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धनु संक्रांति 2025

धनु संक्रांति 2025 


धनु संक्रांति में सूर्य भगवान के वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश करने पर मनाई जाएगी। संक्रांति का अर्थ है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश। वर्षभर ऐसी 12 संक्रांतियाँ होती हैं, जिनमें प्रत्येक मास एक विशेष संक्रांति के रूप में जानी जाती है। धनु संक्रांति के दिन सूर्य देवता की विशेष पूजा की जाती है और पुण्य कार्यों का महत्व बढ़ जाता है। यह संक्रांति दक्षिण भारत में विष्णु आराधना और तीर्थ स्नान के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन दान, स्नान और धार्मिक क्रियाओं का अत्यधिक महत्व बताया गया है।

धनु संक्रांति क्या है?

जब सूर्यदेव धनु राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस राशि परिवर्तन को धनु संक्रांति कहा जाता है। सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश की क्रिया को ही 'संक्रांति' कहते हैं, और जिस राशि में वे प्रवेश करते हैं, संक्रांति उसी नाम से जानी जाती है। धनु संक्रांति से ही खरमास की शुरुआत होती है। इस संक्रांति के दौरान मांगलिक कार्य करना वर्जित है। 

धनु संक्रांति 2025 तिथि और समय

तारीख: मंगलवार, 16 दिसंबर 2025

सूर्य का धनु राशि में प्रवेश (संक्रांति काल): सुबह 4:19 A.M

स्नान-दान का पुण्य काल आरंभ: 16 दिसंबर को सूर्योदय से

धनु संक्रांति का महत्व

1. धनु संक्रांति तब होती है जब सूर्य देव धनु राशि में प्रवेश करते हैं।

2. यह दिन धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

3. इसे 'धर्म संक्रांति' के नाम से भी जाना जाता है।

4. इसी दिन से खरमास का प्रारंभ होता है।

5. खरमास के दौरान मांगलिक कार्यों वर्जित होते हैं।

6. इस मास में भगवान विष्णु की विशेष उपासना और भक्ति का महत्व होता है।

7. जप, तप, ध्यान और साधना करने का यह सर्वोत्तम समय माना जाता है।

8. गंगा स्नान इस दिन अत्यंत पुण्यदायक माना गया है।

9. सूर्य देव की पूजा कर उन्हें जल अर्पित करना फलदायक होता है।

10. पीली वस्तुओं का दान, जैसे – चना दाल, हल्दी, पीले वस्त्र आदि करना लाभकारी होता है।

11. इस दिन ब्राह्मण भोज कराने और गरीबों को अन्न-वस्त्र देने का विशेष महत्व है।

12. इन माह में किए गए सभी धार्मिक कार्यों से सौगुना पुण्य फल प्राप्त होता है और आत्मिक शुद्धि होती है।

खरमास : धार्मिक अनुशासन का महीना

1. खरमास वह समयावधि है जब सूर्य धनु अथवा मीन राशि में गोचर करते हैं। जो धार्मिक रूप से मांगलिक कार्यों के लिए निषिद्ध मानी जाती है।

2. खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय, मुंडन आदि शुभ कार्यों को करने से बचा जाता है।

3. इस अवधि में सूर्यदेव की तेजस्विता और बृहस्पति की शुभता कम मानी जाती है, जिससे शुभ कार्यों में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

4. शास्त्रों के अनुसार सूर्य जब धनु या मीन राशि में होता है, तब उसकी ऊर्जा कमजोर हो जाती है, जिससे शुभ फल नहीं मिलते।

5. खरमास महीने को जप, तप, दान और भगवत भक्ति के लिए विशेष रूप से उत्तम माना गया है, जिससे आत्मिक बल और पुण्य की प्राप्ति होती है।

संक्रांति के दिन पूजन कैसे करें ?

