प्रयोग होने वाली मुख्य सामग्री इस प्रकार है:
• भगवान विष्णु की तस्वीर।
• तुलसी दल।
• गंगाजल या शुद्ध जल।
• पंचामृत।
• दीपक और तेल/घी।
• धूप/अगरबत्ती।
• पीले पुष्प।
• चंदन, रोली, अक्षत।
• पीला वस्त्र
• कलावा
• चने की दाल ।
• तिल से बने व्यंजन।
इन सभी सामग्रियों का उपयोग करके विधिपूर्वक तिल एकादशी पूजा (Til Ekadashi Puja) करनी चाहिए।
षटतिला एकादशी के विशेष नियम
व्रत का पालन करते समय कुछ विशेष नियमों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। यह नियम षटतिला एकादशी 2026 तिथि समय (Shattila Ekadashi 2026 Tithi Timing) के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं: यदि आप विस्तार से पूजा विधि पढ़ना चाहते हैं, तो हमारे ब्लॉग पर अन्य लेख भी देख सकते हैं:
• तिल का महत्व: इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग करना अत्यंत शुभ माना गया है। तिल का दान करना जिसे षटतिला एकादशी में तिल दान (Shattila Ekadashi Me Til Daan) भी कहते हैं, सबसे बड़ा पुण्य फल प्रदान करता है।
• अन्न का त्याग: एकादशी के दिन चावल और किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है।
• पारण: व्रत खोलने के लिए पारण का समय एकादशी पारण समय 2026 (Ekadashi Paran Time 2026) के अनुसार ही होना चाहिए।
• व्यवहार: मन में किसी के प्रति बुरा विचार न लाएं, क्रोध से बचें और झूठ बोलने से बचें।
• ब्रह्मचर्य: व्रत के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
इन नियमों का पालन करके षटतिला एकादशी 2026 (Sattila Ekadashi 2026) का पूरा लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
षटतिला एकादशी मंत्र जप
इस दिन भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करना बहुत ही लाभकारी होता है। षटतिला एकादशी पूजा (Shattila Ekadashi Puja) करते समय कम से कम 108 बार इन मंत्रों का जप करें। जप तिल एकादशी शुभ समय (Til Ekadashi Shubh Samay) में शुरू करना चाहिए:
1. मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
2. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) के दौरान विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना मोक्षदायक माना गया है।
षटतिला एकादशी (क्या करें और क्या न करें)
यह जानना महत्वपूर्ण है कि षट तिल एकादशी कैसे रखते है (Shat Til Ekadashi kaise rakhte hain) और इस दिन कौन से धार्मिक अनुष्ठान करने चाहिए और किन व्यवहारों से बचना चाहिए:
क्या करें
• स्नान: जल में तिल मिलाकर स्नान करें, जिसे षटतिला एकादशी तिल स्नान (Shattila Ekadashi Til Snan) कहा जाता है, यह शुद्धिकरण हेतु आवश्यक है।
• दान: तिल, अन्न, वस्त्र और ऊनी/गर्म कपड़ों का सामर्थ्य अनुसार दान करें। अक्सर आपके मन में सवाल आते होंगे की षटतिला एकादशी पर क्या दान करना चाहिए? (Shattila Ekadashi par kya daan karna chahiye?) तो मैं आपको यहाँ स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि इस दिन तिल और अन्न दान सर्वाधिक शुभ और पुण्यदायी माने जाते हैं।
• जागरण: रात्रि के समय भगवान विष्णु के नाम का संकीर्तन, भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करें।
• पूजा: भगवान विष्णु को तिल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित कर षटतिला एकादशी पूजा (Shattila Ekadashi Puja) विधिवत संपन्न करें।
क्या न करें
• अनाज: चावल, जौ और अन्य किसी भी प्रकार के अनाज का सेवन पूर्णतः वर्जित है।
• निंदा: किसी भी व्यक्ति की निंदा, चुगली या असत्य कथन (झूठ) का प्रयोग न करें।
• क्रोध: मन में किसी भी प्रकार का विकार या क्रोध न लाएँ, पूर्ण मानसिक शांति बनाए रखें।
• तुलसी तोड़ना: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है, पूजन हेतु पत्ते एक दिन पूर्व ही तोड़ लें।
षटतिला एकादशी का ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र में षटतिला एकादशी (Shattila Ekadashi) को एक अत्यंत पुण्यकारी तिथि माना गया है। Shattila Ekadashi 2026 पर किए गए षटतिला एकादशी के उपाय (Shattila Ekadashi Ke Upay) से ग्रहों के दोष शांत होते हैं।
• पाप मुक्ति: इस व्रत को करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में समृद्धि आती है।
