पौष पुत्रदा एकादशी 2025
पौष के शुक्ल पक्ष की एकादशी को `पुत्रदा एकादशी कहते है। इस एकादशी को 'वैकुंठ एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है। यह सब पापो को हरने वाली उत्तम तिथि है। समस्त सिद्धियों एवं कामनाओं को प्रदान करने वाले भगवान नारायण इस तिथि के अधि देवता है।
पौष पुत्रदा एकादशी क्या है?
पौष पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में मनाई जाने वाली एक महत्वपूर्ण एकादशी है, जो पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना की जाती है और संतान प्राप्ति की कामना से व्रत रखा जाता है। 'पुत्रदा' का अर्थ है 'पुत्र प्रदान करने वाली', अतः यह एकादशी विशेष रूप से उन दंपतियों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है जो संतान सुख की प्राप्ति की इच्छा रखते हैं। इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से संतान सुख, घर में समृद्धि और पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पौष पुत्रदा एकादशी तिथि और समय 2025
पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी 30 दिसंबर को मनायी जाएगी।
पौष पुत्रदा एकादशी तिथि: 30 दिसंबर 2025
एकादशी का प्रारंभ: 30 दिसंबर को सुबह 7: 53 A.M
एकादशी तिथि समाप्त: 31 दिसंबर को सुबह 5:00 A.M तक
व्रत पारण का समय: 31 दिसंबर को सूर्योदय के बाद
पौष पुत्रदा एकादशी की कथा
बहुत समय पहले की बात है, भद्रावती पुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चंपा था। राजा को बहुत समय तक कोई संतान नहीं हुयी। सभी सुखों से परिपूर्ण राजा की पत्नी संतान ना होने के कारण चिंता में डूबी रहती थी। राजा के पितर उनके दिए हुए जल को शोकोच्छ्वास से गर्म करके पीते थे। राजा के बाद और कोई ऐसा नहीं दिखाई देता था, जो हम लोगों को दर्पण करेगा। यह सोच कर राजा के पितर दुखी रहते थे। एक दिन राजा घोड़े पर सवार होकर वन में भ्रमण के लिए निकले। राजा के किसी भी पुरोहित आदि को इस बात का पता नहीं था, मृग और पक्षियों से भरे उस घने जंगल में राजा भ्रमण करने लगे। इस प्रकार घूम घूम कर राजा वन की शोभा देख रहे थे। भ्रमण करते हुए राजा को समय का पता नहीं चला और दोपहर हो गई राजा को भूख और प्यास सताने लगी। प्यास से व्याकुल होकर राजा जल की खोज में इधर उधर घूमने लगे। किसी पुण्य के प्रभाव से उन्हें एक उत्तम सरोवर दिखायी दिया। जिसके समीप मुनियों के बहुत से आश्रम थे। नरेश ने उन आश्रमों की ओर देखा। उस समय शुभ की सूचना देने वाले शकुन होने लगे। राजा का दाहिना नेत्र दाहिना हाथ फड़कने लगा। जो उत्तम फल की सूचना दे रहा था। सरोवर के तटपर बहुत मुनि वेद पाठ कर रहे थे। तट पर मुनियों को वेद पाठ करते देखकर राजा को बड़ा हर्ष हुआ। राजा घोड़े से उतर कर वेद पाठ कर रहे मुनियों के पास जाकर खड़े हो गए , और बारी -बारी सबकी वंदना करने लगे। वे मुनि उत्तम व्रत का पालन करने वाले थे। जब राजा ने हाथ जोड़कर बारम्बार दण्डवत किया। तब मुनि बोले हम सब आपसे प्रसन्न हैं राजन आप हमे बताए कि आप कौन हैं ? आपका नाम क्या है ? तब राजा ने उन मुनियों को अपना परिचय देते हुए विनम्रता पूर्वक प्रश्न किया कि हे मुनिवरों आप लोग मुझे बताए आप लोग किस लिए यहाँ एकत्रित हुए हैं ? मुनि बोले राजा हम लोग विश्व देव हैं। यहाँ स्नान के लिए आए हैं। माघ निकट आया है। आज से पांचवें दिन माघ स्नान आरंभ हो जाएगा। मुनियों ने बताया की हे राजन आज ही पुत्रदा एकादशी है, जो व्रत करने वाले मनुष्यों को पुत्र देती है। राजा ने कहा - विश्वदेवगण! यदि आप लोग प्रसन्न है तो मुझे पुत्र दीजिये। मुनि बोले राजन्! आज के दिन 'पुत्रदा' नाम की एकादशी है। इसका व्रत बहुत विख्यात है। तुम आज इस उत्तम व्रत का पालन करो। भगवान केशव के प्रसाद से तुम्हें पुत्र अवश्य प्राप्त होगा।
राजा ने महाऋषियों के उपदेश से उत्तम व्रत का विधि पूर्वक पालन व अनुष्ठान किया। उसके पश्चात रानी ने गर्भधारण किया। समय आने पर पुण्य कर्म करने वाले राजा को तेजस्वी पुत्र प्राप्त हुआ। जिसने अपने गुणों से पिता को संतुष्ट किया। वह प्रजाओं का पालक हुआ।
जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर पुत्रदा एकादशी का पालन करते है। वे इस लोक में पुत्र प्राप्त कर परलोक में मोक्ष प्राप्त करते हैं, इस एकादशी के महत्व को पढ़ने और सुनने मात्र से ही अग्निष्टोम यज्ञ का फल मिलता है।
पौष पुत्रदा एकादशी पूजा 2025: अनुष्ठान
