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मोक्षदा एकादशी 2025
मोक्षदा एकादशी मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पवित्र एकादशी तिथि है। वर्ष 2025 में यह व्रत 1 दिसंबर, सोमवार को पड़ेगा। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना, व्रत और दान करने से पापों का क्षय होता है तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस व्रत के पुण्य से स्वयं के साथ-साथ पितरों को भी उत्तम लोक की प्राप्ति होती है।
मोक्षदा एकादशी क्या है?
मोक्षदा एकादशी सनातन धर्म में मार्गशीर्ष (अगहन) मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कहा जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इसका विशेष धार्मिक महत्व है।
मोक्षदा एकादशी तिथि, समय 2025
मोक्षदा एकादशी 2025 में सोमवार, 1 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी।
• एकादशी तिथि प्रारम्भ: 30 नवंबर 2025, रात 09:31 P.M बजे
• एकादशी तिथि समाप्त: 01 दिसंबर 2025, शाम 07:02 P.M बजे
• व्रत पारण का समय: 02 दिसंबर 2025 सूर्योदय के बाद
मोक्षदा एकादशी की कथा
पूर्व काल की बात है। वैष्णो से विभूषित, परम इस रमणीय चंपक नगर में बैखानस नामक राजा रहते थे। वे अपनी प्रजा का पुत्र की भांति पालन करते थे। इस प्रकार राज्य करते हुए राजा ने एक दिन रात को स्वप्न में अपने पितरों को नीच योनि में पड़ा हुआ देखा। उन सबको इस अवस्था में देखकर राजा को बड़ा कष्ट हुआ और प्रातः काल ब्राह्मणों से सपने का सारा हाल सुनाया।
राजा बोले, "ब्राह्मणों! मैंने अपने पितरों को नरक में गिरा देखा है। वे मुझसे बारंबार रोते हुए कह रहे थे कि तुम हमारे तनुज हो, इसलिए इस नरक समुद्र से हमारा उद्धार करो। ब्राह्मण! इस रूप में मुझे पितरों के दर्शन हुए, इससे मुझे चैन नहीं मिल रहा है। ब्राह्मण! वह व्रत, वह तप, वह योग जिससे मेरे पूर्वज तत्काल नरक से छुटकारा पा जाएं, बताने की कृपा करें।"
ब्राह्मणों ने कहा, "यहां से निकट पर्वत मुनि का आश्रम है। वह भूत, भविष्य के ज्ञाता हैं। राजन! आप उन्हीं के पास चले जाएं।"
ब्राह्मण की बात सुनकर राजा शीघ्र पर्वत मुनि के आश्रम गए। वहां मुनि को देखकर उन्होंने दंडवत प्रणाम किया। मुनि ने राजा से राज्य की कुशलता पूछी। राजा बोले, "आपकी कृपा से सब कुशल है, किंतु सपने में मैंने अपने पितरों को नरक लोक में कष्ट भोगते देखा है। अतः बताएं किस पुण्य प्रभाव से उनका निवारण हो सकता है।"
राजा की बात सुनकर, पर्वत मुनि ने राजा को बताया कि मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को 'मोक्षदा एकादशी' का व्रत करने से पितरों का उद्धार होता है। मुनि ने राजा को इस व्रत की विधि और महिमा विस्तार से समझाई।
यह बात सुनकर राजा पुनः अपने घर लौट आए। जब उत्तम मार्गशीर्ष मास आया, तब राजा ने मुनि के वचनानुसार मोक्षदा एकादशी का व्रत किया और उसका पुण्य समस्त पितरों सहित अपने पिता को दे दिया। पुण्य देते ही आकाश से पुष्पों की वर्षा होने लगी। राजा के पिता सहित समस्त पितर नरक से छुटकारा पा गए और आकाश में जाकर राजा के लिए यह पवित्र वचन बोले, "बेटा! तुम्हारा कल्याण हो।" यह कहकर वे स्वर्ग चले गए।