प्रातःकाल स्नान और शुद्धिकरण

• प्रातःकाल उठे।  

• नित्यकर्मों से निवृत्त होकर गंगाजल युक्त जल से स्नान करें। 

• शुद्ध वस्त्र धारण करें। 

• भगवान सूर्य व विष्णु का ध्यान

• पवित्र स्थान पर आसन लगाकर बैठें। 

• मन में भगवान सूर्य और विष्णु का ध्यान करें। 

• संकल्प लें - "मैं आज संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजन कर रहा/रही हूँ"

पूजन सामग्री एकत्र करें

पूजन के लिए आवश्यक सामग्री है:

• तांबे का लोटा

• स्वच्छ जल

• अक्षत (साबुत चावल)

• लाल पुष्प

• लाल वस्त्र

• रोली/कुमकुम

• गुड़

• तिल

• धूप-दीप

• नारियल

• पंचमेवा (यदि संभव हो)

सूर्य को अर्घ्य अर्पण करें

• तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन और लाल पुष्प डालें। 

• पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को तीन बार अर्घ्य दें। 

सूर्य अर्घ्य मंत्र:

• ॐ घृणिः सूर्याय नमः

• यह मंत्र बोलते हुए अर्घ्य दें, और सूर्य देव से स्वास्थ्य, समृद्धि और आत्मबल की प्रार्थना करें।

भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा

• दीपक प्रज्वलित करें। 

• पुष्प, तिल, गुड़ अर्पित करें। 

• विष्णु सहस्रनाम या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। 

• “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” और “ॐ सूर्याय नमः” का जप करें। 

विशेष दान

संक्रांति के दिन दान का अत्यंत महत्व है। निम्न वस्तुओं का दान विशेष पुण्यदायक माना जाता है:

• काले तिल

• गुड़

• घी

• कंबल / ऊनी वस्त्र

• अन्न / चावल

• तांबे के पात्र

• मिठाई या फल

ये दान गरीबों, ब्राह्मणों, वृद्धजनों, अनाथों को करें।

संक्रांति पर दान करने से व्यक्ति को पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्यलोक की प्राप्ति होती है।

धनु संक्रांति के दिन करने वाले शुभ कार्य

• सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदी या घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान कर सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

• धनु संक्रांति के दिन तिल, गुड़, कंबल, घी और अन्न का ब्राह्मणों या गरीबों को दान करना विशेष फलदायी होता है।

• सूर्य देव की पूजा कर “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” मंत्र का 108 बार जप करना आयुष, तेज और आरोग्य प्रदान करता है।

• धनु संक्रांति से एक माह तक का समय अत्यंत शुभ माना जाता है, जिसमें व्रत, जप, ध्यान और दान करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-

1. धनु संक्रांति कब होती है?

धनु संक्रांति हर वर्ष तब होती है जब सूर्य देव वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करते हैं। यह संक्रांति दिसंबर के महीने में होती है। वर्ष 2025 में, धनु संक्रांति मंगलवार, 16 दिसंबर 2025 को मनाई जाएगी।

2. धनु संक्रांति पर किस प्रकार पूजा करनी चाहिए?

धनु संक्रांति पर प्रातःकाल स्नान के बाद सूर्य देव को जल, तिल, गुड़, लाल पुष्प और अक्षत अर्पित करें। “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” मंत्र का जप करें। इसके बाद तिल, अन्न, वस्त्र और कंबल का दान करें।

3. धनु संक्रांति के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

• क्रोध, वाद-विवाद और कटु वचन बोलने से बचें।

• आलस्य और देर से उठने की आदत न रखें, ब्रह्ममुहूर्त में उठें।

• इस दिन मांसाहार, मद्यपान और तामसिक भोजन से दूर रहें।

• बिना स्नान और शुद्धता के पूजा-पाठ न करें।

• दान करने में अहंकार न करें, विनम्र भाव से दान दें।

4. धनु संक्रांति का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

धनु संक्रांति का हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह आत्मशुद्धि, धार्मिक आस्था और पुण्य अर्जन का समय होता है। इस दिन किए गए कर्मों का कई गुना फल मिलता है, जिससे जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और भाग्य वृद्धि होती है।

5. धनु संक्रांति पर क्या दान करना शुभ माना जाता है?

धनु संक्रांति तिल, गुड़, कंबल, अन्न, वस्त्र और गाय का दान अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। विशेष रूप से सूर्य को अर्घ्य देना और जरूरतमंदों को भोजन कराना अत्यंत फलदायी होता है।

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