पौष मास के शुक्ल पक्ष में दशमी के उत्तम दिन को श्रद्धायुक्त चित्त से प्रातः काल स्नान करें। फिर मध्याहन काल में एकाग्रचित्त हो एक समय भोजन करें तथा रात्रि में भूमि पर सोए, रात के अंत में निर्मल प्रभात होने पर एकादशी के दिन नित्यकर्म करके स्नान करें इसके बाद भक्ति भाव से निम्नांकित मंत्र पढ़ते हुए उपवास का नियम ग्रहण करें-
अद्य स्थित्वा निराहारः सर्वभोगविवर्जितः।
श्वो भोक्ष्ये पुण्डरीकाक्ष शरणं में भवाच्युत।।
' कमलनयन भगवान, नारायण! आज मैं सब भोगों से अलग हो निराहार रहकर कल भोजन करूंगा। अच्युत! आप मुझे शरण दें।
तत्पश्चात धूप और गंध आदि से भगवान हरीकेश का पूजन करके रात्रि में उनके समीप जागरण करें। पुनः सवेरा होने पर द्वादशी के दिन पुन: भक्ति पूर्वक श्री हरि की पूजा करें। उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करा कर भाई- बंधु, नाती और पुत्र आदि के साथ स्वयं मौन होकर भोजन करें।
पौष पुत्रदा एकादशी 2025: लाभ
• संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों को योग्य संतान का आशीर्वाद मिलता है।
• व्रत रखने से अनेक यज्ञों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
• पूर्व जन्मों और वर्तमान जन्म के पाप नष्ट होते हैं।
• पारिवारिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
• भगवान विष्णु की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
पौष पुत्रदा एकादशी 2025: पूजा विधि
1. दशमी तिथि को तैयारी:
• एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से होती है।
• दशमी तिथि को एक समय सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
• मन, वचन और कर्म से पवित्र रहें।
2. प्रातःकाल स्नान और संकल्प:
• एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
• स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
• भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत और पूजा का संकल्प लें:
"मैं श्रीहरि विष्णु की कृपा प्राप्ति हेतु साफला एकादशी का व्रत करता/करती हूँ, कृपया इसे सफल करें।"
3. पूजा स्थल की तैयारी:
• पूजा के लिए लकड़ी या चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं।
• भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।
4. भगवान विष्णु की पूजा करें:
• भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, धूप, दीप, चंदन, रोली, और सुगंधित जल अर्पित करें।
• नैवेद्य में फल, मिष्ठान्न, दूध, पंचामृत आदि अर्पण करें।
• विष्णु सहस्रनाम या विष्णु स्तोत्र का पाठ करें।
5. व्रत का नियम:
• पूरे दिन व्रती को उपवास करना चाहिए ।
• दिनभर भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन और कथा श्रवण करें।
• रात्रि को जागरण करना पुण्यकारी माना गया है।
6. द्वादशी को पारण:
• अगली सुबह द्वादशी तिथि को ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन और दान देकर व्रत का पारण करे।
पौष पुत्रदा एकादशी 2025: मंत्र जप
• मंत्र: ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
अर्थ: मैं भगवान वासुदेव को नमस्कार करता हूँ और उनका शरणागत होता हूँ।
लाभ: इस मंत्र के नियमित जप से जीवन में शांति, सुरक्षा, और विष्णु भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
• मंत्र: ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥
अर्थ : हम नारायण भगवान को जानें, वासुदेव को ध्यान में रखें, और वह विष्णु हमें सद्बुद्धि प्रदान करें।
लाभ: इस मंत्र से बुद्धि और निर्णय शक्ति का विकास होता है।
पौष पुत्रदा एकादशी 2025: महत्त्व
पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत विशेष रूप से संतान सुख की प्राप्ति और परिवार की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्रत पुण्य, शांति और मोक्ष प्रदान करने वाला है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि, संतान रत्न और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यह एकादशी आत्मशुद्धि और भगवान की कृपा पाने का उत्तम अवसर है।
पौष पुत्रदा एकादशी 2025: धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, पौष पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से उन दंपत्तियों को विशेष लाभ होता है जिन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हो रही हो। स्कंद पुराण और पद्म पुराण में इस व्रत का विस्तृत उल्लेख है, जिसमें कहा गया है कि यह व्रत पापों का नाश कर मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम, कथा वाचन और रात्रि जागरण से ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. पौष पुत्रदा एकादशी किस राज्य में मनाई जाती है?