जो इस प्रकार कल्याणमयी मोक्षदा एकादशी का व्रत करता है, उसके पाप नष्ट हो जाते हैं और मरने के बाद वह मोक्ष प्राप्त कर लेता है। यह मोक्ष देने वाली 'मोक्षदा', 'उत्पत्ति' या 'उत्पन्ना एकादशी' मनुष्यों के लिए चिंतामणि (कामनाओं को पूरा करनेवाला एक कल्पित रत्न) के समान समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली है। इस महत्व के पढ़ने और सुनने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है, अर्थात उसके सभी कार्य संपन्न होते हैं।
मोक्षदा एकादशी पूजा 2025: अनुष्ठान
मार्गशीर्ष मास शुक्ल पक्ष में दशमी के उत्तम दिन को श्रद्धा युक्त चित्त से प्रातः काल स्नान करें। फिर मध्याहन काल में एकाग्र चित्त हो एक समय भोजन करें तथा रात्रि में भूमि पर सोए रात के अंत में निर्मल प्रभात होने पर एकादशी के दिन नित्यकर्म करके स्नान करे। इसके बाद भक्ति भाव से निम्नांकित मंत्र पढ़ते हुए उपवास का नियम ग्रहण करें-
अद्य स्थित्वा निराहारः सर्वभोगविवर्जितः।
श्वो भोक्ष्ये पुण्डरीकाक्ष शरणं में भवाच्युत।।
कमलनयन भगवान, नारायण! आज मैं सब भोगों से अलग हो निराहार रहकर कल भोजन करूंगा। अच्युत! आप मुझे शरण दे। फिर धूप और गंध आदि से भगवान नारायण का पूजन करके रात्रि में उनके समीप जागरण करे। तत्पश्चात सवेरा होने पर द्वादशी के दिन पुन: भक्ति पूर्वक श्री हरि की पूजा करें। उसके बाद ब्राह्मणों को भोजन करा कर भाई- बंधु, नाती और पुत्र आदि के साथ स्वयं मौन होकर भोजन करें।
मोक्षदा एकादशी 2025: लाभ?
- पितरों को मोक्ष की प्राप्ति: इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इसके पुण्य से व्यक्ति अपने पूर्वजों को नरक के कष्टों से मुक्ति दिलाकर उन्हें मोक्ष प्रदान कर सकता है।
- पापों का नाश: मोक्षदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह आत्मा को शुद्ध करता है और उसे सकारात्मकता की ओर ले जाता है।
- मोक्ष की प्राप्ति: जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, 'मोक्षदा' का अर्थ है मोक्ष देने वाली। इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करने से व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है और भगवान विष्णु के दिव्य लोक में स्थान पाता है।
- सभी कामनाओं की पूर्ति: इस एकादशी को चिंतामणि के समान माना गया है, जिसका अर्थ है कि यह मनुष्य की समस्त इच्छाओं और मनोकामनाओं को पूर्ण करती है।
मोक्षदा एकादशी 2025: पूजा विधि
• सुबह स्नान कर अपने पूजा-स्थान को अच्छी तरह स्वच्छ करें।
• लाल या पीले रंग का आसन बिछाकर उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
• भगवान विष्णु का पंचामृत से अभिषेक करें।
• इसके बाद, गंगाजल से आचमन कराएं ।
• चरणामृत का पूजा-स्थान और घर में छिड़काव करें।
• भगवान विष्णु को चंदन, फूल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
• तुलसी की पत्तियाँ 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' जैसे मंत्रोच्चारण के साथ अर्पित करें।
• पूजा के अंत में, भगवान को भोग लगाएं ।
• पूरे दिन घर में विष्णु स्तोत्र का पाठ, भजन-कीर्तन करें।
• शाम के समय देवी लक्ष्मी का पूजन या हवन करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
मोक्षदा एकादशी 2025: मंत्र जप?