• पितृ दोष: तिल का दान करने से पितृों को शांति मिलती है, जिससे पितृ दोष का प्रभाव कम हो जाता है। षटतिला एकादशी का महत्व (Importance of Shattila Ekadashi) इसलिए भी है क्योंकि यह व्यक्ति के कुंडली में सकरात्मकता लाती है और पूर्वजों का आशीर्वाद दिलाती है।
• ग्रहों का प्रभाव: तिल का दान शनि और राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने में भी सहायक होता है। षटतिला एकादशी उपाय (Shattila Ekadashi Upay) के रूप में काले तिल का दान विशेष रूप से किया जाता है।
षटतिला एकादशी 2026 (Sath Tila Ekadashi 2026) पर विधिवत पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता आती है और उसकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति मजबूत होती है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।
षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व
षटतिला एकादशी का महत्व (Shattila Ekadashi Ka Mahatva) धार्मिक रूप से अतुलनीय है और इसका वर्णन कई धर्म ग्रंथों में मिलता है।
• मोक्ष प्राप्ति: मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति यह व्रत सच्चे मन से करता है, उसे मृत्यु के बाद बैकुंठ धाम में स्थान मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
• धन-धान्य: यह व्रत करने वाले व्यक्ति के घर में कभी भी धन और अन्न की कमी नहीं होती, क्योंकि यह व्रत अन्न दान का महत्व भी बताता है।
• आरोग्य: तिल का प्रयोग करने से शरीर स्वस्थ रहता है और कई प्रकार के रोगों से बचाव होता है। षटतिला एकादशी के लाभ (Shattila Ekadashi Benefits) में शारीरिक और मानसिक दोनों स्वास्थ्य शामिल हैं।
• भगवान विष्णु की कृपा: इस दिन व्रत करने से भगवान विष्णु (श्री कृष्ण) शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
इस दिन षटतिला एकादशी तिल दान (Shattila Ekadashi Til Daan) को बहुत बड़ा धर्म कर्म माना गया है, क्योंकि तिल को भगवान विष्णु का ही रूप माना जाता है।
षटतिला एकादशी पर क्या खाना चाहिए? (Food Tradition)
चूँकि एकादशी पर अनाज वर्जित है, इसलिए उपवास के दौरान केवल फलाहारी खाद्य पदार्थों का ही सेवन किया जाता है। एकादशी जनवरी 2026 (Ekadashi January 2026) के व्रत में आप निम्नलिखित चीजों का सेवन कर सकते हैं:
• फलाहार: मौसमी फल, दूध, दही, और पनीर।
• सब्जी: आलू, शकरकंद, गाजर, जिन्हें सेंधा नमक और शुद्ध घी में बनाया गया हो।
व्रत में सात्विक और साधारण भोजन ही ग्रहण करना चाहिए, तेल और मसाले का प्रयोग सीमित रखना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. षटतिला एकादशी पर किसकी पूजा की जाती है?
षटतिला एकादशी पर मुख्य रूप से भगवान विष्णु (उनके श्री कृष्ण स्वरूप) की पूजा की जाती है। इस दिन तुलसी दल और तिल का भोग लगाकर उनकी आराधना की जाती है। कई भक्त इस शुभ समय में विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करते है।
2. षटतिला एकादशी क्यों मनाई जाती है?
यह एकादशी मुख्य रूप से पापों से मुक्ति, मोक्ष की प्राप्ति, और तिल दान के महत्व को दर्शाने के लिए मनाई जाती है। यह हमें सिखाती है कि भौतिक और आध्यात्मिक सुखों के लिए दान-पुण्य करना कितना आवश्यक है।
3. षटतिला एकादशी व्रत कैसे करें?
षटतिला एकादशी व्रत (Shattila Ekadashi Vrat) को तिल का छह प्रकार से उपयोग करते हुए, बिना अन्न का सेवन किए, और भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करके किया जाता है। षटतिला एकादशी कैसे रखते है (Shat Tila Ekadashi kaise rakhte hain) इसकी पूरी जानकारी के लिए ऊपर दिए गए 'षटतिला एकादशी व्रत विधि' खंड को ध्यान से पढ़ें।
4. षटतिला एकादशी में तिल का क्या महत्व है?
तिल का महत्व इसलिए है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार, इस दिन तिल का दान करना सोने के दान के बराबर माना गया है। छह प्रकार से तिल का उपयोग करने से व्यक्ति को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है, इसलिए तिल इस व्रत का केंद्रीय तत्व है।
5. षटतिला एकादशी पर क्या दान करना चाहिए?
इस दिन तिल, अन्न (ब्राह्मण को भोजन), कम्बल, और गर्म वस्त्रों का दान करना सबसे शुभ माना जाता है। तिल दान विशेष रूप से फलदायी होता है।