पौष पुत्रदा एकादशी मुख्यतः उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे उत्तर भारतीय राज्यों में श्रद्धापूर्वक मनाई जाती है। अन्य राज्यों में भी विष्णु भक्त इसे श्रद्धा से मानते हैं।
2. हम पौष पुत्रदा एकादशी क्यों मनाते हैं?
हम पौष पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु की कृपा पाने और संतान सुख की प्राप्ति के लिए मनाते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन व्रत रखने से पुत्र रत्न की प्राप्ति और पापों से मुक्ति मिलती है।
3. पौष पुत्रदा एकादशी पर क्या करें?
• प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
• भगवान विष्णु की पूजा करें और तुलसी अर्पित करें।
• दिनभर व्रत रखें, फलाहार या निर्जल रहें।
• विष्णु मंत्रों का जाप व भजन-कीर्तन करें।
• गरीबों को अन्न, वस्त्र व दक्षिणा का दान करें।
4. घर पर पौष पुत्रदा एकादशी पूजा कैसे करें?
• सुबह स्नान कर भगवान विष्णु के व्रत का संकल्प लें।
• घर के साफ स्थान पर पीला कपड़ा बिछाकर विष्णुजी की मूर्ति या चित्र रखें।
• तुलसी, पीले फूल, धूप-दीप, चंदन और फल से पूजा करें।
• "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें और विष्णु सहस्रनाम पढ़ें।
• आरती करें, प्रसाद वितरित करें और जरूरतमंदों को दान दें।
5. 2025 में पौष पुत्रदा एकादशी कब शुरू होगी?
पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी 30 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी। यह व्रत विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य प्राप्ति के लिए रखा जाता है। एकादशी तिथि का प्रारंभ 30 दिसंबर को सुबह 7:53 बजे होगा और इसका समापन 31 दिसंबर को शाम 5:00 बजे तक होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु 31 दिसंबर को सूर्योदय के बाद व्रत पारण कर सकते हैं।
6. पौष पुत्रदा एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?
• अनाज और चावल का सेवन न करें।
• तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
• तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
• क्रोध, झूठ और वाद-विवाद से बचें।
• निंद्रा में समय न गवाएं।
• तामसिक भोजन से दूर रहें।
7. पौष पुत्रदा एकादशी के दिन क्या करना चाहिए?
• स्नान कर व्रत का संकल्प लें और दिनभर उपवास रखें।
• भगवान विष्णु की पूजा करें, उन्हें पीले फूल और तुलसीदल अर्पित करें।
• “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें और विष्णु सहस्रनाम पढ़ें।
• रात्रि में जागरण करें और भजन-कीर्तन में समय बिताएं।
• गरीबों को अन्न, वस्त्र या दक्षिणा का दान करें, जिससे पुण्य की प्राप्ति होती है।
8. इसे पौष पुत्रदा एकादशी क्यों कहा जाता है?
इस व्रत को पौष पुत्रदा एकादशी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह पौष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आती है और इसका मुख्य उद्देश्य पुत्र की प्राप्ति या संतान सुख की कामना होता है।