मोक्षदा एकादशी के दिन मंत्रों के जप के लिए कोई खास मंत्र नहीं बताया गया है, यदि आप मंत्रों का जप करना चाहते है तो आप भगवान विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए कुछ मंत्रों का जप कर सकते है।
• "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" यह भगवान विष्णु का सबसे मुख्य और प्रभावी मंत्र है। इसका जप करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मन को शांति मिलती है।
• हरे राम, हरे राम, राम राम, हरे हरे। हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे।। इस महामंत्र का तुलसी की माला से 108 बार जप करना बहुत फलदायी होता है।
• विष्णु सहस्रनाम और विष्णु स्तोत्रों का पाठ करें। इन पाठों से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
मोक्षदा एकादशी 2025: महत्व
- मनोकामना पूर्ति: इस एकादशी को 'चिंतामणि' के समान बताया गया है, जिसका अर्थ है कि यह मनुष्य की सभी सद्भावनापूर्ण इच्छाओं और कामनाओं को पूरा करती है।
- वाजपेय यज्ञ का फल: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मोक्षदा एकादशी के महत्व को केवल पढ़ने या सुनने मात्र से ही वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। वाजपेय यज्ञ एक अत्यंत पवित्र और बड़ा यज्ञ माना जाता है, जिसके करने से महान पुण्य मिलते हैं और सभी कार्य सफल होते हैं।
- गीता जयंती: इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसलिए इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन गीता का पाठ करना और उसके उपदेशों का पालन करना विशेष फलदायी माना जाता है।
मोक्षदा एकादशी की विशेषता
मोक्षदा एकादशी मोक्ष देने वाली एकादशी है। यह पितरों के उद्धार और पापों के नाश के लिए विशेष है। इसी दिन श्रीमद्भगवद्गीता का अवतरण हुआ था, जिससे इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। यह सभी कामनाएँ पूर्ण कर वाजपेय यज्ञ का फल देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. मोक्षदा एकादशी किस राज्य में मनाई जाती है?
मोक्षदा एकादशी किसी एक विशेष राज्य में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत और विश्व भर में सनातन धर्म (हिंदू धर्म) को मानने वाले लोगों द्वारा मनाई जाती है। यह एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जिसका पालन सभी क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ भगवान विष्णु के भक्त निवास करते हैं।
2. हम मोक्षदा एकादशी क्यों मनाते हैं?
मोक्षदा एकादशी हम मोक्ष पाने, पितरों के उद्धार, और पापों से मुक्ति के लिए मनाते हैं। इसी दिन श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान दिया गया था, इसलिए यह आध्यात्मिक उन्नति और कामना पूर्ति का भी पर्व है।
3. मोक्षदा एकादशी में क्या करें?
मोक्षदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करें, व्रत रखें और गीता का पाठ करें। दान करें और रात में जागरण करें। शांत मन से भगवान का स्मरण करें।
4. मोक्षदा एकादशी पूजा घर पर कैसे करें?
घर पर मोक्षदा एकादशी पूजा के लिए, सुबह स्नान कर विष्णु जी का चित्र स्थापित करें। पंचामृत और जल से अभिषेक कर चंदन, फूल, तुलसी, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र जपें और गीता का पाठ करें। शाम को आरती कर, द्वादशी पर व्रत खोलें।
5. मोक्षदा एकादशी की पूजा कैसे करें?
मोक्षदा एकादशी पर, सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के पूजा स्थान पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। उन्हें पंचामृत से अभिषेक कराएं और फिर जल से। चंदन, पीले फूल, तुलसी दल, धूप-दीप और नैवेद्य (फल-मिठाई) अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करें। विष्णु सहस्रनाम या गीता का पाठ करें। शाम को आरती कर, अगले दिन द्वादशी पर व्रत खोलें।
6. मोक्षदा एकादशी 2025 में कब शुरू होगी?
मोक्षदा एकादशी 2025 में सोमवार, 1 दिसंबर को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 30 नवंबर 2025 को रात 09:31 बजे शुरू होगी और 01 दिसंबर 2025 को शाम 07:02 बजे समाप्त होगी। व्रत 1 दिसंबर 2025 को रखा जाएगा, और पारण (व्रत तोड़ने का) समय 02 दिसंबर 2025 को सूर्योदय के बाद होगा।
7. मोक्षदा एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?
• तामसिक भोजन का त्याग करें।
• नकारात्मक विचारों और व्यवहार से बचें।
• दिन में शयन न करें।
• बाल और नाखून न काटें।
• ब्रह्मचर्य का पालन करें।
• तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
• किसी का अनादर न करें।
8. मोक्षदा एकादशी के दिन क्या करें?
• भगवान विष्णु की पूजा करें।
• मंत्रों का जप करें।
• श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करें।
• व्रत का पालन करें।
• दान करें और जागरण करें।
• मन को शांत रखें।
9. इसे मोक्षदा एकादशी क्यों कहते हैं?
मोक्षदा एकादशी को यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि यह मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी मानी जाती है। 'मोक्षदा' शब्द 'मोक्ष' और 'दा' (देने वाली) से मिलकर बना है। इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के बंधन से मुक्ति मिलती है, जिससे उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस व्रत के पुण्य से पितरों को भी मोक्ष मिलता है।







